# स्वर्ण पदक विजेता कबड्डी खिलाड़ियों को हिमाचल सरकार देगी 1 करोड़ का नकद पुरस्कार, मुख्यमंत्री ने मानी मांग

> एशियन गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम की हिमाचली खिलाड़ियों की मांग पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने नकद पुरस्कार राशि 33 लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये करने और योग्यतानुसार नौकरी देने का भरोसा दिया।

**Type:** article · **Category:** हिमाचल प्रदेश · **Published:** 2026-10-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/himachal-pradesh/svarna-padaka-vijeta-kabaddi-khilariyon-ko-himachal-sarakara-degi-1-karora-ka-nakada-puraskara-cm-sukhu-ne-mani-manga-43312 · **Language:** Hindi
**Tags:** पुष्पा राणा, सुखविंदर सिंह सुक्खू, एशियन गेम्स 2026, महिला कबड्डी, हिमाचल प्रदेश, स्वर्ण पदक

जापान के आइची-नागोया में संपन्न हुए एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए देश की झोली में स्वर्ण पदक डाला। इस दल में शामिल हिमाचल प्रदेश की महिला खिलाड़ियों ने शिमला पहुंचकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से शिष्टाचार भेंट की। भारतीय टीम का नेतृत्व करने वाली पुष्पा राणा के साथ अन्य खिलाड़ियों ने राज्य सरकार की ओर से पूर्व में घोषित 33-33 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि पर असंतोष व्यक्त किया। खिलाड़ियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष पक्ष रखते हुए अन्य स्वर्ण पदक विजेताओं के समान 1 करोड़ रुपये की सम्मान राशि देने का आग्रह किया, जिस पर मुख्यमंत्री ने सहमति जताते हुए इसे पूरा करने का आश्वासन दिया।

## नकद पुरस्कार राशि बढ़ाने पर बनी सहमति
शिमला में आयोजित इस बैठक के बाद भारतीय टीम की कप्तान पुष्पा राणा ने बातचीत के दौरान बताया कि प्रदेश सरकार ने शुरुआत में कबड्डी टीम की प्रत्येक हिमाचली सदस्य के लिए 33 लाख रुपये के नकद इनाम की घोषणा की थी। खिलाड़ी इस राशि को अन्य खेलों के स्वर्ण पदक विजेताओं की तुलना में कम मान रही थीं। खिलाड़ियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष तर्क दिया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने वाले सभी एथलीटों को एक समान मान-सम्मान मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने खिलाड़ियों के इस तर्क को स्वीकार करते हुए नकद पुरस्कार की राशि को बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये करने का फैसला किया। इसके वितरण के लिए शीघ्र ही एक विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा।

## शैक्षणिक योग्यता के आधार पर रोजगार का आश्वासन
मुख्यमंत्री के साथ हुई इस चर्चा में केवल नकद पुरस्कार ही नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के दीर्घकालिक भविष्य और आजीविका का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। पुष्पा राणा ने जानकारी दी कि राज्य सरकार ने पदक विजेता बेटियों को उनकी शैक्षणिक योग्यता तथा खेल उपलब्धियों के आधार पर सरकारी रोजगार प्रदान करने का भी भरोसा दिया है। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराने वाली खिलाड़ियों को अपने करियर की सुरक्षा को लेकर एक नया संबल मिला है, जिससे वे भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए निश्चिंत होकर अभ्यास जारी रख सकेंगी।

