# शिमला में फोरलेन टनल की खुदाई से दरके मकान, निर्माण पर रोक के बाद न्यायिक जाँच की माँग

> शिमला के कई रिहायशी क्षेत्रों में फोरलेन टनल की वजह से भवनों में गंभीर दरारें आ गई हैं, जिसके बाद प्रशासन ने काम रोकते हुए उच्चस्तरीय तकनीकी जाँच कराने का फैसला लिया है।

**Type:** article · **Category:** हिमाचल प्रदेश · **Published:** 2026-09-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/himachal-pradesh/shimla-men-phoralena-tanala-ki-khudai-se-darake-makana-nirmana-para-roka-ke-bada-nyayika-jancha-ki-manga-36827 · **Language:** Hindi
**Tags:** शिमला, एनएचएआई, अनिरुद्ध सिंह, फोरलेन टनल, संजौली, मकानों में दरारें, हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में पहाड़ों के सीने को चीरकर बनाई जा रही भूमिगत सड़क परियोजना स्थानीय निवासियों के आशियानों के लिए बड़ा संकट बनकर उभरी है। संजौली, ढली तथा भट्टाकुफर समेत आसपास के रिहायशी इलाकों में फोरलेन टनल की खुदाई के चलते बहुमंजिला इमारतों की दीवारों और नींव में गहरी दरारें उभर आई हैं। कई ढांचों के जमींदोज होने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने आनन-फानन में काम रोकने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

## रिहायशी बस्तियों में दरारें और असुरक्षित होते आशियाने
पहाड़ी ढलानों पर बसे संजौली के समिट्री, भट्टाकुफर और ढली इलाकों में जमीन के भीतर लगातार हो रहे निर्माण कार्य का बुरा असर सतह पर दिखने लगा है। करीब 13 से 14 भवनों में ऐसी दरारें आई हैं जिनसे पूरा ढांचा डगमगाने लगा है। कई आवासीय परिसरों की स्थिति इतनी चिंताजनक हो चुकी है कि वहां रहना जानलेवा साबित हो सकता है। स्थिति की नाजुकता को भांपते हुए संजौली स्थित हेलीपोर्ट क्षेत्र के 4 घरों को पहले ही खाली करवा लिया गया है, ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

स्थानीय शांति विहार वार्ड के निवासियों ने इस पूरे प्रकरण को लेकर गहरा रोष प्रकट किया है। वर्षों की खून-पसीने की कमाई से तैयार घरों के कमजोर पड़ने के बाद लोग रात के समय अनहोनी की आशंका में जागने को मजबूर हैं। क्षेत्रवासियों का स्पष्ट कहना है कि आधुनिक निर्माण के नाम पर सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर काम किया जा रहा है, जिससे उनकी पीढ़ियों की संपत्ति बर्बाद होने की कगार पर पहुँच गई है।

## एनएचएआई की कार्यप्रणाली पर बरसे कैबिनेट मंत्री
इस संकट के सामने आने के बाद प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया और उसके अधीन जुटी ठेकेदार कंपनियों के कामकाज पर तीखे सवाल दागे हैं। उन्होंने परियोजना में इस्तेमाल की जा रही निर्माण सामग्री और कार्यपद्धति के मानकों पर गंभीर आपत्ति जताई। मंत्री ने खुले शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि एजेंसी ने जनसुरक्षा की अनदेखी बंद नहीं की, तो राज्य सरकार इस मसले को न्यायपालिका के समक्ष ले जाने से बिल्कुल पीछे नहीं हटेगी।

कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने निर्माण गुणवत्ता पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा, "एनएचएआई पूरी तरह से सब-स्टेंडर्ड कार्य कर रही है, जिसके चलते संजौली, समिट्री भट्टाकुफर और ढली क्षेत्र में करीब 13 से 14 भवनों में बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं।" उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के कुछ अधिकारी केवल अपने निजी लाभ में लगे हैं और उन्हें आम नागरिकों के जीवन की कोई परवाह नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि निर्माण कार्य के दौरान पहले भी एक भवन गिर चुका है, फिर भी जरूरी सबक नहीं सीखे गए।

