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  "title": "रोहड़ू में वीरभद्र सिंह के पोस्टर न लगने पर भड़कीं प्रतिभा सिंह, सीएम सुक्खू के कार्यक्रम पर उठाए तीखे सवाल",
  "summary": "ऊपरी शिमला दौरे पर पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह की अनदेखी पर प्रतिभा सिंह ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कार्यक्रम से वीरभद्र की तस्वीर गायब रहने को संकीर्ण मानसिकता बताया।",
  "content": "हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर आंतरिक खींचतान सतह पर आ गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के हालिया ऊपरी शिमला दौरे के दौरान लगाए गए प्रचार पोस्टरों से पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की तस्वीर नदारद रहने पर विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह की माता प्रतिभा सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा एतराज जताया है। रोहड़ू में आयोजित सरकारी व पार्टी कार्यक्रमों में वीरभद्र सिंह के योगदान को याद न किए जाने को उन्होंने बेहद आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।\n\nरोहड़ू में अनदेखी पर प्रतिभा सिंह का कड़ा रुख\nप्रतिभा सिंह ने सीधे तौर पर नाम लिए बिना मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाले आयोजन पर तीखा हमला बोला। 6 अक्तूबर यानी मंगलवार को अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा आचरण काफी छोटी सोच को दर्शाता है। उनका कहना था कि वीरभद्र सिंह को दुनिया से गए अभी ज्यादा समय नहीं बीता है, इसके बावजूद उनके अपने ही प्रभाव वाले क्षेत्र रोहड़ू में उन्हें इस तरह भुला देना बेहद निराशाजनक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वीरभद्र सिंह जैसी कद्दावर राजनीतिक शख्सियत का नाम तक न लिया जाना यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर पार्टी के भीतर किस दिशा में काम हो रहा है।\n\n \n\nकार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों पर भी बरसीं पूर्व प्रदेशाध्यक्ष\nकार्यक्रम के आयोजकों के साथ-साथ प्रतिभा सिंह ने वहां मौजूद कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के रवैये पर भी गहरी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मंच और बैनर तैयार किए जा रहे थे, तब स्थानीय कार्यकर्ताओं को खुद आगे आकर पूर्व मुख्यमंत्री के पोस्टर लगाने की पहल करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि दूसरों से शिकायत क्या करनी, जब अपने ही लोग इस उपेक्षा पर चुप बैठे रहे। एनएसयूआई के अध्यक्ष मनीष ठाकुर का जिक्र करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस की मूल विचारधारा कभी भी गुटबाजी या एक-दूसरे को बांटने की नहीं रही है।\n\nप्रतिभा सिंह ने अपने दौरों का उदाहरण देते हुए कहा कि जब भी वह नाहन या सिरमौर जैसे क्षेत्रों में जाती थीं, तो बैठकों में हिमाचल के पहले मुख्यमंत्री यशवंत सिंह परमार का नाम पूरी श्रद्धा के साथ लेती थीं। वरिष्ठ नेताओं का सम्मान करना हर कांग्रेसी का दायित्व है। उन्होंने अफसोस जताया कि रोहड़ू में आज इसके विपरीत आचरण देखने को मिल रहा है।\n\nवीरभद्र सिंह और रोहड़ू का पुराना नाता\nरोहड़ू विधानसभा क्षेत्र वीरभद्र सिंह का सबसे मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है। वीरभद्र सिंह छह बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और उन्होंने 1990 से लेकर 2007 तक लगातार रोहड़ू विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और हर बार जीत दर्ज की। ऐसे ऐतिहासिक गढ़ में उनके योगदान का कोई उल्लेख न होना स्थानीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।\n\nसुक्खू और वीरभद्र खेमे के पुराने मतभेद\nहिमाचल कांग्रेस में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और वीरभद्र सिंह के बीच राजनीतिक तल्खी का लंबा इतिहास रहा है। वर्ष 2012 में जब सुखविंदर सिंह सुक्खू को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, तब वीरभद्र सिंह ने खुले तौर पर इसका विरोध किया था। दोनों नेताओं के बीच सत्ता और संगठन को लेकर कई बार सार्वजनिक मंचों पर मतभेद और टकराव खुलकर सामने आते रहे हैं। अब रोहड़ू के हालिया घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि पुरानी राजनीतिक अदावत का असर आज भी संगठन की गतिविधियों पर दिखाई दे रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nयह घटनाक्रम हिमाचल प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी के भीतर जारी गुटबाजी और नेतृत्व संघर्ष को दर्शाता है।