शिमला में असम सीएम का कांग्रेस पर हमला, 1984 दंगों पर माफी और मतदाता सूची विवाद पर पूछे तीखे सवाल शिमला में भाजपा की जनसभा के दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 1984 सिख विरोधी दंगों, राम मंदिर और मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर राहुल गांधी व कांग्रेस नेतृत्व पर कड़ा प्रहार किया। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में आयोजित एक राजनीतिक कार्यक्रम के मंच से असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने विपक्षी दल कांग्रेस और सांसद राहुल गांधी पर जोरदार वार किया। राजधानी दिल्ली में विपक्षी खेमे के शक्ति प्रदर्शन के जवाब में आयोजित इस पदयात्रा और जनसभा के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा, आस्था, चुनावी निष्पक्षता और ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़े कई गंभीर मुद्दे उठाए। अपने पूरे वक्तव्य में उन्होंने मुख्य रूप से 1984 के सिख विरोधी दंगों की नैतिक जवाबदेही तय करने, अयोध्या में राम मंदिर की यात्रा न करने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का विरोध करने की विपक्षी नीति पर तीखे सवाल खड़े किए। सिख विरोधी दंगों की ऐतिहासिक जवाबदेही और माफी का सवाल सार्वजनिक मंच से अपनी बात रखते हुए असम के मुख्यमंत्री ने 1984 के खूनी घटनाक्रम की ओर सबका ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि नवंबर का महीना देश के इतिहास में उस त्रासदी की याद दिलाता है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लगभग 3,000 निर्दोष सिखों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस भीषण हिंसा के पीछे उस वक्त के सत्ताधारी दल के प्रमुख नेताओं की सीधी भूमिका रही थी। सरमा ने कहा कि राहुल गांधी को पूरे देश और विशेषकर सिख समाज के सामने आकर इस बर्बरता के लिए स्पष्ट रूप से क्षमा मांगनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एक नवंबर के दिन दिल्ली के रामलीला मैदान में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने से पहले विपक्षी नेता को अपने दल के काले पन्नों का हिसाब देना चाहिए। उनके अनुसार वर्तमान व्यवस्था पर सवाल दागने से पहले पुरानी गलतियों और नागरिकों के साथ हुए अन्याय का सामना करना किसी भी नेतृत्व का बुनियादी दायित्व होता है। राम मंदिर और आस्था के मुद्दे पर सीधा प्रहार धार्मिक आस्था और जनभावनाओं के विषय को छूते हुए हिमंता बिस्वा सरमा ने विपक्षी राजनीति के दोहरे रवैये पर उंगली उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता ने कभी अयोध्या पहुंचकर नवनिर्मित भव्य राम मंदिर के दर्शन नहीं किए, लेकिन उन्हें चुनावी लाभ के लिए बहुसंख्यक हिंदू समाज का समर्थन चाहिए। ऐतिहासिक हमलावर बाबर का उल्लेख करते हुए उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि एक तरफ तुष्टीकरण का खुला खेल चल रहा है और दूसरी तरफ बहुसंख्यकों के धार्मिक सम्मान की निरंतर उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की वैचारिक दिशाहीनता से जनमानस में नाराजगी बढ़ती है। जब नेता सांस्कृतिक आस्था के प्रतीकों से दूरी बनाए रखते हैं और केवल मतदान के वक्त पहचान की बात करते हैं, तो उनकी विश्वसनीयता पूरी तरह संदिग्ध हो जाती है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर तकरार चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े विवादों का विश्लेषण करते हुए सरमा ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का मसला जोरदार ढंग से उठाया। उन्होंने कांग्रेस पर इस प्रशासनिक प्रक्रिया में अड़ंगा लगाने का दोष मढ़ा। उनके अनुसार यदि किसी सूची से जाली पते, मृत नागरिकों के नाम और दोहरे पंजीकरण हटाए जा रहे हैं, तो किसी भी जिम्मेदार राजनीतिक दल को इसका स्वागत करना चाहिए न कि इसके विरोध में अभियान चलाना चाहिए। असम के मुख्यमंत्री ने दावा किया कि मतदाता सूचियों को पारदर्शी बनाने का विरोध केवल इसलिए किया जा रहा है ताकि अवैध घुसपैठियों के फर्जी पहचान पत्रों की रक्षा की जा सके। