# लाहौल-स्पीति जिला परिषद चुनाव में भाजपा समर्थित ठिनले देचेन बनीं अध्यक्ष, उपाध्यक्ष पद पर सुरेश कुमार की जीत

> हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में जिला परिषद अध्यक्ष पद पर भाजपा समर्थित ठिनले देचेन ने एक वोट से बाजी मारी, जबकि उपाध्यक्ष पद पर सुरेश कुमार निर्वाचित हुए हैं.

**Type:** article · **Category:** हिमाचल प्रदेश · **Published:** 2026-10-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/himachal-pradesh/lahaul-spiti-jila-parishada-chunava-men-bjp-samarthita-thinley-dechen-banin-adhyaksha-upadhyaksha-pada-para-suresh-kumar-ki-jita-43634 · **Language:** Hindi
**Tags:** लाहौल-स्पीति, जिला परिषद चुनाव, ठिनले देचेन, सुरेश कुमार, हिमाचल प्रदेश राजनीति, रवि ठाकुर, रामलाल मारकंडा

हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र लाहौल-स्पीति में जिला परिषद के शीर्ष पदों को लेकर बना सियासी गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है. सोमवार को आयोजित चुनावी प्रक्रिया में काजा वार्ड से चुनकर आईं भाजपा समर्थित सदस्य ठिनले देचेन ने अध्यक्ष पद की कुर्सी अपने नाम कर ली, जबकि बरपा वार्ड का प्रतिनिधित्व करने वाले सुरेश कुमार उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं. इस चुनाव के साथ ही क्षेत्र में जिला परिषद के नेतृत्व को लेकर कई दिनों से जारी अनिश्चितता खत्म हो गई है.

## कोरम के अभाव में टलने के बाद संपन्न हुआ मतदान
लाहौल-स्पीति जिला परिषद में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव लंबे इंतजार के बाद आयोजित किए जा सके. इससे पूर्व 21 सितंबर को कोरम पूरा न हो पाने की वजह से चुनाव प्रक्रिया को स्थगित करना पड़ा था. इसके बाद प्रशासन ने पांच अक्टूबर की नई तारीख तय की थी. सोमवार को हुई इस बैठक में जिला परिषद के सभी नौ निर्वाचित सदस्य उपस्थित रहे, जिससे चुनाव प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे बढ़ सकी.

## वोटों का गणित और कड़ा मुकाबला
अध्यक्ष पद के लिए हुआ मुकाबला बेहद करीबी रहा. इसमें काजा वार्ड से भाजपा समर्थित जिला परिषद सदस्य ठिनले देचेन को कुल पांच वोट मिले, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी शशि किरण चार वोट ही जुटा सकीं. इस तरह ठिनले देचेन ने महज एक वोट के मामूली अंतर से जीत दर्ज कर जिला परिषद अध्यक्ष की कमान संभाली.

इसके तुरंत बाद उपाध्यक्ष पद के लिए मतदान कराया गया. उपाध्यक्ष पद की दौड़ में बरपा वार्ड के सदस्य सुरेश कुमार ने बाजी मारी. सुरेश कुमार को छह सदस्यों का समर्थन हासिल हुआ, जबकि उनके सामने मैदान में उतरे लाहौल-स्पीति विकास मंच समर्थित उम्मीदवार रंजीत को तीन वोट मिले. सुरेश कुमार ने तीन मतों के स्पष्ट अंतर से उपाध्यक्ष पद पर विजय प्राप्त की. इसके साथ ही नौ सदस्यीय परिषद में नए नेतृत्व की औपचारिक घोषणा कर दी गई.

## भाजपा खेमे में खुशी, निष्पक्ष चुनाव पर प्रशासन की सराहना
ठिनले देचेन की इस सफलता पर भाजपा नेता एवं पूर्व विधायक रवि ठाकुर ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष समेत सभी विजयी सदस्यों को बधाई दी है. रवि ठाकुर ने कहा कि यह विजय जनता के अटूट भरोसे और पार्टी कार्यकर्ताओं की जमीनी मेहनत का प्रत्यक्ष परिणाम है. उन्होंने खास तौर पर महिलाओं द्वारा भाजपा प्रत्याशियों को मिले समर्थन का जिक्र करते हुए इसे बेहद उत्साहवर्धक बताया. इसके अलावा उन्होंने पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कराने के लिए स्थानीय प्रशासन का आभार प्रकट किया. उनका कहना था कि इस चुनावी नतीजे से कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ है और उन्होंने नए नेतृत्व के सफल कार्यकाल की कामना की.

## पूर्व मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने परिणाम पर खड़े किए सवाल
चुनावी नतीजों के सामने आने के बाद पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं लाहौल-स्पीति विकास मंच के अध्यक्ष डॉ. रामलाल मारकंडा ने पूरी प्रक्रिया और नतीजों पर गंभीर सवाल खड़े किए. डॉ. मारकंडा ने दावा किया कि इस चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच एक अनौपचारिक सहमति बनी थी. इस कथित समझौते के अनुसार अध्यक्ष पद भाजपा को और उपाध्यक्ष पद लाहौल-स्पीति विकास मंच को मिलना तय हुआ था.

डॉ. मारकंडा का आरोप है कि विकास मंच ने वादे के तहत अध्यक्ष पद के लिए भाजपा प्रत्याशी का समर्थन किया, लेकिन उपाध्यक्ष पद के मतदान में निर्दलीय प्रत्याशी की जगह सुरेश कुमार के चुने जाने से तय समीकरण पलट गए. हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक और स्थानीय हलके उनके इन दावों को चुनाव परिणाम के बाद की स्वाभाविक राजनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर देख रहे हैं.

