# पश्चिमी विक्षोभ से पहाड़ों पर फिर बदलेगा मिजाज, छह से नौ अक्टूबर तक बारिश और बर्फबारी का येलो अलर्ट

> दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रवानगी के बाद हिमाचल प्रदेश में नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, जिससे कई जिलों में तेज आंधी, बारिश और बर्फबारी की चेतावनी जारी की गई है।

**Type:** article · **Category:** हिमाचल प्रदेश · **Published:** 2026-10-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/himachal-pradesh/pashchimi-vikshobha-se-paharon-para-phira-badalega-mijaja-chhaha-se-nau-aktubara-taka-barisha-aura-barphabari-ka-yellow-alert-43219 · **Language:** Hindi
**Tags:** हिमाचल मौसम, शिमला मौसम विभाग, पश्चिमी विक्षोभ, बारिश अलर्ट, बर्फबारी, मॉनसून विदाई, कांगड़ा बारिश

हिमाचल प्रदेश की आबोहवा में हाल के दिनों में महसूस हो रही अप्रत्याशित गर्मी के बीच कुदरत एक बार फिर नया मोड़ लेने जा रही है। पिछले सप्ताह जहां तड़के और देर शाम हल्की ठंडक दस्तक दे रही थी, वहीं पिछले कुछ दिनों से तेज धूप खिलने के कारण मैदानी और मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में दिन के वक्त पसीने छूटने लगे थे। कई घरों और दफ्तरों में दोबारा पंखे और एयर कंडीशनर चलाने की नौबत आ गई थी। लेकिन अब मौसम का यह मिजाज बहुत जल्द बदलने वाला है, क्योंकि वायुमंडल में एक ताजा पश्चिमी विक्षोभ दस्तक दे रहा है। इसके प्रभाव से राज्य के विभिन्न हिस्सों में छह से नौ अक्टूबर तक बादलों की गड़गड़ाहट, तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और ऊंची चोटियों पर ताजा बर्फबारी की स्थिति बनने जा रही है। इस दौरान सतह पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं और आंधी का प्रकोप देखने को मिल सकता है।

## मौसम विभाग की आधिकारिक चेतावनी और चार दिनों का जिलावार पूर्वानुमान
मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के अलग-अलग जिलों के लिए छह अक्टूबर से लेकर नौ अक्टूबर तक चार दिनों का अलर्ट जारी किया है। छह अक्टूबर के लिए ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है, जबकि बाकी जिलों के लिए उस दिन कोई विशेष अलर्ट नहीं रखा गया है। इसके बाद सात अक्टूबर को चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर जिलों के लिए वर्षा का येलो अलर्ट प्रभावी रहेगा, जबकि शेष जिलों में स्थिति सामान्य रहने का अनुमान है।

आठ अक्टूबर के मौसम की बात करें तो ऊना, बिलासपुर, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सोलन में बारिश के आसार जताए गए हैं। नौ अक्टूबर को इसका प्रभाव धीरे-धीरे सिमटने लगेगा और केवल मंडी, शिमला और सिरमौर में ही बारिश होने की संभावना जताई गई है, जबकि बाकी नौ जिलों में किसी प्रकार का अलर्ट नहीं रहेगा। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पांच अक्टूबर को पूरे प्रदेश में मौसम साफ बना रहेगा और सोमवार को भी चटक धूप खिली रही, लेकिन छह अक्टूबर की देर रात से मौसम तेजी से करवट बदलेगा। छह अक्टूबर की देर रात और सात अक्टूबर की सुबह कांगड़ा, बिलासपुर और मंडी सहित कई क्षेत्रों में तेज गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश होगी और ऊंची पहाड़ियों पर हल्की बर्फबारी दर्ज की जा सकती है।

## दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की देरी से रवानगी और बारिश के आंकड़े
हिमाचल प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून तीन अक्टूबर 2026 को आधिकारिक रूप से विदा हो गया है। इस बार मॉनसून ने सामान्य तारीख के मुकाबले करीब आठ दिन की देरी से विदाई ली है। प्रदेश में इस साल मॉनसून की आमद एक जुलाई तक पूरी तरह दर्ज की गई थी। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के रिकॉर्ड के मुताबिक पिछले दस वर्षों में मॉनसून की सबसे देरी से विदाई साल 2019 में दर्ज की गई थी, जब मॉनसून सीजन 11 अक्टूबर को समाप्त हुआ था।

