{
  "type": "article",
  "title": "पठानकोट-मंडी फोरलेन: मंडी से पधर खंड के ग्रीन फील्ड इलाके में फूटे पानी के स्रोत, सड़क बचाने को चैनलाइजेशन शुरू",
  "summary": "मंडी से पधर के बीच बने 19 किलोमीटर लंबे हाईवे के 8 किलोमीटर ग्रीन फील्ड हिस्से में बारिश के बाद नए जलस्रोत फूटने से खतरा पैदा हो गया है, जिसे कलवर्ट से जोड़ने का काम 15 दिनों में पूरा होगा।",
  "content": "हिमाचल प्रदेश में पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के तहत तैयार किए जा रहे नए मार्ग पर बारिश के चलते अप्रत्याशित तकनीकी चुनौती सामने आई है। मंडी से पधर के बीच निर्मित 19 किलोमीटर लंबे हिस्से में से 8 किलोमीटर का क्षेत्र ग्रीन फील्ड इलाके में पड़ता है। मानसूनी बारिश के बाद इस 8 किलोमीटर के पूरे दायरे में जमीन के भीतर से पानी के नए स्रोत फूट पड़े हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा किए गए तकनीकी आकलन में यह बात सामने आई कि अगर इन जलस्रोतों के बहाव को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो भविष्य में यह पूरी सड़क की नींव और बुनियादी ढांचे के लिए गंभीर संकट बन सकते हैं।\n\nसड़क को सुरक्षित रखने के लिए कलवर्ट से जोड़ा जा रहा पानी\nमार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर वरुण चारी ने बताया कि बरसात के चलते इस मार्ग पर करीब 5 से 6 अलग-अलग जगहों पर पानी के नए स्रोत सामने आए हैं। इन जलस्रोतों से लगातार हो रहे रिसाव को व्यवस्थित दिशा देने के मकसद से चैनलाइजेशन का काम तुरंत शुरू कर दिया गया है। योजना के तहत सभी नए स्रोतों के पानी को सही ढलान देकर पास में बने कलवर्ट की ओर मोड़ा जा रहा है, जिससे पानी सीधे पुलियों के जरिए बाहर निकल जाए और डामर या सड़क की संरचना को कोई क्षति न पहुंचे।\n\nगावर कंस्ट्रक्शन को मिला 15 दिनों का अल्टीमेटम\nइस मार्ग के निर्माण का जिम्मा संभाल रही गावर कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के जीएम विकास नागर ने बताया कि एनएचएआई से निर्देश मिलते ही मौके पर राहत और मरम्मत कार्य युद्धस्तर पर शुरू करा दिया गया है। जिन भी 5 से 6 जगहों पर नए जलस्रोत उभरे हैं, वहां पानी को वैज्ञानिक और उचित तरीके से चैनलाइज किया जा रहा है। निर्माण कंपनी का लक्ष्य है कि आने वाले 15 दिनों के भीतर इस पूरे काम को पूरी गुणवत्ता के साथ पूरा कर लिया जाए, ताकि आगे किसी कटाव की आशंका न रहे।\n\nमहीने के अंत तक पूरी तरह बहाल हो सकता है ट्रैफिक\nमंडी से पधर के बीच का यह 19 किलोमीटर लंबा नया खंड लगभग बनकर पूरी तरह तैयार हो चुका है। मौजूदा समय में बरसात से हुए मामूली नुकसान की मरम्मत और जल निकासी के काम को अंतिम रूप दिया जा रहा है। एनएचएआई की योजना इसी महीने के अंत तक इस मार्ग को पूरी तरह दुरुस्त कर वाहनों की नियमित आवाजाही के लिए खोलने की है। वर्तमान में इस मार्ग के बड़े हिस्से पर वाहनों का संचालन हो रहा है, जबकि मरम्मत और चैनलाइजेशन वाले स्थानों पर सुरक्षा के लिहाज से ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया है।\n\nइसका आप पर असर\nमंडी-पठानकोट मार्ग पर यात्रा करने वाले वाहन चालकों के लिए नए फोरलेन पर सफर सुगम होगा, लेकिन मरम्मत के दौरान कुछ स्थानों पर डायवर्जन का सामना करना पड़ेगा।\n\n• भारत में: पठानकोट से मंडी होकर कुल्लू-मनाली जाने वाले पर्यटकों और मालवाहक वाहनों को इस महीने के अंत तक 19 किलोमीटर का तैयार मार्ग मिलने से यात्रा समय में बचत होगी। हालांकि पहाड़ी ग्रीन फील्ड मार्गों पर भूजल रिसाव को देखते हुए मानसून बाद की तकनीकी सुरक्षा का महत्व बढ़ गया है।