# मंडी के नौ मील पर 125 करोड़ रुपये का वायाडक्ट पुल अब दोहरे पिलर पर तैयार होगा, एनएचएआई मुख्यालय ने डिजाइन बदला

> कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर लगातार भूस्खलन झेल रहे नौ मील क्षेत्र में प्रस्तावित 350 मीटर लंबे वायाडक्ट ब्रिज का ढांचा अब सिंगल पिलर की जगह डबल पिलर पर बनेगा, जबकि मौजूदा मार्ग को 35 करोड़ रुपये की लागत से सुरक्षा दीवार बनाकर सुरक्षित रखा जा रहा है.

**Type:** article · **Category:** हिमाचल प्रदेश · **Published:** 2026-10-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/himachal-pradesh/mandi-ke-nau-mila-para-125-karora-rupaye-ka-vayadakta-pula-aba-dohare-pilara-para-taiyara-hoga-nhai-mukhyalaya-ne-dijaina-badala-43257 · **Language:** Hindi
**Tags:** मंडी फोरलेन, कीरतपुर मनाली हाईवे, एनएचएआई, वायाडक्ट ब्रिज, नौ मील मंडी, हिमाचल प्रदेश सड़क

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में कीरतपुर-मनाली फोरलेन परियोजना के अत्यंत संवेदनशील नौ मील हिस्से में बनने वाले वायाडक्ट पुल की तकनीकी रूपरेखा में बड़ा बदलाव तय हुआ है. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के क्षेत्रीय कार्यालय ने पहले इस स्थान के लिए सिंगल पिलर संरचना का खाका तैयार करके मंजूरी के लिए भेजा था. दिल्ली स्थित एनएचएआई मुख्यालय ने सुरक्षा और भौगोलिक चुनौतियों की विस्तृत समीक्षा के बाद उस एकल पिलर प्रारूप पर तकनीकी आपत्ति दर्ज कराई है, और पूरे ढांचे को डबल पिलर यानी दोहरे खंभों पर टिकाने का स्पष्ट निर्देश दिया है.

## लगातार भूस्खलन की चुनौती और नए डिजाइन की जरूरत
नौ मील क्षेत्र की पहाड़ी लंबे अर्से से गंभीर भूस्खलन प्रवण क्षेत्र बनी हुई है. वर्ष 2023 और 2025 के मानसून सीजन के दौरान इस पहाड़ी से भारी मात्रा में पत्थर और मलबा मुख्य सड़क पर आ गिरा था, जिसके चलते यातायात बार-बार ठप हुआ और यात्रियों को भारी संकट का सामना करना पड़ा. इसी लगातार बने खतरे को जड़ से खत्म करने के मकसद से करीब 350 मीटर लंबे वायाडक्ट पुल के निर्माण की विस्तृत योजना आगे बढ़ाई जा रही है.

प्रोजेक्ट डायरेक्टर वरुण चारी के अनुसार, आरंभिक चरण में 125 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के साथ सिंगल पिलर ब्रिज का तकनीकी डिजाइन तैयार हुआ था. मुख्यालय स्तर पर जांच-पड़ताल के बाद जब इसमें फेरबदल के निर्देश मिले, तो डीपीआर तैयार करने वाली टीम ने अब दो पिलरों की नींव पर आधारित संशोधित डिजाइन पर काम शुरू कर दिया है. जैसे ही यह नया तकनीकी खाका तैयार हो जाएगा, संशोधित प्रस्ताव को अंतिम अनुमोदन के लिए दोबारा दिल्ली मुख्यालय प्रेषित किया जाएगा.

## पहाड़ी इलाकों में क्या भूमिका निभाता है वायाडक्ट ब्रिज
तकनीकी दृष्टि से वायाडक्ट ब्रिज सड़क का एक ऐसा ऊंचा पुलनुमा गलियारा होता है, जिसे सीधी जमीन पर बिछाने के बजाय मजबूत पिलरों के सहारे हवा में खड़ा किया जाता है. दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में इस तरह की इंजीनियरिंग संरचना का इस्तेमाल मुख्य रूप से तीव्र ढलानों, बार-बार दरकती पहाड़ियों और भूस्खलन की मार झेलने वाले जटिल भूभागों के ऊपर से सुरक्षित रास्ता निकालने के लिए किया जाता है, ताकि नीचे की मिट्टी या पत्थरों के खिसकने से ऊपर का संपर्क मार्ग प्रभावित न हो.

## मौजूदा सड़क को बचाने के लिए 35 करोड़ रुपये की सुरक्षा दीवार
जब तक 350 मीटर लंबा यह मुख्य वायाडक्ट ब्रिज बनकर तैयार नहीं हो जाता, तब तक नौ मील वाले मौजूदा मार्ग से वाहनों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी रहे, इसके लिए एनएचएआई समानांतर सुरक्षा कार्य भी कर रहा है. वर्तमान सड़क की बुनियाद को मजबूत रखने और ऊपर से आने वाले मलबे को रोकने के लिए नीचे से ऊपर तक एक मजबूत सुरक्षा दीवार खड़ी की जा रही है. सुरक्षा दीवार के निर्माण का यह ठेका लगभग 35 करोड़ रुपये की लागत से एक कार्यदायी कंपनी को सौंपा जा चुका है और जमीनी स्तर पर इसका निर्माण कार्य भी आरंभ हो चुका है.

