# शिमला के चौपाल थाने में तैनात आरक्षी ने सीनियर पर लगाया छुआछूत का आरोप, एससी-एसटी कानून में केस

> हिमाचल प्रदेश पुलिस में तैनात एक आरक्षी के साथ उसके सीनियर द्वारा जातिगत भेदभाव करने और बर्तन छूने से रोकने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है।

**Type:** article · **Category:** हिमाचल प्रदेश · **Published:** 2026-09-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/himachal-pradesh/shimla-ke-chopal-thane-men-tainata-arakshi-ne-siniyara-para-lagaya-chhuachhuta-ka-aropa-sc-st-kanuna-men-kesa-36924 · **Language:** Hindi
**Tags:** हिमाचल प्रदेश पुलिस, शिमला, चौपाल, जातिगत भेदभाव, एससी एसटी एक्ट, छुआछूत

हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग में सहकर्मी के साथ जातिगत भेदभाव और छुआछूत बरतने की गंभीर घटना सामने आई है। शिमला जिले के चौपाल पुलिस थाने में पदस्थ एक आरक्षी ने अपने वरिष्ठ सहयोगी पर जाति के आधार पर अपमानित करने और मानसिक प्रताड़ना देने का आरोप लगाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग ने संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर पूरे घटनाक्रम की छानबीन शुरू कर दी है।

## ड्यूटी पर तैनाती के पहले दिन ही जाति पूछने का आरोप
पीड़ित आरक्षी राजेश कुमार ने चौपाल के थाना प्रभारी को दी गई अपनी लिखित शिकायत में पूरे मामले का सिलसिलेवार विवरण दिया है। शिकायत पत्र के अनुसार, राजेश कुमार की ड्यूटी 27 जुलाई से बिरेंद्रा देवी की सुरक्षा गार्ड के तौर पर लगाई गई थी। पीड़ित का कहना है कि सुरक्षा गार्ड के इंचार्ज पद पर तैनात हेड कॉन्स्टेबल राकेश कुमार ने ड्यूटी के पहले दिन ही उससे उसकी जाति के बारे में पूछताछ की। जैसे ही राकेश कुमार को यह पता चला कि वह दलित समुदाय से ताल्लुक रखता है, उसने तुरंत छुआछूत भरा व्यवहार दिखाना शुरू कर दिया।

## धार्मिक मान्यता की आड़ में भोजन के बर्तन छूने से रोका
शिकायत में लगाए गए आरोपों के मुताबिक, हेड कॉन्स्टेबल राकेश कुमार ने खुद को महासू देवता का गूर बताया। उसने आरक्षी से कहा कि गूर होने के नाते उसे कई तरह के नियमों और परहेजों का पालन करना होता है। इसके बाद आरोपी ने दलित आरक्षी को सीधे चेतावनी देते हुए कहा कि वह खाने-पीने के बर्तनों को बिल्कुल न छुए, अन्यथा उसका देवता खुद ही इस बात को देख लेगा। गार्ड रूम के भीतर खाना पकाने और पानी पीने के बर्तनों से दूर रहने का दबाव बनाए जाने से पीड़ित को भारी मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा।

## सितंबर महीने में भी दोहराया गया भेदभावपूर्ण बर्ताव
आरक्षी राजेश कुमार के अनुसार, भेदभाव की यह प्रवृत्ति पहली घटना के बाद भी जारी रही। जब 11 सितंबर को उसी सुरक्षा दल में उसकी दोबारा तैनाती की गई, तब हेड कॉन्स्टेबल ने फिर से उसके साथ छुआछूत और अपमानजनक व्यवहार किया। इसके बाद 13 सितंबर को भी भोजन को लेकर दोबारा जातिगत टिप्पणी की गई और अनुचित आचरण दोहराया गया।

## फोन रिकॉर्डिंग का दावा और कानूनी कार्रवाई
पीड़ित आरक्षी ने अपनी शिकायत में यह स्पष्ट किया है कि उसके पास अपने मोबाइल फोन में इस पूरे घटनाक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है, जिसमें आरोपी द्वारा जाति पूछने और भेदभाव करने की बात स्वीकार की गई है। चौपाल थाना पुलिस ने इस औपचारिक शिकायत के आधार पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(r) के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच जारी है।

