# मुद्रा योजना से चमकी ऊना की पूनम की किस्मत, मनाली में संभाल रहीं पांच दुकानें

> हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले की रहने वाली पूनम शर्मा ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की मदद से मनाली में पांच दुकानें खड़ी कर ली हैं। उनकी सालाना कमाई अब दो लाख रुपये से बढ़कर पंद्रह लाख रुपये तक पहुंच गई है।

**Type:** article · **Category:** हिमाचल प्रदेश · **Published:** 2026-09-18 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/himachal-pradesh/mudra-yojana-se-chamaki-una-ki-poonam-ki-kismata-manali-men-snbhala-rahin-pancha-dukanen-33166 · **Language:** Hindi
**Tags:** मुद्रा योजना, मनाली, ऊना, पूनम शर्मा, महिला उद्यमी, व्यापार, हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले की रहने वाली एक साधारण महिला ने अपनी मेहनत और सरकारी मदद के दम पर कारोबार की दुनिया में एक अलग मुकाम हासिल किया है। मनाली में आज वह पांच अलग-अलग दुकानों का संचालन कर रही हैं और उनकी वार्षिक आय में जबरदस्त इजाफा हुआ है। इस सफलता के पीछे एक संघर्षपूर्ण यात्रा है, जिसमें सरकारी ऋण योजना ने एक बड़ा मोड़ साबित किया है।

 

## शुरुआती संघर्ष और शुरुआती दौर

मनाली आने से पहले उनके पति स्थानीय स्तर पर एक सब्जी की दुकान पर नौकरी किया करते थे। जब वह साल 2012 में मनाली पहुंचीं, तो उन्होंने अपने पति को दूसरों के यहां मजदूरी करने के बजाय खुद का स्वतंत्र काम शुरू करने की सलाह दी। इसके बाद उन्होंने मनाली के अलेयु में एक बहुत छोटी सी सब्जी की दुकान की शुरुआत की। अपने काम को विस्तार देने के लिए उन्होंने बैंक से लोन लेने की कोशिश की, लेकिन बाहरी जिले की होने की वजह से उस वक्त बैंकों ने उन्हें वित्तीय सहायता देने से इनकार कर दिया। नतीजतन, साल 2015 तक वह उसी छोटी सी दुकान के सहारे अपना गुजर-बसर करती रहीं।

 

## प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से मिला टर्निंग पॉइंट

वर्ष 2015 में जब प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की शुरुआत हुई, तो बैंकों ने खुद उनसे संपर्क किया। उन्होंने सबसे पहले इस योजना के तहत अढ़ाई लाख रुपये का कर्ज लिया। इस पूंजी से उन्होंने न सिर्फ अपनी सब्जी की दुकान को फैलाया, बल्कि किराना स्टोर का व्यवसाय भी शुरू कर दिया। यह प्रयास धीरे-धीरे रंग लाया और उनका व्यापार चल निकला। आज वह स्थिति यह है कि वह अलेयू और जगत सुख जैसे इलाकों में कुल पांच दुकानों को सफलतापूर्वक चला रही हैं।

 

## क्रेडिट लिमिट और कारोबार का विस्तार

कारोबार बढ़ने के साथ बैंक से मिलने वाली वित्तीय मदद का दायरा भी लगातार बढ़ता गया। पहले उन्हें अढ़ाई लाख रुपये मिले, जिसके बाद बैंक ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत उन्हें 5 लाख, 10 लाख, 15 लाख और आज वर्तमान स्थिति में उनके बैंक खाते में ऋण की लिमिट बढ़कर 42 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है। इस मजबूत वित्तीय सपोर्ट की बदौलत वह अपने व्यापार को लगातार नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं। इस पूरे सफर में उनके पति भी कंधे से कंधा मिलाकर उनका साथ दे रहे हैं और दोनों मिलकर इस काम को संभालते हैं।

 

## दूसरों को दे रहीं रोजगार और प्रधानमंत्री से मुलाकात

इस कारोबार के जरिए वह केवल अपने परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत नहीं कर रही हैं, बल्कि अन्य 6 लोगों को भी रोजगार मुहैया करा रही हैं। उनका मानना है कि अगर यह योजना शुरू न होती, तो वह कभी भी एक छोटे दायरे से बाहर नहीं निकल पातीं। इस योजना के माध्यम से उन्हें साल 2015 में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का भी अनमोल अवसर मिला। हाल ही में इस योजना के 10 साल पूरे होने पर, 8 अप्रैल 2015 को याद करते हुए उन्हें हिमाचल प्रदेश से एकमात्र लाभार्थी के रूप में चुना गया था। इस दौरान उनके पूरे परिवार में भारी उत्साह का माहौल था, क्योंकि उनके घर की एक महिला को देश के प्रधानमंत्री से सीधे संवाद करने का सौभाग्य मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई इस बातचीत में उन्होंने साझा किया कि कैसे यह योजना उनके जीवन में एक नई उम्मीद बनकर आई और उन्होंने एक साधारण गृहिणी से एक सफल कारोबारी का सफर तय किया।

