# ऊना पत्नी हत्याकांड में भतीजे को भगाने वाले चाचा को हाईकोर्ट से जमानत, जज ने कहा हर इंसान सुधर सकता है

> हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ऊना जिले के चर्चित हत्याकांड में मुख्य आरोपी को भगाने में मदद करने वाले चाचा को जमानत दे दी, जस्टिस संदीप शर्मा ने कहा कि अपराधी पैदा नहीं होते बल्कि हालात उन्हें बनाते हैं।

**Type:** article · **Category:** हिमाचल प्रदेश · **Published:** 2026-07-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/himachal-pradesh/una-patni-hatyakanda-men-bhatije-ko-bhagane-vale-chacha-ko-haikorta-se-jamanata-jaja-ne-kaha-hara-insana-sudhara-sakata-hai-4754 · **Language:** Hindi
**Tags:** हिमाचल हाईकोर्ट, जमानत, ऊना हत्याकांड, अनुच्छेद 21, जस्टिस संदीप शर्मा, पत्नी हत्या मामला

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक चर्चित हत्या मामले में सह-आरोपी चाचा को जमानत दे दी है। जस्टिस संदीप शर्मा की बेंच ने अपने आदेश में कहा कि कोई भी इंसान अपराधी बनकर पैदा नहीं होता, हालात और परिस्थितियां उसे उस राह पर धकेलती हैं। अदालत ने यह भी साफ किया कि आरोप चाहे कितने भी संगीन क्यों न हों, वे किसी विचाराधीन कैदी के आज़ादी के संवैधानिक अधिकार को कुचल नहीं सकते।

## क्या है पूरा मामला
यह पूरा घटनाक्रम सितंबर 2025 का है। मुख्य आरोपी, जो याचिकाकर्ता चाचा का भतीजा है, ने 24 साल की पीड़िता से परिवार को बिना बताए शादी रचा ली थी। काफी समय बाद जब लड़की के घरवालों को इस शादी और उसके प्रेगनेंट होने की जानकारी मिली, तो उन्होंने रिश्ता स्वीकार करते हुए 24 सितंबर 2025 को विधि-विधान से उसे ससुराल विदा करने का फैसला किया।

## शादी से एक दिन पहले हत्या, जंगल में मिला अधजला शव
लेकिन विदाई से ठीक एक दिन पहले, 23 सितंबर को महिला अचानक और रहस्यमय ढंग से गायब हो गई। कुछ ही समय बाद एक वन रक्षक ने पुलिस को सूचना दी, जिसके आधार पर पुलिस टीम ने ऊना जिले के बरिया इलाके के जंगल से महिला का आधा जला हुआ शव बरामद किया। पीड़िता की मां ने अपने दामाद और उसके चाचा दोनों पर हत्या करने का आरोप लगाया। जांच आगे बढ़ने पर सामने आया कि पैसों के लेनदेन और पत्नी की प्रेगनेंसी को लेकर हुए विवाद में पति ने ही बेहद क्रूरता से अपनी पत्नी की जान ले ली थी।

## चाचा पर हत्या नहीं, भगाने में मदद करने का आरोप
गौर करने वाली बात यह है कि हाईकोर्ट में जमानत मांगने पहुंचे याचिकाकर्ता चाचा पर सीधे तौर पर हत्या करने का आरोप नहीं है। पुलिस के मुताबिक हत्या की जानकारी मिलने पर चाचा ने पुलिस को सूचित करने की बजाय अपने भतीजे को पठानकोट छोड़ा, जहां से वह जम्मू स्थित अपनी आर्मी यूनिट में लौट सके। इसी आरोप में चाचा को 25 सितंबर 2025 से पुलिस हिरासत में रखा गया था। मामले में चार्जशीट दाखिल होने के बाद उसने अदालत का रुख कर जमानत की मांग की।

