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  "title": "किन्नौर में मॉनसून की पहली बारिश से तबाही, चोलिंग नाले की बाढ़ में दबीं स्कॉर्पियो और पिकअप, 6 घंटे बंद रहने के बाद खुला हाईवे",
  "summary": "हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में भारी बारिश के बाद चोलिंग और रिब्बा में फ्लैश फ्लड आया, जिसमें एक स्कॉर्पियो और एक पिकअप मलबे में दब गईं और शिमला-किन्नौर-काजा नेशनल हाईवे करीब 6 घंटे बाद बहाल हुआ।",
  "content": "हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में मानसून की पहली भारी बारिश ने ही तबाही मचा दी है। रिकॉन्गपिओ से मिली जानकारी के मुताबिक चोलिंग गांव के पास मीरू नाले में अचानक आई बाढ़ ने काजा, किन्नौर और शिमला को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे को पूरी तरह जाम कर दिया। सड़क पर भारी मात्रा में मलबा और बड़े-बड़े पत्थर आ गिरे, जिससे आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई। इसी बीच किन्नौर के ही रिब्बा गांव में भी रात के अंधेरे में फ्लैश फ्लड ने दस्तक दी और गांव वालों को पूरी रात जागकर गुजारनी पड़ी। राहत की बात यह रही कि दोनों जगहों से अब तक किसी जनहानि की खबर सामने नहीं आई है।\n\nचोलिंग नाले की बाढ़ में दबीं दो गाड़ियां\nचोलिंग स्थित प्राइमरी स्कूल के पास नाले में उमड़े पानी और मलबे में दो वाहन पूरी तरह दब गए, इनमें एक स्कॉर्पियो और एक पिकअप गाड़ी शामिल है। हालांकि इन दोनों वाहनों में सवार किसी व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है। नाले के दोनों तरफ बड़ी तादाद में गाड़ियां फंसी रहीं, जिनमें ट्रकों की संख्या सबसे ज्यादा थी।\n\n \n\nरिब्बा में भी रतजगा, कण्डे मार्ग बंद\nकिन्नौर के रिब्बा में सुबह करीब तीन बजे रिब्बा खड्ड में अचानक बाढ़ आ गई, जिससे रिब्बा को कण्डे से जोड़ने वाला संपर्क मार्ग बंद हो गया। यहां भी किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन बाढ़ की चपेट में आकर कुछ छोटे वाहनों को आंशिक नुकसान जरूर पहुंचा। ग्रामीण देर रात ही सड़कों पर उतर आए और अपने वाहनों को सुरक्षित स्थानों पर हटाया।\n\nमटर सीजन में हाईवे बंद होने से किसान परेशान\nइन दिनों किन्नौर में मटर की फसल का सीजन पूरे उफान पर है। ऐसे समय में हाईवे के बंद होने से मटर लदे ट्रकों के चालकों को घंटों इंतजार करना पड़ा। समय पर फसल मंडियों तक न पहुंच पाने से किसानों और व्यापारियों दोनों की चिंता बढ़ गई, क्योंकि मटर जैसी नाशवान फसल में देरी सीधे नुकसान में बदल जाती है।\n\nप्रशासन ने संभाला मोर्चा, करीब 6 घंटे बाद खुला रास्ता\nकिन्नौर के डीसी डॉ. अमित कुमार शर्मा ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि चोलिंग के पास सड़क साफ करने और फंसे वाहनों को निकालने के लिए भारी मशीनरी मौके पर भेज दी गई है। प्रशासन की टीम लगातार मौके पर डटी रही और बंद पड़े राष्ट्रीय उच्च मार्ग को जल्द से जल्द चालू करने में जुटी रही। मशक्कत रंग लाई और करीब 6 घंटे की जद्दोजहद के बाद हाईवे को अस्थायी तौर पर यातायात के लिए खोल दिया गया।