# आईआईटी मंडी में भगवद्गीता पोस्टर विवाद, शूद्रों के काम को लेकर उठे सवाल

> हिमाचल प्रदेश के आईआईटी मंडी में जन्माष्टमी के मौके पर लगे एक पोस्टर में वर्ण व्यवस्था और शूद्रों की भूमिका पर टिप्पणी को लेकर विवाद गहरा गया है। संस्थान ने मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया है।

**Type:** article · **Category:** हिमाचल प्रदेश · **Published:** 2026-09-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/himachal-pradesh/poster-on-varna-system-at-iit-mandi-sparks-row-over-caste-roles-29428 · **Language:** Hindi
**Tags:** आईआईटी मंडी, विवादित पोस्टर, भगवद्गीता, जाति व्यवस्था, लक्ष्मीधर बेहरा, हिमाचल प्रदेश, आईआईटी विवाद

हिमाचल प्रदेश स्थित आईआईटी मंडी के परिसर में जन्माष्टमी के एक कार्यक्रम के दौरान वर्ण व्यवस्था को दर्शाने वाला पोस्टर लगाए जाने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस पोस्टर में समाज के चार वर्णों का उल्लेख किया गया था, जिसमें शूद्रों की भूमिका को कथित तौर पर उच्च वर्गों की सेवा करना बताया गया, जिससे विभिन्न हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। इस पूरे घटनाक्रम के तूल पकड़ने के बाद संस्थान प्रशासन ने त्वरित कदम उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन कर दिया है। यह विवादित पोस्टर संस्थान के मुख्य ऑडिटोरियम के बाहर चस्पा किया गया था, जिस पर 'भगवद्गीता – द टाइमलेस विजडम' शीर्षक दिया गया था।

## पोस्टर में क्या थी सामग्री और कैसे हुआ खुलासा
इस पोस्टर में तस्वीरों और लिखित विवरण के माध्यम से समाज के चार पारंपरिक वर्गों यानी ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र की अलग-अलग भूमिकाओं को रेखांकित किया गया था। पोस्टर के मुताबिक, ब्राह्मणों की जिम्मेदारी ईश्वर का संदेश प्रसारित करना बताई गई थी, जबकि क्षत्रियों को समाज और आध्यात्मिकता की रक्षा करने वाला और वैश्यों को अर्थव्यवस्था के संचालन के साथ दूसरों की सहायता करने वाला दर्शाया गया था। इसके विपरीत, शूद्र वर्ग के हिस्से में केवल उच्च वर्गों की सेवा करने का कार्य बताया गया, जिसके बाद परिसर और बाहर हंगामा मच गया। इस सामग्री में भगवद्गीता के दो विशिष्ट श्लोकों का हवाला भी दिया गया था, जिसने इस विवाद को और अधिक हवा दे दी।

## छात्रों द्वारा आयोजित था कार्यक्रम, संस्थान ने स्पष्ट की स्थिति
विवाद बढ़ने के बाद संस्थान ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि जन्माष्टमी का यह समारोह आईआईटी मंडी का कोई आधिकारिक या प्रायोजित कार्यक्रम नहीं था। इसे पूरी तरह से छात्रों की पहल पर आयोजित किया गया था और संस्थान ने न तो इसे प्रायोजित किया था और न ही इसके समर्थन की पुष्टि की थी। जैसे ही यह मामला अधिकारियों के संज्ञान में आया, एक जांच समिति का गठन किया गया जो यह पड़ताल करेगी कि इस पोस्टर को किसने डिजाइन किया था और इसे परिसर में स्थापित करने के लिए किसकी अनुमति ली गई थी। इसके साथ ही, यह कमेटी पोस्टर को तैयार करने के पीछे के उद्देश्यों और अन्य सभी संबंधित पहलुओं की भी गहराई से जांच करेगी।

## जांच कमेटी का गठन और आगे की कार्रवाई
संस्थान द्वारा बनाई गई इस जांच समिति में केवल फैकल्टी सदस्यों को ही शामिल नहीं किया गया है, बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों को भी जगह दी गई है। इस समिति में अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधि भी शामिल हैं, ताकि निष्पक्षता बनी रहे। जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर संस्थान आगामी अनुशासनात्मक या प्रशासनिक कार्रवाई तय करेगा। संस्थान ने यह भी दो टूक कहा है कि वह इस प्रकार की किसी भी गतिविधि या सामग्री का समर्थन नहीं करता है और परिसर में नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

## प्रशासन का पक्ष और निदेशक की प्रतिक्रिया
आईआईटी मंडी के रजिस्ट्रार डॉ. केएस पांडेय ने मीडिया के सामने स्पष्ट किया कि संस्थान ऐसी किसी भी गतिविधि का समर्थन नहीं करता और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं दूसरी ओर, संस्थान के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने अपने बयान में कहा कि यह पोस्टर छात्रों द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम का हिस्सा था और कुछ छात्रों ने भगवद्गीता की अपने नजरिए से व्याख्या की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आईआईटी मंडी हमेशा से समानता, सामाजिक न्याय, वैज्ञानिक सोच और देश के संविधान में निहित मौलिक मूल्यों को संरक्षित रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध रहा है।

