हिमाचल पर्यटन विकास निगम में वेतन संकट गहराया, भड़के कर्मचारियों ने उठाई चेयरमैन को हटाने की मांग हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के करीब 1570 कर्मियों को सितंबर बीतने के बाद भी अगस्त का वेतन नहीं मिला है। भारतीय मजदूर संघ ने चेयरमैन रघुवीर सिंह बाली को हटाने और पहली तारीख तक भुगतान न होने पर राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम में कार्यरत कर्मचारियों के सामने गंभीर वित्तीय संकट खड़ा हो गया है। सितंबर महीने की 24 तारीख बीत जाने के बावजूद निगम के करीब 1570 कर्मचारियों के खातों में अगस्त महीने का वेतन नहीं पहुंचा है। इस अप्रत्याशित देरी से कर्मचारियों का आक्रोश सातवें आसमान पर पहुंच गया है। श्रमिक संगठन भारतीय मजदूर संघ ने निगम प्रबंधन और प्रदेश सरकार के ढुलमुल रवैये के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार करते हुए सीधे तौर पर मोर्चा खोलने का ऐलान कर दिया है। संगठन ने पर्यटन विकास निगम के मौजूदा चेयरमैन रघुवीर सिंह बाली की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की है। होटल और इकाइयों से कमाई के बावजूद वेतन पर संकट भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष मदन राणा ने इस पूरे मामले को लेकर प्रबंधन की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि इस संकट की मार करीब 1000 नियमित कर्मचारियों, 500 आउटसोर्स कर्मचारियों और लगभग 70 दैनिक भोगियों पर पड़ रही है। सितंबर के 24 दिन निकल जाने के बाद भी इन कर्मचारियों को अगस्त महीने का पारिश्रमिक नहीं मिल पाया है। मदन राणा का कहना है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारी अपने परिवार का पेट पालने, मकान का किराया चुकाने, बैंक कर्जों की मासिक किस्तें भरने और बच्चों के स्कूल की फीस देने जैसी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पूरी तरह मासिक वेतन पर निर्भर रहते हैं। उन्होंने प्रबंधन से सीधा सवाल पूछा कि जब निगम के तमाम होटल और पर्यटन इकाइयां नियमित रूप से कारोबार कर रही हैं और आय जुटा रही हैं, तो वह सारा राजस्व आखिर जा कहां रहा है। पर्याप्त वित्तीय संसाधन होने के बाद भी कर्मचारियों को समय पर वेतन न दिया जाना प्रबंधन की प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। पुरानी पेंशन के दावों के बीच भत्तों और बिलों का भुगतान अटका कर्मचारी नेताओं ने राज्य सरकार की नीतियों और कथनी पर भी तंज कसा है। संगठन का कहना है कि एक तरफ प्रदेश सरकार पुरानी पेंशन योजना बहाल करने का व्यापक प्रचार कर रही है, वहीं दूसरी तरफ पर्यटन निगम जैसे प्रमुख सार्वजनिक उपक्रम के कर्मचारियों को अपने बुनियादी वेतन के लिए ही दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। स्थिति सिर्फ मासिक वेतन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कर्मचारियों के मेडिकल बिलों और यात्रा भत्तों का निपटारा भी लंबे समय से लटका हुआ है। मदन राणा का आरोप है कि कर्मचारियों और उनके प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखने के लिए सरकार से कई बार औपचारिक मुलाकात का समय मांगा, लेकिन शासन और प्रशासन ने उनकी जायज समस्याओं को कभी गंभीरता से नहीं लिया। बसों के घटते बेड़े और संपत्तियों के निजीकरण पर उठे सवाल पर्यटन निगम के बुनियादी ढांचे में लगातार आ रही गिरावट भी कर्मचारियों के गुस्से की एक प्रमुख वजह बनी हुई है। भारतीय मजदूर संघ के अनुसार, एक दौर ऐसा था जब निगम के पास करीब 70 पर्यटक बसों का बड़ा बेड़ा संचालित होता था, जो अब सिमटकर महज दो बसों तक सीमित रह गया है। संगठन ने आरोप लगाया कि निगम की बेशकीमती संपत्तियों और होटलों को धीरे-धीरे निजी हाथों में सौंपने की सुनियोजित पृष्ठभूमि तैयार की जा रही है। कर्मचारी प्रतिनिधियों ने संदेह जताया कि क्या सरकार निगम के सार्वजनिक प्रतिष्ठानों को बेचने की तैयारी कर रही है। हालांकि, इस विषय पर सरकार ने अगस्त माह में विधानसभा के पटल पर स्थिति साफ की थी। सरकार का पक्ष