# राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेंट होगा हिमाचल का रणसिंघा, जानिए कौन हैं इसे बनाने वाले वीर सिंह

> हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के कारीगर वीर सिंह द्वारा तैयार पारंपरिक रणसिंघा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को स्मृति चिन्ह के रूप में भेंट किया जाएगा। हाल ही में इस अनोखी कलाकृति को जीआई टैग मिला है और इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पहले दिया जा चुका है।

**Type:** article · **Category:** हिमाचल प्रदेश · **Published:** 2026-09-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/himachal-pradesh/rashtrapati-droupadi-murmu-ko-bhenta-hoga-himachal-ka-rarsingha-janie-kauna-hain-ise-banane-vale-veer-singh-39833 · **Language:** Hindi
**Tags:** राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, हिमाचल प्रदेश, रणसिंघा, मंडी, जीआई टैग, हस्तशिल्प

हिमाचल प्रदेश की प्राचीन और समृद्ध हस्तशिल्प कला दुनिया भर में अपनी अनूठी पहचान रखती है। इसी सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक विशेष पारंपरिक रणसिंघा स्मृति चिन्ह के तौर पर भेंट किया जाएगा। इस कलाकृति को मंडी जिले के सराज क्षेत्र के थाची गांव के रहने वाले कुशल शिल्पी वीर सिंह ने अपने हाथों से तैयार किया है। इस उपहार के जरिए हिमाचल की लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत की झलक देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचेगी।

 

## बिलासपुर के दीक्षांत समारोह में होगी भेंट

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 6 से 8 अक्तूबर तक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू हिमाचल प्रदेश के दौरे पर रहेंगी। इस दौरान वह 6 अक्तूबर को बिलासपुर स्थित एम्स के पहले दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगी। इसी ऐतिहासिक अवसर पर उन्हें यह पारंपरिक रणसिंघा उपहार स्वरूप दिया जाएगा। इस विशेष स्मृति चिन्ह की बनावट बेहद आकर्षक है जिसमें दो रणसिंघे शामिल हैं और उनके ठीक बीच में संबंधित संस्थान का लोगो डिजाइन किया गया है। इस पूरे कलात्मक उपहार को पीतल और तांबे जैसी धातुओं का उपयोग करके बनाया गया है जो इसकी मजबूती और सुंदरता दोनों को बढ़ाता है।

 

## पीढ़ियों से चली आ रही है हस्तशिल्प की यह परंपरा

कलाकार वीर सिंह और उनका पूरा परिवार कई पीढ़ियों से इस पारंपरिक हस्तशिल्प के काम से जुड़ा हुआ है। सबसे खास बात यह है कि आज के आधुनिक दौर में भी रणसिंघे और देवी-देवताओं के मोहरे पूरी तरह से हाथ से ही तैयार किए जाते हैं। यही वजह है कि इन तमाम कलाकृतियों में हिमाचल की मिट्टी, संस्कृति और लोक कला की गहरी छाप साफ तौर पर दिखाई देती है। वीर सिंह के साथ उनके परिवार के अन्य सदस्य भी इस कार्य में पूरा सहयोग देते हैं। इस प्रकार यह कला केवल आजीविका का साधन मात्र नहीं है, बल्कि उनके परिवार की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत का जीवंत हिस्सा बन चुकी है।

 

## प्रधानमंत्री और पूर्व राष्ट्रपति को भी मिल चुका है रणसिंघा

वीर सिंह के हाथों बनी यह अनूठी कलाकृतियां इससे पहले भी देश के कई सर्वोच्च पदों पर बैठे दिग्गजों तक पहुंच चुकी हैं। उनके द्वारा बनाए गए रणसिंघे केवल स्थानीय नेताओं तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भी ऐसे स्मृति चिन्ह भेंट किए जा चुके हैं। इसके अलावा हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाने वाले ये हस्तनिर्मित रणसिंघे देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी उपहार के रूप में पहुंच चुके हैं। जीआई टैग मिलने के बाद से इस कला को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक नई पहचान मिली है। पारंपरिक शिल्प को बचाने और उसे संवारने के उनके सराहनीय प्रयासों के लिए उन्हें पिछले वर्ष दिल्ली में यंग आर्टिजन अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है।

 

