# सिरमौर में बंद सड़क ने बढ़ाई बेबसी, बुजुर्ग मां का शव डंडे के सहारे छह किलोमीटर कंधे पर ढोने को मजबूर हुआ बेटा

> हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में भूस्खलन से बाधित सड़क बहाल न होने पर ग्रामीणों को एक बुजुर्ग महिला की पार्थिव देह छह किलोमीटर तक पैदल ढोनी पड़ी।

**Type:** article · **Category:** हिमाचल प्रदेश · **Published:** 2026-10-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/himachal-pradesh/sirmaur-men-bnda-saraka-ne-barhai-bebasi-bujurga-man-ka-shava-dnde-ke-sahare-chhaha-kilomitara-kndhe-para-dhone-ko-majabura-hua-be-43866 · **Language:** Hindi
**Tags:** सिरमौर, हिमाचल प्रदेश, नाहन, सड़क बहाली, धारटीधार, भूस्खलन, ग्रामीण समस्याएं

पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में बारिश का दौर थमने के बाद भी दुर्गम इलाकों में बुनियादी रास्तों की बदहाली स्थानीय निवासियों की मुश्किलें बढ़ा रही है। सिरमौर जिले के एक सुदूर ग्रामीण इलाके में दिल को झकझोर देने वाला वाकया सामने आया है, जहाँ संपर्क मार्ग ठप होने के चलते एक परिवार को अपनी बुजुर्ग परिजन का शव अस्पताल से घर तक पहुँचाने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी। वाहन आगे जाने का रास्ता न मिलने पर ग्रामीणों ने बांस के डंडे का सहारा लिया और पार्थिव देह को छह किलोमीटर पैदल उठाकर गाँव तक पहुँचाया, जिसके बाद ही उनका अंतिम संस्कार संभव हो सका।

## चंडीगढ़ में उपचार के दौरान तोड़ा था दम
नाहन उपमंडल के अंतर्गत धारटीधार इलाके की ग्राम पंचायत घगेड़ा में स्थित टीना गुलरवाला गाँव की अस्सी साल की निवासी परमा देवी काफी समय से अस्वस्थ चल रही थीं। शनिवार की देर रात अचानक उनकी हालत अधिक नाजुक हो गई, जिसके बाद परिजनों ने उन्हें तुरंत नाहन के अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें चंडीगढ़ स्थित पीजीआई रेफर कर दिया। वहाँ चिकित्सकों की तमाम कोशिशों के बावजूद रविवार तड़के करीब चार बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

## पथरीले पगडंडी रास्तों पर छह किलोमीटर की कठिन यात्रा
अस्पताल से कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद परिजन शव वाहन के जरिए पार्थिव शरीर को लेकर गृह क्षेत्र के लिए रवाना हुए। गाड़ी धारटीधार और रामा घगेड़ा के बीच संपर्क मार्ग तक तो पहुँच गई, मगर टीना गुलरवाला की ओर मुड़ने वाली सड़क मलबे और टूट-फूट की वजह से पूरी तरह अवरुद्ध थी। चारपहिया वाहन का आगे जाना असंभव देखकर गाँव के लोग एकत्र हुए। उन्होंने शव को एक मजबूत डंडे से सुरक्षित बांधा और बारी-बारी से अपने कंधों पर टिकाकर ऊबड़-खाबड़, चट्टानी और जोखिम भरे रास्ते से चलना शुरू किया। करीब छह किलोमीटर की यह कठिन पैदल दूरी तय करके वे गाँव पहुँचे और फिर वहाँ के श्मशान घाट पर विधि-विधान से दाह संस्कार संपन्न हुआ।

## बरसात के आरंभ से ही ठप पड़ा है संपर्क मार्ग
इलाकाई बाशिंदों का कहना है कि यह सड़क इस साल बारिश का मौसम शुरू होने के बाद से ही क्षतिग्रस्त होकर बंद पड़ी है। राज्य में मॉनसून का आगमन तीस जून को हुआ था और तीन अक्टूबर को उसकी विदाई भी दर्ज की जा चुकी है। इस बार मौसमी बरसात सामान्य से कम रहने के बावजूद पहाड़ी ढलानों से गिरे मलबे को हटाकर इस मार्ग को यातायात योग्य नहीं बनाया जा सका।