था कि मुनाफे में चल रही पर्यटन निगम की इकाइयों को निजी कंपनियों को लीज पर देने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है, जबकि आठ परिसंपत्तियों को पीपीपी मॉडल के तहत संचालन और रखरखाव के लिए सौंपने की मंजूरी दी गई थी। मुख्यमंत्री से कमान संभालने की अपील और आंदोलन का अल्टीमेटम पर्यटन विकास निगम में कथित तानाशाही रवैये और प्रशासनिक निष्क्रियता का हवाला देते हुए श्रमिक संगठन ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से तत्काल हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। मदन राणा ने मांग रखी है कि चेयरमैन रघुवीर सिंह बाली को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त किया जाए और पर्यटन निगम की बागडोर मुख्यमंत्री स्वयं अपने हाथों में लें, ताकि व्यवस्था पटरी पर लौट सके। संघ ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि हर महीने की पहली तारीख को कर्मचारियों का वेतन जारी करने की स्थायी व्यवस्था नहीं बनाई गई, तो यह संघर्ष राज्यव्यापी जनांदोलन में तब्दील हो जाएगा। संगठन ने आने वाले दिनों में चेयरमैन के खिलाफ काले झंडे दिखाने, पुतले फूंकने और मंत्रियों व उच्चाधिकारियों के बहिष्कार जैसे कड़े विकल्पों पर विचार करने की बात कही है। यहां तक कि विरोध स्वरूप निगम कर्मियों द्वारा दी जाने वाली सेवाएं पूरी तरह ठप करने की चेतावनी भी दी गई है। सरकारी पक्ष और खजाने की स्थिति पर स्पष्टीकरण इस पूरे घटनाक्रम पर फिलहाल पर्यटन निगम के चेयरमैन रघुवीर सिंह बाली का औपचारिक बयान सामने नहीं आया है, हालांकि वे शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सकते हैं। दूसरी ओर, सरकार की तरफ से मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा कि उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है। नरेश चौहान ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के नियमित सरकारी कर्मचारियों को वेतन और पेंशन के लिए कभी प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती, लेकिन बोर्डों और स्वायत्त निगमों में कभी-कभार तकनीकी या स्थानीय कारणों से ऐसी वित्तीय अड़चनें सामने आ जाती हैं। उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले जब हिमाचल पथ परिवहन निगम में इसी प्रकार की समस्या पैदा हुई थी, तब मुख्यमंत्री के दखल के बाद मामले का तुरंत समाधान कर दिया गया था। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश सरकार के खजाने में धन की कोई कमी नहीं है और यदि पर्यटन निगम में कोई प्रशासनिक या वित्तीय रुकावट होगी, तो उसे बातचीत के जरिए जल्द दूर कर लिया जाएगा। इसका आप पर असर हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के कर्मचारियों को समय पर वेतन न मिलने से उनके दैनिक खर्चों और राज्य की पर्यटन सेवाओं पर सीधा असर पड़ सकता है। • हिमाचल प्रदेश में: पर्यटन निगम के करीब 1570 कर्मचारियों और उनके परिवारों के सामने घर का किराया, बैंक ईएमआई और बच्चों की फीस भरने का तात्कालिक संकट खड़ा हो गया है। यदि पहली तारीख तक वेतन समाधान नहीं हुआ तो कर्मचारियों द्वारा सेवाएं बंद करने की चेतावनी से राज्य के सरकारी होटलों और परिवहन सेवाओं पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। • अन्य राज्यों के पर्यटकों के लिए: हिमाचल प्रदेश घूमने आने वाले पर्यटकों को निगम के होटलों या परिवहन सेवाओं में संभावित विरोध प्रदर्शनों के कारण असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। आगंतुकों को सलाह दी जाती है कि वे बुकिंग और यात्रा से पहले पर्यटन इकाइयों के संचालन से जुड़ी स्थिति की पड़ताल कर लें। • सार्वजनिक उपक्रम कर्मियों के लिए: स्वायत्त बोर्डों और निगमों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए यह स्थिति समय पर वेतन व भत्ते सुनिश्चित करने वाली पारदर्शी व्यवस्था की जरूरत को उजागर करती है। विभिन्न विभागों के कर्मचारी संघ इस घटनाक्रम के बाद समयबद्ध भुगतान के नियमों को लेकर सरकार पर दबाव