## जापान में भारतीय टीम का स्वर्णिम सफर
आइची-नागोया में आयोजित एशियन गेम्स 2026 के महिला कबड्डी फाइनल में भारत का मुकाबला ईरान की मजबूत टीम के साथ हुआ। बेहद रोमांचक और कड़े मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार संयम और रणनीति का प्रदर्शन करते हुए ईरान को 37-34 के अंतर से पराजित किया। इस जीत के साथ भारतीय महिला कबड्डी टीम ने एशियन गेम्स में लगातार दूसरी बार स्वर्ण पदक अपने नाम करने का कीर्तिमान स्थापित किया। इस ऐतिहासिक अभियान में सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र की निवासी पुष्पा राणा ने बतौर कप्तान पूरी टीम का मार्गदर्शन किया। उनके साथ भावना ठाकुर और ज्योति ठाकुर ने भी मैच के निर्णायक पलों में उत्कृष्ट खेल दिखाया। इस दल में हिमाचल की कुल चार खिलाड़ी पुष्पा राणा, भावना ठाकुर, ज्योति ठाकुर और रितु नेगी शामिल थीं, जिनमें रितु नेगी का यह लगातार तीसरा एशियन गेम्स था।

## राष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल का दबदबा और बजट प्रावधान
कबड्डी के खेल में हिमाचल प्रदेश का दबदबा काफी समय से कायम है। राज्य की महिला टीम ने 2025 के नेशनल गेम्स में लगातार तीसरी बार स्वर्ण पदक जीतकर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की थी। उसी मजबूत नींव के दम पर प्रदेश की बेटियों ने अंतरराष्ट्रीय फलक पर भी अपना परचम लहराया। एशियन गेम्स के पदक विजेताओं के लिए हिमाचल सरकार ने कुल 5.33 करोड़ रुपये के नकद पुरस्कार का प्रावधान घोषित किया था, जिसमें कबड्डी खिलाड़ियों को 33-33 लाख रुपये आबंटित किए गए थे। हालांकि, खिलाड़ियों की आपत्ति के बाद अब इसे संशोधित कर प्रत्येक खिलाड़ी के लिए 1 करोड़ रुपये करने की सहमति दी गई है।

## युवाओं और बेटियों को कप्तान का संदेश
मुलाकात संपन्न होने के बाद कप्तान पुष्पा राणा ने प्रदेश की नई पीढ़ी, विशेषकर बालिकाओं से अपने जीवन के लक्ष्यों के प्रति समर्पित रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बेटियों को अपने जीवन का लक्ष्य स्पष्ट रूप से तय करना चाहिए और उसे हासिल करने के लिए निरंतर कठोर परिश्रम करना चाहिए। यदि निष्ठा के साथ प्रयास किए जाएं तो सफलता और अवसर अवश्य प्राप्त होते हैं। इसके साथ ही उन्होंने युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से पूरी तरह दूर रहने की सलाह दी। पुष्पा राणा ने जोर देकर कहा कि युवाओं को अपनी वास्तविक रुचि के क्षेत्र को चुनकर उसी में अपनी ऊर्जा लगानी चाहिए ताकि वे समाज और देश के लिए सकारात्मक योगदान दे सकें।

## इसका आप पर असर
अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले एथलीटों के लिए पुरस्कार राशि और नौकरियों में समानता सुनिश्चित करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।

- **भारत में:** यह निर्णय अन्य राज्यों के खिलाड़ियों को भी समान नकद पुरस्कारों और करियर सुरक्षा की मांग करने के लिए प्रेरित करेगा। विभिन्न खेलों में पदक विजेताओं के बीच पुरस्कार राशि की असमानता को दूर करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत बहस तेज हो सकती है।
- **हिमाचल प्रदेश में:** राज्य की पदक विजेता महिला कबड्डी खिलाड़ियों को अब 33 लाख रुपये के स्थान पर 1 करोड़ रुपये की राशि और सरकारी नौकरी का अवसर मिलेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों को खेलों को पूर्णकालिक करियर के रूप में अपनाने का नया प्रोत्साहन प्राप्त होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह स्थिति तब उत्पन्न हुई जब एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली महिला कबड्डी टीम की खिलाड़ियों ने राज्य सरकार द्वारा पूर्व में घोषित पुरस्कार राशि को अन्य विजेताओं की तुलना में अपर्याप्त माना। खिलाड़ियों ने सीधे मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी बात रखकर समान मानदेय और भविष्य की सुरक्षा की मांग उठाई।