\n• हिमाचल प्रदेश में: मंडी से पधर के बीच स्थानीय यात्रियों को अगले 15 दिनों तक निर्माण कार्य वाले 5 से 6 स्थानों पर डायवर्जन से गुजरना पड़ेगा। महीने के अंत में काम पूरा होने के बाद पधर और मंडी के बीच रोजाना सफर करने वालों को बिना रुकावट आवागमन की सुविधा मिलेगी।\n• वाहन चालकों के लिए: निर्माण वाले हिस्सों में ट्रैफिक डायवर्ट रहने के कारण चालकों को गति सीमित रखनी होगी। 15 दिन बाद चैनलाइजेशन पूरा होने पर सड़क धंसने या पानी भरने का खतरा समाप्त हो जाएगा।\n• बुनियादी ढांचे पर: पानी को कलवर्ट में मोड़े जाने से नव-निर्मित हाईवे की उम्र बढ़ेगी और कटाव रुकेगा। इससे बारिश के मौसम के बाद होने वाले भारी मरम्मत खर्च और सड़क बंद होने की समस्या से राहत मिलेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nमंडी से पधर के बीच बने नए हाईवे के ग्रीन फील्ड हिस्से में बरसात के बाद जमीन के भीतर से प्राकृतिक पानी का भारी रिसाव शुरू हो गया। खुदाई और निर्माण के बाद भूजल के दबाव ने 5 से 6 स्थानों पर नए स्रोतों का रूप ले लिया, जिसे समय रहते न संभालने पर सड़क धंस सकती थी।\n\n• सीधा कारण: भारी बारिश के बाद 8 किलोमीटर के ग्रीन फील्ड क्षेत्र में 5 से 6 जगहों पर नए भूमिगत जलस्रोत फूट पड़े। इन स्रोतों से अनियंत्रित रूप से निकल रहा पानी सड़क की नींव और डामर के लिए खतरा बन गया था।\n• परिस्थितियां: ग्रीन फील्ड क्षेत्र में नई खुदाई और पहाड़ी संरचना के कारण भूजल का बहाव बदल गया। मानसून की बारिश ने भूमिगत जलस्तर को बढ़ा दिया, जिससे पानी ने कमजोर बिंदुओं से बाहर निकलना शुरू कर दिया।\n• उठाया गया कदम: एनएचएआई और गावर कंस्ट्रक्शन लिमिटेड ने खतरे को भांपते हुए पानी को तुरंत कलवर्ट की ओर मोड़ने का चैनलाइजेशन कार्य शुरू किया। इस कार्य को 15 दिनों में पूरा कर महीने के अंत तक यातायात पूरी तरह सुचारू करने की समयसीमा तय की गई है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मंडी से पधर के बीच हाईवे के किस हिस्से में समस्या आई है?\nमंडी से पधर के बीच बने 19 किलोमीटर लंबे हाईवे के 8 किलोमीटर ग्रीन फील्ड इलाके में बरसात के बाद 5 से 6 जगहों पर पानी के नए स्रोत फूट पड़े हैं।\n\n2. जलस्रोतों से सड़क को बचाने के लिए क्या कदम उठाया जा रहा है?\nएनएचएआई इन सभी नए जलस्रोतों को चैनलाइज करके उनके पानी को पास के कलवर्ट में भेज रहा है ताकि सड़क को नुकसान न पहुंचे।\n\n3. चैनलाइजेशन का कार्य कब तक पूरा होने की उम्मीद है?\nनिर्माण कार्य कर रही गावर कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के अनुसार यह काम आने वाले 15 दिनों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।\n\n4. इस नए 19 किमी हाईवे पर पूरा ट्रैफिक कब तक शुरू होगा?\nएनएचएआई का लक्ष्य मरम्मत और चैनलाइजेशन का कार्य पूरा करके इसी महीने के अंत तक पूरे हाईवे को यातायात के लिए सुचारू रूप से खोलने का है।",
  "url": "https://trendkia.com/himachal-pradesh/pathankot-mandi-phoralena-mandi-se-padhar-khnda-ke-grina-philda-ilake-men-phute-pani-ke-srota-saraka-bachane-ko-chainalaijeshana-s-44359",
  "category": "हिमाचल प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-10-07",
  "tags": [
    "मंडी",
    "पधर",
    "हिमाचल प्रदेश",
    "एनएचएआई",
    "पठानकोट मंडी हाईवे",
    "गावर कंस्ट्रक्शन",
    "सड़क निर्माण"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}