## निदेशक के पिछले विवादित बयान और पृष्ठभूमि
उल्लेखनीय है कि आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा पहले भी अपने बयानों और आध्यात्मिक गतिविधियों के कारण चर्चा के केंद्र में रह चुके हैं। वर्ष 2023 में उन्होंने अपने संबोधन में छात्रों से मांसाहार का सेवन पूरी तरह छोड़ने का संकल्प लेने की अपील की थी। इसी दौरान उन्होंने हिमाचल प्रदेश में आए खतरनाक भूस्खलन और बादल फटने जैसी प्राकृतिक आपदाओं को जानवरों के प्रति बरती जाने वाली क्रूरता से जोड़ने का एक विवादित दावा भी किया था। इसके अलावा, संस्थान के निदेशक पद पर कार्यभार संभालने के कुछ समय बाद उनका एक पुराना वीडियो भी सार्वजनिक हुआ था, जिसमें उन्होंने मंत्रोच्चार के माध्यम से अपने एक मित्र के परिवार को कथित तौर पर बुरी आत्माओं के प्रभाव से मुक्त कराने में सहायता करने का दावा किया था। प्रो. बेहरा का इस्कॉन संस्था और भगवद्गीता से पुराना और गहरा नाता रहा है, और वह पिछले करीब 27 वर्षों से युवाओं को भगवद्गीता के सिद्धांतों के जरिए शांति और जीवन के मूल्य सिखाने की बात कहते आए हैं। इसी के तहत आईआईटी मंडी के शैक्षणिक पाठ्यक्रम में भगवद्गीता से जुड़ा तीन क्रेडिट का एक कोर्स भी पढ़ाया जाता है।

## इसका आप पर असर
यह घटना उच्च शिक्षण संस्थानों में वैचारिक स्वतंत्रता और सामाजिक समानता के बीच संतुलन को लेकर एक बड़ी बहस को जन्म देती है।

- **भारत भर में:** देश भर के शैक्षणिक संस्थानों में परिसरों के भीतर आयोजनों और धार्मिक या सामाजिक ग्रंथों की व्याख्या को लेकर नए दिशानिर्देश या सख्त निगरानी लागू की जा सकती है।
- **मंडी में:** स्थानीय स्तर पर आईआईटी मंडी के छात्रों और प्रशासन के बीच प्रशासनिक नियमों को कड़ा किया जा सकता है, जिससे भविष्य के छात्र आयोजनों पर कड़ी नजर रहेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह विवाद परिसरों में धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या और छात्रों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों पर प्रशासन के शुरुआती नियंत्रण न होने के कारण उपजा है।

- **सीधा कारण:** जन्माष्टमी समारोह के दौरान ऑडिटोरियम के बाहर शूद्रों की भूमिका को उच्च वर्गों की सेवा करने वाला बताने वाला पोस्टर लगाया जाना इस विवाद का मुख्य कारण बना।
- **संस्थान की प्रतिक्रिया:** मामले के सार्वजनिक होने और तीखी प्रतिक्रिया मिलने के बाद आईआईटी मंडी प्रशासन ने तुरंत जांच समिति गठित करने का निर्णय लिया।
- **निदेशक की पृष्ठभूमि:** निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा के पूर्व के बयानों और इस्कॉन व भगवद्गीता से उनके लंबे जुड़ाव के कारण इस पूरे घटनाक्रम पर राष्ट्रीय स्तर पर अधिक ध्यान केंद्रित हुआ।

## सवाल-जवाब

### 1. आईआईटी मंडी में विवाद का मुख्य कारण क्या था?
आईआईटी मंडी में जन्माष्टमी के दौरान लगे एक पोस्टर में वर्ण व्यवस्था के तहत शूद्रों की भूमिका को उच्च वर्गों की सेवा करना बताया गया था।

### 2. इस विवाद के बाद संस्थान ने क्या कदम उठाया है?
संस्थान ने पूरे मामले की जांच के लिए फैकल्टी और विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए एक जांच समिति का गठन किया है।

### 3. क्या यह कार्यक्रम आईआईटी मंडी का आधिकारिक कार्यक्रम था?
नहीं, संस्थान ने स्पष्ट किया है कि यह कार्यक्रम छात्रों द्वारा आयोजित किया गया था और यह संस्थान का आधिकारिक कार्यक्रम नहीं था।

### 4. जांच समिति में किन प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है?
जांच कमेटी में फैकल्टी सदस्यों के अलावा अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधियों को भी जगह दी गई है।

### 5. आईआईटी मंडी के वर्तमान निदेशक कौन हैं?
प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा आईआईटी मंडी के निदेशक हैं।

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