मंडी जिले में ई-बसों ने 24 दिनों में कराई 19.31 लाख रुपये की बचत, सुक्खू सरकार की पहल से एचआरटीसी को मिला बड़ा वित्तीय लाभ मंडी और सुंदरनगर डिपो में नई इलेक्ट्रिक बसों ने पारंपरिक डीजल के मुकाबले संचालन लागत काफी घटा दी है। महज 24 दिनों के भीतर हिमाचल पथ परिवहन निगम को 19.31 लाख रुपये से अधिक की सीधी वित्तीय बचत हुई है। हिमाचल पथ परिवहन निगम के बेड़े में पर्यावरण अनुकूल वाहनों को जोड़ने की कवायद अब धरातल पर ठोस वित्तीय और पर्यावरणीय नतीजे दिखाने लगी है। मंडी जिले के सार्वजनिक परिवहन तंत्र को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शामिल की गईं 25 नई इलेक्ट्रिक बसें स्थानीय यात्रियों को शांत और सुगम सफर देने के साथ-साथ निगम के वित्तीय घाटे को पाटने में भी मददगार साबित हो रही हैं। राज्य सरकार की मंशा आने वाले पांच वर्षों के दौरान परिवहन निगम को पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाने की है, और संचालन के शुरुआती आंकड़ों से स्पष्ट है कि यह बदलाव परिवहन व्यवस्था की दिशा बदल रहा है। पारंपरिक ईंधन की तुलना में ऊर्जा खपत पर होने वाला खर्च प्रति किलोमीटर लगभग 12 से 13 रुपये तक कम हो चुका है, जिससे निगम के दैनिक संचालन व्यय में भारी राहत दर्ज की गई है। मंडी जिले में महत्वपूर्ण मार्गों पर दौड़ीं नई बसें मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने 17 अगस्त को डिजिटल माध्यम से हरी झंडी दिखाकर मंडी जिले के लिए इन 25 ई-बसों के संचालन का शुभारंभ किया था। इसके तुरंत बाद जिला प्रशासन और डिपो प्रबंधन ने इन्हें प्रमुख अंतर-जिला मार्गों के साथ-साथ ग्रामीण व उप-शहरी संपर्कों पर तैनात कर दिया। लंबी दूरी के रूटों में मंडी से शिमला, मंडी से पालमपुर, मंडी से चंडीगढ़ तथा मंडी-शिमला-तुलाह मार्ग शामिल हैं। वहीं स्थानीय और ग्रामीण संपर्कों की बात करें तो मंडी से सुंदरनगर, मंडी से बटाहर, मंडी से तांदी, मंडी से पाली, मंडी से रोपा, मंडी से रिवालसर-नैनादेवी, मंडी से कोट, मंडी से कोटली, मंडी से माहन और मंडी से दुर्गापुर जैसे रूटों पर इन बसों ने नियमित फेरे लगाने शुरू कर दिए हैं। यात्रियों ने सराहा शोरमुक्त और आरामदायक अनुभव इलेक्ट्रिक बसों के सड़कों पर उतरते ही दैनिक यात्रियों की प्रतिक्रिया बेहद सकारात्मक रही है। लंबे समय से डीजल बसों के शोर और कंपन से जूझ रहे मुसाफिरों के लिए यह सफर किसी सुखद बदलाव से कम नहीं है। मंडी के ज्वालापुर इलाके के निवासी इंद्र ठाकुर ने मंडी से शिमला तक का सफर इस बस से पूरा करने के बाद कहा, "सफर बहुत अच्छा और आरामदायक रहा। इससे पर्यावरण को नुकसान नहीं होता। राज्य सरकार का यह प्रयास सराहनीय है, इसके लिए मुख्यमंत्री और प्रदेश सरकार का आभार।" उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदूषण रहित सफर आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। दुर्गापुर रूट पर सफर करने वाली वंशिका जम्वाल ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सामान्य बसों की तुलना में इन नई गाड़ियों की बैठक व्यवस्था काफी आरामदायक है और यात्रा पूरी तरह थकावट मुक्त रहती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन जल्द ही अन्य ग्रामीण रूटों पर भी ऐसी ही गाड़ियां उतारेगा ताकि दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिकों को भी आधुनिक परिवहन का लाभ मिल सके। इसी तरह तुलाह जाने वाले जसवंत कुमार ने