## इसका आप पर असर
इस सरकारी योजना के सफल क्रियान्वयन से छोटे व्यवसायियों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली के जरिए अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने का सीधा मार्ग मिल रहा है।

- **भारत में:** देश भर के छोटे दुकानदारों और सूक्ष्म उद्यमियों को बिना किसी जटिल गारंटी के आसान शर्तों पर कर्ज मिलने की राह आसान हुई है।

- **हिमाचल प्रदेश में:** स्थानीय और बाहरी जिलों से आने वाले छोटे व्यापारियों को अपनी आजीविका बढ़ाने तथा रोजगार के नए अवसर पैदा करने का सीधा संबल मिल रहा है।

- **वित्तीय सहायता:** शुरुआती दौर के छोटे ऋणों से कारोबार शुरू करने वाले लोग सफल संचालन के बाद अपनी क्रेडिट लिमिट को लाखों रुपये तक बढ़ा सकते हैं।

- **रोजगार सृजन:** इस प्रकार की वित्तीय योजनाओं से स्थानीय स्तर पर छोटे व्यवसाय बढ़ने के कारण अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के रास्ते खुलते हैं।

- **महिला सशक्तिकरण:** ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की गृहिणियां आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकती हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
कमजोर वित्तीय पृष्ठभूमि वाले छोटे दुकानदारों के लिए शुरुआती पूंजी जुटाना सबसे बड़ी बाधा होती है, जिसे दूर करने के लिए विशेष सरकारी नीतियां बनाई गई हैं।

- **ऋण की अनुपलब्धता:** शुरुआती वर्षों में बाहरी जिले से होने के कारण स्थानीय बैंकों ने पारंपरिक नियमों का हवाला देते हुए ऋण देने से मना कर दिया था।

- **योजना का शुभारंभ:** वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की शुरुआत ने सूक्ष्म उद्यमियों के लिए वित्तीय समावेशन और आसान कर्ज के दरवाजे खोल दिए।

- **क्रमिक विस्तार:** समय पर ऋण चुकाने और बेहतर व्यावसायिक प्रदर्शन के आधार पर बैंकों ने धीरे-धीरे ऋण सीमा को अढ़ाई लाख से बढ़ाकर 42 लाख रुपये तक कर दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. पूनम शर्मा मूल रूप से किस स्थान की रहने वाली हैं?
पूनम शर्मा मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले की रहने वाली हैं।

### 2. वह वर्तमान में अपना कारोबार कहाँ और किस रूप में चला रही हैं?
वह मनाली के अलेयु और जगत सुख क्षेत्रों में अपने पति के साथ मिलकर पांच अलग-अलग दुकानों का संचालन कर रही हैं।

### 3. उन्हें पहली बार बैंक से कितना ऋण मिला था?
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत उन्हें शुरुआती दौर में अढ़ाई लाख रुपये का ऋण मिला था।

### 4. वर्तमान में उनके बैंक ऋण की लिमिट कितनी हो गई है?
उनके बैंक ऋण की लिमिट बढ़कर वर्तमान में 42 लाख रुपये हो गई है।

### 5. उनकी सालाना आय बढ़कर कितनी हो गई है?
उनका कारोबार बढ़ने के बाद उनकी वार्षिक आय दो लाख रुपये से बढ़कर 15 लाख रुपये हो गई है।

### 6. वह कितने अन्य लोगों को रोजगार दे रही हैं?
वह अपने व्यापार के माध्यम से अन्य 6 लोगों को रोजगार मुहैया करा रही हैं।

### 7. उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का अवसर कब मिला?
उन्हें वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का मौका मिला था, और हाल ही में 8 अप्रैल को इस योजना के 10 साल पूरे होने पर उन्हें हिमाचल प्रदेश से एकमात्र लाभार्थी चुना गया था।

## प्रेरणा और सबक
एक साधारण गृहिणी से सफल कारोबारी बनने तक का यह सफर उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ा मुकाम हासिल करना चाहते हैं।

- **आत्मनिर्भरता की पहल:** दूसरों के यहां नौकरी करने के बजाय अपने खुद के छोटे व्यवसाय की नींव रखकर भविष्य को सुरक्षित किया जा सकता है।

- **सरकारी योजनाओं का लाभ:** समय पर उपलब्ध होने वाली सरकारी वित्तीय सहायता और योजनाओं का सही उपयोग करके कारोबार को कई गुना बढ़ाया जा सकता है।

- **कड़ी मेहनत और धैर्य:** शुरुआती वर्षों में आने वाली परेशानियों और बैंकों के मना करने के बावजूद लगातार प्रयास जारी रखने से सफलता अवश्य मिलती है।

- **व्यापार का विविधीकरण:** सब्जी के छोटे काम से शुरुआत करके किराना स्टोर और कई दुकानों तक कारोबार का दायरा बढ़ाना समझदारी का कदम है।

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