शिमला के संजौली में सुरंग खुदाई से इमारतों पर मंडराया संकट, जांच के घेरे में 100 मीटर का दायरा ढली फोरलेन टनल परियोजना के चलते संजौली सिमिट्री के सैकड़ों मकानों में दरारें आ गई हैं, जिसके बाद प्रशासन ने ब्लास्टिंग रोककर 100 मीटर के दायरे में सघन सर्वेक्षण और तकनीकी जांच के निर्देश दिए हैं। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में फोरलेन विस्तार के तहत चल रहे भूमिगत सुरंग के काम ने स्थानीय बाशिंदों की चिंता बढ़ा दी है। ढली क्षेत्र में तैयार हो रही दोहरी सुरंग के ठीक ऊपरी हिस्से में स्थित संजौली सिमिट्री इलाके के आवासीय ढांचों में दरारें उभर आई हैं। रिहायशी इमारतों में आई इन दीवारों की खराबी से सैकड़ों परिवारों के आशियानों पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। घटनाक्रम की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह हरकत में आ गया है और जमीनी स्तर पर राहत एवं तकनीकी आकलन की रणनीति तैयार की गई है। प्रशासन की उच्चस्तरीय बैठक और प्रभावितों की सुनवाई संजौली सिमिट्री में भूमिगत निर्माण के कारण उभरी समस्याओं को लेकर शिमला के उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में प्रभावित निवासियों की चिंताओं को प्रमुखता से सुना गया और उनके त्वरित समाधान पर गहन विमर्श हुआ। राजस्व विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि वे पूरे इलाके में घूमकर ऐसे सभी घरों की सूची बनाएं जहां दरारें आई हैं और मरम्मत की तत्काल जरूरत है। बैठक में तय हुआ कि निर्माण कार्य कर रही एजेंसी इन चिन्हित इमारतों को ठीक करने के लिए एक मुकम्मल मरम्मत योजना पेश करेगी। कार्य की मजबूती और मानकों की पुष्टि के लिए लोक निर्माण विभाग के तकनीकी अधिकारियों को निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है। लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों द्वारा कार्य की गुणवत्ता की गहन जांच और आधिकारिक मंजूरी मिलने के बाद ही मरम्मत प्रक्रिया को पूर्ण माना जाएगा, ताकि स्थानीय नागरिकों की जान-माल की मुकम्मल सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। तीन चरणों में होगा 100 मीटर के दायरे का सर्वेक्षण निर्माणाधीन दोहरी सुरंग के ऊपरी सतह पर करीब 100 मीटर के पूरे इलाके का विस्तृत तकनीकी सर्वेक्षण करने का निर्णय लिया गया है। इस पूरी पड़ताल को तीन अलग-अलग हिस्सों में बांटकर अंजाम दिया जाएगा ताकि संभावित खतरे का सटीक अनुमान लग सके। सर्वेक्षण के शुरुआती चरण में 11-11 मीटर चौड़ी दोनों सुरंगों के ठीक ऊपर बने मकानों की स्थिति परखी जाएगी। इसके पश्चात दूसरे चरण में दोनों सुरंगों के मध्य मौजूद 20 मीटर चौड़े हिस्से पर टिकी इमारतों का संरचनात्मक जायजा लिया जाएगा। तीसरे व अंतिम चरण में सुरंग के दोनों किनारों पर 30-30 मीटर के फासले में स्थित सभी मकानों की सघन जांच कर डेटा तैयार किया जाएगा। ब्लास्टिंग की अनुमति तुरंत रद्द, तकनीकी विशेषज्ञों को बुलावा समीक्षा के दौरान भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में परियोजना स्थल पर