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सीमा पार से आने वाले अनाधिकृत तत्वों को राजनीतिक छत्रछाया देकर वोट बैंक बनाना राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। ईवीएम और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर दोहरा मानदंड विपक्षी दलों द्वारा चुनावी हार के बाद अक्सर उठाई जाने वाली आपत्तियों का खंडन करते हुए सरमा ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम के उपयोग पर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने सवाल किया कि जब भी कांग्रेस को चुनावी शिकस्त मिलती है, तो वह तुरंत मशीनों और चुनाव आयोग पर सारा दोष मढ़ देती है। उन्होंने उदाहरण देकर पूछा कि अगर प्रणाली में कोई बुनियादी खामी है, तो हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे प्रांतों में गैर-भाजपा दल अपनी सरकारें कैसे बना पाए। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध चलाए जा रहे राजनीतिक अभियानों की आलोचना की। सरमा ने कहा कि जीत मिलने पर चुप रहना और हारने पर संवैधानिक संस्थाओं को लांछित करना किसी भी लोकतांत्रिक दल को शोभा नहीं देता। अगर विपक्ष को पूरी व्यवस्था पर अविश्वास है, तो उसे अपनी राजनीतिक सोच और रणनीतियों का आत्ममंथन करना चाहिए। पड़ोसी देशों की अस्थिरता और राष्ट्रीय नेतृत्व भाषण के एक अन्य हिस्से में हिमंता बिस्वा सरमा ने पड़ोसी देशों के मौजूदा हालात का हवाला दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें भारत की शांति व्यवस्था को बिगाड़कर यहां भी नेपाल और बांग्लादेश जैसी अस्थिरता पैदा करने की फिराक में हैं। अपने सख्त तेवर दिखाते हुए उन्होंने कहा कि देश विरोधी साजिशों को कभी पनपने नहीं दिया जाएगा। सरमा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके संरक्षण में देश विकास के पथ पर अग्रसर है और केंद्र की सत्ता किसी भी विघटनकारी ताकतों के दबाव में नहीं झुकेगी। जनता को यह साफ फैसला करना होगा कि वह राजनीतिक टकराव चाहती है या देश में स्थायी शांति और प्रगति की निरंतरता चाहती है। रोजगार के आंकड़ों पर सुक्खू सरकार की घेराबंदी स्थानीय मुद्दों पर आते हुए असम के मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार के कामकाज की समीक्षा की। उन्होंने दोनों राज्यों के रोजगार आंकड़ों की सीधी तुलना पेश की। सरमा ने बताया कि उनकी अपनी सरकार ने असम में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की थी, जबकि उन्होंने वास्तविक धरातल पर एक लाख सात हजार लोगों को नियुक्तियां प्रदान की हैं। इसके विपरीत उन्होंने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश में पांच लाख युवाओं को नौकरियां देने का वादा करके कांग्रेस सत्ता में आई थी, परंतु वह वादा केवल कागजों तक ही सीमित रह गया। उन्होंने प्रियंका गांधी द्वारा चुनावी सभाओं में किए गए आश्वासनों का उल्लेख करते हुए कहा कि झूठी घोषणाओं के दम पर जनता को भ्रमित करने की राजनीति अब बेनकाब हो चुकी है। अंत में उन्होंने हिमाचल की जनता से आने वाले समय में विकासपरक नीतियों के आधार पर निर्णय लेने की अपील की। इसका आप पर असर यह राजनीतिक टकराव आने वाले चुनावों में दलों की प्राथमिकताओं, वादों की जवाबदेही और मतदाता सूचियों की पारदर्शिता को सीधे प्रभावित करता है। • भारत में: राष्ट्रीय स्तर पर मतदाता सूची की जांच और 1984 दंगों पर माफी की मांग से राजनीतिक ध्रुवीकरण तेज होगा। इससे विभिन्न राज्यों में होने वाले चुनावों के दौरान दोनों प्रमुख दलों के बीच तीखा वैचारिक