जमयांग त्सेरिंग चरस केस की जांच अब सीबीआई करेगी, हाईकोर्ट ने एफआईआर बरकरार रखी हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने तिब्बती मूल के अमेरिकी शेफ जमयांग त्सेरिंग से जुड़े एनडीपीएस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है और पुलिस की भूमिका पर भी स्वतंत्र जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन भुंतर थाने में दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने तिब्बती मूल के अमेरिकी शेफ जमयांग त्सेरिंग से जुड़े एनडीपीएस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई को सौंप दी है। जस्टिस राकेश कैंथला की बेंच ने पुलिस की गिरफ्तारी प्रक्रिया, त्सेरिंग को लगी गंभीर चोटों और पूरी कार्रवाई की स्वतंत्र जांच के आदेश दिए हैं, हालांकि भुंतर पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग अदालत ने ठुकरा दी। पूरा मामला क्या है याचिका के मुताबिक जमयांग त्सेरिंग जनवरी 2026 के अंत में अमेरिका से भारत आए थे। वह अपने दो साथियों के साथ मनाली और कसोल होते हुए मैक्लोडगंज की तरफ जा रहे थे। याचिका में बताया गया है कि उनकी यात्रा का मकसद कारोबारी संभावनाएं तलाशना था, जिसमें होटल खोलने की योजना भी शामिल थी। 22 फरवरी को रास्ते में पुलिस ने उनकी गाड़ी रोक ली, और यहीं से पूरा विवाद शुरू हुआ। गाड़ी से चरस और नकदी बरामद होने का दावा याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने उनसे 4 लाख रुपये नकद से भरा बैग मांगा था। जब उन्होंने देने से इनकार किया तो पुलिसकर्मी जबरन गाड़ी में घुस गए, सामान में 28 ग्राम चरस रखकर मामला बना दिया, और उन्हें घंटों तक बिना खाना पानी शौचालय की सुविधा के हिरासत में रखा गया। याचिका के अनुसार पुलिस ने त्सेरिंग को सड़क पर धक्का दिया, तभी वहां से गुजर रहे एक टेम्पो ट्रैवलर ने उन्हें टक्कर मार दी। इस टक्कर में त्सेरिंग बुरी तरह घायल हुए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। पुलिस की तरफ से इन सभी आरोपों को खारिज किया गया है। हिमाचल प्रदेश पुलिस का कहना है कि गाड़ी से 28 ग्राम चरस और 4 लाख रुपये नकद स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में कानूनी तरीके से बरामद किए गए थे। पुलिस के मुताबिक तलाशी के दौरान ही त्सेरिंग तेज रफ्तार टेम्पो ट्रैवलर की चपेट में आकर घायल हुए, न कि किसी धक्का देने की वजह से। हाईकोर्ट ने केस डायरी पर उठाए सवाल जस्टिस राकेश कैंथला ने सुनवाई के दौरान कहा कि पुलिस की केस डायरी में कई अहम सवालों के जवाब संतोषजनक ढंग से नहीं दिए गए हैं। अदालत ने खासतौर पर पूछा कि याचिकाकर्ताओं को शाम 6:50 बजे से रात 1:30 बजे तक, यानी करीब साढ़े छह घंटे, घटनास्थल पर क्यों रोका गया। साथ ही त्सेरिंग को चोट कैसे लगी, इसका भी स्पष्ट रिकॉर्ड पुलिस के पास मौजूद नहीं है। अदालत ने कहा कि इन हालातों को देखते हुए एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी हो जाती है। एफआईआर बरकरार, लेकिन जांच का दायरा बढ़ा हाईकोर्ट ने भुंतर पुलिस थाने में दर्ज एनडीपीएस अधिनियम की एफआईआर को रद्द करने से मना कर दिया। अदालत ने साफ किया कि पुलिस पर लगे प्रक्रियागत गड़बड़ी या झूठा फंसाने के आरोप सही हैं या नहीं, यह सबूतों की जांच के बाद ही तय होगा, और सिर्फ आरोप लगने भर से इस चरण पर एफआईआर खारिज नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि