कांस्टेबल की वर्दी से सेना के अफसर तक, फतेहपुर के विकास गुलेरिया बने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट हिमाचल प्रदेश पुलिस में तीन साल तक कांस्टेबल के पद पर सेवाएं देने के बाद कांगड़ा जिले के विकास गुलेरिया ने ओटीए चेन्नई से पासआउट होकर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट का पद हासिल किया है. दृढ़ संकल्प और लगातार की गई मेहनत कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी रास्ते आसान बना देती है. हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा में स्थित फतेहपुर उपमंडल के पट्टा जटियां गांव के रहने वाले विकास गुलेरिया ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है. विकास ने राज्य पुलिस बल में सेवा करते हुए भी अपने बड़े सपने को ओझल नहीं होने दिया. दिन-रात की कड़ी तैयारी के बूते उन्होंने भारतीय सेना में बतौर अधिकारी कमीशन प्राप्त किया है. अपने गांव लौटने पर उनका बेहद गर्मजोशी से स्वागत किया गया और उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है. पुलिस की ड्यूटी के बीच जारी रखा सेना में जाने का प्रयास विकास गुलेरिया का सफर अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल है. साल 2022 में वह हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग में बतौर कांस्टेबल भर्ती हुए थे. पुलिस की व्यस्त और चुनौतीपूर्ण ड्यूटी के बीच उन्होंने लगभग तीन साल तक अपनी सेवाएं दीं. वर्दी में रहते हुए भी उनके भीतर भारतीय सेना में अधिकारी बनकर देश की रक्षा करने का जज्बा लगातार बना रहा. ड्यूटी के लंबे घंटों और जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई और शारीरिक दक्षता की तैयारी को नहीं रुकने दिया. इसी लगन के दम पर उन्होंने सेना की चयन प्रक्रिया उत्तीर्ण की और ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) चेन्नई में कड़े सैन्य प्रशिक्षण के लिए चुने गए. प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर वह सेना में लेफ्टिनेंट बनकर निकले हैं. गांव और स्थानीय संस्थानों से ही पूरी की पढ़ाई विकास की प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पूरी तरह से उनके गृह क्षेत्र से ही जुड़ी रही है. उन्होंने अपनी दसवीं कक्षा की पढ़ाई देहरी से पूरी की थी. इसके उपरांत उन्होंने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय राजा का तालाब से अपनी बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण की. उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने देहरी कॉलेज में दाखिला लिया और वहीं से अपना स्नातक स्तर का अध्ययन संपन्न किया. एक सामान्य पृष्ठभूमि से आने के बावजूद स्थानीय संस्थानों में पढ़कर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है, जो ग्रामीण परिवेश के छात्रों के लिए बड़ा उदाहरण है. साधारण परिवार में खुशी और गर्व का माहौल विकास के परिवार की पृष्ठभूमि बेहद साधारण और संघर्षपूर्ण रही है. उनके पिता विभीषण सिंह निजी क्षेत्र में एक सामान्य नौकरी करते हैं, जबकि उनकी माता मीनू देवी एक समर्पित गृहिणी हैं. पिता विभीषण सिंह का कहना है कि विकास ने जब सेना का अधिकारी बनने का विचार साझा किया था, तो पूरे परिवार ने उसके निर्णय का सम्मान किया और हर कदम पर उसका मनोबल बढ़ाया. विकास की माता मीनू देवी ने बेटे को सेना की वर्दी में देखकर अत्यंत हर्ष व्यक्त किया और प्रार्थना की कि वह हमेशा सुरक्षित रहकर देश की गरिमा को बढ़ाएं. क्षेत्र के युवाओं को नशे से दूर रहने की दी सलाह गांव पहुंचने पर विकास ने क्षेत्र के युवाओं से संवाद किया और उन्हें जीवन में अनुशासन अपनाने का संदेश दिया. उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे नशे की लत से पूरी तरह दूर रहें और अपने जीवन के लक्ष्यों के प्रति समर्पित रहें. विकास का कहना है कि सही दिशा में लगातार प्रयास किए जाएं तो संसाधनों की कमी कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती. इसका आप पर असर यह सफलता ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतियोगी