# श्रम विभाग के 160 डाटा एंट्री ऑपरेटरों पर आजीविका का संकट, 30 सितंबर को सेवा अवधि पूरी होने के बाद काम रोकने की हिदायत

> हिमाचल प्रदेश के श्रम एवं रोजगार विभाग में 13 वर्षों से कार्यरत 160 आउटसोर्स कर्मचारियों का सेवा काल 30 सितंबर को समाप्त हो रहा है। योजनाएं बंद होने और बजट के अभाव का हवाला देकर उन्हें 1 अक्टूबर से दफ्तर न आने के मौखिक निर्देश मिले हैं।

**Type:** article · **Category:** हिमाचल प्रदेश · **Published:** 2026-09-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/himachal-pradesh/labor-department-ke-160-data-entry-operators-para-ajivika-ka-snkata-30-september-ko-seva-avadhi-puri-hone-ke-bada-kama-rokane-ki-h-40421 · **Language:** Hindi
**Tags:** आउटसोर्स कर्मचारी, हिमाचल प्रदेश, श्रम एवं रोजगार विभाग, डाटा एंट्री ऑपरेटर, यदोपति चौहान, सुखविंदर सिंह सुक्खू, कौशल विकास भत्ता योजना, बेरोजगार भत्ता योजना

हिमाचल प्रदेश के श्रम एवं रोजगार विभाग में पिछले 13 वर्षों से निरंतर सेवाएं दे रहे आउटसोर्स कर्मचारियों के सामने अचानक आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। विभिन्न विभागीय कार्यालयों में तैनात 160 डाटा एंट्री ऑपरेटरों का निर्धारित सेवा काल 30 सितंबर को औपचारिक रूप से समाप्त हो रहा है। इस समयावधि के पूरा होते ही इन कर्मचारियों के भविष्य पर अनिश्चितता के काले बादल मंडराने लगे हैं, क्योंकि उनके अनुबंध के नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह अटक गई है।

## बिना लिखित पत्र के मौखिक निर्देशों पर कार्यालय आने से मनाही
हिमाचल प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी संघ की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, जिला रोजगार अधिकारियों को उच्च निदेशालय स्तर से अनौपचारिक व मौखिक निर्देश जारी किए गए हैं। इन निर्देशों के तहत अधिकारियों से कहा गया है कि वे अपने-अपने कार्यालयों में तैनात सभी आउटसोर्स डाटा एंट्री ऑपरेटरों को 1 अक्टूबर से काम पर न आने की सख्त हिदायत दे दें। हालांकि, विभाग की ओर से कर्मचारियों की छंटनी या सेवा समाप्ति को लेकर अब तक कोई आधिकारिक लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है।

श्रम एवं रोजगार आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष यदोपति चौहान ने कर्मचारियों की पीड़ा उजागर करते हुए बताया कि इन सभी कर्मचारियों ने पिछले 13 वर्षों के लंबे सफर में पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ सरकारी कामकाज संभाला है। सेवा विस्तार या नवीनीकरण न होने की स्थिति में इस तरह अचानक मौखिक फरमान सुनाए जाने से सैकड़ों परिवार संकट में पड़ गए हैं। चौहान ने सवाल उठाया कि इस स्थिति में ये कर्मचारी अपने घर-परिवार का भरण-पोषण कैसे करेंगे और बच्चों की परवरिश किस तरह हो पाएगी। मौखिक संदेशों में यहां तक कह दिया गया है कि यदि कोई कर्मचारी अपनी मर्जी से दफ्तर आता भी है, तो उसे उस अवधि का वेतन नहीं दिया जाएगा।

## स्थायी नीति के दावों के बीच कर्मचारी शोषण का आरोप
कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष ने लगातार जारी इस अनिश्चितता को कर्मचारियों का गंभीर शोषण करार दिया है। उन्होंने रेखांकित किया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सार्वजनिक मंचों से आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए एक पारदर्शी व स्थायी नीति तैयार करने और किसी भी कर्मी को सेवा से बाहर न निकालने की बातें दोहराते रहे हैं। इसके विपरीत, जमीनी हकीकत यह बन चुकी है कि नीति तैयार होना तो दूर, वर्षों से निष्ठापूर्वक कार्य कर रहे पुराने कर्मियों को बिना किसी स्पष्ट आधार के बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है।

