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  "type": "article",
  "title": "कांगड़ा के ज्वालामुखी अस्पताल में प्रसव के बाद 23 वर्षीय महिला ने तोड़ा दम, परिजनों ने लगाए लापरवाही के आरोप",
  "summary": "कांगड़ा के ज्वालामुखी अस्पताल में बेटे को जन्म देने के बाद अधिक रक्तस्राव से पीड़ित 23 वर्षीय महिला की टांडा मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में देरी और लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।",
  "content": "हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले स्थित ज्वालामुखी नागरिक अस्पताल में प्रसव के कुछ ही घंटों बाद एक 23 वर्षीय महिला की अचानक तबीयत बिगड़ने और फिर टांडा मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ने का दुखद मामला सामने आया है। जच्चा की जान जाने के बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल के बाहर जोरदार प्रदर्शन करते हुए प्रशासन और ड्यूटी पर मौजूद कर्मियों के खिलाफ नारेबाजी की। पीड़ित परिवार ने उपचार में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है।\n\nबुधवार सुबह अस्पताल में भर्ती हुई थी महिला, शाम को हुआ था प्रसव\nप्राप्त जानकारी के मुताबिक, मृतका की शिनाख्त 23 वर्षीय त्रिकला देवी के तौर पर हुई है, जो मझीन क्षेत्र के तरीड़ी गांव निवासी दीपक डोगरा की पत्नी थीं। परिजनों ने बताया कि त्रिकला देवी को प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद बुधवार सुबह करीब 5 बजे ज्वालामुखी अस्पताल लाया गया था, जहां उन्हें भर्ती कर लिया गया। पूरे दिन चले चिकित्सकीय परीक्षण के उपरांत शाम लगभग साढ़े 3 बजे सामान्य प्रक्रिया से महिला की डिलीवरी हुई। महिला ने एक पूर्णतः स्वस्थ नवजात बेटे को जन्म दिया, जिससे परिवार में उत्सव का माहौल बन गया था।\n\nशिशु के जन्म के तुरंत बाद तय नियमों के तहत प्रसूता को निगरानी कक्ष में शिफ्ट किया गया। परिजनों और अस्पताल के बयानों के अनुसार, प्रसव के लगभग एक घंटे बाद अचानक महिला के शरीर से अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया। देखते ही देखते उसकी शारीरिक स्थिति तेजी से गिरने लगी, जिसके बाद अस्पताल में मौजूद मेडिकल टीम ने उसे संभालने की प्रक्रिया शुरू की।\n\nरेफर करने में देरी का आरोप, परिजनों ने खड़े किए गंभीर सवाल\nमृतका के परिजनों का सीधा आरोप है कि डिलीवरी के बाद महिला का खून बहना लगातार जारी रहा, लेकिन स्थानीय स्तर पर स्थिति पर काबू नहीं पाया जा सका। परिजनों का तर्क है कि यदि ज्वालामुखी अस्पताल के पास ऐसे गंभीर रक्तस्राव को नियंत्रित करने के समुचित संसाधन या विशेषज्ञ नहीं थे, तो महिला को समय रहते उच्च चिकित्सा संस्थान के लिए क्यों नहीं भेजा गया।\n\nपरिजनों का कहना है कि जब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई, तब जाकर आनन-फानन में महिला को डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा महाविद्यालय टांडा रेफर किया गया। वहां पहुंचने के बाद उपचार के दौरान डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद महिला ने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद परिजनों का सब्र टूट गया और उन्होंने स्वास्थ्य प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।\n\nबीएमओ बोले- डिलीवरी के बाद हुआ पोस्टपार्टम हैमरेज, लिखित शिकायत पर शुरू हुई जांच\nज्वालामुखी अस्पताल के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) डॉ. पवन शर्मा ने मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि महिला की डिलीवरी शाम करीब साढ़े 3 बजे हुई थी और उसके बाद उसे निर्धारित निगरानी में रखा गया था। प्रसव के करीब एक घंटे बाद उसे अचानक भारी ब्लीडिंग शुरू हुई, जिसे चिकित्सकीय भाषा में पोस्टपार्टम हैमरेज (PPH) कहा जाता है।\n\nबीएमओ ने स्पष्ट किया कि जब किसी प्रसूता की हालत अचानक बिगड़ती है, तो प्रोटोकॉल के मुताबिक पहले स्थानीय अस्पताल में जरूरी दवाएं देकर उसे स्थिर करने का हरसंभव प्रयास किया जाता है ताकि मरीज रास्ते में झटके झेल सके। स्टाफ और डॉक्टरों ने ब्लीडिंग रोकने की पूरी कोशिश की, लेकिन रक्तस्राव न थमने के कारण मरीज को बेहतर आपातकालीन सेवाओं के लिए टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था।\n\nडॉ. पवन शर्मा ने आगे बताया कि परिजनों की मांग पर उनसे लिखित शिकायत प्राप्त कर ली गई है और उन्हें उचित कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई का भरोसा दिया गया है। डिलीवरी कक्ष से लेकर रेफरल तक के पूरे घटनाक्रम, महिला को दिए गए इंजेक्शन और दवाओं, उसकी शारीरिक स्थिति और रेफर करने के समय के सभी मेडिकल रिकॉर्ड्स की गहनता से तकनीकी जांच की जाएगी।\n\nदो साल पहले हुई थी शादी, नवजात के सिर से उठा मां का साया\nपारिवारिक पृष्ठभूमि के अनुसार, त्रिकला देवी की शादी लगभग दो वर्ष पूर्व दीपक डोगरा के साथ हुई थी। दीपक पेशे से दिहाड़ी मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। पहले बच्चे के रूप में बेटे के जन्म से घर में अपार खुशियां आई थीं, लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर मां की असमय मृत्यु ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। नवजात शिशु के जन्म लेते ही उसके सिर से ममता का साया उठ गया है। पुलिस जिला देहरा के संदीप धवल ने मामले की पुष्टि करते हुए आश्वस्त किया है कि परिजनों के आरोपों और मेडिकल रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कर कानूनी पहलुओं को स्पष्ट किया जाएगा।