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  "type": "article",
  "title": "सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच बंद होने से मरीज बेहाल, बकाया विवाद के बीच कर्मचारियों का कामकाज ठप",
  "summary": "हिमाचल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच की सुविधा पूरी तरह प्रभावित हो गई है, क्योंकि लगभग 130 करोड़ रुपये का बकाया न मिलने से नाराज कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है.",
  "content": "हिमाचल प्रदेश के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करने वाले मरीजों के सामने गंभीर परेशानी खड़ी हो गई है. राज्य के चिकित्सा संस्थानों में लंबे समय से संचालित हो रही मुफ्त नैदानिक जांच की सेवाएं अचानक बाधित हो गई हैं. इस गतिरोध की मुख्य वजह सरकार और निजी सेवा प्रदाता के बीच लंबित भुगतान को लेकर उपजा वित्तीय संकट है, जिसके चलते सामान्य ओपीडी और भर्ती मरीजों को आवश्यक पैथोलॉजी जांचों के लिए भारी मुश्किलों से जूझना पड़ रहा है.\n\nलंबित बकाये और वेतन संकट के कारण अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार\nइस पूरे मामले की जड़ में सरकारी स्तर पर अटका हुआ बड़ा वित्तीय भुगतान है. संबंधित सेवा प्रदाता कंपनी का राज्य सरकार के पास करीब 130 करोड़ रुपये का बकाया फंसा हुआ है. प्रशासनिक स्तर पर यह धनराशि लंबे वक्त से जारी नहीं की गई है, जिसका सीधा असर जमीनी स्तर पर तैनात कर्मियों पर पड़ा है. फंड की तंगी के चलते कार्यबल को पिछले 2 से 3 महीनों से नियमित वेतन तक नहीं मिल पाया है. लगातार आर्थिक तंगी झेल रहे कर्मचारियों ने विरोध स्वरूप अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता चुना है. इस सामूहिक कार्य बहिष्कार के चलते समूचे प्रदेश में जांच केंद्रों पर ताले लटक गए हैं और रक्त, मूत्र समेत विभिन्न पैथोलॉजी जांचों की प्रक्रिया ठप पड़ी है.\n\nराजधानी शिमला के आईजीएमसी में भारी अफरा-तफरी\nहड़ताल का सबसे व्यापक प्रभाव शिमला स्थित प्रमुख चिकित्सा संस्थान आईजीएमसी में महसूस किया जा रहा है. इस शीर्ष अस्पताल में रोजाना लगभग 700 से 800 मरीज अपनी बीमारी के निदान हेतु नियमित रूप से लैब में पहुंचते थे. इन हजारों जांचों का खर्च सरकार वहन करती थी, जिससे आम नागरिकों को एक भी पैसा खर्च नहीं करना पड़ता था. वर्तमान में काउंटर और कलेक्शन सेंटर बंद रहने से दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से पहुंचे मरीजों को बैरंग लौटना पड़ रहा है. डॉक्टर पर्ची पर जांच लिख रहे हैं, परंतु संस्थान के भीतर परीक्षण की कोई व्यवस्था न होने से अफरा-तफरी का माहौल बन गया है.\n\nनिजी केंद्रों पर महंगी जांच कराने को मजबूर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग\nइस प्रशासनिक विवाद की सबसे कड़ी मार समाज के आर्थिक रूप से कमजोर तबके पर पड़ रही है. सामान्य नागरिक और गरीब परिवार भारी खर्चों से बचने के लिए सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का रुख करते हैं. अस्पताल के भीतर मुफ्त सुविधा बंद होने के बाद मजबूरन लोगों को निजी पैथोलॉजी केंद्रों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं. निजी केंद्रों पर विभिन्न परीक्षणों के लिए निर्धारित मोटी रकम अदा करनी पड़ रही है, जिससे उनके घरेलू बजट पर सीधा बोझ बढ़ गया है. सरकार और कंपनी के वित्तीय विवाद ने मरीजों की जेब और उनकी स्वास्थ्य निगरानी दोनों को एक साथ संकट में डाल दिया है. अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकारी स्तर पर यह गतिरोध कब दूर किया जाता है ताकि स्वास्थ्य केंद्र सामान्य रूप से कार्य कर सकें.