# टांडा मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर से बदसलूकी पर लैब असिस्टेंट निलंबित, डॉक्टरों के प्रदर्शन के बाद फैसला

> कांगड़ा के टांडा मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी महिला डॉक्टर से छेड़छाड़ के मामले में आरोपी लैब असिस्टेंट को निलंबित कर दिया गया है। डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार और बढ़ते दबाव के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर यह कदम उठाया गया।

**Type:** article · **Category:** हिमाचल प्रदेश · **Published:** 2026-10-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/himachal-pradesh/tanda-medical-college-men-treni-doktara-se-badasaluki-para-laiba-asistenta-nilnbita-doktaron-ke-pradarshana-ke-bada-phaisala-43066 · **Language:** Hindi
**Tags:** टांडा मेडिकल कॉलेज, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश, डॉक्टर हड़ताल, सुखविंदर सिंह सुक्खू, महिला सुरक्षा

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा में ट्रेनी महिला चिकित्सक के साथ हुई अभद्रता और छेड़छाड़ के मामले में प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। घटना के करीब एक सप्ताह तक ठोस कार्रवाई न होने से नाराज डॉक्टरों ने जब हड़ताल का रास्ता चुना, तब जाकर प्रशासनिक तंत्र हरकत में आया और आरोपी लैब असिस्टेंट को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। हालांकि, पुलिस प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद आरोपी की अब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है और पुलिस ने उसे केवल जांच में शामिल होने का नोटिस दिया है।

## ब्लड बैंक में आधी रात को हुई थी घटना
यह पूरा विवाद 28 सितंबर की रात को शुरू हुआ था। सीनियर एवं जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर संगठन के महासचिव डॉ. आर्यन गैलेरिया के अनुसार, प्रसूति विभाग में भर्ती एक गंभीर महिला मरीज के लिए आपातकालीन स्थिति में रक्त की तत्काल जरूरत थी। जब ब्लड बैंक से संपर्क किया गया, तो वहां तैनात कर्मचारी ने रक्त भेजने से साफ इनकार कर दिया और महिला रेजिडेंट डॉक्टर को खुद ब्लड बैंक आने को कहा। मरीज की बिगड़ती हालत और जान बचाने की प्राथमिकता को देखते हुए महिला डॉक्टर खुद ब्लड बैंक पहुंचीं। वहां पहुंचते ही तैनात कर्मचारी ने उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया और अशोभनीय छेड़छाड़ की।

## कार्रवाई में देरी और डॉक्टरों की हड़ताल
इस अप्रिय घटना के सामने आने के बाद अस्पताल परिसर में तनाव फैल गया। आरोप है कि लगभग एक हफ्ते तक अस्पताल प्रबंधन ने मामले को दबाने की कोशिश की और केवल जांच कमेटी गठित करके बैठकों का दौर चलाता रहा। आरोपी के खिलाफ कोई त्वरित अनुशासनात्मक कार्रवाई न होते देख रेजिडेंट डॉक्टरों का धैर्य जवाब दे गया। डॉक्टरों ने सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने और आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी की मांग को लेकर काम बंद कर हड़ताल शुरू कर दी। इसी बीच मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर लिया और पीड़िता के बयान अदालत में भी दर्ज कराए गए, लेकिन पुलिस ने गिरफ्तारी की बजाय सिर्फ जांच नोटिस थमाया।

## मुख्यमंत्री की वापसी और निलंबन के आदेश
मामले के तूल पकड़ने पर रोहड़ू और रामपुर के दौरे से शिमला लौटने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आरोपी कर्मी को तुरंत सस्पेंड करने के सख्त निर्देश जारी किए। स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंघमार ने लैब तकनीशियन के निलंबन की आधिकारिक पुष्टि की है। इसके साथ ही प्रशासन ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि चिकित्सा संस्थानों में महिला स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा, गरिमा और अनुशासन के साथ किसी भी सूरत में समझौता नहीं किया जाएगा।

## इसका आप पर असर
अस्पतालों में डॉक्टरों की हड़ताल और सुरक्षा के मुद्दे सीधे तौर पर मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करते हैं।

- **हिमाचल प्रदेश में:** टांडा मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों के काम पर लौटने से कांगड़ा और आसपास के जिलों के मरीजों को ओपीडी और नियमित उपचार में राहत मिलेगी। समय पर इलाज न मिलने से परेशान मरीजों की लंबी कतारें अब सामान्य होने की उम्मीद है।
- **रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए:** ड्यूटी के दौरान नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिला डॉक्टरों की सुरक्षा की मांग फिर से केंद्र में आ गई है। अस्पतालों में ब्लड बैंक और दूरदराज के विभागों में सुरक्षा प्रोटोकॉल सख्त किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
- **आपातकालीन सेवाओं पर असर:** ऐसी घटनाओं के दौरान स्वास्थ्य सेवाएं बाधित होने से गंभीर मरीजों के परिजनों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जिससे इलाज का खर्च अचानक बढ़ जाता है।
- **कानूनी प्रक्रिया के लिहाज से:** सरकारी संस्थानों में यौन उत्पीड़न और बदसलूकी की शिकायतों पर आंतरिक कमेटियों की जांच प्रक्रिया में तेजी लाने का दबाव बढ़ेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटना अस्पताल के भीतर कार्यस्थल सुरक्षा की विफलता और प्रशासनिक स्तर पर शुरुआती लापरवाही के कारण उपजे आक्रोश का परिणाम है।

- **तात्कालिक विवाद:** प्रसूति विभाग में गंभीर महिला मरीज के लिए रक्त मंगाने पर ब्लड बैंक कर्मी ने सहयोग करने से मना कर दिया और महिला डॉक्टर को रात में वहां बुलाकर कथित तौर पर छेड़छाड़ की।
- **प्रशासनिक शिथिलता:** घटना 28 सितंबर को होने के बावजूद लगभग एक सप्ताह तक अस्पताल प्रबंधन केवल बैठकों और समिति गठन तक सीमित रहा, जिससे आरोपी पर तुरंत कोई असर नहीं पड़ा।
- **डॉक्टरों का बढ़ता असंतोष:** पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने के बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी न होने और केवल जांच नोटिस दिए जाने से डॉक्टरों का गुस्सा फूट पड़ा और वे हड़ताल पर चले गए।
- **उच्च स्तरीय दखल:** जब विरोध प्रदर्शन से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने लगीं, तब मुख्यमंत्री के शिमला लौटते ही मामले की गंभीरता को देखते हुए निलंबन का कड़ा निर्देश जारी हुआ।

## सवाल-जवाब

### 1. टांडा मेडिकल कॉलेज में क्या घटना हुई थी?
28 सितंबर को एक गंभीर मरीज के लिए रक्त लेने गई ट्रेनी महिला डॉक्टर के साथ ब्लड बैंक में तैनात कर्मचारी ने कथित तौर पर दुर्व्यवहार और छेड़छाड़ की थी।

### 2. आरोपी कर्मचारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है?
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद स्वास्थ्य सचिव ने आरोपी लैब तकनीशियन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

### 3. डॉक्टरों ने हड़ताल क्यों शुरू की थी?
घटना के एक सप्ताह बाद भी प्रबंधन द्वारा ठोस कदम न उठाने और पुलिस द्वारा आरोपी को गिरफ्तार न किए जाने के विरोध में डॉक्टरों ने हड़ताल की थी।

### 4. क्या पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है?
नहीं, पुलिस ने मामला दर्ज करने और पीड़िता के अदालत में बयान दर्ज कराने के बाद आरोपी को सिर्फ जांच में शामिल होने का नोटिस दिया है।

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