## इसका आप पर असर
यह घटना वर्दीधारी सुरक्षा बलों और सरकारी कार्यालयों के भीतर समानता के नियमों तथा कानूनी जवाबदेही को रेखांकित करती है।

- **भारत में:** सरकारी महकमों और अनुशासित पुलिस बलों में छुआछूत जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ कानून बेहद सख्त है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून के तहत कार्यस्थल पर ऐसा व्यवहार करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ बिना देरी आपराधिक मुकदमा चलाया जाता है।
- **हिमाचल प्रदेश में:** शिमला जिले के चौपाल थाने में हुई इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि राज्य में पुलिस कर्मियों द्वारा आंतरिक स्तर पर किए जाने वाले भेदभाव की शिकायतों को भी गंभीरता से लिया जा रहा है। इससे राज्य भर के अन्य कर्मियों को अनुचित सामाजिक दबाव के विरुद्ध कानूनी संरक्षण प्राप्त करने का भरोसा मिलता है।
- **कार्यस्थल नियमों पर:** किसी भी सार्वजनिक या साझा ड्यूटी रूम में जाति के आधार पर भोजन और बर्तनों के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाना पूर्णतः गैरकानूनी है। पीड़ित कर्मी ऐसे मामलों में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने के साथ डिजिटल साक्ष्य प्रस्तुत कर सकते हैं।
- **सख्त जवाबदेही:** कानून के तहत दर्ज एफआईआर के बाद विभागीय स्तर पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान रहता है। इससे सार्वजनिक संस्थानों में सेवा दे रहे सभी स्तर के अधिकारियों के लिए पारदर्शी आचरण बनाए रखना अनिवार्य हो जाता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह मामला सुरक्षा ड्यूटी के दौरान एक वरिष्ठ पुलिसकर्मी द्वारा अपने सहकर्मी के साथ जातिगत श्रेष्ठता और धार्मिक मान्यताओं का हवाला देकर छुआछूत बरतने के आरोपों के बाद सामने आया।

- **जातिगत पूछताछ:** सुरक्षा दल में आरक्षी की तैनाती के पहले ही दिन गार्ड इंचार्ज द्वारा उसकी जाति पूछे जाने और दलित पहचान सामने आने पर मतभेद शुरू हुआ।
- **धार्मिक परंपरा का हवाला:** आरोपी हेड कॉन्स्टेबल ने स्वयं को महासू देवता का गूर बताते हुए कथित धार्मिक नियमों और परहेज का बहाना बनाया। इसी आधार पर उसने आरक्षी को रसोई और पानी के बर्तनों से दूर रहने का आदेश दिया।
- **लगातार उपेक्षा और शिकायत:** जुलाई में शुरू हुआ यह आचरण सितंबर माह की ड्यूटी के दौरान भी दोहराया गया। जब मानसिक प्रताड़ना असहनीय हो गई और साक्ष्य एकत्र हो गए, तब पीड़ित ने औपचारिक प्राथमिकी दर्ज कराई।

## सवाल-जवाब

### 1. यह मामला किस पुलिस थाने और जिले से संबंधित है?
यह मामला हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के चौपाल पुलिस थाने में सामने आया है।

### 2. शिकायतकर्ता और आरोपी पुलिसकर्मियों के नाम क्या हैं?
शिकायतकर्ता आरक्षी का नाम राजेश कुमार है और आरोपी हेड कॉन्स्टेबल का नाम राकेश कुमार है।

### 3. पीड़ित आरक्षी को भोजन के बर्तन छूने से क्यों रोका गया?
आरोपी हेड कॉन्स्टेबल ने खुद को महासू देवता का गूर बताते हुए कथित धार्मिक परहेज का हवाला दिया और दलित आरक्षी को बर्तन छूने से मना किया।

### 4. पीड़ित आरक्षी की तैनाती किस सुरक्षा ड्यूटी में थी?
पीड़ित आरक्षी 27 जुलाई से बिरेंद्रा देवी की सुरक्षा गार्ड के रूप में तैनात था।

### 5. आरोपी हेड कॉन्स्टेबल के खिलाफ किन कानूनी धाराओं में मामला दर्ज किया गया है?
पुलिस ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(r) के तहत एफआईआर दर्ज की है।

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