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  "type": "article",
  "title": "पीडब्ल्यूडी मंत्री विक्रमादित्य सिंह के विभाग पर कुर्की की तलवार, तीन दिन का समय",
  "summary": "हिमाचल प्रदेश की एक अदालत ने लोक निर्माण विभाग को कर्मचारी वीरेंद्र कुमार का बकाया वेतन और मुआवजा ब्याज सहित तीन दिन में चुकाने का आदेश दिया है। तय समय सीमा में भुगतान न होने पर मंडी स्थित सर्किट हाउस को कुर्क करने की चेतावनी दी गई है।",
  "content": "हिमाचल प्रदेश में सरकारी महकमे और एक कर्मचारी के बीच चल रहे कानूनी विवाद में स्थानीय अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह के अधीन आने वाले लोक निर्माण विभाग को कोर्ट के आदेशों की अवहेलना भारी पड़ सकती है। अदालत ने विभाग को साफ निर्देश दिए हैं कि वह तीन दिन के भीतर कर्मचारी के बकाए का भुगतान करे, अन्यथा मंडी शहर के टारना रोड पर स्थित पीडब्ल्यूडी के सर्किट हाउस को कुर्क कर लिया जाएगा।\n\nवेतन और हर्जाने का पुराना विवाद\nयह पूरा कानूनी मामला वेतन भुगतान से जुड़ा हुआ है। लोक निर्माण विभाग के कर्मी वीरेंद्र कुमार ने विभाग के फैसलों और कार्यप्रणाली से असंतुष्ट होकर लेबर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेबर कोर्ट ने 7 सितंबर 2022 को वीरेंद्र कुमार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए विभाग को निर्देश दिया था कि वह कर्मचारी को 3,29,222 रुपये की राशि बतौर हर्जाना दे। इसके साथ ही, 34 महीने के रुके हुए वेतन का भुगतान ब्याज सहित करने को कहा गया था। हालांकि, पीडब्ल्यूडी विभाग ने इस आदेश को लागू करने में टालमटोल की, जिसके बाद कर्मचारी ने अपने अधिवक्ता बीसी शर्मा के जरिए अदालत में निष्पादन याचिका दाखिल की।\n\nअदालत ने खारिज की विभाग की आपत्तियां\nमामले की सुनवाई करते हुए मंडी में सीनियर सिविल जज असलम बेग की अदालत ने लोक निर्माण विभाग की तरफ से दायर की गई तमाम आपत्तियों को 12 अगस्त को ही खारिज कर दिया था। अदालत ने अपने आदेश में इस बात पर जोर दिया कि विभाग काफी लंबे समय से लेबर कोर्ट के फैसले का पालन करने में नाकाम रहा है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में विभाग की संपत्तियों को कुर्क करके ही बकाया राशि का भुगतान करवाने के अलावा अब अदालत के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।\n\nकुर्की की पूरी प्रक्रिया और पुलिस बल की तैनाती\nअदालत के ताजा और सख्त निर्देशों के मुताबिक, अगर 17 अक्तूबर तक निर्धारित राशि ब्याज सहित अदा नहीं की जाती है, तो मंडी शहर के टारना रोड पर स्थित लोक निर्माण विभाग के सर्किट हाउस का कब्जा अदालत के प्रतिनिधि ले लेंगे। अदालत ने इसके लिए सभी जरूरी सामान और सामग्री पहले से ही तैयार रखने के निर्देश दिए हैं ताकि कुर्की की कार्रवाई में कोई रुकावट न आए। कानून और व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए एसपी मंडी को भी पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात करने के आदेश जारी किए गए हैं।\n\nमेहमानों की असुविधा से बचने के निर्देश\nअदालत ने मानवीय दृष्टिकोण और व्यावहारिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कुर्की की कार्रवाई के समय को लेकर भी खास निर्देश दिए हैं। अदालत का कामकाज देखने वाले कर्मचारी को यह हिदायत दी गई है कि सर्किट हाउस की कुर्की की पूरी कार्यवाही 27 अक्तूबर को दोपहर 12 बजे के बाद ही शुरू की जाए। यह समय विशेष तौर पर सर्किट हाउस में ठहरने वाले मेहमानों के चेक-इन और चेक-आउट के समय के बाद तय किया गया है, ताकि वहां आने-जाने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।\n\nअंतिम अवसर और विभाग के पास विकल्प\nसुनवाई के दौरान विभाग की ओर से सहायक लोक अभियोजक ने अदालत से आखिरी अवसर दिए जाने का विशेष अनुरोध किया था। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए विभाग को भुगतान के लिए तीन दिन का वक्त दिया है। यदि तय अवधि के भीतर पैसों का भुगतान नहीं किया जाता है, तो अदालत द्वारा तय की गई कुर्की की पूरी कार्यवाही बिना किसी और देरी के अमल में लाई जाएगी।\n\nइसका आप पर असर\nइस अदालत के फैसले का सीधा असर सरकारी विभागों के कामकाज और प्रशासनिक जवाबदेही पर पड़ेगा।\n\n• भारत में: सरकारी महकमों को यह संदेश जाता है कि अदालती आदेशों और श्रम कानूनों की अनदेखी करने पर भारी प्रशासनिक और संपत्ति संबंधी नुकसान उठाना पड़ सकता है।\n• मंडी में: स्थानीय स्तर पर सर्किट हाउस की कुर्की की कार्रवाई से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है और कर्मचारियों के अदालती मामलों के जल्द निपटारे की उम्मीद बढ़ी है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह स्थिति लोक निर्माण विभाग द्वारा अदालती आदेशों का लंबे समय तक पालन न किए जाने के कारण उत्पन्न हुई है।\n\n• लेबर कोर्ट का फैसला: लेबर कोर्ट ने 7 सितंबर 2022 को कर्मचारी के पक्ष में वेतन और हर्जाना देने का आदेश दिया था जिसे विभाग ने समय पर लागू नहीं किया।\n• आपत्तियों का खारिज होना: कोर्ट द्वारा विभाग की सभी आपत्तियों को 12 अगस्त को खारिज किए जाने के बाद कुर्की का कानूनी रास्ता साफ हो गया।\n• कानूनी बाध्यता: अदालत के पास अब विभाग की संपत्तियों को कुर्क करने के अलावा कर्मचारियों के बकाए की वसूली का कोई अन्य विकल्प शेष नहीं बचा था।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यह मामला किस विभाग से जुड़ा है?\nयह मामला हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी से जुड़ा है।\n\n2. अदालत ने भुगतान के लिए कितना समय दिया है?\nअदालत ने विभाग को ब्याज सहित राशि चुकाने के लिए तीन दिन का समय दिया है।\n\n3. किस संपत्ति को कुर्क करने का आदेश दिया गया है?\nमंडी शहर के टारना रोड पर स्थित लोक निर्माण विभाग के सर्किट हाउस को कुर्क करने का आदेश दिया गया है।\n\n4. लेबर कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया था?\nलेबर कोर्ट ने 7 सितंबर 2022 को कर्मचारी को 3,29,222 रुपये हर्जाना और 34 महीने का वेतन ब्याज सहित देने को कहा था।\n\n5. इस मामले की सुनवाई किस अदालत में हुई?\nइस मामले की सुनवाई मंडी में सीनियर सिविल जज असलम बेग की अदालत में हुई।",
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  "category": "हिमाचल प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-10-16",
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    "पीडब्ल्यूडी हिमाचल",
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