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  "title": "मंदिरों के धन से सामाजिक कार्य कराने पर लगी रोक हटाएगी हिमाचल सरकार, हाईकोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर करने की योजना",
  "summary": "हिमाचल प्रदेश सरकार शक्तिपीठों और प्रसिद्ध मंदिरों के कोष से शिक्षा तथा समाज कल्याण के कार्यों पर वित्तीय सहायता की अनुमति मांगने के लिए हाईकोर्ट में समीक्षा याचिका दायर करेगी। विधानसभा में चिंतपूर्णी के विधायक सुदर्शन सिंह बबलू द्वारा उठाए गए सवाल पर उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने यह घोषणा की।",
  "content": "हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को धार्मिक स्थलों की आय के सार्वजनिक उपयोग पर एक अहम चर्चा हुई। चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक सुदर्शन सिंह बबलू ने शून्यकाल के दौरान प्रसिद्ध चिंतपूर्णी मंदिर की संपत्ति और कोष का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि मंदिर के चढ़ावे और बजटीय व्यवस्था का लाभ स्थानीय निवासियों, जनकल्याणकारी योजनाओं तथा शिक्षा क्षेत्र को दिलाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।\n\nविधायक ने विधानसभा में उठाया मंदिर कोष का मुद्दा\nसदन में अपनी बात रखते हुए विधायक सुदर्शन सिंह बबलू ने कहा कि चिंतपूर्णी मंदिर परिसर में पूरे वर्ष बड़े मेलों और विशेष आयोजनों का आयोजन होता रहता है। इन आयोजनों के दौरान स्वच्छता बनाए रखने, सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर प्रशासन की ओर से भारी धनराशि खर्च की जाती है। उन्होंने तर्क दिया कि जब मंदिर प्रबंधन परिसर के रखरखाव पर इतना अधिक बजट लगाता है, तो स्थानीय स्तर पर सामाजिक कार्यों और शैक्षणिक विकास के लिए भी आर्थिक मदद दी जानी चाहिए। विधायक ने मांग की कि हिंदू समाज के हित में चलाए जा रहे लोक कल्याणकारी कार्यों के लिए मंदिर कोष से वित्तीय सहायता की अनुमति दोबारा दिलाने हेतु सरकार को हाईकोर्ट में प्रभावी पैरवी करनी चाहिए।\n\nप्रशासनिक गाड़ियों की खरीद के बाद हाईकोर्ट ने लगाई थी रोक\nहिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में स्थित प्रसिद्ध चिंतपूर्णी शक्तिपीठ के धन से जुड़े इस विवाद की जड़ें कुछ समय पुरानी घटनाओं से जुड़ी हैं। जिला प्रशासन ने मंदिर ट्रस्ट के फंड से प्रशासनिक उपयोग के लिए नए वाहन खरीद लिए थे। यह मामला जब हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के समक्ष पहुंचा, तो अदालत ने कड़ी आपत्ति जताते हुए मंदिर के पैसों से गाड़ियां खरीदने या गैर-संबंधित कार्यों पर खर्च करने पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कर दिया था कि मंदिरों का धन केवल मंदिर के सीधे प्रबंधन, रखरखाव, सौंदर्यीकरण और परिसर के भीतर ही खर्च किया जा सकता है। इस आदेश के बाद सामाजिक और शैक्षणिक मदद पर भी विराम लग गया था।\n\nकानूनी पहलुओं का अध्ययन कर अदालत में समीक्षा याचिका की तैयारी\nविधायक के सवाल का जवाब देते हुए उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में लगभग 36 प्रमुख शक्तिपीठ और प्रसिद्ध मंदिर राज्य सरकार के नियंत्रण में हैं। उप मुख्यमंत्री ने माना कि अतीत में जिला प्रशासन द्वारा मंदिर के पैसों से अधिकारियों के लिए वाहन खरीदने जैसी गतिविधियां गलत थीं और अदालत का रोक लगाना जायज था। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि जनहित के सामाजिक और शैक्षणिक कार्यों पर लगी रोक को हटाना आवश्यक है। सरकार सभी विधिक पहलुओं का बारीकी से अध्ययन कर रही है और यदि जरूरी हुआ तो हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर कर राहत की मांग की जाएगी।\n\nइसका आप पर असर\nहिमाचल प्रदेश सरकार के इस कानूनी कदम से राज्य के धार्मिक ट्रस्टों के धन के उपयोग पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा।\n\n• हिमाचल प्रदेश में: यदि हाईकोर्ट से अनुमति मिलती है, तो ऊना और अन्य जिलों के स्थानीय स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों को मंदिर ट्रस्टों से वित्तीय अनुदान मिलना फिर शुरू हो सकेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा और सामाजिक कल्याण योजनाएं मजबूत होंगी।\n• भारत में: यह मामला पूरे देश में राज्य नियंत्रण वाले मंदिरों के फंड के इस्तेमाल पर कानूनी मिसाल कायम कर सकता है। इससे धार्मिक दान और सरकारी प्रशासन के बीच संतुलन तय करने में स्पष्टता आएगी।\n• श्रद्धालुओं के लिए: मंदिरों में आने वाले भक्तों के चढ़ावे का पारदर्शी उपयोग तय होगा ताकि उनका पैसा निजी या प्रशासनिक गाड़ियों पर खर्च न होकर जनसेवा में लगे। इससे श्रद्धालुओं का भरोसा बढ़ेगा।\n• स्थानीय छात्रों के लिए: गरीब और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को मंदिर निधियों से मिलने वाली छात्रवृत्तियां दोबारा चालू होने का रास्ता साफ होगा। इससे शिक्षा के क्षेत्र में आर्थिक बाधाएं कम होंगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. हिमाचल प्रदेश सरकार किस मामले में हाईकोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर करेगी?\nसरकार मंदिरों के धन का उपयोग सामाजिक कल्याण और शिक्षा कार्यों के लिए करने की अनुमति मांगने हेतु समीक्षा याचिका दायर करेगी।\n\n2. हाईकोर्ट ने मंदिरों के पैसों के खर्च पर रोक क्यों लगाई थी?\nऊना जिला प्रशासन द्वारा मंदिर के पैसों से गाड़ियां खरीदने के बाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि चढ़ावे की रकम केवल मंदिर परिसर और उसके सीधे प्रबंधन पर ही खर्च हो सकती है।\n\n3. सदन में चिंतपूर्णी मंदिर का मुद्दा किसने उठाया?\nचिंतपूर्णी से कांग्रेस विधायक सुदर्शन सिंह बबलू ने विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान शून्यकाल में यह मामला उठाया।\n\n4. हिमाचल प्रदेश में सरकार के अधीन कितने बड़े शक्तिपीठ और मंदिर हैं?\nउप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के अनुसार राज्य में लगभग तीन दर्जन (36) प्रमुख शक्तिपीठ और मंदिर सरकार के नियंत्रण में हैं।",
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  "publishedAt": "2026-09-01",
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