रेखांकित किया कि केबिन के भीतर इंजन की आवाज बिल्कुल न के बराबर है, जिससे यात्रा बेहद शांत रहती है। कोटली निवासी किरण राणा ने भी सरकार के कदम का स्वागत करते हुए कहा कि सीटों की बेहतर बनावट से बुजुर्गों और महिलाओं के लिए लंबी यात्राएं काफी सहज हो गई हैं। मंडी डिपो में दर्ज हुआ 11.34 लाख रुपये का शुद्ध लाभ वित्तीय आंकड़ों पर नजर डालें तो हरित परिवहन का यह मॉडल निगम के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हुआ है। निगम के मंडलीय प्रबंधक उत्तम सिंह के विवरण के मुताबिक, 17 अगस्त 2026 से 10 सितम्बर 2026 तक के 24 दिनों में दोनों डिपो की ई-बसों का परिचालन प्रदर्शन बेहतरीन रहा है। मंडी डिपो को आवंटित 15 बसों ने इस दौरान कुल 60,060 किलोमीटर का फासला तय किया। इस दूरी को पूरा करने के लिए बिजली चार्जिंग पर कुल 7,95,795 रुपये का खर्च आया। यदि इन्हीं रूटों पर निगम की पुरानी डीजल बसें चलाई जातीं, तो ईंधन पर 19,30,055 रुपये खर्च होते। इस तरह मंडी यूनिट ने ईंधन के मद में सीधे 11,34,260 रुपये की शुद्ध बचत दर्ज की है। सुंदरनगर इकाई में भी राजस्व को मिला सहारा यही उत्साहजनक रुझान सुंदरनगर डिपो में भी देखने को मिला, जहां 10 इलेक्ट्रिक बसों को विभिन्न रूटों पर उतारा गया था। इन 10 बसों ने 24 दिनों की समान अवधि में कुल 35,044 किलोमीटर का सफर तय किया। इस संचालन के दौरान बिजली बिल और चार्जिंग का कुल व्यय मात्र 2,10,037 रुपये रहा, जबकि डीजल इंजन से इतनी दूरी तय करने पर 10,07,732 रुपये का तेल जल जाता। नतीजतन, सुंदरनगर डिपो को भी 7,97,695 रुपये का भारी मुनाफा हासिल हुआ। दोनों इकाइयों के आंकड़ों को मिला दिया जाए तो निगम ने इस छोटी सी अवधि में कुल 19,31,955 रुपये की ऐतिहासिक बचत की है। चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार और हरित परिवहन का लक्ष्य इलेक्ट्रिक बेड़े के निर्बाध संचालन के लिए आधारभूत ढांचे को भी तेजी से तैयार किया जा रहा है। मंडी बस स्टैंड, मंडी वर्कशॉप तथा सुंदरनगर बस स्टैंड पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं, जहां निर्धारित शेड्यूल के अनुसार गाड़ियों को चार्ज किया जाता है। इसके अतिरिक्त जंजैहली में भी एक नया चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना प्रस्तावित है, जिसके पूरा होने पर पहाड़ी और ऊंचाई वाले इलाकों में भी ई-बसों का विस्तार आसान हो जाएगा। जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके कार्बन उत्सर्जन घटाने का यह मॉडल हिमाचल प्रदेश को एक स्वच्छ और हरित राज्य बनाने के व्यापक संकल्प का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। इसका आप पर असर मंडी जिले में इलेक्ट्रिक बसों के सफल संचालन से दैनिक यात्रियों और निगम की वित्तीय सेहत दोनों पर सकारात्मक असर पड़ना शुरू हो गया है। • हिमाचल प्रदेश में: परिवहन निगम के वित्तीय घाटे में कमी आने से भविष्य में अन्य जिलों में भी ई-बसों का तेजी से विस्तार होगा। इससे राज्य के संवेदनशील पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने और हरित परिवहन ढांचा तैयार करने में मदद मिलेगी। • मंडी जिले में: स्थानीय नागरिकों को शिमला, चंडीगढ़ और पालमपुर जैसे लंबे मार्गों पर आधुनिक, शांत और सुरक्षित यात्रा की सुविधा मिल रही है। 