## जस्टिस संदीप शर्मा की अहम टिप्पणी
2 जुलाई को इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संदीप शर्मा ने एक बड़ा संदेश दिया। अदालत ने कहा कि अपराधी पैदा नहीं होते, बल्कि हालात उन्हें बनाते हैं। हर इंसान के भीतर अच्छाई की एक संभावना छिपी होती है, इसलिए किसी भी अपराधी को सुधार की गुंजाइश से परे नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि यह मानवीय नजरिया अक्सर किशोर हो या वयस्क अपराधी, दोनों से निपटते वक्त भुला दिया जाता है। बेंच के मुताबिक हकीकत में हर संत का एक अतीत रहा है और हर पापी का एक भविष्य होता है।

## अनुच्छेद 21 और जल्द सुनवाई का अधिकार
कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाले स्वतंत्रता और त्वरित सुनवाई के अधिकार पर खास जोर दिया। बेंच ने कहा कि जब भी कोई अपराध होता है, उसके पीछे सामाजिक और आर्थिक हालात, माता-पिता की उपेक्षा या मानसिक तनाव जैसे कई कारण काम करते हैं। अदालत ने पुलिस जांच की रफ्तार पर भी सवाल खड़े किए। कोर्ट ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने अपनी सूची में 53 गवाहों के नाम दिए हैं, लेकिन आज तक एक भी गवाह से पूछताछ नहीं हो सकी है। ऐसे में ट्रायल पूरा होने में लंबा वक्त लगना तय है। बेंच ने कहा कि आरोपी को इस तरह अनिश्चित काल तक जेल में बंद रखना दरअसल मुकदमे से पहले ही उसे सज़ा दे देने जैसा होगा। अदालत ने साफ कहा कि अपराध चाहे कितना भी संगीन क्यों न हो, वह किसी के भी जल्द सुनवाई पाने के अधिकार को नहीं छीन सकता।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** यह फैसला दिखाता है कि अदालतें अब सिर्फ आरोप की गंभीरता से जमानत तय नहीं करतीं, ट्रायल में देरी और अनुच्छेद 21 के तहत जल्द सुनवाई के अधिकार को भी बराबर तवज्जो दे रही हैं, जिससे देशभर में लंबे समय से जेल में बंद विचाराधीन कैदियों को जमानत मिलने की उम्मीद बढ़ सकती है।
- **हिमाचल प्रदेश में:** ऊना जिले से जुड़े इस हत्याकांड में मुख्य आरोपी भतीजे का ट्रायल अब भी चलेगा, जबकि 53 गवाहों की पूछताछ अभी बाकी होने से सुनवाई लंबी खिंच सकती है।

## सवाल-जवाब

### 1. हिमाचल हाईकोर्ट ने किसे जमानत दी?
कोर्ट ने मुख्य हत्या आरोपी के चाचा को जमानत दी, जिस पर भतीजे को भगाने में मदद करने का आरोप था।

### 2. यह घटना कब और कहां हुई?
यह सितंबर 2025 की घटना है, महिला का शव ऊना जिले के बरिया इलाके के जंगल से बरामद हुआ था।

### 3. पीड़िता की मौत कैसे हुई?
जांच में सामने आया कि पैसों और प्रेगनेंसी को लेकर हुए विवाद में पति ने पत्नी को जलाकर मार डाला था।

### 4. चाचा पर सीधे हत्या का आरोप क्यों नहीं है?
पुलिस के मुताबिक चाचा ने हत्या की जानकारी मिलने पर पुलिस को सूचित करने की बजाय भतीजे को पठानकोट भेजकर उसकी जम्मू स्थित आर्मी यूनिट भागने में मदद की, इसी आरोप में वह हिरासत में था।

### 5. कोर्ट ने जमानत देते हुए क्या कहा?
जस्टिस संदीप शर्मा ने कहा कि अपराधी पैदा नहीं होते बल्कि बनाए जाते हैं, और गंभीर आरोप भी विचाराधीन कैदी के त्वरित सुनवाई के अधिकार को नहीं छीन सकते।

### 6. चाचा कब से हिरासत में था?
वह 25 सितंबर 2025 से पुलिस हिरासत में था और चार्जशीट दाखिल होने के बाद उसने जमानत मांगी थी।

### 7. कोर्ट ने ट्रायल में देरी को लेकर क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि अभियोजन के 53 गवाहों में से अब तक एक की भी पूछताछ नहीं हुई है, इसलिए आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना मुकदमे से पहले सजा देने जैसा होगा।

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