छात्रों और कार्यरत कर्मचारियों के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शक साबित होती है. • भारत में: सरकारी या पुलिस सेवा में कार्यरत युवा इस बात से सीख ले सकते हैं कि नौकरी के दौरान भी उच्च पदों की प्रतियोगी परीक्षाएं पास की जा सकती हैं. उचित समय प्रबंधन से नौकरी के कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए भी कमीशन प्राप्त करना संभव है. • हिमाचल प्रदेश में: कांगड़ा और आसपास के ग्रामीण युवाओं के लिए स्थानीय सरकारी स्कूलों और कॉलेजों से पढ़ाई करके भी सैन्य अधिकारी बनने का रास्ता खुला दिखता है. यह उपलब्धि युवाओं को नशे की सामाजिक बुराई से दूर रहकर करियर पर ध्यान लगाने के लिए प्रेरित करती है. ऐसा क्यों हुआ विकास गुलेरिया की इस उपलब्धि के पीछे वर्षों की निरंतर लगन और ठोस पारिवारिक समर्थन का एक पूरा क्रम रहा है. • सपनों के प्रति अडिग निष्ठा: साल 2022 में कांस्टेबल के पद पर नियुक्ति मिलने के बाद उन्होंने अपनी यात्रा को वहीं सीमित नहीं माना. सेना में अधिकारी बनने के पूर्व संकल्प को उन्होंने पुलिस सेवा की जिम्मेदारियों के बीच भी जिंदा रखा. • निरंतर तैयारी और समय प्रबंधन: पुलिस की व्यस्त ड्यूटी के दौरान बचे हुए समय का सदुपयोग करते हुए उन्होंने लिखित परीक्षा और शारीरिक परीक्षण के लिए खुद को लगातार तैयार रखा. इसी अनुशासन के चलते वे ओटीए चेन्नई में चयनित हुए. • पारिवारिक और शैक्षणिक आधार: परिवार की आर्थिक सीमाओं के बावजूद माता-पिता ने उनके फैसले का पूरा समर्थन किया. स्थानीय देहरी कॉलेज और स्कूलों से प्राप्त बुनियादी शिक्षा ने उन्हें इस राष्ट्रीय स्तर की चयन प्रक्रिया के लिए जरूरी आधार प्रदान किया. सवाल-जवाब 1. विकास गुलेरिया कौन हैं और उन्होंने हाल ही में क्या उपलब्धि हासिल की है? विकास गुलेरिया हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के निवासी हैं, जो ओटीए चेन्नई से प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं. 2. सेना में अधिकारी बनने से पहले विकास किस पद पर कार्यरत थे? वे साल 2022 से हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग में बतौर कांस्टेबल लगभग तीन वर्षों तक कार्यरत थे. 3. विकास गुलेरिया का संबंध किस गांव और जिले से है? वे हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के अंतर्गत फतेहपुर उपमंडल के पट्टा जटियां गांव के रहने वाले हैं. 4. विकास ने अपनी प्रारंभिक और कॉलेज स्तर की पढ़ाई कहां से की? उन्होंने दसवीं देहरी से, बारहवीं राजा का तालाब स्कूल से और अपनी स्नातक डिग्री देहरी कॉलेज से पूरी की. 5. विकास गुलेरिया के माता-पिता क्या करते हैं? उनके पिता विभीषण सिंह निजी सेवा में कार्यरत हैं और उनकी माता मीनू देवी गृहिणी हैं. 6. विकास ने युवाओं को क्या संदेश दिया है? उन्होंने युवाओं से नशे की लत से पूरी तरह दूर रहने, अनुशासन बनाए रखने और अपने लक्ष्यों के प्रति कड़ी मेहनत करने का आह्वान किया है. प्रेरणा और सबक विकास गुलेरिया की सफलता से मिलने वाले प्रमुख जीवन सबक: • वर्तमान स्थिति को अंतिम न समझें: पहली नौकरी मिलने के बाद भी यदि बड़ा लक्ष्य बाकी है, तो संतुष्ट होकर प्रयास बंद करने के बजाय अपनी दिशा में निरंतर आगे बढ़ते रहें. • समय प्रबंधन ही वास्तविक शक्ति है: पुलिस की व्यस्त ड्यूटी के साथ पढ़ाई जारी रखना सिखाता है कि समय की कमी का बहाना बनाए बिना उपलब्ध पलों का सही उपयोग करना ही सफलता की कुंजी है. • संसाधनों के अभाव को कमजोरी न बनने दें: महानगरों के बड़े संस्थानों में पढ़े बिना भी गांव और स्थानीय सरकारी कॉलेजों की शिक्षा के बूते राष्ट्रीय स्तर के मुकाम हासिल किए जा सकते हैं. • अनुशासन और सकारात्मक जीवनशैली: नशे जैसी प्रवृत्तियों से दूर रहकर शारीरिक और मानसिक अनुशासन बनाए रखना बड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सबसे जरूरी शर्त है. https://trendkia.com/himachal-pradesh/kanstebala-ki-vardi-se-sena-ke-aphasara-taka-fatehpur-ke-vikas-guleria-bane-bharatiya-sena-men-lephtinenta-31112 TrendKia — Har trend, sabse pehle.