बना सकते हैं। • आर्थिक सुरक्षा पर असर: चिकित्सा बिलों और यात्रा भत्तों के लंबित रहने से कर्मचारियों को आपातकालीन जरूरतों के लिए व्यक्तिगत बचत या कर्ज पर निर्भर होना पड़ रहा है। समय पर भुगतान न मिलने से निचले स्तर के संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मियों पर सबसे गंभीर वित्तीय दबाव पड़ रहा है। ऐसा क्यों हुआ हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के कर्मचारियों को वेतन न मिलने की स्थिति निगम के वित्तीय प्रबंधन, स्वायत्त निकायों की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक प्राथमिकताओं के टकराव के कारण उत्पन्न हुई है। • स्वायत्त निगमों का वित्तीय ढांचा: राज्य सरकार के नियमित कर्मचारियों की तुलना में सार्वजनिक निगमों और बोर्डों को अपने राजस्व और परिचालन लागतों के आधार पर वेतन प्रबंधित करना होता है। पर्यटन इकाइयों से होने वाली आय और मासिक वेतन दायित्वों के बीच सामंजस्य न बैठ पाने के कारण यह गतिरोध बना है। • बसों के बेड़े और परिचालन में गिरावट: निगम के बस बेड़े का 70 से घटकर केवल दो वाहनों पर आ जाना सार्वजनिक उपक्रम की घटती आय और बुनियादी ढांचे के कमजोर होने को दर्शाता है। इससे निगम की नियमित राजस्व जुटाने की क्षमता प्रभावित हुई है। • प्रबंधन और श्रमिक संगठनों में संवादहीनता: कर्मचारी प्रतिनिधियों के अनुसार कई बार अनुरोध के बावजूद निगम प्रबंधन और सरकार ने उनकी शिकायतों पर समय रहते औपचारिक बैठक नहीं की। इस प्रशासनिक उदासीनता ने समय पर वेतन वितरण की प्रक्रिया को और अधिक बाधित किया। • निजीकरण और पीपीपी मॉडल को लेकर आशंकाएं: आठ परिसंपत्तियों के संचालन और रखरखाव को पीपीपी मॉडल पर देने के सरकारी फैसले और कथित संपत्तियों की बिक्री की चर्चाओं से कर्मचारियों में अविश्वास बढ़ा है। प्रबंधन के प्रति इस अविश्वास ने वेतन के विवाद को सीधे चेयरमैन को हटाने की मांग तक पहुंचा दिया। सवाल-जवाब 1. हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के कितने कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है? निगम के करीब 1570 कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है, जिनमें लगभग 1000 नियमित, 500 आउटसोर्स और 70 दैनिक भोगी कर्मचारी शामिल हैं। 2. कर्मचारियों को किस महीने का वेतन मिलना बाकी है? कर्मचारियों को अगस्त महीने का वेतन 24 सितंबर बीत जाने के बाद भी नहीं मिल पाया है। 3. भारतीय मजदूर संघ ने राज्य सरकार से क्या प्रमुख मांग की है? संघ ने पर्यटन निगम के चेयरमैन रघुवीर सिंह बाली को पद से हटाने और निगम की व्यवस्था मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा अपने हाथ में लेने की मांग की है। 4. मांगें पूरी न होने पर कर्मचारी संगठन ने क्या चेतावनी दी है? संघ ने चेतावनी दी है कि हर माह 1 तारीख को वेतन न मिलने पर प्रदेशभर में काले झंडे दिखाए जाएंगे, पुतले फूंके जाएंगे और निगम की सेवाएं बंद की जा सकती हैं। 5. पर्यटन निगम की बसों की संख्या को लेकर क्या आरोप लगाया गया है? मजदूर संघ का आरोप है कि कभी निगम के पास करीब 70 बसों का बेड़ा हुआ करता था, जो अब घटकर केवल दो बसों तक रह गया है। 6. सरकार ने संपत्तियों के निजीकरण के आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण दिया था? सरकार ने विधानसभा में स्पष्ट किया था कि मुनाफे वाली इकाइयों को लीज पर देने का कोई प्रस्ताव नहीं है, जबकि आठ संपत्तियों को पीपीपी मॉडल के तहत संचालन व रखरखाव के लिए मंजूरी दी गई थी। 7. वेतन में देरी पर सरकार के प्रधान मीडिया सलाहकार ने क्या कहा? प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा कि खजाने में धन की कमी नहीं है और यदि निगम स्तर पर कोई दिक्कत है तो उसे मुख्यमंत्री के दखल से सुलझा लिया जाएगा। https://trendkia.com/himachal-pradesh/himachala-tourism-development-corporation-men-vetana-snkata-gaharaya-bharake-karmachariyon-ne-uthai-chairman-ko-hatane-ki-manga-38258 TrendKia — Har trend, sabse pehle.