# कुल्लू की पहाड़ियों में आईटीबीपी और एनसीबी का बड़ा एक्शन, मनाला क्रीम का कच्चा माल तबाह

> हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े संयुक्त अभियान के तहत अवैध रूप से उगाई जा रही भांग की फसल को नष्ट कर दिया है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य विश्व प्रसिद्ध 'मनाला क्रीम' चरस के कच्चे माल के स्रोत को खत्म करना है।

**Type:** article · **Category:** हिमाचल प्रदेश · **Published:** 2026-09-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/himachal-pradesh/kullu-ki-pahariyon-men-itbp-aura-ncb-ka-bara-ekshana-manala-krima-ka-kachcha-mala-tabaha-39565 · **Language:** Hindi
**Tags:** कुल्लू क्राइम, एनसीबी कार्रवाई, आईटीबीपी ऑपरेशन, मनाला क्रीम, हिमाचल ड्रग्स, भांग की खेती, पुलिस रेड

हिमाचल प्रदेश की दुर्गम पहाड़ियों और ऊंचाई वाले इलाकों में ड्रग्स के अवैध कारोबार पर सुरक्षा एजेंसियों ने एक बहुत बड़ा प्रहार किया है। कुल्लू के बेहद कठिन और सुदूर इलाकों में चल रही अवैध भांग की खेती का पर्दाफाश करते हुए संयुक्त टीमों ने पूरी फसल को मौके पर ही नष्ट कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जिस चरस की सबसे ज्यादा मांग रहती है और जिसे दुनिया 'मनाला क्रीम' के नाम से जानती है, उसका पूरा कच्चा माल इसी इलाके से तैयार किया जाता था। सुरक्षा बलों के अचानक पहुंचे इस ताबड़तोड़ एक्शन से मादक पदार्थों के सौदागरों में हड़कंप मच गया है और कुछ ही मिनटों में उनकी अवैध फसल पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गई।

## कंटीले तारों के पीछे छिपाया गया था पूरा खेल
कुल्लू की इन पथरीली और ऊंची पहाड़ियों तक आम आदमी का पहुंचना बेहद कठिन होता है। इसी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर ड्रग्स माफिया ने सुनसान जगहों पर अवैध भांग की खेती फैला रखी थी। इस गुप्त खेती को छिपाने के लिए माफिया ने परिसर के चारों तरफ मजबूत कंटीले तारों की फेंसिंग कर रखी थी ताकि किसी भी आम इंसान या बाहरी व्यक्ति की नजर इस पर न पड़ सके। आरोपियों ने उन सभी रास्तों और पैंतरों का इस्तेमाल किया था जिससे सुरक्षा एजेंसियों की निगाहों से बचा जा सके, लेकिन पुख्ता खुफिया जानकारी के आधार पर एजेंसियों ने इस चक्रव्यूह को भेद ही डाला।

## पहली बार आईटीबीपी के साथ उतरीं संयुक्त टीमें
मादक पदार्थों के खिलाफ इस जंग में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश पुलिस और वन विभाग के अधिकारी भी कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। इस पूरे ऑपरेशन की सबसे खास बात यह रही कि पहली बार दुर्गम पहाड़ी इलाकों की भौगोलिक चुनौतियों से निपटने के लिए आईटीबीपी के जवानों को भी शामिल किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक तस्करों और सप्लायरों पर होने वाली सामान्य कार्रवाइयों से इतर इस बार एजेंसियों ने अपनी रणनीति बदली है और सीधे उस जड़ पर वार किया है जहां से नशीले पदार्थों का उत्पादन शुरू होता है। जब तक कच्चा माल ही खत्म नहीं होगा, तब तक तैयार चरस बाजार तक नहीं पहुंच पाएगी।

## जियो-टैगिंग के जरिए रखा जा रहा है पूरा रिकॉर्ड
अवैध खेती के खिलाफ चलाए जा रहे इस अभियान को पूरी तरह पारदर्शी और पुख्ता बनाने के लिए एजेंसियां आधुनिक तकनीक का खुलकर इस्तेमाल कर रही हैं। कार्रवाई के दौरान जितनी भी जगहों पर अवैध भांग की खेती पाई जा रही है, उन सभी स्थानों की सटीक जियो-टैगिंग की जा रही है ताकि भविष्य में भी उसका डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहे। इसके अलावा मौके की वीडियोग्राफी और उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें भी खींची जा रही हैं ताकि कानूनी कार्रवाई मजबूत बनी रहे। पूरी प्रक्रिया संपन्न होने के बाद वन विभाग की तरफ से आधिकारिक रूप से फसल नष्ट किए जाने का एक प्रमाण पत्र भी जारी किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि मैदान पर पूरी सख्ती से काम किया गया है।

