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  "title": "कुल्लू की सैंज घाटी में पार्वती प्रोजेक्ट की टनल से बहा मटमैला पानी, पालचरा में मकान और दुकानें मलबे में समाईं",
  "summary": "हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में एनएचपीसी पार्वती जल विद्युत परियोजना चरण-दो की टनल से भारी रिसाव के बाद पालचरा गांव में सैलाब आ गया, जिससे कई मकान, दुकानें और खेत मलबे से घिर गए।",
  "content": "हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्र कुल्लू स्थित सैंज घाटी में जल विद्युत परियोजना की एक सुरंग से अचानक फूटे पानी ने भारी तबाही मचाई है। एनएचपीसी की पार्वती जल विद्युत परियोजना चरण-दो के एडिट-5 हिस्से से अत्यधिक मात्रा में पानी का रिसाव होने लगा। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के चलते ढलानों से होता हुआ भारी मटमैला पानी और मलबा नीचे बसे पालचरा गांव में घुस गया, जिससे स्थानीय निवासियों में चीख-पुकार मच गई और संपत्ति का भारी नुकसान हुआ।\n\nपालचरा और थल्यारू में अफरा-तफरी, रात में घरों से भागे लोग\nशनिवार की रात जब ग्रामीण सोने की तैयारी कर रहे थे, तभी अचानक मटमैले पानी का तेज सैलाब रिहायशी इलाके में दाखिल हो गया। ग्रामीणों के मुताबिक, करीब 11 बजे हालात इतने बिगड़ गए कि लोगों को अपनी जान बचाने के लिए तुरंत घरों से बाहर भागना पड़ा। गांव के लोगों ने आपसी तालमेल और एकजुटता दिखाते हुए प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। कई परिवारों के अपने आशियाने उजड़ जाने के कारण उन्हें पूरी रात दूसरे ग्रामीणों के घरों में शरण लेनी पड़ी।\n\nमकानों, दुकानों और होमस्टे में घुसा मलबा, फसलों को नुकसान\nटनल से हुए इस भारी जलभराव और मलबे के कारण गांव के बुनियादी ढांचे को गहरी चोट पहुंची है। प्राथमिक सूचना के अनुसार, दो मकान पूरी तरह मलबे में दब गए हैं, जबकि एक नया मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इसके अलावा दो दुकानों और दो अन्य रिहायशी मकानों को भी गंभीर क्षति पहुंची है। गांव के डावेराम, जयराम, गंगा राम, ठाकुर दास और लुदर चंद के घरों, दुकानों और होमस्टे में मलबा भर गया। खेती के खेतों में गाद भर जाने से खड़ी फसलों को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है।\n\nतीसरी बार टनल रिसाव की घटना, प्रशासन और परियोजना प्रमुख पहुंचे\nघटना की सूचना मिलते ही उपमंडलाधिकारी नागरिक पंकज शर्मा और परियोजना प्रमुख रणजीत सिंह प्रशासनिक दल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रभावित ग्रामीणों से बातचीत कर जमीनी स्थिति का मुआयना किया और हरसंभव मदद उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। ग्रामीणों ने मांग रखी है कि प्रशासन जल्द से जल्द संपत्ति और फसलों के नुकसान का आधिकारिक आकलन करे और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करे।\n\nस्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस घटना पर कड़ा आक्रोश जताया है। जिला परिषद सदस्य विभा सिंह ने बताया कि रैला पंचायत में यह समस्या अत्यंत चिंताजनक रूप ले चुकी है और पिछले साल भी यहां इसी तरह का रिसाव हुआ था। वहीं रैला-2 के उपप्रधान मोती राम ने स्पष्ट किया कि पालचरा और थल्यारू गांव में यह तीसरी बार ऐसा हादसा हुआ है। उन्होंने एनएचपीसी प्रबंधन से प्रभावितों को त्वरित आर्थिक सहायता देने और टनल रिसाव की समस्या का एक स्थायी तकनीकी समाधान निकालने का आग्रह किया है।\n\nइसका आप पर असर\nजल विद्युत सुरंग से पानी और मलबा बहने से पालचरा और आसपास के ग्रामीणों की संपत्ति, आजीविका और दैनिक सुरक्षा को सीधा झटका लगा है।