शिमला में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शुरू किया नया दफ्तर, 20 करोड़ रुपये की लागत पर विपक्ष के आरोपों का दिया जवाब शिमला में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 20 करोड़ रुपये की लागत से तैयार अपने नए कार्यालय का सोमवार को उद्घाटन किया, जहां निर्माण अभी अधूरा है और मामला हाईकोर्ट में भी लंबित है। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर एक नया कदम सामने आया है, जहां मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को अपने नए कार्यालय परिसर का औपचारिक उद्घाटन किया। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 20 करोड़ रुपये का खर्च आया है। वर्तमान समय में इस भवन का निर्माण पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, बल्कि अभी केवल मुख्यमंत्री के बैठने का कक्ष ही पूरी तरह तैयार हो पाया है, जबकि भवन के शेष हिस्सों में निर्माण कार्य लगातार जारी है। हाईकोर्ट में लंबित याचिका और विरासत नियमों के आरोप इस नवनिर्मित भवन का निर्माण कानूनी जांच और विवादों के बीच हुआ है। इमारत के निर्माण को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका लंबित है, जिसमें हेरिटेज नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। कानूनी आपत्तियों के बावजूद प्रशासन ने इसके पहले चरण को क्रियान्वित किया है। जब मुख्यमंत्री से अदालत में विचाराधीन इस मामले के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने और कानूनी अधिकार का उपयोग करने की स्वतंत्रता है। नए परिसर की सुविधाएं और भविष्य का ढांचा प्रशासनिक योजना के अनुसार, इस पूरे परिसर में न केवल मुख्यमंत्री का दफ्तर होगा, बल्कि राज्य के मंत्रियों, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के कार्यालय भी स्थापित किए जाएंगे। वर्तमान में केवल मुख्यमंत्री कार्यालय ही कार्य करने योग्य स्थिति में पहुंचा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह निर्माण का केवल पहला चरण है। इस नए परिसर में व्यवस्थाओं का विस्तार किया गया है, जिसके तहत इसमें वातानुकूलित व्यवस्था के साथ 15 कमरे बनाए गए हैं और 40 वाहनों के लिए पार्किंग की सुविधा विकसित की गई है। पुराने सचिवालय में जगह की तंगी और विपक्ष पर पलटवार पुराने प्रशासनिक भवन की सीमाओं की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले के दफ्तर में लोगों और आगंतुकों के बैठने तक की पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं थी, जिसकी ओर अधिकारियों ने भी ध्यान दिलाया था। नए भवन में विधायकों से मिलने आने वाले आम नागरिकों के बैठने के लिए समुचित व्यवस्था तैयार की गई है। विपक्ष की तरफ से फिजूलखर्ची के लगाए जा रहे आरोपों पर जवाब देते हुए सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि फिजूलखर्ची उन्होंने नहीं की, बल्कि पूर्व की सरकार ने एक हजार करोड़ रुपये के संस्थान खोलकर गैर-जरूरी खर्च किया था। उन्होंने कहा कि यह कार्यालय किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं है, बल्कि अगले पचास साल तक कार्य करने के हिसाब से बनाया गया है, और यदि 15 साल बाद भाजपा का मुख्यमंत्री भी बनता है तो वह भी इसी स्थान से कार्य करेगा। इसका आप पर असर शिमला में मुख्यमंत्री कार्यालय के नए भवन के शुरू होने से सरकारी कामकाज और जनता की बैठकों के लिए अलग व्यवस्था बनेगी। • हिमाचल प्रदेश में: राज्य सचिवालय और मुख्यमंत्री कार्यालय में अपने प्रशासनिक कार्यों के लिए आने वाले लोगों को नए भवन में बैठने की बेहतर जगह मिलेगी। पहले चरण में केवल मुख्यमंत्री कक्ष शुरू होने से अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए अभी पुराने दफ्तरों पर निर्भर रहना होगा। • शिमला में: 40 वाहनों की नई पार्किंग व्यवस्था से मुख्य कार्यालय के आसपास गाड़ियों के ठहराव में कुछ सुधार होगा। भवन निर्माण को लेकर हाईकोर्ट में लंबित मामले पर आने वाले कानूनी आदेश से आगे के निर्माण पर असर पड़ सकता है। • जनता के लिए: विधायकों और अधिकारियों से मिलने आने वाले आम लोगों के लिए अलग प्रतीक्षा क्षेत्र तैयार किया गया है। शेष विभागों के स्थानांतरण के लिए नागरिकों को भवन का पूरा निर्माण समाप्त होने का इंतजार करना पड़ेगा। • सरकारी खर्च के स्तर पर: 20 करोड़ रुपये के कुल बजट में बने इस दफ्तर के रख-रखाव और उपयोग पर आगामी दिनों में प्रशासनिक संसाधन केंद्रित होंगे। विपक्ष और सरकार के बीच इस खर्च को लेकर जारी बहस बजट सत्रों में भी देखने को मिल सकती है। ऐसा क्यों हुआ पुराने कार्यालय में जगह की भारी कमी और प्रशासनिक विस्तार की आवश्यकता के कारण इस नए भवन का निर्माण शुरू किया गया था। • स्थान की अनुपलब्धता: पुराने कार्यालय परिसर में अधिकारियों और आम आगंतुकों के बैठने के लिए पर्याप्त स्थान मौजूद नहीं था, जिसे अधिकारियों ने भी रेखांकित किया था। इस कमी को दूर करने के लिए अधिक कमरों और बैठक व्यवस्था वाले नए परिसर की योजना बनाई गई। • विरासत नियमों का विवाद: निर्माण के दौरान हेरिटेज नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां इसकी याचिका अभी भी लंबित है। इस कानूनी प्रक्रिया के बीच ही प्रशासन ने चरणबद्ध तरीके से पहले हिस्से का उद्घाटन किया। • चरणबद्ध विकास रणनीति: पूरे ढांचे के तैयार होने में समय लगने के कारण प्रशासन ने इसे कई चरणों में बांटकर केवल तैयार हो चुके मुख्यमंत्री कक्ष का संचालन शुरू किया। शेष मंत्रियों और सचिवों के दफ्तरों का निर्माण कार्य अभी भी जारी रखा गया है। सवाल-जवाब 1. नए मुख्यमंत्री कार्यालय पर कुल कितनी लागत आई है? इस नए भवन के निर्माण पर 20 करोड़ रुपये की लागत आई है। 2. इस नए भवन में वर्तमान में क्या तैयार हुआ है? अभी केवल पहले चरण के तहत मुख्यमंत्री का कार्यालय कक्ष तैयार हुआ है, जबकि बाकी निर्माण जारी है। 3. परिसर में क्या सुविधाएं शामिल की गई हैं? इस परिसर में वातानुकूलित व्यवस्था के साथ 15 कमरे और 40 गाड़ियों की पार्किंग की सुविधा है। 4. हाईकोर्ट में यह मामला क्यों लंबित है? भवन निर्माण में हेरिटेज नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। 5. भवन पूरी तरह तैयार होने पर यहां किसके दफ्तर होंगे? मुख्यमंत्री के अलावा यहां राज्य के मंत्रियों, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के कार्यालय होंगे। https://trendkia.com/himachal-pradesh/shimla-men-mukhyamntri-sukhvinder-singh-sukhu-ne-shuru-kiya-naya-daphtara-20-karora-rupaye-ki-lagata-para-vipaksha-ke-aropon-ka-di-35560 TrendKia — Har trend, sabse pehle.