## इसका आप पर असर
कुल्लू और आसपास के पहाड़ी इलाकों में चल रहे इस बड़े सुरक्षा अभियान का सीधा असर स्थानीय समाज, अवैध कारोबारियों और प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ने वाला है।

- **भारत में:** देश भर में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों की इस नई रणनीति से सप्लायरों में कड़ा संदेश गया है। इस तरह के अभियानों से सीमावर्ती और पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाली अवैध गतिविधियों पर लगाम कसने में मदद मिलेगी।
- **कुल्लू में:** स्थानीय निवासियों और युवाओं के बीच ड्रग्स की उपलब्धता कम होगी जिससे अपराध दर और नशामुक्ति से जुड़ी समस्याओं में सुधार आएगा। प्रशासनिक सख्ती बढ़ने से स्थानीय ग्रामीण असामाजिक तत्वों की गतिविधियों की सूचना तुरंत देने के लिए आगे आएंगे।
- **किसान वर्ग पर:** वैध खेती करने वाले आम किसानों को अब अपराधियों की अवैध गतिविधियों के कारण बेवजह शक के घेरे में नहीं आना पड़ेगा। प्रशासन द्वारा जियो-टैगिंग और प्रमाण पत्र जारी करने से भूमि के दुरुपयोग पर भी सख्त निगरानी रखी जाएगी।
- **ड्रग माफिया पर:** मादक पदार्थों के कारोबार से जुड़े नेटवर्क को आर्थिक रूप से भारी झटका लगा है क्योंकि तैयार फसल बाजार में बिकने से पहले ही तबाह हो गई है। तस्करों के लिए अब दुर्गम इलाकों में ऐसी गुप्त खेती करना बेहद जोखिम भरा हो गया है।

## ऐसा क्यों हुआ
ड्रग्स के खिलाफ एजेंसियों द्वारा इस बार अपनाई गई रणनीति में पारंपरिक तरीकों से हटकर सीधे जड़ पर प्रहार करने का दृष्टिकोण अपनाया गया है।

- **कच्चे माल पर सीधा वार:** तस्करों और छोटे सप्लायरों तक पहुंचने के बजाय एजेंसियां अब सीधे उस कृषि उत्पादन स्थल को नष्ट कर रही हैं जहां से प्रतिबंधित चरस का निर्माण शुरू होता है।
- **भौगोलिक दुर्गमता का फायदा:** कुल्लू के ऊंचे और कठिन पहाड़ी इलाकों में रास्तों के अभाव और कंटीले तारों की फेंसिंग के कारण अपराधियों को लंबे समय तक छुपने का मौका मिल रहा था।
- **विशेष बलों की तैनाती:** पहाड़ी इलाकों में सामान्य पुलिस बलों के साथ पहली बार आईटीबीपी जैसे विशेष बल को शामिल किए जाने से दुर्गम स्थानों पर प्रभावी कार्रवाई करना संभव हुआ है।
- **इंटेलिजेंस नेटवर्क का विस्तार:** सुरक्षा एजेंसियों को मिले सटीक खुफिया इनपुट और आधुनिक जियो-टैगिंग तकनीक के उपयोग से अवैध खेती करने वालों की पहचान करना आसान हो गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. कुल्लू में यह संयुक्त अभियान किन सुरक्षा एजेंसियों ने चलाया है?
इस अभियान में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, आईटीबीपी, हिमाचल प्रदेश पुलिस और वन विभाग के अधिकारी शामिल रहे।

### 2. इस कार्रवाई का मुख्य निशाना क्या था?
कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य 'मनाला क्रीम' चरस के लिए कच्चा माल तैयार करने वाली अवैध भांग की फसल को नष्ट करना था।

### 3. इस ऑपरेशन में आईटीबीपी को क्यों शामिल किया गया है?
दुर्गम और ऊंचे पहाड़ी इलाकों में बिना रास्तों वाली कठिन जगहों पर प्रभावी कार्रवाई करने के लिए पहली बार आईटीबीपी को शामिल किया गया है।

### 4. अवैध खेती छुपाने के लिए तस्करों ने क्या इंतजाम किए थे?
तस्करों ने खेती वाली जगह के चारों तरफ कंटीले तारों की फेंसिंग कर रखी थी ताकि किसी की नजर उस तक न पहुंच सके।

### 5. नष्ट की गई फसल का रिकॉर्ड कैसे रखा जा रहा है?
कार्रवाई वाली जगह की जियो-टैगिंग की जा रही है और फोटो-वीडियोग्राफी के जरिए पूरा डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।

### 6. कार्रवाई पूरी होने के बाद कौन सा प्रमाण पत्र जारी होता है?
फसल पूरी तरह नष्ट किए जाने के बाद वन विभाग की तरफ से आधिकारिक प्रमाण पत्र जारी किया जाता है।

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