इसके अलावा कीरतपुर-मनाली फोरलेन मार्ग पर यात्रियों की सहूलियत के लिए थलौट क्षेत्र में भी बुनियादी ढांचे का बड़ा विस्तार प्रस्तावित है, जहां 200 करोड़ रुपये के बजट से 500 मीटर लंबी पहली बॉक्स टनल का निर्माण किया जाना है.

## इसका आप पर असर
मंडी के नौ मील पर डबल पिलर वायाडक्ट और 35 करोड़ रुपये की सुरक्षा दीवार बनने से मनाली व कुल्लू आने-जाने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को मानसून में बार-बार लगने वाले लंबे जाम और मलबे के खतरे से स्थायी राहत मिलेगी.

- **हिमाचल प्रदेश में:** नौ मील पर बनने वाली 35 करोड़ रुपये की सुरक्षा दीवार से मौजूदा सड़क पर भूस्खलन का असर घटेगा और दैनिक आवागमन सुचारू रहेगा. 350 मीटर लंबे वायाडक्ट ब्रिज के निर्माण से चंडीगढ़-मनाली रूट पर सफर करने वाले सेब उत्पादकों और मालवाहकों का कीमती समय बचेगा.
- **पर्यटकों और मुसाफिरों के लिए:** 125 करोड़ रुपये के इस पुल और थलौट की 500 मीटर बॉक्स टनल के पूरा होने के बाद कुल्लू-मनाली की यात्रा काफी सुरक्षित हो जाएगी. पर्यटकों को बरसात के दिनों में अचानक मार्ग बंद होने की चिंता से मुक्ति मिलेगी.
- **सड़क सुरक्षा और इंजीनियरिंग:** डबल पिलर डिजाइन लागू होने से पुल की मजबूती बढ़ेगी और तीव्र ढलानों पर भारी वाहनों का दबाव सुरक्षित रूप से संभलेगा. इससे भूस्खलन जोन में भविष्य में होने वाले हादसों की आशंका न्यूनतम हो जाएगी.
- **स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए:** सुगम और निर्बाध फोरलेन संपर्क से मंडी और कुल्लू घाटी में पर्यटन उद्योग को गति मिलेगी. मार्ग सुधरने से स्थानीय व्यापार और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी.

## ऐसा क्यों हुआ
एनएचएआई मुख्यालय ने 9 मील पर सिंगल पिलर की जगह डबल पिलर डिजाइन का निर्देश इसलिए दिया क्योंकि यह क्षेत्र अत्यधिक भूस्खलन-प्रवण है और एकल पिलर पर भविष्य में खतरे की आशंका थी.

- **गंभीर भूस्खलन का इतिहास:** वर्ष 2023 और 2025 के मानसून में 9 मील की पहाड़ी से भारी मलबा और बोल्डर गिरे थे, जिससे सड़क कई दिनों तक अवरुद्ध रही. इस भीषण विस्थापन को देखते हुए जमीन पर सड़क बनाने के बजाय 350 मीटर ऊंचा वायाडक्ट ब्रिज चुनना पड़ा.
- **तकनीकी समीक्षा और मजबूती की आवश्यकता:** 125 करोड़ रुपये के सिंगल पिलर डिजाइन की दिल्ली मुख्यालय में समीक्षा के दौरान पाया गया कि दोहरे पिलर का ढांचा पहाड़ी ढलानों पर अधिक स्थिरता देगा. इसी तकनीकी आपत्ति के चलते डीपीआर टीम को दोबारा दो खंभों के आधार पर नक्शा तैयार करने को कहा गया.
- **अंतरिम यातायात प्रबंधन:** नया पुल बनने तक चालू फोरलेन पर वाहनों की सुरक्षित आवाजाही बनाए रखना अनिवार्य था. इसी कारण स्थल पर 35 करोड़ रुपये की लागत से नीचे से ऊपर तक सुरक्षा दीवार बनाने का काम तुरंत शुरू किया गया.

## सवाल-जवाब

### 1. मंडी के नौ मील पर वायाडक्ट ब्रिज का डिजाइन क्यों बदला जा रहा है?
एनएचएआई मुख्यालय ने सिंगल पिलर डिजाइन पर तकनीकी आपत्ति जताते हुए बेहतर मजबूती और सुरक्षा के लिए इसे डबल पिलर पर बनाने के निर्देश दिए हैं.

### 2. प्रस्तावित 350 मीटर लंबे वायाडक्ट ब्रिज की अनुमानित लागत कितनी है?
इस 350 मीटर लंबे वायाडक्ट ब्रिज के निर्माण पर करीब 125 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आएगी.

### 3. पुल निर्माण के दौरान वर्तमान सड़क पर यातायात कैसे सुरक्षित रहेगा?
यातायात को सुरक्षित बनाए रखने के लिए करीब 35 करोड़ रुपये की लागत से पहाड़ी पर नीचे से ऊपर तक सुरक्षा दीवार बनाई जा रही है.

### 4. नौ मील क्षेत्र में वायाडक्ट ब्रिज बनाने की मुख्य वजह क्या है?
यह इलाका भारी भूस्खलन प्रभावित है, जहां 2023 और 2025 की बरसात में पहाड़ी से भारी पत्थर और मलबा गिरने के कारण भारी परेशानी हुई थी.

### 5. थलौट में प्रस्तावित बॉक्स टनल की लागत और लंबाई कितनी है?
थलौट में 200 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से हिमाचल प्रदेश की पहली 500 मीटर लंबी बॉक्स टनल बनाई जाएगी.

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