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  "title": "हिमाचल प्रदेश में मॉनसून का कहर: 196 लोगों की मौत और 944 करोड़ का नुकसान, भरमौर में फ्लैश फ्लड से बहा पुल",
  "summary": "हिमाचल प्रदेश में मॉनसून की मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है, जिससे अब तक 196 लोगों की जान जा चुकी है और 944 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति का नुकसान हुआ है। मौसम विभाग ने 21 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रहने का अलर्ट जारी किया है।",
  "content": "पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में मॉनसून की बेरुखी और कुदरत के प्रकोप से हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। राज्यभर में जारी मूसलाधार बारिश, भूस्खलन और भीषण सड़क हादसों के कारण मरने वालों का कुल आंकड़ा 196 तक पहुंच गया है। इन दुखद हादसों में से 80 लोगों की जान विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में आने से गई है, जबकि 116 लोगों की मौत सड़क पर हुए सड़क हादसों के कारण हुई है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की सोमवार शाम 6 बजे तक सामने आई आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे संकट के दौरान अब तक कुल 299 लोग घायल हुए हैं, जबकि एक व्यक्ति अभी भी लापता है जिसकी तलाश जारी है। शिमला में मंगलवार की सुबह से ही बारिश का सिलसिला बना हुआ है।\n\nमनाली और धर्मशाला में सबसे ज्यादा बारिश\nशिमला स्थित मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा मंगलवार की सुबह 10 बजे जारी किए गए ताजा बुलेटिन में पिछले 12 घंटों के दौरान हुई वर्षा का ब्योरा दिया गया है। इसके मुताबिक, मनाली के कोठी इलाके में सबसे अधिक 71 एमएम बरसात दर्ज की गई है। इसके अलावा धर्मशाला में 52.2 एमएम, कसौली में 52.0 एमएम, काहू में 47.4 एमएम, नाहन में 46.4 एमएम और चंबा के जोत क्षेत्र में 42.4 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।\n\nभरमौर में फ्लैश फ्लड और श्रद्धालुओं का रेस्क्यू\nबीते सोमवार को चंबा जिले के भरमौर अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बलोठ के गांव 84 चला में भारी बारिश के बाद अचानक तेज सैलाब यानी फ्लैश फ्लड आ गया। इस सैलाब के वेग ने वहां श्रद्धालुओं के आने-जाने के लिए बनाया गया लोहे का एक पुल पूरी तरह बहा दिया और पैदल रास्ता भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस आपदा के कारण मां भगवती खुन्डी वाली के दर्शन करने जा रहे लगभग 40 से 50 श्रद्धालु रास्ते में ही फंस गए। घटना की जानकारी मिलते ही पूर्व प्रधान पवन शर्मा ने स्थानीय नागरिकों के साथ तुरंत मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। स्थानीय लोगों ने आपसी सहयोग से एक अस्थायी लकड़ी की पुलिया तैयार की और सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित तरीके से नदी के पार पहुंचाया। राहत की बात यह रही कि इस भयानक हादसे में किसी भी तरह के जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। वर्तमान में इन दिनों श्रद्धालु लगभग 35 से 40 किलोमीटर का लंबा पैदल सफर तय करके माता के मंदिर पहुंच रहे हैं, लेकिन मार्ग बाधित होने के कारण उनकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन के सामने मांग रखी है कि इस टूटे हुए पुल और रास्ते को जल्द से जल्द दोबारा बहाल किया जाए।\n\nअरबों का नुकसान और ठप पड़ी व्यवस्थाएं\nराजस्व विभाग की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, भारी बारिश, भूस्खलन और अन्य तमाम प्राकृतिक आपदाओं की वजह से प्रदेश को अब तक कुल 944 करोड़ रुपए से अधिक की चपत लग चुकी है। इस भारी भरकम नुकसान में अकेले लोक निर्माण विभाग को 744 करोड़ रुपये से ज्यादा का घाटा उठाना पड़ा है, जबकि जल शक्ति विभाग को 227 करोड़ रुपये से अधिक की क्षति हुई है। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण राज्यभर में यातायात व्यवस्था बुरी तरह लड़खड़ा गई है। प्रदेश में इस समय कुल 87 सड़कें यातायात के लिए पूरी तरह बंद पड़ी हुई हैं। इनमें सबसे ज्यादा बुरी स्थिति कुल्लू जिले की है जहां 33 सड़कें और मंडी जिले की है जहां 27 सड़कें बंद हैं। इसके अलावा पूरे राज्य में 4 ट्रांसफार्मर और 8 जलापूर्ति परियोजनाएं भी गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं।\n\nमकानों और पशुधन को भारी क्षति\nआपदा और बरसात के इस दौर ने रिहायशी संपत्तियों को भी तहस-नहस कर दिया है। रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, 32 पक्के और 53 कच्चे मकान पूरी तरह से जमींदोज हो चुके हैं। इसके साथ ही, 116 पक्के और 196 कच्चे मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है, जबकि पूरे प्रदेश में 14 दुकानें भी ढह गई हैं। मॉनसून की इस भयंकर मार का असर मूक पशुओं पर भी पड़ा है। आपदा के कारण अब तक कुल 425 पशु-पक्षियों की मौत हो चुकी है, जबकि 270 पशुशालाएं पूरी तरह धराशायी हो गई हैं।