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  "type": "article",
  "title": "कृषि विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति संशोधन कानून असंवैधानिक घोषित, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने सुक्खू सरकार के नियम रद्द किए",
  "summary": "हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने कृषि और बागवानी विश्वविद्यालयों में कुलपति की नियुक्ति पर सुक्खू सरकार द्वारा बनाए गए संशोधित नियमों को रद्द करते हुए यूजीसी दिशा-निर्देशों के तहत नई चयन प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है।",
  "content": "हिमाचल प्रदेश में कृषि तथा उद्यानिकी विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार को बड़ा झटका लगा है। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को कुलपति चयन में निर्णायक शक्ति प्रदान करने वाले संशोधित कानून और उसके तहत बनाए गए नियमों को असंवैधानिक ठहराते हुए खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा किया गया बदलाव विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के वर्ष 2018 के नियमों के सीधे विपरीत था।\n\nयूजीसी नियमों के उल्लंघन पर अदालत का कड़ा रुख\nउच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की पीठ ने नरेंद्र कुमार सांख्यन तथा संजीव कुमार चौहान की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय सुनाया। याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार द्वारा कुलपति चयन की प्रक्रिया में किए गए बदलावों को अदालत में चुनौती दी थी। खंडपीठ ने हिमाचल प्रदेश कृषि, उद्यानिकी एवं वानिकी (संशोधन) अधिनियम 2023, इसमें वर्ष 2025 में किए गए संशोधन तथा वर्ष 2026 के नियमों को असंवैधानिक और शुरुआत से ही शून्य घोषित कर दिया।\n\nदो प्रमुख राज्य विश्वविद्यालयों में नई चयन प्रक्रिया का आदेश\nइस न्यायिक आदेश का प्रभाव राज्य के दो प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों पर पड़ेगा। पालमपुर स्थित चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय तथा सोलन स्थित डॉ. यशवंत सिंह परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय में अब कुलपति पदों पर नए सिरे से नियुक्ति होगी। उच्च न्यायालय ने दोनों विश्वविद्यालयों में यूजीसी विनियम 2018 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करते हुए तुरंत नई चयन प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।\n\nफरवरी 2026 का विज्ञापन और पृष्ठभूमि\nदोनों कृषि एवं उद्यानिकी विश्वविद्यालयों में काफी लंबे समय से स्थायी कुलपतियों के पद खाली पड़े थे। इस स्थिति से निपटने और चयन प्रक्रिया में अंतिम अधिकार प्राप्त करने के लिए सुक्खू सरकार ने संबंधित कानून में संशोधन किया था। इसके पश्चात फरवरी 2026 में सरकार ने इन पदों के लिए विज्ञापन भी जारी किया था। हालांकि, संशोधित प्रावधानों में चयन का मुख्य नियंत्रण सरकार के पास रखे जाने के कारण यह मामला न्यायशास्त्र के सिद्धांतों और केंद्रीय अकादमिक मानकों के उल्लंघन के आधार पर अदालत की चौखट तक पहुंचा।\n\nइसका आप पर असर\nहिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के इस निर्णय से राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों में कुलपतियों के चयन में पारदर्शिता और अकादमिक स्वायत्तता सुनिश्चित होगी।\n\n• हिमाचल प्रदेश में: पालमपुर और सोलन स्थित राज्य के दोनों प्रमुख कृषि एवं उद्यानिकी विश्वविद्यालयों में नियमित कुलपतियों की नियुक्ति का रास्ता साफ होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन में अनिश्चितता समाप्त होगी और शैक्षणिक गतिविधियों को गति मिलेगी।\n• अकादमिक जगत के लिए: उच्च शिक्षण संस्थानों में कुलपतियों के चयन में राज्य सरकारों के सीधे हस्तक्षेप पर रोक लगेगी। चयन प्रक्रिया पूरी तरह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप संपन्न होगी।\n• छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए: योग्य अकादमिक नेतृत्व मिलने से विश्वविद्यालयों के अनुसंधान, पठन-पाठन और राष्ट्रीय रैंकिंग में सुधार की संभावना बढ़ेगी।\n• राज्य सरकार के लिए: फरवरी 2026 में जारी की गई नियुक्ति प्रक्रिया रद्द होने के बाद अब सरकार को यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार नया विज्ञापन और चयन मंडल गठित करना होगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने सुक्खू सरकार के किस फैसले को रद्द किया है?\nअदालत ने कृषि और उद्यानिकी विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति में सरकार को निर्णायक भूमिका देने वाले संशोधित अधिनियम और नियमों को रद्द कर दिया है।\n\n2. यह मामला किन दो विश्वविद्यालयों से जुड़ा हुआ है?\nयह फैसला पालमपुर स्थित चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय और सोलन स्थित डॉ. यशवंत सिंह परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय से जुड़ा है।\n\n3. हाईकोर्ट ने किस कानून और नियमों को असंवैधानिक घोषित किया है?\nअदालत ने हिमाचल प्रदेश कृषि, उद्यानिकी एवं वानिकी (संशोधन) अधिनियम 2023, वर्ष 2025 के संशोधन तथा वर्ष 2026 में बनाए गए नियमों को असंवैधानिक ठहराया है।\n\n4. इस मामले की सुनवाई किस बेंच ने की?\nइस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने की।\n\n5. अदालत ने आगे नियुक्ति प्रक्रिया के संबंध में क्या निर्देश दिया है?\nउच्च न्यायालय ने दोनों विश्वविद्यालयों में यूजीसी विनियम 2018 के तहत नए सिरे से कुलपति चयन प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है।",
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  "category": "हिमाचल प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-08-28",
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    "हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय",
    "सुक्खू सरकार",
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