सोलन से चुनावी दावेदारी और संन्यास के सवाल पर मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल ने साधी चुप्पी, बोले हर उम्र में काम जरूरी हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल ने अंतरराष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस पर राजनीति से संन्यास के कयासों को टालते हुए कहा कि चुनाव लड़ने का निर्णय पार्टी आलाकमान तय करेगा। हिमाचल प्रदेश सरकार में वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल के सियासी भविष्य को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं एक बार फिर गर्म हो गई हैं। 86 वर्ष की आयु पार कर चुके डॉ. शांडिल ने अंतरराष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस के अवसर पर शिमला में आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने उपस्थित बुजुर्गों को शुभकामनाएं प्रेषित कीं और स्वयं को नई ऊर्जा तथा उत्साह से भरा हुआ बताया। जब उनसे सार्वजनिक जीवन तथा चुनावी राजनीति से विश्राम लेने को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कोई सीधा जवाब न देते हुए अपने पत्ते नहीं खोले। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी जिम्मेदारी को संभालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, जिससे उनके सक्रिय राजनीति में बने रहने के कयासों को नया बल मिला है। सोलन सीट पर दावेदारी और आलाकमान का निर्णय सोलन विधानसभा क्षेत्र से आगामी चुनाव में उनकी अपनी उम्मीदवारी अथवा उनके पुत्र के चुनावी मैदान में उतरने को लेकर पूछे गए प्रश्न पर कैबिनेट मंत्री ने गेंद पार्टी नेतृत्व के पाले में डाल दी। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाए जाने का अंतिम निर्णय पार्टी का आलाकमान ही करेगा। हालांकि पूर्व में वे कई अवसरों पर बातों ही बातों में राजनीति से निवृत्ति की ओर इशारा करते रहे हैं, लेकिन शिमला के इस मंच से उन्होंने अपने भावी राजनीतिक कदमों पर कोई अंतिम या स्पष्ट रुख जाहिर नहीं किया। सेना का अनुभव और निरंतर सक्रियता का संकल्प अपने लंबे सार्वजनिक जीवन का उल्लेख करते हुए डॉ. शांडिल ने कहा कि वे वर्ष 1999 से जनता का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और विधायक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि आयु कभी भी उनके जनसेवा के कार्यों में रुकावट बनकर सामने नहीं आई। अपने पुराने दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि जब उन्होंने 19 वर्ष की अल्पायु में युद्ध लड़ा था, तब से उनका यह दृढ़ विश्वास रहा है कि व्यक्ति की उम्र चाहे जो भी हो, उसे निरंतर कर्मशील रहना चाहिए और समाज के लिए कार्य करते रहना चाहिए। सैनिक पृष्ठभूमि से लेकर सियासी सफर तक डॉ. धनीराम शांडिल का जीवन सैन्य सेवा और उच्च शिक्षा का अनूठा संगम रहा है। वे भारतीय सेना में कर्नल के पद से सेवानिवृत्त होने के पश्चात लोकतांत्रिक राजनीति में दाखिल हुए थे। उन्होंने वर्ष 1996 में एचपीयू से पीएचडी की उपाधि भी प्राप्त की थी। विधानसभा में प्रवेश करने से पूर्व वे संसद के निचले सदन यानी लोकसभा के सदस्य भी रह चुके हैं तथा पूर्ववर्ती वीरभद्र सरकार में भी कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। चुनावी समीकरणों की बात करें तो सोलन विधानसभा सीट पर उन्होंने पिछले दो चुनावों में अपने ही दामाद राजेश कश्यप को शिकस्त देकर विधानसभा में अपनी जगह बनाई है। उनके पारिवारिक दायरे में उनकी धर्मपत्नी, एक पुत्र तथा एक पुत्री शामिल हैं। इसका आप पर असर हिमाचल प्रदेश की सोलन विधानसभा सीट पर राजनीतिक प्रतिनिधित्व और स्थानीय टिकट वितरण के समीकरण सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। • हिमाचल प्रदेश में: सत्ताधारी दल के भीतर वरिष्ठ नेताओं