25 बसों के संचालन से दैनिक आवागमन में सहूलियत बढ़ी है और आने वाले समय में जंजैहली सहित अन्य ग्रामीण इलाकों में भी यह नेटवर्क पहुंचेगा। • किराये और स्थिरता पर असर: डीजल के मुकाबले बिजली की प्रति किलोमीटर ऊर्जा लागत 12 से 13 रुपये कम होने से निगम पर किराये बढ़ाने का दबाव नहीं बनेगा। इससे यात्रियों के लिए बस किराये में लंबे समय तक स्थिरता बने रहने की उम्मीद है। • पर्यावरण और स्वास्थ्य लाभ: कार्बन उत्सर्जन और इंजन के शोर में भारी गिरावट आने से शहरी और पहाड़ी सड़कों पर प्रदूषण स्तर कम होगा। दैनिक यात्रियों को सिरदर्द और यात्रा की थकान से मुक्ति मिल रही है। ऐसा क्यों हुआ हिमाचल पथ परिवहन निगम द्वारा इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से इतनी बड़ी वित्तीय बचत और परिचालन दक्षता संभव हो सकी है। • कम ऊर्जा खपत और परिचालन लागत: पारंपरिक डीजल इंजनों की तुलना में इलेक्ट्रिक मोटर की ऊर्जा दक्षता काफी अधिक होती है। 17 अगस्त से 10 सितम्बर के बीच मंडी और सुंदरनगर में 95,104 किलोमीटर चलने पर चार्जिंग खर्च केवल 10,05,832 रुपये आया, जबकि डीजल पर 29,37,787 रुपये खर्च होते। • रणनीतिक रूट आवंटन और चार्जिंग नेटवर्क: 25 बसों को लंबे अंतर-जिला रूटों और व्यस्त स्थानीय संपर्कों पर सुनियोजित तरीके से तैनात किया गया। मंडी बस स्टैंड, मंडी वर्कशॉप और सुंदरनगर में चार्जिंग स्टेशन पहले से तैयार होने के कारण बसों को बिना किसी रुकावट के लगातार चलाया जा सका। • राज्य सरकार का आत्मनिर्भरता लक्ष्य: सुक्खू सरकार ने परिवहन निगम को अगले पांच वर्षों में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने का नीतिगत संकल्प लिया है। इस योजना के तहत बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहनों का अनुपात बढ़ाकर घाटे को नियंत्रित करने की ठोस शुरुआत की गई है। सवाल-जवाब 1. मंडी जिले में कुल कितनी इलेक्ट्रिक बसें शामिल की गई हैं? मंडी जिले के लिए 25 नई इलेक्ट्रिक बसें बेड़े में शामिल की गई हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री ने 17 अगस्त को हरी झंडी दिखाई थी। 2. 24 दिनों के संचालन में परिवहन निगम को कुल कितनी बचत हुई? 17 अगस्त 2026 से 10 सितम्बर 2026 तक के 24 दिनों में मंडी और सुंदरनगर डिपो को मिलाकर कुल 19,31,955 रुपये की बचत हुई है। 3. डीजल के मुकाबले इलेक्ट्रिक बस से प्रति किलोमीटर कितनी बचत हो रही है? पारंपरिक डीजल बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसों से ऊर्जा लागत में लगभग 12 से 13 रुपये प्रति किलोमीटर तक की बचत दर्ज की गई है। 4. मंडी और सुंदरनगर डिपो में अलग-अलग कितना मुनाफा दर्ज हुआ? मंडी डिपो में 15 बसों ने 11,34,260 रुपये तथा सुंदरनगर डिपो में 10 बसों ने 7,97,695 रुपये की शुद्ध वित्तीय बचत हासिल की। 5. वर्तमान में चार्जिंग स्टेशन कहां-कहां स्थापित किए गए हैं और अगला कहां प्रस्तावित है? मंडी बस स्टैंड, मंडी वर्कशॉप और सुंदरनगर बस स्टैंड में चार्जिंग स्टेशन काम कर रहे हैं, जबकि अगला स्टेशन जंजैहली में प्रस्तावित है। 6. ये इलेक्ट्रिक बसें किन प्रमुख लंबी दूरी के मार्गों पर चलाई जा रही हैं? ये बसें मंडी से शिमला, मंडी से पालमपुर, मंडी से चंडीगढ़ और मंडी-शिमला-तुलाह जैसे प्रमुख लंबी दूरी के मार्गों पर संचालित हो रही हैं। https://trendkia.com/himachal-pradesh/mandi-jile-men-i-bason-ne-24-dinon-men-karai-19-31-lakha-rupaye-ki-bachata-sukhu-sarakara-ki-pahala-se-hrtc-ko-mila-bara-vittiya-l-35695 TrendKia — Har trend, sabse pehle.