## योजनाएं बंद होने और बजट की कमी का विभागीय हवाला
विभागीय अधिकारियों की ओर से दी जा रही दलीलों का ब्योरा देते हुए यदोपति चौहान ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों का कहना है कि इन सभी डाटा एंट्री ऑपरेटरों की मूल नियुक्ति जिन विशेष योजनाओं के संचालन के लिए की गई थी, वे योजनाएं वर्तमान में निष्प्रभावी या बंद हो चुकी हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन मदों में अब कोई अतिरिक्त बजट उपलब्ध नहीं बचा है।

अधिकारियों का यह भी कहना है कि जब तक प्रदेश सरकार कौशल विकास भत्ता योजना 2013 और बेरोजगार भत्ता योजना 2017 को पुनः प्रभावी रूप से संचालित नहीं करती, तब तक इन पदों पर सेवा विस्तार संभव नहीं हो सकेगा। वहीं, निदेशालय स्तर पर यह बात भी सामने आई है कि आउटसोर्सिंग कंपनियों के साथ अनुबंध नवीनीकरण संबंधी औपचारिक फाइल तैयार करके शासन को भेजी जा चुकी है। हालांकि, यह फाइल श्रम विभाग के प्रशासनिक सचिव के कार्यालय में पिछले कई दिनों से लंबित पड़ी है, जिसके चलते किसी भी निर्णय पर मुहर नहीं लग पाई है।

## जल शक्ति विभाग में उपजे गतिरोध की पुनरावृत्ति
उल्लेखनीय है कि सरकारी विभागों में आउटसोर्स कर्मचारियों के सामने ऐसा संकट पहली बार नहीं देखा गया है। इससे पहले जल शक्ति विभाग में तैनात आउटसोर्स कर्मियों को लेकर भी कार्यदायी कंपनी नाइलिट की ओर से 1 अक्टूबर से दफ्तर न आने का फरमान सुनाया गया था। कंपनी ने उस समय यह तर्क दिया था कि सरकार के साथ उसका वार्षिक अनुबंध नवीनीकृत नहीं हो पाया है।

हालांकि, जब यह मामला सार्वजनिक हुआ और चर्चा का विषय बना, तब राज्य सरकार ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए स्थिति संभाली थी। सरकार ने यह आश्वस्त किया था कि किसी भी कर्मचारी को कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा और संबंधित कंपनी के साथ अनुबंध का विधिवत नवीनीकरण किया जाएगा। इस संबंध में प्रदेश के जल शक्ति मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर जानकारी साझा करते हुए कर्मियों को राहत प्रदान की थी। अब श्रम विभाग के 160 ऑपरेटर भी सरकार से इसी तरह के त्वरित व निर्णायक हस्तक्षेप की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

## इसका आप पर असर
सरकारी विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मियों के लिए अनुबंध नवीनीकरण और सेवा सुरक्षा से जुड़े नियम अत्यंत संवेदनशील विषय बने हुए हैं।

- **भारत में:** देश भर के सार्वजनिक क्षेत्रों में तीसरे पक्ष के माध्यम से सेवाएं दे रहे संविदा कर्मचारियों के लिए यह मामला नीतिगत सुरक्षा की निरंतर मांग को उजागर करता है। इससे स्पष्ट होता है कि सरकारी योजनाओं की मियाद खत्म होते ही अनुबंध आधारित नौकरियों पर आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
- **हिमाचल प्रदेश में:** राज्य के श्रम एवं रोजगार कार्यालयों में 160 डाटा एंट्री ऑपरेटरों के काम रोकने से आम नागरिकों के रोजगार पंजीकरण और सेवा से जुड़े कार्य प्रभावित हो सकते हैं। प्रभावित कर्मचारियों को अब अपने वेतन और सेवा विस्तार के लिए राज्य सरकार के आधिकारिक आदेश और प्रशासनिक सचिव के निर्णय की प्रतीक्षा करनी होगी।
- **संविदा कर्मचारियों पर:** अन्य विभागों के आउटसोर्स कर्मियों में भी कार्य अवधि समाप्त होने से पहले अनुबंध की स्थिति स्पष्ट कराने को लेकर चिंता बढ़ सकती है। कर्मियों को अपने संगठनों के जरिए सरकार द्वारा घोषित स्थायी नीति पर त्वरित अमल की मांग उठानी पड़ सकती है।
- **आम जनता पर:** जिला रोजगार कार्यालयों में जाने वाले युवाओं को विभिन्न प्रमाणन, भत्ता संबंधी जानकारी या डाटा सत्यापन में देरी का सामना करना पड़ सकता है। सेवा बहाली या वैकल्पिक व्यवस्था होने तक स्थानीय कार्यालयों में दैनिक फाइलिंग प्रक्रिया की गति धीमी रह सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
हिमाचल प्रदेश के श्रम विभाग में तैनात 160 डाटा एंट्री ऑपरेटरों के सामने यह संकट योजनाओं के बंद होने, बजट अभाव और प्रशासनिक स्तर पर फाइल लंबित रहने की वजह से उत्पन्न हुआ है।