\n\n• भारत में: पहाड़ी राज्यों में जल विद्युत बुनियादी ढांचे के निर्माण और सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े होते हैं। नीति निर्माताओं और विद्युत निगमों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल को कड़ाई से लागू करने का दबाव बढ़ता है।\n• कुल्लू में: पालचरा और थल्यारू के कई परिवारों को तत्काल प्रभाव से अपने क्षतिग्रस्त घर छोड़कर पड़ोसियों के यहां शरण लेनी पड़ी है। प्रभावित ग्रामीण अपनी क्षतिग्रस्त दुकानों, होमस्टे और बर्बाद फसलों के मुआवजे के लिए प्रशासनिक सर्वेक्षण का इंतजार कर रहे हैं।\n• आवास और सुरक्षा: मलबे में दबे और क्षतिग्रस्त मकानों के कारण परिवारों के सामने सिर छिपाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों को भविष्य में होने वाले टनल रिसाव से बचाव के लिए स्थायी समाधान की दरकार है।\n• स्थानीय आजीविका: होमस्टे और दुकानों में गाद भरने से स्थानीय पर्यटन और व्यापारिक आय पूरी तरह ठप हो गई है। कृषि भूमि पर मटमैला पानी भरने से मौसमी उपज का भी भारी नुकसान हुआ है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nएनएचपीसी पार्वती जल विद्युत परियोजना चरण-दो की टनल में बने एडिट-5 से अनियंत्रित पानी का रिसाव होने के कारण यह सैलाब आया, जिसने नीचे बसे गांवों को मलबे से पाट दिया।\n\n• एडिट-5 से पानी का अत्यधिक रिसाव: परियोजना की संबंधित टनल शाखा से अत्यधिक जल प्रवाह बाहर निकल आया। अत्यधिक दबाव के साथ निकला यह पानी ढलान से नीचे आते हुए मटमैले सैलाब में बदल गया।\n• पुराने रिसाव और कमजोर सुरक्षा प्रबंधन: स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि पिछले वर्ष भी इसी स्थान पर रिसाव दर्ज किया गया था। इस बार मिलाकर इलाके में तीसरी बार जल रिसाव हुआ है, जिससे टनल प्रबंधन के स्थायी समाधान पर सवाल उठे हैं।\n• भौगोलिक ढलान का असर: एडिट-5 से निकला तेज बहाव पहाड़ी ढलान से गुजरते समय भारी मिट्टी और मलबा समेटते हुए सीधे पालचरा और थल्यारू के रिहायशी इलाकों और खेतों में जा गिरा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सैंज घाटी में पानी का रिसाव किस परियोजना से हुआ?\nयह रिसाव एनएचपीसी की पार्वती जल विद्युत परियोजना चरण-दो के एडिट-5 से हुआ।\n\n2. इस घटना में कौन से गांव सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं?\nइस सैलाब से कुल्लू जिले की सैंज घाटी के पालचरा और थल्यारू गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।\n\n3. गांव में कितना बुनियादी नुकसान दर्ज किया गया है?\nग्रामीणों के अनुसार दो मकान मलबे में दब गए, एक नया मकान क्षतिग्रस्त हुआ और दो दुकानों व दो अन्य घरों को भारी नुकसान पहुंचा।\n\n4. ग्रामीणों को किस समय अपने घरों से सुरक्षित निकलना पड़ा?\nशनिवार रात करीब 11 बजे पानी घुसने के बाद ग्रामीणों ने आपसी मदद से प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।\n\n5. प्रशासन की ओर से मौके पर कौन से अधिकारी पहुंचे?\nउपमंडलाधिकारी नागरिक पंकज शर्मा और परियोजना प्रमुख रणजीत सिंह ने मौके पर पहुंचकर प्रभावित लोगों से स्थिति का जायजा लिया।\n\n6. क्या इस टनल से रिसाव की घटना पहले भी हो चुकी है?\nहां, स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अनुसार पिछले साल भी यह समस्या हुई थी और यहां यह तीसरी बार रिसाव का मामला सामने आया है।",
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  "category": "हिमाचल प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-09-21",
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