- **पुरस्कार राशि में असमानता:** राज्य सरकार ने शुरुआत में कबड्डी खिलाड़ियों को 33-33 लाख रुपये देने का ऐलान किया था, जिसे खिलाड़ियों ने व्यक्तिगत खेलों के स्वर्ण पदक विजेताओं को मिलने वाले 1 करोड़ रुपये की तुलना में कम आंका। खिलाड़ियों का तर्क था कि पदक का मूल्य खेल के आधार पर विभाजित नहीं होना चाहिए।
- **सीधी पैरवी और संवाद:** कप्तान पुष्पा राणा के नेतृत्व में खिलाड़ियों ने व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात की और स्पष्ट रूप से अपनी असंतुष्टि दर्ज कराई। आमने-सामने की इस बातचीत में मुख्यमंत्री ने उनकी दलीलों की सत्यता को स्वीकार किया।
- **लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन का रिकॉर्ड:** खिलाड़ियों ने 2025 के नेशनल गेम्स में लगातार तीसरी बार स्वर्ण पदक जीता था और एशियन गेम्स के फाइनल में ईरान को 37-34 से हराकर पुनः शीर्ष स्थान प्राप्त किया, जिसने उनकी मांग को मजबूत आधार दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. हिमाचल के मुख्यमंत्री ने कबड्डी खिलाड़ियों को कितनी पुरस्कार राशि देने का आश्वासन दिया है?
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने खिलाड़ियों की मांग मानते हुए 33 लाख रुपये की जगह 1 करोड़ रुपये की नकद राशि देने का आश्वासन दिया है।

### 2. भारतीय महिला कबड्डी टीम ने एशियन गेम्स 2026 के फाइनल में किसे हराया था?
भारतीय टीम ने फाइनल मुकाबले में ईरान को 37-34 से हराकर स्वर्ण पदक जीता।

### 3. भारतीय महिला कबड्डी टीम में हिमाचल प्रदेश की कौन-कौन सी खिलाड़ी शामिल थीं?
टीम में कप्तान पुष्पा राणा, भावना ठाकुर, ज्योति ठाकुर और रितु नेगी शामिल थीं।

### 4. रितु नेगी के लिए यह कौन सा एशियन गेम्स था?
रितु नेगी के लिए यह उनका लगातार तीसरा एशियन गेम्स था।

### 5. क्या राज्य सरकार ने खिलाड़ियों को रोजगार देने की भी बात कही है?
हाँ, मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को उनकी शैक्षणिक योग्यता और उपलब्धियों के आधार पर सरकारी नौकरी देने का भरोसा दिया है।

### 6. हिमाचल महिला कबड्डी टीम ने राष्ट्रीय स्तर पर क्या उपलब्धि हासिल की थी?
हिमाचल की महिला कबड्डी टीम ने 2025 के नेशनल गेम्स में लगातार तीसरी बार स्वर्ण पदक जीता था।

## प्रेरणा और सबक
कठिन परिस्थितियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ाने वाली इन महिला खिलाड़ियों की यात्रा समर्पण और अधिकारों के लिए मुखर होने की प्रेरक मिसाल है।

- **अधिकारों के लिए मुखर होना:** खिलाड़ियों ने असंतोष को दबाने के बजाय सीधे सरकार के सामने अपनी मांग तर्कपूर्ण ढंग से रखी। जब आपका योगदान वास्तविक और ठोस हो, तो उचित मान-सम्मान की मांग करना पूरी तरह न्यायसंगत है।
- **लगातार कड़ी मेहनत का फल:** नेशनल गेम्स 2025 में लगातार तीसरी जीत से लेकर एशियन गेम्स 2026 तक खिलाड़ियों का अभ्यास निरंतर जारी रहा। निरंतरता और अनुशासन ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता की कुंजी हैं।
- **दबाव में संयम बनाए रखना:** ईरान के खिलाफ फाइनल मुकाबले में 37-34 के करीबी स्कोर के बीच टीम ने अपना मानसिक संतुलन नहीं खोया। अत्यधिक दबाव के क्षणों में धैर्य बनाए रखना ही विजेता और उपविजेता के बीच का अंतर तय करता है।

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