## साल 2014 में हुआ था आठ किलोमीटर लंबे मार्ग का उद्घाटन
स्थानीय विवरण के अनुसार, लगभग आठ किलोमीटर की लंबाई वाले इस टीना गुलरवाला मार्ग की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। उस वक्त नाहन क्षेत्र के तत्कालीन विधायक राजीव बिंदल ने इसका विधिवत उद्घाटन किया था। यह संपर्क रास्ता आगे जाकर जलमूसा तथा कोलर के निकट स्थित कटासन मंदिर के पास पांवटा साहिब-कालाअंब राष्ट्रीय राजमार्ग से जा मिलता है। इलाके के प्रमुख हाईवे को जोड़ने वाला यह अहम लिंक मार्ग महीनों से बंद रहने से ग्रामीणों की दैनिक आवाजाही और आपातकालीन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हैं।

## इसका आप पर असर
पहाड़ी इलाकों में बुनियादी सड़कों की मरम्मत में देरी सीधे तौर पर ग्रामीण परिवारों के जीवन और स्वास्थ्य सुरक्षा को संकट में डालती है।

- **भारत में:** पहाड़ी राज्यों में मानसून के बाद ग्रामीण सड़कों की धीमी बहाली यह रेखांकित करती है कि आपदा प्रबंधन में अंतिम छोर तक त्वरित राहत पहुँचाना कितना आवश्यक है। नीतिगत स्तर पर दुर्गम इलाकों के लिए वैकल्पिक संपर्क साधन और त्वरित मलबा निस्तारण प्रणाली मजबूत करने की दरकार है।
- **सिरमौर में:** टीना गुलरवाला और घगेड़ा क्षेत्र के निवासियों को किसी भी आकस्मिक बीमारी या मृत्यु के समय पैदल आवाजाही पर निर्भर रहना पड़ रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग तक जुड़ने वाले इस लिंक मार्ग के बंद रहने से स्थानीय किसानों, मरीजों और छात्रों की रोजमर्रा की यात्रा बुरी तरह बाधित है।

## ऐसा क्यों हुआ
पहाड़ी क्षेत्र में मानसून के दौरान हुए भूस्खलन और मलबे की समय पर सफाई न हो पाने के कारण संपर्क मार्ग कई महीनों से पूरी तरह बाधित पड़ा रहा।

- **मानसून जनित भूस्खलन:** तीस जून को राज्य में बारिश का मौसम शुरू होने के बाद पहाड़ी ढलानों से मिट्टी और पत्थर गिरने से संपर्क सड़क बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी।
- **मरम्मत में विलंब:** तीन अक्टूबर को मानसून समाप्त होने और सामान्य से कम वर्षा दर्ज किए जाने के बाद भी संबंधित प्रशासन आठ किलोमीटर लंबे इस मार्ग से रुकावटें हटाने में असफल रहा।
- **वैकल्पिक मार्ग का अभाव:** टीना गुलरवाला गाँव को मुख्य सड़क और हाईवे से जोड़ने वाला कोई अन्य पक्का संपर्क मार्ग उपलब्ध नहीं होने के कारण ग्रामीणों के सामने पैदल चलने के सिवा कोई चारा नहीं बचा।

## सवाल-जवाब

### 1. यह घटना किस स्थान पर हुई?
यह मामला हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के नाहन उपमंडल में धारटीधार इलाके की घगेड़ा पंचायत स्थित टीना गुलरवाला गाँव का है।

### 2. बुजुर्ग महिला का निधन कहाँ और कब हुआ था?
अस्सी वर्षीय परमा देवी का निधन रविवार सुबह करीब चार बजे पीजीआई चंडीगढ़ में इलाज के दौरान हुआ।

### 3. ग्रामीणों को शव डंडे से बांधकर पैदल क्यों ले जाना पड़ा?
टीना गुलरवाला जाने वाली सड़क लंबे समय से भूस्खलन के कारण बंद थी, जिससे शव वाहन आगे नहीं जा सका और छह किलोमीटर पैदल चलना पड़ा।

### 4. टीना गुलरवाला सड़क का निर्माण कब हुआ था?
लगभग आठ किलोमीटर लंबी इस सड़क का निर्माण 2014 में हुआ था और इसका उद्घाटन तत्कालीन विधायक राजीव बिंदल ने किया था।

### 5. हिमाचल प्रदेश में इस साल मानसून की अवधि क्या रही?
राज्य में इस साल मानसून ने तीस जून को दस्तक दी थी और तीन अक्टूबर को उसकी विदाई हुई थी।

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