\n\nलिप्पा, चोलिंग और रिस्पा में सबसे ज्यादा नुकसान: सूरत सिंह नेगी\nकिन्नौर से भाजपा नेता सूरत सिंह नेगी ने कहा कि मानसून की पहली ही बारिश ने जिले में भारी तबाही मचाई है और लिप्पा, चोलिंग तथा रिस्पा क्षेत्रों में सड़कों, संपर्क मार्गों और आम जनजीवन को गंभीर नुकसान पहुंचा है। उन्होंने बताया कि शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार कई जगहों पर बाढ़ और भूस्खलन से आवागमन बाधित हुआ है और स्थानीय लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। नेगी ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से मांग की कि प्रभावित इलाकों का तुरंत मौके पर जाकर निरीक्षण किया जाए और नुकसान का पूरा आकलन कर सड़क, पेयजल, बिजली जैसी जरूरी सेवाओं को जल्द बहाल किया जाए। साथ ही उन्होंने प्रभावित परिवारों, किसानों और बागवानों को उचित मुआवजा और हरसंभव राहत देने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल घड़ी में वे जनता के साथ खड़े हैं।\n\nपूरे हिमाचल में बारिश का असर, 46 सड़कें और 181 ट्रांसफॉर्मर ठप\nअकेले किन्नौर ही नहीं, भारी बारिश की मार पूरे हिमाचल प्रदेश पर पड़ी है। राज्यभर में 46 सड़कें और 181 बिजली ट्रांसफॉर्मर प्रभावित हुए हैं, जिन्हें ठीक करने में लोक निर्माण विभाग और बिजली बोर्ड की टीमें जुटी हुई हैं। मौसम विभाग ने कांगड़ा, मंडी, शिमला और सिरमौर जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि बाकी कई जिलों में येलो अलर्ट लागू है। राजधानी शिमला में भी हालात सामान्य नहीं रहे, यहां सचिवालय परिसर की पार्किंग में मानसून की पहली बारिश के बाद ही दरारें दिखाई देने लगीं, जो प्रशासन के लिए चिंता का एक और कारण बन गई हैं।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: मानसून सीजन की पहली ही बारिश में पहाड़ी राज्यों में इस तरह की तबाही से साफ है कि इस साल भी बारिश और खतरनाक हो सकती है, इसलिए पहाड़ी इलाकों की यात्रा करने वालों को मौसम विभाग के अलर्ट पर नजर रखनी चाहिए।\n• हिमाचल प्रदेश में: शिमला-किन्नौर-काजा हाईवे समेत राज्यभर की 46 सड़कें और 181 ट्रांसफॉर्मर प्रभावित होने से किन्नौर, कांगड़ा, मंडी, शिमला और सिरमौर में यात्रा करने वालों को देरी और बिजली आपूर्ति में दिक्कत झेलनी पड़ सकती है।\n• किन्नौर के किसानों के लिए: मटर सीजन के दौरान हाईवे बंद रहने से फसल मंडियों तक पहुंचने में देरी हुई, जिससे किसानों और व्यापारियों को सीधा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. किन्नौर में फ्लैश फ्लड कहां-कहां आया?\nहिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के चोलिंग गांव में मीरू नाले और रिब्बा गांव में रिब्बा खड्ड में फ्लैश फ्लड आया।\n\n2. क्या इस हादसे में किसी की जान गई?\nनहीं, चोलिंग और रिब्बा दोनों जगहों से अब तक किसी जनहानि की खबर सामने नहीं आई है।\n\n3. मलबे में कौन-कौन सी गाड़ियां दबीं?\nचोलिंग प्राइमरी स्कूल के पास एक स्कॉर्पियो और एक पिकअप गाड़ी मलबे में दब गईं।\n\n4. शिमला-किन्नौर-काजा हाईवे कितनी देर बाद बहाल हुआ?\nहाईवे को घटना के करीब 6 घंटे बाद अस्थायी तौर पर यातायात के लिए बहाल कर दिया गया।\n\n5. मटर किसानों पर इस हादसे का क्या असर पड़ा?\nहाईवे बंद होने से मटर लदे ट्रक फंस गए, जिससे फसल समय पर मंडियों तक नहीं पहुंच सकी और किसानों-व्यापारियों की चिंता बढ़ गई।\n\n6. हिमाचल में इस बारिश से कुल कितना नुकसान हुआ है?\nराज्यभर में 46 सड़कें और 181 बिजली ट्रांसफॉर्मर प्रभावित हुए हैं, और मौसम विभाग ने कांगड़ा, मंडी, शिमला व सिरमौर में ऑरेंज अलर्ट तथा कई अन्य जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है।",
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  "category": "हिमाचल प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-07-03",
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