इस पूरे मॉनसून सीजन के दौरान हिमाचल प्रदेश में सामान्य से 11 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। राज्य में मॉनसून के दौरान सामान्य वर्षा का मानक 734.4 मिलीमीटर रहता है, जबकि इस वर्ष कुल 652.8 मिलीमीटर बारिश ही दर्ज हो सकी। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के वैज्ञानिक संदीप शर्मा के अनुसार तकनीकी तौर पर 11 फीसदी की यह कमी सामान्य बारिश की श्रेणी में ही मानी जाती है, लेकिन अगर जिलों के स्तर पर देखा जाए तो वर्षा के वितरण में भारी असमानता देखने को मिली है।

## जिलों में बारिश का असमान वितरण
मॉनसून सीजन के दौरान जिलों के स्तर पर वर्षा के आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आया है। पूरे राज्य में सबसे अधिक बारिश कांगड़ा जिले में 1549.6 मिलीमीटर दर्ज की गई, जबकि सिरमौर में 1249.1 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई। कुछ जिलों में तो बादल सामान्य से ज्यादा बरसे, जिनमें किन्नौर में सामान्य से 18 फीसदी अधिक, शिमला में 16 फीसदी अधिक तथा बिलासपुर और सिरमौर दोनों जिलों में 6 फीसदी अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई।

इसके विपरीत जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति में सबसे कम 133.8 मिलीमीटर बारिश हुई, जो कि वहां के सामान्य आंकड़े से 65 फीसदी कम है। इसी तरह हमीरपुर जिले में सामान्य से 34 फीसदी कम बारिश रिकॉर्ड हुई। अन्य जिलों की बात करें तो मंडी में सामान्य से 16 फीसदी, सोलन में 14 फीसदी, चंबा में आठ फीसदी और ऊना में सात फीसदी कम वर्षा हुई। राज्य के अधिकांश जिलों में बारिश सामान्य के इर्द-गिर्द रही, लेकिन लाहौल-स्पीति और हमीरपुर में कमी का स्तर काफी अधिक रहा।

## तापमान में उतार-चढ़ाव और आने वाले दिनों का रुख
पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से दो से तीन डिग्री सेल्सियस ऊपर दर्ज किया गया। कई ऊंचाई वाले इलाकों में तापमान में अप्रत्याशित उछाल देखा गया है, जहां कल्पा में दिन का पारा सामान्य से करीब छह से 11 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रिकॉर्ड किया गया। पांच अक्टूबर को भी धूप खिली रहने के चलते पारा सामान्य से ऊपर ही बना रहा।

वैज्ञानिक संदीप शर्मा के अनुसार सात अक्टूबर से बारिश और तेज अंधड़ की गतिविधियों के चलते अधिकतम तापमान में दो से चार डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आएगी, जिससे पारा दोबारा सामान्य स्तर के आसपास आ जाएगा। तापमान का यह सामान्य रुख नौ अक्टूबर तक बरकरार रहने की उम्मीद है। इसके बाद जैसे ही 10 अक्टूबर से आसमान साफ होगा, तापमान में फिर से धीरे-धीरे बढ़ोतरी दर्ज होने लगेगी।

## इसका आप पर असर
हिमाचल प्रदेश में छह से नौ अक्टूबर के बीच सक्रिय हो रहा पश्चिमी विक्षोभ दैनिक आवागमन, तापमान और बाहरी गतिविधियों पर सीधा असर डालेगा।