## धार्मिक आयोजनों और देव संस्कृति का अभिन्न अंग

वीर सिंह द्वारा बनाए जाने वाले रणसिंघे केवल घर की सजावट की वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि ये हिमाचल की समृद्ध देव संस्कृति और प्राचीन परंपराओं के प्रतीक हैं। राज्य के कई हिस्सों में धार्मिक आयोजनों और उत्सवों के दौरान रणसिंघे का बजाया जाना अनिवार्य हिस्सा माना जाता है। वीर सिंह ने इस बात पर जोर दिया है कि जीआई टैग मिलने से इस पारंपरिक वाद्य यंत्र को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिलेगी। उन्होंने सरकार से मांग की है कि जीआई टैग प्रक्रिया में बिचौलियों को बाहर किया जाना चाहिए ताकि सीधे तौर पर असली हस्तशिल्पकारों को ही अधिकृत यूजर का दर्जा मिल सके।

## इसका आप पर असर
यह एक सांस्कृतिक और पारंपरिक समाचार है जिसका आम नागरिकों के दैनिक जीवन, वित्त या करों पर कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ता है।

- **हिमाचल प्रदेश में:** इस विशेष रणसिंघा को जीआई टैग मिलने और राष्ट्रपति स्तर पर सराहना मिलने से राज्य के पारंपरिक हस्तशिल्पकारों और स्थानीय कला को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा मिलेगा।

- **स्थानीय कारीगरों के लिए:** इस प्रकार की आधिकारिक मान्यता मिलने से पारंपरिक शिल्प से जुड़े कलाकारों की आजीविका सुरक्षित होती है और बिचौलियों से मुक्ति की मांग मजबूत होती है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह भेंट हिमाचल प्रदेश की प्राचीन देव संस्कृति और हस्तशिल्प परंपरा को राष्ट्रीय मंच पर सम्मानित करने के उद्देश्य से तय की गई है। हाल ही में इस पारंपरिक कलाकृति को जीआई टैग मिलने से इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता में और अधिक वृद्धि हुई है।

- **सांस्कृतिक महत्व:** रणसिंघा हिमाचल के धार्मिक आयोजनों और उत्सवों का एक अनिवार्य हिस्सा रहा है, जो इसे कूटनीतिक और प्रतिष्ठित उपहार के रूप में उपयुक्त बनाता है।

- **सरकारी दौरा:** राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बिलासपुर एम्स दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आगमन के कारण इस अनूठी कलाकृति को भेंट करने का अवसर चुना गया है।

- **कला संरक्षण:** वीर सिंह जैसे कारीगरों का पीढ़ियों पुराना पारिवारिक कौशल और उनका उत्कृष्ट कार्य इस शिल्प को जीवित रखने का मुख्य आधार है।

## सवाल-जवाब

### 1. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को कौन सा पारंपरिक वाद्य यंत्र भेंट किया जाएगा?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पारंपरिक रणसिंघा स्मृति चिन्ह के रूप में भेंट किया जाएगा।

### 2. इस रणसिंघा को किसने तैयार किया है?
इस रणसिंघा को हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सराज क्षेत्र के थाची गांव के रहने वाले वीर सिंह ने तैयार किया है।

### 3. यह रणसिंघा राष्ट्रपति को कहाँ भेंट किया जाएगा?
इसे 6 अक्तूबर को बिलासपुर स्थित एम्स के पहले दीक्षांत समारोह के दौरान भेंट किया जाएगा।

### 4. यह रणसिंघा किन धातुओं से बनाया गया है?
इस स्मृति चिन्ह को पीतल और तांबे की धातुओं का उपयोग करके बनाया गया है और इसके बीच में संस्थान का लोगो है।

### 5. वीर सिंह को कौन सा पुरस्कार मिल चुका है?
पारंपरिक हस्तशिल्प को संरक्षित करने के लिए वीर सिंह को पिछले वर्ष दिल्ली में यंग आर्टिजन अवार्ड से सम्मानित किया गया था।

## प्रेरणा और सबक
वीर सिंह का जीवन और उनका संघर्ष पारंपरिक कला को बचाने वाले हर व्यक्ति के लिए एक प्रेरणा है।

- **पारंपरिक विरासत को सहेजना:** पीढ़ियों पुराने हस्तशिल्प को बिना आधुनिक मशीनों के आज भी हाथों से तैयार कर अपनी संस्कृति को जीवित रखना।

- **कड़ी मेहनत और समर्पण:** बिना किसी बड़े व्यावसायिक समर्थन के पुश्तैनी काम को परिवार के साथ मिलकर एक मजबूत आजीविका का साधन बनाना।

- **राष्ट्रीय स्तर पर पहचान:** अपनी कला में निरंतरता और उत्कृष्टता बनाए रखते हुए देश के शीर्ष नेतृत्व तक अपनी कलाकृतियों को पहुंचाना।

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