किसी भी तरह का विस्फोट नहीं किया जा रहा है। इसके बावजूद एहतियाती कदम उठाते हुए जिला प्रशासन ने संबंधित कंपनी को जारी किए गए सभी ब्लास्टिंग परमिट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए हैं। दरारों के वास्तविक कारणों का वैज्ञानिक विश्लेषण करने के लिए आईआईटी रुड़की से तकनीकी विशेषज्ञों का दल बुलाने का औपचारिक अनुरोध भेजा गया है। यह दल मौके पर पहुंचकर जमीन की बनावट, निर्माण के झटकों और इमारतों की दीवारों पर पड़े असर का वैज्ञानिक अध्ययन करेगा। साथ ही विशेषज्ञ दल यह भी दिशा-निर्देश देगा कि भविष्य में सुरंग का शेष कार्य किन सावधानियों और इंजीनियरिंग तकनीकों के साथ पूरा किया जाए जिससे कोई नया नुकसान न हो। मौके पर पहुंचे अधिकारी, हर पहलू पर पैनी नजर दरारों की प्रारंभिक जानकारी सामने आते ही अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी और एसडीएम की टीमों ने पहले ही प्रभावित गलियों का दौरा कर लिया था। इसके बाद खुद उपायुक्त शिमला, पुलिस अधीक्षक तथा अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने संजौली सिमिट्री पहुंचकर जमीनी हकीकत देखी और निवासियों से सीधा संवाद किया। इस उच्चस्तरीय बैठक और निरीक्षण प्रक्रिया में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (कानून एवं व्यवस्था) पंकज शर्मा, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (प्रोटोकॉल) ज्ञान सागर नेगी, एसडीएम शिमला ग्रामीण मंजीत शर्मा, एनएचएआई के परियोजना निदेशक आनंद कुमार व उप प्रबंधक सुमित बंसल उपस्थित रहे। निर्माण कार्य से जुड़ी गवार कंस्ट्रक्शन कंपनी के महाप्रबंधक कुलदीप गुजराल, भारत कंस्ट्रक्शन के प्रोजेक्ट मैनेजर सदानंद मोहंती एवं एचआर मैनेजर रविंदर चंदेल तथा काला के नायब तहसीलदार लायक राम शर्मा और बी. एस. चौहान भी चर्चा में शामिल रहे। उपायुक्त ने स्थानीय लोगों को भरोसा दिया कि प्रशासन नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है और हालात पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। इसका आप पर असर संजौली सिमिट्री में सुरंग निर्माण से मकानों में आई दरारों के बाद प्रशासन ने सुरक्षा जांच और मरम्मत प्रक्रिया शुरू कर दी है। • भारत में: पहाड़ी क्षेत्रों में सुरंग और राजमार्ग परियोजनाओं के दौरान सुरक्षा मानकों और भूगर्भीय जांच को लेकर कड़े नियम लागू किए जाने की मांग जोर पकड़ेगी। राष्ट्रीय स्तर पर बुनियादी ढांचा निर्माण एजेंसियों को घनी आबादी वाले इलाकों में भूमिगत खुदाई के दौरान सतर्कता बढ़ानी होगी। • शिमला में: संजौली सिमिट्री के लगभग 100 मीटर के दायरे में रहने वाले परिवारों के घरों की तीन चरणों में सघन संरचनात्मक जांच की जाएगी। जिन मकानों में दरारें पाई जाएंगी, उनका रिपेयर रोडमैप निर्माण कंपनी तैयार करेगी और लोक निर्माण विभाग की हरी झंडी के बाद ही काम पूरा माना जाएगा। • स्थानीय नागरिकों के लिए: क्षेत्र में ब्लास्टिंग पर तुरंत रोक लगा दी गई है, जिससे लगातार होने वाले कंपन से राहत मिलेगी। प्रभावित मकान मालिकों को राजस्व विभाग के सर्वे में अपने