- **मूल योजनाओं की समाप्ति:** इन कर्मचारियों की भर्ती कौशल विकास भत्ता योजना 2013 तथा बेरोजगार भत्ता योजना 2017 के क्रियान्वयन के लिए की गई थी। वर्तमान में इन योजनाओं के बंद होने के कारण विभाग के पास इन कर्मियों को जारी रखने का प्रत्यक्ष आधार नहीं बचा है।
- **बजट की कमी:** संबंधित योजनाओं के निष्क्रिय होने के बाद विभाग के पास कर्मचारियों के मानदेय भुगतान के लिए आवश्यक वित्तीय बजट उपलब्ध नहीं है। बिना बजट आवंटन के स्थानीय अधिकारी इन पदों पर औपचारिक सेवा विस्तार देने में असमर्थता जता रहे हैं।
- **प्रशासनिक स्तर पर विलंब:** सेवा प्रदाता कंपनियों के साथ अनुबंध नवीनीकरण की आधिकारिक फाइल निदेशालय से शासन को भेजी जा चुकी है। यह फाइल श्रम विभाग सचिव के कार्यालय में पिछले कई दिनों से लंबित रहने के कारण औपचारिक स्वीकृति नहीं मिल सकी।
- **पूर्व उदाहरण और समाधान:** ऐसा ही गतिरोध हाल ही में जल शक्ति विभाग में नाइलिट कंपनी के अनुबंध को लेकर भी सामने आया था। उस मामले में शासन के त्वरित दखल के बाद अनुबंध का नवीनीकरण कर कर्मचारियों की सेवाएं सुरक्षित की गई थीं।

## सवाल-जवाब

### 1. हिमाचल प्रदेश श्रम विभाग में कितने कर्मचारियों की नौकरी पर संकट आया है?
विभाग के विभिन्न कार्यालयों में पिछले 13 वर्षों से कार्यरत 160 आउटसोर्स डाटा एंट्री ऑपरेटरों की सेवा अवधि 30 सितंबर को पूरी हो रही है।

### 2. कर्मचारियों को काम पर न आने के निर्देश किस रूप में दिए गए हैं?
कर्मचारी संघ के अनुसार जिला रोजगार अधिकारियों को निदेशालय से मौखिक आदेश दिए गए हैं कि कर्मियों को 1 अक्टूबर से दफ्तर न आने को कहें, जबकि कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुआ है।

### 3. विभागीय अधिकारियों ने सेवा विस्तार न होने का क्या कारण बताया है?
अधिकारियों का कहना है कि कौशल विकास भत्ता योजना 2013 और बेरोजगार भत्ता योजना 2017 बंद हो चुकी हैं और विभाग के पास बजट का अभाव है।

### 4. अनुबंध नवीनीकरण की फाइल वर्तमान में कहां लंबित है?
कर्मचारी महासंघ के अनुसार कंपनियों के साथ अनुबंध नवीनीकरण की फाइल कई दिनों से श्रम विभाग सचिव के कार्यालय में लंबित पड़ी है।

### 5. जल शक्ति विभाग में इसी तरह के मामले में सरकार ने क्या कदम उठाया था?
जल शक्ति विभाग में नाइलिट के कर्मियों को रोकने की सूचना के बाद सरकार ने दखल दिया था और मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कर्मियों को न निकालने तथा अनुबंध नवीनीकृत करने की घोषणा की थी।

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