## प्रशासन का कड़ा रुख, निर्माण अनुमति निरस्त
हालात का जायजा लेने के लिए शिमला के उपायुक्त अनुपम कश्यप स्वयं प्रभावित इलाकों में पहुंचे। जमीनी स्तर पर इमारतों को पहुंचे नुकसान का मुआयना करने के उपरांत जिला प्रशासन ने निर्माण के लिए पूर्व में जारी की गई अनुमति को तुरंत प्रभाव से वापस ले लिया। मौके पर फोरलेन टनल से जुड़े सभी कार्यों पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी गई है, ताकि मकानों में कंपन के कारण दरारें और अधिक चौड़ी न हों।

प्रशासन की इस पाबंदी के बाद अब पूरी परियोजना की तकनीकी व स्वतंत्र पड़ताल कराने की योजना बनाई जा रही है। अनिरुद्ध सिंह ने स्पष्ट किया है कि वे इस संवेदनशील विषय पर राज्य के मुख्यमंत्री तथा मुख्य सचिव के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक करने जा रहे हैं। उनका प्रस्ताव है कि जांच के लिए गठित होने वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति में पर्यावरणविद, भूवैज्ञानिक और संबंधित विभागों के शीर्ष तकनीकी विशेषज्ञ शामिल किए जाएं। निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मंत्री ने आग्रह किया है कि समिति की कमान किसी सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश अथवा न्यायाधीश को सौंपी जानी चाहिए ताकि दोषियों की जवाबदेही तय हो सके।

## मुआवजे और वैज्ञानिक मूल्यांकन की उठी मांग
प्रभावित शांति विहार वार्ड के एक प्रतिनिधिमंडल ने कैबिनेट मंत्री से भेंट कर अपनी पीड़ा साझा की। इस शिष्टमंडल में पार्षद विनीत शर्मा, नरेंद्र ठाकुर तथा पूर्व पार्षद राजेंद्र चौहान शामिल रहे। स्थानीय प्रतिनिधियों ने सरकार के सामने मांग रखी है कि संकटग्रस्त भवनों का विधिवत अधिग्रहण किया जाए और प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।

प्रभावितों का एक दल जल्द ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के समक्ष पेश होकर अपनी आपबीती सुनाएगा। नागरिकों की सबसे प्रमुख मांग यह है कि जब तक स्वतंत्र वैज्ञानिक एवं भूगर्भीय विशेषज्ञ पूरी सुरक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करते, तब तक किसी भी तरह के भारी उत्खनन कार्य को आगे न बढ़ाया जाए। इसके साथ ही भविष्य में भूस्खलन अथवा धंसाव से बचाव के पुख्ता उपाय लागू करने की बात भी उठाई गई है।

## इसका आप पर असर
शिमला में टनल निर्माण के चलते मकानों में आई दरारों ने पहाड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की सुरक्षा और स्थानीय नागरिकों की संपत्ति के संरक्षण पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

- **हिमाचल प्रदेश में:** पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के लिए निर्माण सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता बन गई है, जिसके चलते टनल के आसपास के इलाकों में मकानों के ढांचागत नुकसान का खतरा मंडरा रहा है। संजौली, ढली और भट्टाकुफर के निवासी जब तक वैज्ञानिक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक निर्माण कार्य पर रोक और प्रभावित संपत्तियों के लिए मुआवजे की मांग कर सकते हैं।
- **भारत में:** राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर अन्य पहाड़ी राज्यों में भी नियामक निगरानी सख्त हो सकती है। केंद्र और राज्य सरकारों को संवेदनशील ढलानों पर सुरंग खुदाई के दौरान स्थानीय आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नए दिशा-निर्देश लागू करने पड़ सकते हैं।
- **प्रभावित परिवारों के लिए:** 4 परिवारों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा चुका है और अन्य 13-14 इमारतों के लोग भी बेघर होने के खतरे का सामना कर रहे हैं। इन नागरिकों को अपने क्षतिग्रस्त भवनों के तकनीकी मूल्यांकन के लिए प्रशासन से संपर्क बनाए रखना होगा ताकि राहत और पुनर्वास प्रक्रिया शुरू हो सके।
- **यातायात व सड़क ढांचा:** फोरलेन सुरंग का काम रुकने से परियोजना की पूर्णता अवधि आगे बढ़ सकती है, जिससे राजधानी के प्रवेश द्वारों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित रहेगी। यात्रियों को आगामी कुछ समय तक वैकल्पिक मार्गों और मौजूदा संकरी सड़कों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
शिमला के संजौली और आसपास के क्षेत्रों में इमारतों में गंभीर दरारें आने का मुख्य कारण भूमिगत टनल निर्माण के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों की कथित अनदेखी और सब-स्टैंडर्ड कार्यपद्धति है। भारी मशीनरी और सुरंग की खुदाई से उत्पन्न कंपन ने कमजोर पहाड़ी सतह को हिलाकर रख दिया है।

