कांगड़ा के बड़ा भंगाल में लापता बताए गए राजस्थान के पांचों ट्रेकर सुरक्षित मिले, प्रशासन ने बताया पैनिक कॉल हिमाचल प्रदेश के बड़ा भंगाल घाटी क्षेत्र में ट्रेकिंग पर निकले राजस्थान के पांचों युवा सुरक्षित हैं और अपने गंतव्य पर पहुंच चुके हैं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि खराब मौसम और तय कार्यक्रम में देरी के कारण परिजनों में घबराहट फैल गई थी। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की बेहद दुर्गम मानी जाने वाली बड़ा भंगाल घाटी में ट्रेकिंग के दौरान लापता बताए जा रहे राजस्थान के पांचों ट्रेकर्स पूरी तरह सुरक्षित मिल गए हैं। प्रशासन ने उनके सकुशल होने की पुष्टि करते हुए बताया है कि सभी सदस्य अपने गंतव्य तक पहुंच चुके हैं और उनका अपने परिजनों से भी संपर्क स्थापित हो चुका है। इससे पहले उनके फंसे होने की आशंका जताई जा रही थी, जिसे अधिकारियों ने केवल घबराहट में किया गया पैनिक कॉल करार दिया है। चंबा के भरमौर और धार्दी क्षेत्र में पहुंचे ट्रेकर्स बैजनाथ के उपमंडलीय दंडाधिकारी संकल्प गौतम के अनुसार पांचों ट्रेकर्स से सीधा संपर्क साध लिया गया है। उन्होंने दो दिन का समय बड़ा भंगाल में बिताया और इसके बाद वे चंबा जिले के भरमौर क्षेत्र में स्थित अपने तय गंतव्य तक पहुंच गए। डीसी कांगड़ा हेमराज बैरवा ने जानकारी दी कि सभी पांचों सदस्य सुरक्षित हैं और धार्दी पहुंच चुके हैं। उनके परिजनों को इस बात की सूचना दे दी गई है और अब किसी भी प्रकार की चिंता की बात नहीं है। खराब मौसम और भारी बर्फबारी से थमी थी रफ्तार प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इन ट्रेकर्स के दल में अंकुर मलानी, सत्यम साबू, पवन, श्याम आर और तरुण राठी शामिल हैं, जिनकी उम्र 28 से 35 वर्ष के बीच है। यह समूह पांच अक्टूबर को बीड़ से राजगुंधा के लिए रवाना हुआ था। तय योजना के तहत उन्हें छह अक्टूबर को राजगुंधा से आगे बढ़ते हुए बड़ा भंगाल के रास्ते थमसर दर्रा पार करना था। हालांकि छह और सात अक्टूबर को ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों में अचानक भारी बर्फबारी शुरू हो गई, जिससे उनकी आवाजाही पर गंभीर असर पड़ा और मौसम खराब होने के चलते संपर्क कट गया था। देरी से परिजनों में उपजी चिंता और सर्च ऑपरेशन बुधवार की देर रात जिला आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ को यह सूचना मिली थी कि करीब 12 घंटे से ट्रेकर्स से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। इस खबर के आते ही बीड़-बिलिंग इलाके में सक्रिय बचाव दलों को तुरंत सतर्क कर दिया गया और तलाश के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया। डीसी कांगड़ा हेमराज बैरवा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि पर्यटकों के लापता होने या संकट में घिरने जैसी कोई गंभीर नौबत नहीं थी। तय कार्यक्रम की तुलना में उनकी वापसी में महज एक दिन की देरी हुई थी। नेटवर्क न होने के कारण जब परिवार वालों का संपर्क नहीं हो सका, तो उन्होंने घबराकर प्रशासन को कॉल किया था। अब सभी ट्रेकर्स पूरी तरह ठीक हैं और अपने परिवारों से बातचीत कर चुके हैं। इसका आप पर असर हिमाचल के दुर्गम इलाकों में ट्रेकिंग करने वाले पर्यटकों और उनके परिजनों के लिए यह घटना पहाड़ी रास्तों पर सुरक्षा नियमों के पालन