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  "title": "हिमाचल सरकार ने बीबीएमबी को सशर्त मंजूरी दी, पंडोह में 10 मेगावॉट बिजली परियोजना को मिली हरी झंडी",
  "summary": "हिमाचल सरकार ने पंडोह डैम के पास बीबीएमबी के 10 मेगावॉट पावर प्रोजेक्ट को सरप्लस जमीन लौटाने की शर्त पर सशर्त एनओसी दे दी है, जिसके बाद अब दोनों पक्षों में बातचीत जारी है।",
  "content": "हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में पंडोह डैम के पास बन रहे 10 मेगावॉट के पावर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) को इस प्रोजेक्ट के लिए सशर्त एनओसी जारी कर दी है। सरकार ने साफ कहा है कि निर्माण कार्य शुरू किया जा सकता है, लेकिन इसके बदले बीबीएमबी को सरप्लस जमीन राज्य को वापस लौटानी होगी। इसी शर्त को लेकर अब बीबीएमबी प्रबंधन और प्रदेश सरकार के बीच बातचीत चल रही है।\n\nसरप्लस जमीन को लेकर पेच\nबीबीएमबी का कहना है कि उसके पास फिलहाल कोई सरप्लस जमीन बची ही नहीं है, क्योंकि जो भी अतिरिक्त जमीन थी उसे पहले ही राज्य सरकार को सौंपा जा चुका है। बीबीएमबी पंडोह के अतिरिक्त अधीक्षण अभियंता चंद्रमणि शर्मा ने इस बात की पुष्टि की कि सरकार ने सरप्लस जमीन लौटाने की शर्त पर ही एनओसी दी है। उनके मुताबिक बीबीएमबी के वरिष्ठ अधिकारी इस मुद्दे को सुलझाने के लिए सरकार के साथ सीधी बातचीत में जुटे हैं, ताकि प्रोजेक्ट का काम बिना रुकावट आगे बढ़ सके। शर्मा ने यह भी बताया कि प्रोजेक्ट पूरा होने पर राज्य को हिस्सेदारी के तहत मुफ्त बिजली भी मिलेगी, जो हिमाचल के लिए अतिरिक्त फायदे की बात होगी।\n\n50 साल पुरानी टनल से निकलेगी बिजली\nइस पूरी योजना की जड़ें करीब 50 साल पुरानी हैं। जब पंडोह डैम बनाया जा रहा था, तब ब्यास नदी के पानी को मोड़ने के लिए 30 डायामीटर की एक टनल तैयार की गई थी। बीबीएमबी प्रबंधन ने गौर किया कि पंडोह डैम से जो 15 प्रतिशत पानी अभी सीधे ब्यास नदी में छोड़ा जा रहा है, अगर उसी पानी को इस पुरानी टनल के रास्ते छोड़ा जाए तो उससे बिजली बनाई जा सकती है। यानी जो पानी अब तक बिना किसी उपयोग के बह रहा था, उसका इस्तेमाल अब बिजली उत्पादन के लिए किया जाएगा।\n\n5-5 मेगावॉट के दो प्रोजेक्ट प्रस्तावित\nइसी विचार के आधार पर बीबीएमबी ने पंडोह में 5-5 मेगावॉट क्षमता के दो अलग-अलग पावर प्रोजेक्ट प्रस्तावित किए हैं, जिनकी कुल क्षमता 10 मेगावॉट होगी। चंद्रमणि शर्मा के अनुसार, इस प्रोजेक्ट के लिए फिलहाल 80 करोड़ रुपये की प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट यानी पीएफआर तैयार की जा चुकी है, जबकि लागत से जुड़ी अंतिम विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर पर अभी काम चल रहा है। डीपीआर पूरी होने के बाद ही प्रोजेक्ट की असल लागत और तय समयसीमा साफ हो पाएगी।\n\nइसका आप पर असर\nयह प्रोजेक्ट पूरा होने पर हिमाचल प्रदेश को मुफ्त बिजली के रूप में सीधा फायदा मिलेगा, हालांकि आम बिजली उपभोक्ताओं के बिल पर इसका तुरंत कोई असर नहीं पड़ेगा।\n\n• भारत में: देशभर में नदियों के मौजूदा ढांचे और पुरानी टनलों का इस्तेमाल कर छोटे हाइड्रो प्रोजेक्ट लगाने का यह एक उदाहरण बन सकता है। इससे कम लागत में स्वच्छ बिजली उत्पादन बढ़ाने का रास्ता दूसरे राज्यों के लिए भी खुल सकता है।\n• मंडी में: पंडोह और आसपास के इलाकों में प्रोजेक्ट बनने से निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बन सकते हैं। साथ ही राज्य को मिलने वाली मुफ्त बिजली का हिस्सा हिमाचल के ऊर्जा संसाधनों को मजबूत करेगा।\n• जमीन विवाद: अगर बीबीएमबी और सरकार के बीच सरप्लस जमीन को लेकर सहमति नहीं बनती, तो प्रोजेक्ट के शुरू होने में और देरी हो सकती है, जिससे तय समयसीमा प्रभावित होगी।\n• लागत पर असर: अभी सिर्फ 80 करोड़ रुपये की प्रारंभिक रिपोर्ट बनी है, फाइनल डीपीआर आने के बाद ही असल लागत और बजट तय होगा, जिससे सरकारी खर्च आगे बढ़ या घट सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पंडोह डैम के पास कौन सा प्रोजेक्ट बनाया जा रहा है?\nबीबीएमबी 10 मेगावॉट क्षमता का पावर प्रोजेक्ट बना रहा है, जिसमें 5-5 मेगावॉट के दो अलग यूनिट होंगे।\n\n2. राज्य सरकार ने एनओसी किस शर्त पर दी है?\nसरकार ने कहा है कि प्रोजेक्ट का काम शुरू हो सकता है, लेकिन इसके बदले बीबीएमबी को सरप्लस जमीन राज्य को वापस करनी होगी।\n\n3. बीबीएमबी का इस शर्त पर क्या कहना है?\nबीबीएमबी का कहना है कि उसके पास अब कोई सरप्लस जमीन नहीं बची, क्योंकि जो भी अतिरिक्त जमीन थी वह पहले ही सरकार को लौटाई जा चुकी है।\n\n4. बिजली बनाने के लिए किस टनल का इस्तेमाल होगा?\n50 साल पहले पंडोह डैम बनाते समय ब्यास नदी का पानी मोड़ने के लिए बनाई गई 30 डायामीटर की टनल का इस्तेमाल किया जाएगा।\n\n5. इस प्रोजेक्ट से हिमाचल को क्या फायदा होगा?\nप्रोजेक्ट बनने पर राज्य को हिस्सेदारी के तहत मुफ्त बिजली मिलेगी।\n\n6. प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत क्या है?\nअभी 80 करोड़ रुपये की प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट यानी पीएफआर बनी है, जबकि फाइनल डीपीआर तैयार की जा रही है।",
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  "category": "हिमाचल प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-09-05",
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