\n\n21 अगस्त तक बारिश का अनुमान\nइस बीच, मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने चेतावनी दी है कि हिमाचल प्रदेश में 21 अगस्त तक बारिश का यह दौर लगातार जारी रहेगा। आगामी 18 से 22 अगस्त के दौरान राज्य के अनेक हिस्सों में हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश होने की संभावना जताई गई है, जबकि कुछ खास इलाकों में भारी बारिश भी हो सकती है। विभाग ने 18 अगस्त को कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने का रेड या ऑरेंज जैसा गंभीर अलर्ट और 19 अगस्त को भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके बाद के दिनों यानी 20 और 21 अगस्त को भी अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने की पूरी संभावना है, जबकि 23 अगस्त को कुछेक जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जा सकती है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 18 अगस्त को बिलासपुर, कांगड़ा, मंडी और सिरमौर जिलों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है, जबकि ऊना, हमीरपुर, चंबा, कुल्लू, शिमला और सोलन में भी बारिश का अलर्ट है। इसके अलावा 19 अगस्त को बिलासपुर, कांगड़ा, चंबा, मंडी, शिमला और सिरमौर समेत कई अन्य जिलों में भी भारी बरसात का अनुमान है।\n\nतेज हवाएं और संभावित खतरे\nआगामी 21 अगस्त तक प्रदेश के निचले और मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में कई जगहों पर गरज और चमक के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका है। इसके अलावा किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों में भी इस समयावधि के दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज गति से हवाएं चल सकती हैं। भारी बारिश के इस दौर के बीच मौसम विभाग ने भूस्खलन होने, मलबा गिरने और अचानक बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड आने का गंभीर खतरा जताया है। लगातार हो रही बारिश की वजह से तमाम नदी-नालों और अन्य जलस्रोतों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है, सड़कों पर फिसलन बढ़ सकती है और कम दृश्यता के चलते यातायात भी खासी बाधाओं का सामना कर सकता है। इसके अलावा कृषि और बागवानी क्षेत्रों को भी स्थानीय स्तर पर काफी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।\n\nयात्रियों और चालकों के लिए सलाह\nइसे देखते हुए मौसम विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे भूस्खलन और फ्लैश फ्लड की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में जाने से पूरी तरह बचें और नदी-नालों के आसपास के इलाकों से सुरक्षित दूरी बनाकर रखें। वाहन चालकों को विशेष रूप से हिदायत दी गई है कि वे मौसम और सड़क की मौजूदा स्थिति का जायजा लेते हुए अत्यंत सावधानी से वाहन चलाएं और प्रशासन द्वारा जारी की गई ट्रैफिक एडवाइजरी का पूरी तरह पालन करें।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: पहाड़ी क्षेत्रों में आने वाले पर्यटकों और यात्रियों को भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है।\n• हिमाचल प्रदेश में: स्थानीय नागरिकों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भूस्खलन तथा फ्लैश फ्लड संभावित नदी-नालों के करीब जाने से बचने और प्रशासन की ट्रेफिक एडवाइजरी का पालन करने की सख्त जरूरत है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. हिमाचल प्रदेश में मॉनसून की तबाही से अब तक कुल कितने लोगों की मौत हुई है?\nहिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं और सड़क हादसों के कारण अब तक कुल 196 लोगों की मौत हो चुकी है।\n\n2. प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं से अब तक कुल कितने करोड़ का नुकसान हुआ है?\nराजस्व विभाग के अनुसार, भारी बारिश और भूस्खलन के कारण प्रदेश को अब तक 944 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हो चुका है।\n\n3. भरमौर में फ्लैश फ्लड की घटना के बाद स्थानीय लोगों ने क्या कदम उठाया?\nस्थानीय लोगों ने सूझबूझ दिखाते हुए लकड़ी की अस्थायी पुलिया बनाई और रास्ते में फंसे 40 से 50 श्रद्धालुओं को सुरक्षित दूसरी तरफ पहुंचाया।\n\n4. मौसम विभाग के अनुसार हिमाचल में बारिश का दौर कब तक जारी रहने की संभावना है?\nमौसम विज्ञान केंद्र शिमला के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में 21 अगस्त तक बारिश का दौर लगातार जारी रहने का अनुमान है।\n\n5. वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में कुल कितनी सड़कें यातायात के लिए बंद हैं?\nभारी बारिश और भूस्खलन के चलते राज्यभर में अभी कुल 87 सड़कें यातायात के लिए बंद पड़ी हुई हैं।",
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  "category": "हिमाचल प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-08-18",
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