अगर जांच में मादक पदार्थ की बरामदगी सही साबित होती है, तो पुलिस की किसी संभावित प्रक्रियागत खामी से आरोपी अपने आप कानूनी जिम्मेदारी से बरी नहीं हो जाएंगे। आईजी स्तर के अधिकारी से भी हुई थी शिकायत याचिकाकर्ता की तरफ से पेश अधिवक्ता निशांत शर्मा ने अदालत को बताया कि हिरासत में लिए जाने के तुरंत बाद त्सेरिंग ने पुलिस के एक आईजी स्तर के अधिकारी से संपर्क कर प्रक्रियागत उल्लंघनों की शिकायत दर्ज कराई थी। उनका कहना है कि अब सीबीआई की जांच में सिर्फ त्सेरिंग को लगी चोटों की परिस्थितियां ही नहीं, बल्कि पुलिसकर्मियों के आचरण और गाड़ी में मादक पदार्थ रखे जाने के आरोपों की भी निष्पक्ष पड़ताल होगी। अब सीबीआई क्या जांच करेगी हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब सीबीआई पूरे घटनाक्रम, याचिकाकर्ताओं की घंटों चली हिरासत, पुलिस पर लगे प्रक्रियागत अनियमितता के आरोपों और जमयांग त्सेरिंग को लगी गंभीर चोटों की स्वतंत्र जांच करेगी। जांच की रिपोर्ट से यह साफ होगा कि गाड़ी में चरस किसने रखी, हिरासत के दौरान क्या हुआ, और त्सेरिंग को चोट किन हालात में लगी। आदेश क्यों अहम माना जा रहा है इस आदेश को कानूनी हलकों में इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि हाईकोर्ट ने एक साथ दो अलग बातें स्पष्ट कर दी हैं, पुलिस पर लगे आरोपों की जांच जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामला अपने आप खत्म हो जाएगा। दोनों पहलुओं की जांच अब साथ साथ आगे बढ़ेगी और सीबीआई की रिपोर्ट पर आगे की कानूनी कार्रवाई निर्भर करेगी। इसका आप पर असर यह मामला पुलिस जांच में जवाबदेही और विदेशी पर्यटकों की सुरक्षा से जुड़ा है। • भारत में: सीबीआई जांच से यह तय होगा कि गिरफ्तारी और तलाशी के दौरान पुलिस को तय प्रक्रिया का पालन कैसे करना चाहिए, जिसका असर देशभर में दर्ज होने वाले एनडीपीएस मामलों की जांच के तरीके पर पड़ सकता है। • हिमाचल प्रदेश में: कुल्लू जिले के भुंतर इलाके से गुजरने वाले पर्यटकों और विदेशी नागरिकों के लिए पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता और जवाबदेही पर अब ज्यादा नजर रहेगी। सवाल-जवाब 1. सीबीआई जांच का आदेश किसने दिया? हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस राकेश कैंथला ने यह आदेश दिया है। 2. यह मामला किससे जुड़ा है? यह मामला तिब्बती मूल के अमेरिकी शेफ जमयांग त्सेरिंग से जुड़े एनडीपीएस केस से जुड़ा है। 3. गाड़ी से क्या बरामद हुआ था? पुलिस के मुताबिक गाड़ी से 28 ग्राम चरस और 4 लाख रुपये नकद बरामद किए गए थे। 4. क्या हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द कर दी? नहीं, हाईकोर्ट ने भुंतर पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया है। 5. घटना कब हुई थी? 22 फरवरी को पुलिस ने मनाली-कसोल से मैक्लोडगंज जा रहे त्सेरिंग की गाड़ी को रास्ते में रोका था। 6. त्सेरिंग को चोट कैसे लगी? याचिकाकर्ताओं के मुताबिक पुलिस ने उन्हें सड़क पर धक्का दिया जिसके बाद एक टेम्पो ट्रैवलर ने टक्कर मारी, जबकि पुलिस का कहना है कि तलाशी के दौरान तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आने से वह घायल हुए। https://trendkia.com/himachal-pradesh/jamyang-tsering-charasa-kesa-ki-jancha-aba-cbi-karegi-high-court-ne-fir-barakarara-rakhi-7555 TrendKia — Har trend, sabse pehle.