के संन्यास और नई पीढ़ी को टिकट देने के नीतिगत रुख पर असर पड़ेगा। इससे आगामी चुनावी टिकट वितरण में आलाकमान की रणनीति पर अन्य बुजुर्ग नेताओं की नजरें भी टिकी रहेंगी। • सोलन में: सोलन सीट पर स्थानीय मतदाताओं और कार्यकर्ताओं के सामने उम्मीदवारी को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी। यदि शांडिल स्वयं मैदान में उतरते हैं या अपने बेटे को आगे लाते हैं, तो स्थानीय चुनावी मुकाबला पूर्ववत पारिवारिक प्रतिद्वंद्विता के इर्द-गिर्द सिमट सकता है। • प्रशासनिक कार्यों पर: वर्तमान में कैबिनेट मंत्री के रूप में उनके दायित्वों और क्षेत्र के विकास कार्यों की निरंतरता बनी रहेगी। वरिष्ठ नेतृत्व के सक्रिय रहने से सोलन क्षेत्र से जुड़े नीतिगत फैसलों में स्थिरता देखने को मिलेगी। • वरिष्ठ नागरिकों के लिए: 86 वर्ष की उम्र में सार्वजनिक जीवन में सक्रियता का संदेश स्थानीय स्तर पर बुजुर्ग आबादी के लिए एक सामाजिक प्रेरणा बनेगा। यह सार्वजनिक मंचों पर वरिष्ठ नागरिकों की उत्पादकता और भागीदारी को लेकर सकारात्मक संदेश देता है। ऐसा क्यों हुआ यह राजनीतिक अनिश्चितता शिमला में आयोजित एक सार्वजनिक समारोह के दौरान वरिष्ठ मंत्री से पूछे गए सवालों और उनके नपे-तुले जवाबों के बाद सामने आई है। • सार्वजनिक कार्यक्रम में बयान: शिमला में अंतरराष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे डॉ. शांडिल से पत्रकारों ने उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर सीधा सवाल पूछ लिया था। उन्होंने संन्यास के संकेत देने के बजाय यह कहकर जवाब दिया कि वे हर काम के लिए सक्षम और तैयार हैं। • टिकट वितरण का द्वंद्व: सोलन विधानसभा क्षेत्र में आगामी चुनाव के लिए उनके स्वयं चुनाव लड़ने अथवा अपने बेटे को राजनीतिक विरासत सौंपने को लेकर स्थानीय स्तर पर लंबे समय से अटकलें लगाई जा रही थीं। शांडिल ने इस पर अंतिम निर्णय आलाकमान पर छोड़कर स्वयं को विकल्पों के लिए खुला रखा। • पारिवारिक व चुनावी पृष्ठभूमि: डॉ. शांडिल पिछले दो चुनावों में अपने ही दामाद राजेश कश्यप को हराकर विधानसभा पहुंचे हैं। इस कड़े राजनीतिक मुकाबले और पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण सोलन सीट पर उनके अगले कदम को लेकर राजनीतिक दलों में उत्सुकता स्वाभाविक है। सवाल-जवाब 1. डॉ. धनीराम शांडिल की वर्तमान आयु कितनी है? डॉ. धनीराम शांडिल की वर्तमान आयु 86 वर्ष है। 2. क्या डॉ. शांडिल ने राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की है? नहीं, उन्होंने संन्यास पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं और कहा है कि वे हर काम के लिए तैयार हैं। 3. सोलन सीट से अगला चुनाव कौन लड़ेगा? डॉ. शांडिल ने कहा है कि सोलन सीट से वे खुद लड़ेंगे या उनका बेटा, इसका अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान करेगा। 4. डॉ. शांडिल राजनीति में आने से पहले किस पद पर थे? वे राजनीति में आने से पहले भारतीय सेना में कर्नल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। 5. डॉ. शांडिल कब से विधायक हैं? डॉ. धनीराम शांडिल वर्ष 1999 से विधायक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। 6. सोलन से उन्होंने पिछले दो चुनावों में किसे हराया है? उन्होंने सोलन सीट से पिछले दो विधानसभा चुनावों में अपने दामाद राजेश कश्यप को चुनाव हराया है। 7. डॉ. शांडिल ने पीएचडी कब और कहां से की थी? उन्होंने वर्ष 1996 में एचपीयू से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की थी। https://trendkia.com/himachal-pradesh/solana-se-chunavi-davedari-aura-snnyasa-ke-savala-para-mntri-dr-dhani-ram-shandil-ne-sadhi-chuppi-bole-hara-umra-men-kama-jaruri-41642 TrendKia — Har trend, sabse pehle.