का बड़ा सबक है। • भारत में: अधिक ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में ट्रेक पर जाने वाले पर्यटकों को मौसम के अचानक बदलाव और नेटवर्क ब्लैकआउट के लिए अतिरिक्त समय का बफर रखना चाहिए। परिजनों को पहले से सूचित रखना आवश्यक है कि संपर्क कटने का मतलब हर बार दुर्घटना नहीं होता। • हिमाचल प्रदेश में: कांगड़ा और चंबा के दूरदराज दर्रों में ट्रेकिंग कराने वाली एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन को खराब मौसम में ट्रेकर्स की ट्रैकिंग प्रणाली और मजबूत करनी होगी। बीड़-बिलिंग और राजगुंधा से गुजरने वाले दलों को स्थानीय मौसम परामर्श की अनदेखी से बचना चाहिए। • ट्रेकर्स के लिए: बर्फबारी के दौरान थमसर जैसे दर्रों को पार करते समय तय समय से देरी होना सामान्य बात है, इसलिए पर्याप्त राशन और आपातकालीन योजना साथ रखना अनिवार्य है। नेटवर्क क्षेत्र में पहुंचते ही परिजनों को सुरक्षित होने की सूचना तत्काल देनी चाहिए। • आपातकालीन सेवाओं के लिए: आपदा प्रबंधन दलों को पैनिक कॉल्स और वास्तविक संकट के बीच अंतर तय करने के लिए त्वरित सूचना तंत्र विकसित करना होगा। इससे अनावश्यक तलाशी अभियानों पर लगने वाले संसाधनों की बचत हो सकेगी। ऐसा क्यों हुआ यह घटना ऊंचाई वाले इलाकों में अचानक बदले मौसम, भारी बर्फबारी और सुदूर घाटियों में मोबाइल कनेक्टिविटी के अभाव के कारण उत्पन्न हुई। • खराब मौसम और बर्फबारी: छह और सात अक्टूबर को थमसर दर्रे और ऊपरी चोटियों पर भारी बर्फबारी हुई, जिससे 28 से 35 वर्ष के ट्रेकर्स की चलने की गति धीमी पड़ गई। इस मौसमी बाधा के चलते उनका तय कार्यक्रम एक दिन पिछड़ गया। • संपर्क विहीन क्षेत्र: बड़ा भंगाल और धार्दी जैसे बेहद दुर्गम इलाकों में मोबाइल नेटवर्क नहीं होता, जिससे लगभग 12 घंटे तक कोई संपर्क नहीं हो सका। संपर्क टूटने के कारण परिजनों में अनहोनी की आशंका बढ़ गई। • घबराहट में सूचना: निर्धारित समय पर वापसी न होने और संवाद पूरी तरह ठप रहने के कारण परिवार ने जिला आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ को आपात सूचना दी। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि ट्रेकर्स सुरक्षित थे और यह केवल देरी के चलते उपजी पैनिक कॉल थी। सवाल-जवाब 1. बड़ा भंगाल ट्रेक पर गए पांचों ट्रेकर्स कहां के रहने वाले हैं? बड़ा भंगाल ट्रेक पर गए पांचों ट्रेकर्स राजस्थान के रहने वाले हैं। 2. ट्रेकर्स के समूह में कौन-कौन शामिल हैं और उनकी उम्र क्या है? इस दल में अंकुर मलानी, सत्यम साबू, पवन, श्याम आर और तरुण राठी शामिल हैं, जिनकी उम्र 28 से 35 वर्ष के बीच है। 3. ट्रेकर्स किस रास्ते से कहां जा रहे थे? वे पांच अक्टूबर को बीड़ से राजगुंधा निकले थे और छह अक्टूबर को बड़ा भंगाल होते हुए थमसर दर्रा पार कर चंबा के भरमौर की ओर जा रहे थे। 4. प्रशासन ने उनके लापता होने की खबर पर क्या स्पष्टीकरण दिया? डीसी कांगड़ा हेमराज बैरवा ने स्पष्ट किया कि कोई भी ट्रेकर लापता या फंसा नहीं था, बल्कि वापसी में एक दिन की देरी होने के कारण परिवार ने घबराहट में पैनिक कॉल किया था। https://trendkia.com/himachal-pradesh/kangra-ke-bara-bhngala-men-lapata-batae-gae-rajasthan-ke-panchon-trekara-surakshita-mile-prashasana-ne-bataya-painika-kola-45110 TrendKia — Har trend, sabse pehle.