- **खुदाई और कंपन का प्रभाव:** घनी आबादी वाले संजौली, समिट्री भट्टाकुफर और ढली के नीचे टनल की खुदाई के चलते पहाड़ी ढलानों पर कंपन हुआ, जिसके कारण ऊपर स्थित बहुमंजिला मकानों की दीवारों और नींव में गहरी दरारें आ गईं। कमजोर भूगर्भीय संरचना पर लगातार दबाव पड़ने से ढांचों की मजबूती प्रभावित हुई।
- **सब-स्टैंडर्ड कार्य और लापरवाही के आरोप:** कैबिनेट मंत्री के अनुसार परियोजना को अंजाम दे रही निर्माण एजेंसी और ठेकेदार घटिया गुणवत्ता के साथ काम कर रहे हैं तथा सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी की गई। तकनीकी रूप से संवेदनशील ढलानों पर आवश्यक रेट्रोफिटिंग और सुरक्षात्मक उपाय न किए जाने से पहले भी एक भवन गिर चुका था।
- **स्वतंत्र निगरानी की कमी:** निर्माण से पहले और उसके दौरान व्यापक भूगर्भीय और पर्यावरणीय प्रभाव के स्वतंत्र वैज्ञानिक मूल्यांकन का अभाव रहा। प्रशासनिक स्तर पर समय रहते कड़े निरीक्षण न होने से खतरा बढ़ता गया, जिसके बाद अब जिला प्रशासन ने काम रोककर सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अगुवाई में जांच समिति गठित करने की सिफारिश की है।

## सवाल-जवाब

### 1. शिमला में किन इलाकों के मकानों में दरारें आई हैं?
शिमला के संजौली, समिट्री, भट्टाकुफर, ढली और शांति विहार क्षेत्र के करीब 13 से 14 भवनों में बड़ी दरारें आई हैं।

### 2. प्रशासन ने इस मामले में क्या त्वरित कार्रवाई की है?
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने निर्माण की अनुमति वापस लेते हुए फोरलेन टनल के काम को तुरंत रोकने के आदेश दिए हैं।

### 3. संजौली में कितने मकान खाली करवाए गए हैं?
खतरे को देखते हुए संजौली के हेलीपोर्ट क्षेत्र में स्थित 4 घरों को खाली करवाया जा चुका है।

### 4. कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने एनएचएआई पर क्या आरोप लगाए हैं?
उन्होंने एनएचएआई पर सब-स्टैंडर्ड काम करने, सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने और अफसरों द्वारा पैसे बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

### 5. जांच समिति के गठन को लेकर क्या सुझाव दिया गया है?
मंत्री ने भूवैज्ञानिकों व पर्यावरणविदों की एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाने और उसकी अध्यक्षता किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने का सुझाव दिया है।

### 6. प्रभावित क्षेत्र के लोगों की मुख्य मांगें क्या हैं?
स्थानीय लोग वैज्ञानिक नुकसान आकलन, क्षतिग्रस्त संपत्तियों के अधिग्रहण, उचित मुआवजे और विशेषज्ञों की हरी झंडी तक काम बंद रखने की मांग कर रहे हैं।

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