\n\nइसका आप पर असर\nसरकारी अस्पतालों में मुफ्त टेस्ट रुकने से मरीजों को अपनी जेब से खर्च उठाना पड़ रहा है.\n\n• हिमाचल प्रदेश में: सरकारी चिकित्सा केंद्रों में मुफ्त जांच सुविधा पूरी तरह बंद हो गई है. अस्पताल पहुंचने वाले लोगों को नियमित पैथोलॉजी टेस्ट के लिए निजी लैब में भुगतान करना पड़ रहा है.\n• भारत में: सार्वजनिक स्वास्थ्य योजनाओं में पीपीपी मॉडल पर निर्भरता की कमियां सामने आई हैं. अन्य राज्यों के नागरिक भी सरकारी और निजी सेवा प्रदाताओं के अनुबंध विवादों से स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने को लेकर चिंतित हैं.\n• मरीजों के बजट पर असर: खून और पेशाब की सामान्य जांचों के लिए भी निजी केंद्रों पर भारी रकम चुकानी पड़ रही है. इससे गरीब और निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों पर अचानक बड़ा आर्थिक बोझ आ पड़ा है.\n• उपचार में देरी: जांच रिपोर्ट समय पर न मिलने से डॉक्टरों द्वारा सटीक दवा शुरू करने में बाधा आ रही है. गंभीर और भर्ती मरीजों को रोग निदान के लिए अधिक समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है.\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह संकट मुख्य रूप से सरकार द्वारा समय पर भुगतान न किए जाने और कर्मचारियों के वेतन रुकने के कारण पैदा हुआ है.\n\n• लंबित भुगतान: राज्य सरकार की तरफ से सेवा प्रदाता कंपनी को लगभग 130 करोड़ रुपये का भुगतान लंबे समय से अटका हुआ है. भारी भरकम बकाया जमा होने के कारण संचालन कंपनी की वित्तीय स्थिति चरमरा गई.\n• कर्मचारियों का बकाया वेतन: फंड के अभाव में लैब कर्मचारियों को बीते 2 से 3 महीनों से पगार नहीं मिली है. दैनिक जीवन के खर्च चलाने में असमर्थ होने पर कर्मियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला किया.\n• वार्ता का अभाव: सरकार और निजी एजेंसी के बीच समय रहते समाधान न निकल पाने से सेवाएं सीधे प्रभावित हुईं. जब तक बकाया राशि के भुगतान पर सहमति नहीं बनती, तब तक जांच केंद्र पुनः शुरू होना मुश्किल दिखाई दे रहा है.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. हिमाचल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त टेस्ट क्यों बंद हुए हैं?\nनिजी लैब कंपनी के कर्मचारियों ने वेतन न मिलने के कारण अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे जांच सेवाएं ठप हो गई हैं.\n\n2. कर्मचारियों को वेतन क्यों नहीं मिल पा रहा था?\nसरकार की तरफ से कंपनी का करीब 130 करोड़ रुपये का भुगतान अटका हुआ है, जिसके कारण 2 से 3 महीनों से पगार नहीं बंटी.\n\n3. शिमला के आईजीएमसी में रोजाना कितने मरीज प्रभावित हो रहे हैं?\nआईजीएमसी में रोजाना लगभग 700 से 800 मरीजों के टेस्ट प्रभावित हो रहे हैं, जो पहले मुफ्त में किए जाते थे.\n\n4. सरकारी अस्पताल में टेस्ट बंद होने पर मरीज क्या कर रहे हैं?\nमरीजों को मजबूरी में निजी लैब का रुख करना पड़ रहा है, जहां उन्हें भारी रकम खर्च करके जांच करवानी पड़ रही है.",
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  "publishedAt": "2026-11-03",
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