- **हिमाचल प्रदेश में:** ऊना, कांगड़ा, शिमला और मंडी समेत कई जिलों में छह और सात अक्टूबर को 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं और बारिश होने वाली है। स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करते समय सतर्क रहना चाहिए और गरज-चमक के दौरान खुले में निकलने से बचना चाहिए।
- **तापमान में बदलाव:** सात अक्टूबर से दिन के तापमान में दो से चार डिग्री सेल्सियस की तेज गिरावट आएगी। जो लोग हाल की धूप के कारण गर्म कपड़े समेट चुके थे, उन्हें सुबह और शाम के वक्त दोबारा गर्म कपड़ों की जरूरत पड़ेगी।
- **ऊंचाई वाले क्षेत्रों में:** ऊंची पहाड़ियों और चोटियों पर हल्की बर्फबारी की संभावना जताई गई है। ऊंचाई वाले दर्रों और संवेदनशील पर्वतीय मार्गों पर आवाजाही करने वाले वाहन चालकों को फिसलन को लेकर सावधानी बरतनी होगी।
- **मौसम साफ होने की समयसीमा:** नौ अक्टूबर के बाद केवल तीन जिलों में छिटपुट बारिश रहेगी और 10 अक्टूबर से धूप निकलने के साथ पारा फिर चढ़ेगा। जरूरी खेती-किसानी या बाहरी निर्माण कार्यों की योजना 10 अक्टूबर के बाद के लिए बनाना ज्यादा मुफीद रहेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के विदा होते ही उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों के ऊपर एक ताजा पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो गया है, जिससे वायुमंडलीय दबाव में तीव्र बदलाव आया है।

- **पश्चिमी विक्षोभ का आगमन:** भूमध्यसागरीय क्षेत्र से नमी लेकर आने वाली पछुआ हवाओं की प्रणाली छह अक्टूबर की रात से उत्तर भारत के पहाड़ों पर असर दिखा रही है। इस विक्षोभ के सक्रिय होने से मध्यवर्ती और पर्वतीय जिलों में गरज के साथ बारिश और तेज हवाओं की स्थिति बनी है।
- **अत्यधिक स्थानीय तापमान:** पिछले दिनों में कल्पा जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तापमान सामान्य से छह से 11 डिग्री तक बढ़ गया था। इस असामान्य हीटिंग और तेज धूप ने वायुमंडल में अस्थिरता बढ़ाई, जिससे विक्षोभ के टकराते ही तीव्र आंधी और बारिश की संभावना मजबूत हो गई।
- **मॉनसून की विदाई का क्रम:** तीन अक्टूबर को मॉनसून के सामान्य से आठ दिन देरी से विदा होने के बाद वातावरण में मौसम का संक्रमण काल चल रहा है। संक्रमण के इस दौर में पश्चिमी विक्षोभ का सक्रिय होना हर साल शुरुआती सर्दियों की बारिश और बर्फबारी का सबब बनता है।

## सवाल-जवाब

### 1. हिमाचल प्रदेश में बारिश और आंधी का येलो अलर्ट किन तारीखों के लिए है?
मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य में छह अक्टूबर से नौ अक्टूबर तक बारिश, बर्फबारी और तेज आंधी का येलो अलर्ट जारी किया है।

### 2. इस दौरान हवाओं की गति कितनी रहने की संभावना है?
मौसम विभाग के अनुसार इस मौसमी बदलाव के दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी और तूफान चल सकता है।

### 3. हिमाचल प्रदेश से मॉनसून की आधिकारिक विदाई कब हुई?
राज्य से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून तीन अक्टूबर 2026 को सामान्य से करीब आठ दिन की देरी से विदा हुआ।

### 4. इस साल मॉनसून सीजन में प्रदेश में कितनी बारिश दर्ज की गई?
इस सीजन में सामान्य 734.4 मिलीमीटर के मुकाबले 652.8 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 11 फीसदी कम है।

### 5. मॉनसून के दौरान किस जिले में सबसे ज्यादा और किसमें सबसे कम बारिश हुई?
सबसे अधिक बारिश कांगड़ा में 1549.6 मिलीमीटर दर्ज की गई, जबकि लाहौल-स्पीति में सबसे कम 133.8 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई।

### 6. बारिश के बाद तापमान में कितनी गिरावट आने का अनुमान है?
सात अक्टूबर से बारिश की गतिविधियों के चलते अधिकतम तापमान में दो से चार डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आने के आसार हैं।

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