\n\n• हिमाचल प्रदेश में: सत्ताधारी संगठन के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान से प्रशासनिक फैसलों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ सकता है। सरकार और संगठन के बीच बढ़ते तनाव के कारण कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित हो सकता है।\n• रोहड़ू और शिमला क्षेत्र में: पूर्व मुख्यमंत्री के समर्थकों में नाराजगी बढ़ने से स्थानीय स्तर पर पार्टी के कार्यक्रमों में समन्वय की कमी देखने को मिल सकती है। आगामी राजनीतिक गतिविधियों के दौरान दोनों खेमों के बीच शक्ति प्रदर्शन तेज होने के आसार हैं।\n• पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए: दो प्रमुख गुटों के बीच खुलकर सामने आई तल्खी से जमीनी कार्यकर्ताओं के सामने असमंजस की स्थिति बन गई है। किसी एक खेमे के प्रति निष्ठा जताने को लेकर स्थानीय स्तर पर गुटबाजी और बढ़ सकती है।\n• राज्य की राजनीति पर: कैबिनेट स्तर पर संतुलन बनाए रखना मुख्यमंत्री के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। दोनों पक्षों के बीच विवाद गहराने पर पार्टी आलाकमान को हस्तक्षेप करना पड़ सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह विवाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के ऊपरी शिमला दौरे के दौरान रोहड़ू में आयोजित कार्यक्रम के पोस्टरों से पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की तस्वीर हटाए जाने के कारण पैदा हुआ। दोनों पक्षों के बीच दशकों पुरानी संगठनात्मक प्रतिस्पर्धा इस टकराव की मुख्य वजह बनी।\n\n• पोस्टर और प्रचार सामग्री से बेदखली: रोहड़ू में आयोजित सरकारी और संगठनात्मक कार्यक्रम के पोस्टरों में छह बार के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को कोई जगह नहीं दी गई और न ही उनके योगदान का उल्लेख किया गया। इस अनदेखी को उनके परिवार और समर्थकों ने अपमान के रूप में देखा।\n• रोहड़ू का ऐतिहासिक राजनीतिक महत्व: वीरभद्र सिंह 1990 से लेकर 2007 तक लगातार रोहड़ू से विधायक चुने गए थे। उनके पारंपरिक गढ़ में ही उनकी तस्वीर नदारद रहने पर उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिर की।\n• सुक्खू और वीरभद्र खेमे की पुरानी रंजिश: वर्ष 2012 में जब सुखविंदर सिंह सुक्खू को हिमाचल प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था, तब वीरभद्र सिंह उनके सख्त खिलाफ थे। दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक मंचों पर मतभेद पहले भी कई बार सामने आ चुके हैं।\n• स्थानीय कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता: प्रतिभा सिंह ने इस बात पर भी निराशा जताई कि कार्यक्रम स्थल पर मौजूद कांग्रेस नेताओं और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने खुद आगे आकर वीरभद्र सिंह के पोस्टर लगाने की कोशिश नहीं की।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. प्रतिभा सिंह ने किस बात पर नाराजगी जताई है?\nउन्होंने रोहड़ू में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के दौरे के दौरान पोस्टरों से पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह की तस्वीर और नाम गायब रहने पर आपत्ति जताई है।\n\n2. प्रतिभा सिंह ने इस घटना को क्या करार दिया?\nउन्होंने इसे काफी छोटी सोच का प्रतीक बताते हुए कहा कि वीरभद्र सिंह जैसी शख्सियत को इतनी जल्दी भुला दिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।\n\n3. वीरभद्र सिंह का रोहड़ू विधानसभा सीट से क्या नाता रहा है?\nवीरभद्र सिंह छह बार हिमाचल के सीएम रहे और उन्होंने 1990 से 2007 तक लगातार रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।\n\n4. सुखविंदर सिंह सुक्खू और वीरभद्र सिंह के बीच पुराना टकराव क्या था?\nवर्ष 2012 में जब सुक्खू को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया था, तब वीरभद्र सिंह उनके खिलाफ थे और दोनों नेताओं के बीच कई बार सार्वजनिक मतभेद देखे गए थे।\n\n5. प्रतिभा सिंह ने यशवंत सिंह परमार का जिक्र क्यों किया?\nउन्होंने बताया कि जब वह नाहन और सिरमौर जाती थीं तो बैठकों में यशवंत सिंह परमार का नाम सम्मानपूर्वक लेती थीं, ठीक उसी तरह पार्टी में वरिष्ठ नेताओं को सम्मान देना सबका कर्तव्य है।",
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  "category": "हिमाचल प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-10-06",
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