## नए नेतृत्व के सामने स्थानीय विकास की चुनौतियां
चुनाव संपन्न होने के बाद अब नवनिर्वाचित अध्यक्ष ठिनले देचेन और उपाध्यक्ष सुरेश कुमार के कंधों पर जिले के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने का अहम जिम्मा होगा. दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों वाले लाहौल-स्पीति में सड़क संपर्क, स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर सिंचाई व्यवस्था, पर्यटन के विस्तार और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे जिला परिषद की प्राथमिकताओं में शामिल रहेंगे. क्षेत्र के लोगों को उम्मीद है कि नया नेतृत्व प्रशासनिक तालमेल के साथ विकास योजनाओं को धरातल पर तेजी से लागू करेगा.

## इसका आप पर असर
लाहौल-स्पीति जिला परिषद चुनाव के इस नतीजे से क्षेत्र की स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था को नया नेतृत्व मिला है, जिससे लंबित विकास कार्यों को गति मिलने की संभावना है.

- **भारत में:** सीमांत और जनजातीय क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन के सुदृढ़ होने से केंद्र और राज्य की ग्रामीण विकास योजनाओं की निगरानी बेहतर होती है. यह चुनाव जनजातीय इलाकों में महिला नेतृत्व की भागीदारी बढ़ाने का एक सकारात्मक संदेश देता है.
- **लाहौल-स्पीति में:** नए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के बाद सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और सिंचाई से जुड़े रुके हुए काम अब तेजी पकड़ सकेंगे. स्थानीय निवासियों को उम्मीद है कि पर्यटन और ग्रामीण बुनियादी ढांचे से जुड़े बजट के आवंटन और क्रियान्वयन में अब अनावश्यक देरी नहीं होगी.
- **प्रशासनिक स्तर पर:** कई दिनों से कोरम के अभाव और राजनीतिक अनिर्णय के कारण ठप पड़ा जिला परिषद का कामकाज अब सामान्य हो सकेगा. इससे परिषद की नियमित बैठकें शुरू हो सकेंगी और सार्वजनिक विकास योजनाओं के प्रस्ताव समय पर पारित हो सकेंगे.
- **नागरिक सेवाओं के लिए:** सर्दियों की शुरुआत से पहले दूरदराज के गांवों में जरूरी सुविधाओं की बहाली के लिए परिषद तुरंत निर्णय ले सकती है. स्थानीय लोग अब अपनी बुनियादी समस्याओं को लेकर नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों से सीधे संपर्क कर सकते हैं.

## ऐसा क्यों हुआ
लाहौल-स्पीति जिला परिषद का यह चुनाव लंबे समय से कोरम और राजनीतिक खींचतान के कारण लटका हुआ था, जिसे सुलझाने के लिए तय प्रक्रिया के तहत दोबारा बैठक बुलाई गई.

- **कोरम का अभाव:** इस चुनाव की पहली तारीख 21 सितंबर तय की गई थी, लेकिन जरूरी संख्या में सदस्यों के न जुटने के कारण कोरम पूरा नहीं हो सका और मतदान स्थगित करना पड़ा. नियमों के तहत प्रशासन ने फिर पांच अक्टूबर की तारीख मुकर्रर की ताकि प्रक्रिया पूरी की जा सके.
- **बारीक संख्या बल:** नौ सदस्यों वाली परिषद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सीटों का गणित बेहद नजदीकी था. इसी वजह से अध्यक्ष पद के लिए दोनों पक्षों ने अपनी पूरी ताकत झोंकी, जिसका परिणाम 5-4 के बेहद करीबी अंतर के रूप में सामने आया.
- **राजनीतिक तालमेल की चर्चाएं:** चुनाव के दौरान विभिन्न धड़ों के बीच अनौपचारिक समझौतों की बातें सामने आईं, जिसके तहत उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय या मंच समर्थित चेहरे को लाने की उम्मीद थी. हालांकि, मतदान के दौरान बने नए समीकरणों ने सुरेश कुमार को छह वोटों की स्पष्ट बढ़त दिला दी.

## सवाल-जवाब

### 1. लाहौल-स्पीति जिला परिषद का नया अध्यक्ष कौन चुना गया है?
काजा वार्ड से भाजपा समर्थित जिला परिषद सदस्य ठिनले देचेन नए अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुई हैं.

### 2. अध्यक्ष पद के चुनाव में ठिनले देचेन को कितने वोट मिले?
ठिनले देचेन को पांच वोट मिले, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी शशि किरण को चार वोट प्राप्त हुए.

### 3. उपाध्यक्ष पद के चुनाव में किसकी जीत हुई और कितने मतों से हुई?
बरपा वार्ड से सदस्य सुरेश कुमार छह वोट पाकर तीन वोटों के अंतर से उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए.

### 4. यह चुनाव पहले 21 सितंबर को क्यों स्थगित करना पड़ा था?
21 सितंबर को बैठक में कोरम पूरा न होने के कारण चुनाव स्थगित कर दिया गया था और नई तारीख तय की गई थी.

### 5. जिला परिषद चुनाव में कुल कितने सदस्यों ने मतदान किया?
चुनाव के दौरान जिला परिषद के सभी नौ निर्वाचित सदस्य उपस्थित रहे और मतदान किया.

### 6. पूर्व मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने चुनाव परिणाम को लेकर क्या आरोप लगाया?
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और कांग्रेस के बीच अनौपचारिक समझौता हुआ था, लेकिन उपाध्यक्ष पद पर उम्मीद के विपरीत परिणाम आया.

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._