नुकसान का पंजीकरण कराना होगा ताकि मरम्मत सुनिश्चित हो सके। • आवागमन और निर्माण पर: आईआईटी रुड़की के दल की तकनीकी रिपोर्ट आने तक निर्माण प्रक्रिया में जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं। इस तकनीकी जांच के कारण ढली फोरलेन परियोजना के सुरंग कार्य की गति कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकती है। ऐसा क्यों हुआ ढली फोरलेन परियोजना के तहत बनाई जा रही दोहरी सुरंग के भूमिगत निर्माण कार्य के चलते ऊपरी सतह पर स्थित संजौली सिमिट्री के मकानों में संरचनात्मक दरारें विकसित हुई हैं। • भूमिगत सुरंग निर्माण: जमीन के नीचे दोहरी सुरंग की खुदाई होने से ऊपरी सतह पर स्थित संजौली सिमिट्री की रिहायशी इमारतों की नींव और दीवारों पर दबाव पड़ा, जिससे दरारें उभर आईं। इस इलाके में करीब 100 मीटर के दायरे में मौजूद इमारतों पर सीधा प्रभाव पड़ा है। • ब्लास्टिंग संबंधी आशंकाएं: हालांकि राजमार्ग प्राधिकरण का कहना है कि वर्तमान में विस्फोटक ब्लास्टिंग नहीं की जा रही है, लेकिन पूर्व अनुमति और खुदाई के कंपनों को नुकसान का संभावित कारक माना जा रहा है, जिसके चलते ब्लास्टिंग अनुमति तुरंत रद्द की गई। • वैज्ञानिक मूल्यांकन की आवश्यकता: पहाड़ी ढलान पर जमीन की बनावट और सुरंग की खुदाई के संयुक्त प्रभाव का सटीक तकनीकी कारण अब तक तय नहीं हुआ है। वास्तविक भूगर्भीय कारणों की पहचान के लिए ही आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञ दल को विस्तृत अध्ययन के लिए बुलाया गया है। सवाल-जवाब 1. संजौली सिमिट्री के मकानों में दरारें क्यों आई हैं? ढली फोरलेन परियोजना के तहत भूमिगत दोहरी सुरंग के निर्माण कार्य के चलते ऊपरी रिहायशी इमारतों में दरारें उभरी हैं। 2. प्रशासन कितने दायरे के मकानों की जांच करवा रहा है? ट्विन टनल के ऊपर आने वाले लगभग 100 मीटर क्षेत्र में स्थित मकानों की तीन चरणों में विस्तृत तकनीकी जांच की जाएगी। 3. तीन चरणों की जांच प्रक्रिया किस तरह होगी? पहले चरण में 11-11 मीटर की टनल के ऊपर, दूसरे में दोनों सुरंगों के बीच 20 मीटर के हिस्से में और तीसरे में दोनों ओर 30-30 मीटर के दायरे में बने मकानों का आकलन होगा। 4. मकानों की मरम्मत कौन करेगा और इसकी निगरानी कौन संभालेगा? चिन्हित मकानों की मरम्मत निर्माण कंपनी के रोडमैप के तहत होगी, जिसकी गुणवत्ता का निरीक्षण लोक निर्माण विभाग के अधिकारी करेंगे। 5. क्या सुरंग निर्माण स्थल पर ब्लास्टिंग की अनुमति जारी है? नहीं, जिला प्रशासन ने निर्माण कंपनी को दी गई ब्लास्टिंग की अनुमति को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। 6. दरारों के कारणों की वैज्ञानिक जांच के लिए किसे बुलाया गया है? कारणों के तकनीकी और वैज्ञानिक अध्ययन तथा आगामी सुरक्षा उपायों के सुझाव के लिए आईआईटी रुड़की से विशेषज्ञ दल भेजने का अनुरोध किया गया है। https://trendkia.com/himachal-pradesh/shimla-ke-sanjauli-men-surnga-khudai-se-imaraton-para-mndaraya-snkata-jancha-ke-ghere-men-100-mitara-ka-dayara-36182 TrendKia — Har trend, sabse pehle.