\n\nइसका आप पर असर\nयह घटना ग्रामीण और उप-मंडलीय सरकारी अस्पतालों में प्रसवकालीन आपातकालीन सुविधाओं और रेफरल प्रक्रिया की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।\n\n• हिमाचल प्रदेश में: कांगड़ा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को रेफरल में होने वाले विलंब और प्राथमिक केंद्रों में आपातकालीन रक्तस्राव प्रबंधन की सीमित सुविधाओं को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी। आपात स्थिति उत्पन्न होने पर परिजनों को समय गंवाए बिना सीधे बड़े मेडिकल कॉलेज जाने का विकल्प भी ध्यान में रखना चाहिए।\n• भारत में: देश भर के स्वास्थ्य केंद्रों में पोस्टपार्टम हैमरेज जैसी घातक जटिलताओं के लिए तुरंत रक्त चढ़ाने और प्राथमिक देखभाल को मजबूत करने की आवश्यकता रेखांकित होती है। प्रसव के समय मरीजों के परिजनों को अस्पताल के बैकअप संसाधनों और आपातकालीन एंबुलेंस सुविधाओं की जानकारी पहले से रखनी चाहिए।\n• प्रशासनिक स्तर पर: पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच से यह तय होगा कि उप-मंडलीय अस्पतालों में गंभीर मामलों को रेफर करने के प्रोटोकॉल का समय पर पालन हुआ या नहीं। इससे भविष्य में प्राथमिक अस्पतालों में रेफरल टाइमलाइन की निगरानी व्यवस्था अधिक सख्त हो सकती है।\n• मरीजों के अधिकार: यदि किसी अस्पताल में उपचार के दौरान लापरवाही या रेफरल में अनुचित देरी की आशंका हो, तो तीमारदार स्थानीय प्रशासन या पुलिस में लिखित शिकायत देकर मेडिकल बोर्ड से जांच कराने की मांग कर सकते हैं। कानूनी प्रक्रिया के तहत संपूर्ण केस शीट और उपचार रिकॉर्ड की समीक्षा अनिवार्य होती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह दुखद घटना प्रसव के उपरांत प्रसूता के शरीर में अचानक उत्पन्न हुए अनियंत्रित रक्तस्राव और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में स्थिति न संभलने के कारण हुई।\n\n• पोस्टपार्टम हैमरेज की जटिलता: अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, शिशु के जन्म के लगभग एक घंटे बाद महिला को अचानक अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हुआ, जिसे चिकित्सीय भाषा में पोस्टपार्टम हैमरेज कहा जाता है। यह प्रसव के बाद गर्भाशय के संकुचित न होने या रक्त वाहिकाओं की जटिलता के कारण होने वाली एक अत्यंत गंभीर स्थिति है।\n• रेफरल का निर्णय और समय: बीएमओ के मुताबिक चिकित्सकों ने पहले स्थानीय अस्पताल में दवाएं देकर मरीज को स्थिर करने का प्रयास किया ताकि वह रास्ते का तनाव झेल सके। हालांकि, परिजनों का दावा है कि स्थिति गंभीर होने के बावजूद उच्च संस्थान भेजने में देरी की गई, जिसके चलते टांडा पहुंचने तक महिला की हालत बेहद नाजुक हो गई थी।\n• प्रशासनिक एवं पुलिस जांच: परिजनों के लिखित विरोध के बाद देहरा पुलिस और स्वास्थ्य प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया है। महिला को दिए गए उपचार, दवाओं और रेफरल के समय से जुड़े सभी दस्तावेजों की समीक्षा के बाद ही वास्तविक चिकित्सकीय कारणों का अंतिम खुलासा होगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ज्वालामुखी अस्पताल में किस महिला की मृत्यु हुई है?\nमृतका की पहचान 23 वर्षीय त्रिकला देवी के रूप में हुई है, जो मझीन क्षेत्र के तरीड़ी गांव निवासी दीपक डोगरा की पत्नी थीं।\n\n2. महिला को अस्पताल में कब भर्ती कराया गया था और प्रसव कब हुआ?\nत्रिकला देवी को बुधवार सुबह लगभग 5 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था और शाम करीब 3:30 बजे उन्होंने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया।\n\n3. प्रसव के बाद महिला की तबीयत कैसे बिगड़ी?\nडिलीवरी के लगभग एक घंटे बाद महिला को अचानक अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया, जिसे डॉक्टरों ने पोस्टपार्टम हैमरेज बताया।\n\n4. परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर क्या आरोप लगाए हैं?\nपरिजनों का आरोप है कि अत्यधिक ब्लीडिंग के बावजूद महिला को समय रहते उच्च संस्थान रेफर नहीं किया गया और इलाज में लापरवाही बरती गई।\n\n5. अस्पताल के बीएमओ डॉ. पवन शर्मा का क्या पक्ष है?\nबीएमओ ने बताया कि स्टाफ ने ब्लीडिंग रोकने और मरीज को स्थिर करने का प्रयास किया था, जिसके बाद उसे टांडा रेफर किया गया और मामले की जांच की जा रही है।\n\n6. पुलिस और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठा रहे हैं?\nपुलिस जिला देहरा के संदीप धवल ने पुष्टि की है कि परिजनों की लिखित शिकायत और मेडिकल रिकॉर्ड्स की निष्पक्ष जांच की जाएगी।",
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  "category": "हिमाचल प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-09-25",
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