टकराव देखने को मिलेगा। • हिमाचल प्रदेश में: राज्य में सुक्खू सरकार द्वारा पांच लाख नौकरियों के वादे पर उठे सवालों से स्थानीय युवाओं में रोजगार को लेकर बहस छिड़ेगी। सरकारी भर्तियों की गति और चुनावी घोषणाओं की हकीकत स्थानीय राजनीति का मुख्य केंद्र बनेगी। • मतदाताओं के लिए: मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण होने से फर्जी और दोहरे नाम बाहर किए जाएंगे। आम नागरिकों को अपना नाम सूची में सुनिश्चित करने के लिए पहचान दस्तावेजों की समय पर पुष्टि करनी होगी। • चुनावी प्रक्रिया पर: ईवीएम और चुनाव आयोग पर बार-बार उठने वाले सवालों से संस्थागत विश्वसनीयता की बहस दोबारा उभरेगी। चुनाव आयोग द्वारा आगामी चुनावों में निगरानी के नियम और सख्त किए जा सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ यह तीखा वाकयुद्ध दिल्ली में कांग्रेस की महारैली के जवाब में शिमला में भाजपा द्वारा आयोजित शक्ति प्रदर्शन के दौरान सामने आया। दोनों दल आगामी चुनावी चक्र से पहले राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर बढ़त बनाने का प्रयास कर रहे हैं। • सीधा कारण: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शिमला में भाजपा की पदयात्रा और जनसभा को संबोधित करते हुए विपक्षी बयानों का आक्रामक जवाब दिया। यह आयोजन मुख्य रूप से दिल्ली में कांग्रेस के बड़े प्रदर्शन के प्रत्युत्तर में किया गया था। • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1984 के सिख विरोधी दंगों में दिल्ली में लगभग 3,000 लोग मारे गए थे, जिसकी राजनीतिक जवाबदेही को लेकर भाजपा लंबे समय से कांग्रेस पर हमलावर रही है। इसी के साथ राम मंदिर निर्माण और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भी दोनों पक्षों के रुख पूरी तरह विपरीत रहे हैं। • रोजगार और वादों की राजनीति: हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस द्वारा पांच लाख रोजगार के वादे को भाजपा ने अपनी असम सरकार के एक लाख सात हजार नौकरियों के वास्तविक आंकड़े से जोड़कर घेरा है। चुनावी गारंटियों की नाकामी को उजागर करना विपक्ष की प्रमुख राज्य रणनीति का हिस्सा बन चुका है। सवाल-जवाब 1. शिमला में भाजपा की जनसभा में किस मुख्य मुद्दे पर राहुल गांधी से माफी की मांग की गई? असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 1984 के सिख विरोधी दंगों में 3,000 लोगों की हत्या का हवाला देते हुए राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग की। 2. हिमंता बिस्वा सरमा ने राम मंदिर को लेकर कांग्रेस नेता पर क्या आरोप लगाया? उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने कभी अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन नहीं किए, फिर भी वे हिंदुओं से चुनावी वोट की उम्मीद करते हैं। 3. मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण पर असम सीएम ने क्या आपत्ति जताई? उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस फर्जी पते और मृत मतदाताओं की जांच का विरोध केवल घुसपैठियों को संरक्षण देने के लिए कर रही है। 4. ईवीएम विवाद पर सरमा ने किन राज्यों का उदाहरण देकर सवाल उठाया? उन्होंने हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए पूछा कि यदि मशीनों में गड़बड़ी थी तो वहां विपक्षी सरकारें कैसे बनीं। 5. हिमाचल प्रदेश और असम के रोजगार के आंकड़ों में क्या अंतर बताया गया? सरमा ने दावा किया कि असम सरकार ने एक लाख सात हजार नौकरियां दीं, जबकि हिमाचल की सुक्खू सरकार पांच लाख रोजगार का वादा पूरा करने में विफल रही। https://trendkia.com/himachal-pradesh/shimala-men-assam-cm-ka-congress-para-hamala-1984-dngon-para-maphi-aura-voter-list-vivada-para-puchhe-tikhe-savala-54817 TrendKia — Har trend, sabse pehle.