# ज़ांस्कर रेंज की 23,409 फीट ऊंची नून पीक पर फहराया तिरंगा, विशाल ठाकुर और उनकी टीम ने चार दिन में पूरा किया कठिन अभियान

> हिमाचल प्रदेश के पर्वतारोही विशाल ठाकुर और उनके तीन साथियों ने लद्दाख की नून पीक को रिकॉर्ड चार दिनों में सफलतापूर्वक फतह किया है। कारगिल के तांगोल गांव से शुरू हुआ यह तकनीकी अभियान 30 अगस्त 2026 को सुरक्षित रूप से पूरा हुआ।

**Type:** article · **Category:** हिमाचल प्रदेश · **Published:** 2026-09-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/himachal-pradesh/zanskara-renja-ki-23-409-phita-unchi-nun-peak-para-phaharaya-tirnga-vishal-thakur-aura-unaki-tima-ne-chara-dina-men-pura-kiya-kath-25615 · **Language:** Hindi
**Tags:** विशाल ठाकुर, नून पीक, कारगिल, पर्वतारोहण, ज़ांस्कर रेंज, हिमाचल प्रदेश, नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग

हिमाचल प्रदेश के प्रमुख पर्वतारोही विशाल ठाकुर ने हिमालय की ज़ांस्कर रेंज में स्थित बेहद कठिन और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण नून पीक पर सफलता का परचम लहराया है। समुद्र तल से 23,409 फीट यानी 7,135 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस पर्वत चोटी को विशाल ठाकुर और उनके तीन अन्य सदस्यों वाले दल ने केवल चार दिनों की छोटी अवधि में फतह कर लिया। इस दल में महिला पर्वतारोही सहित कुल चार सदस्य शामिल थे, जिन्होंने प्रतिकूल मौसम और दुर्गम चढ़ाई का सामना करते हुए इस अभियान को बिना किसी हादसे के पूरा किया।

## अभियान का पूरा घटनाक्रम और समय सीमा
इस कठिन पर्वतारोहण अभियान की शुरुआत कारगिल जिले में स्थित तांगोल गांव से हुई थी। चार सदस्यीय दल 26 अगस्त 2026 को तांगोल गांव से नून पीक की चढ़ाई के लिए रवाना हुआ था। इस टीम में विशाल ठाकुर के अलावा राहुल, निकिता ठाकुर और राकेश सिंह नेगी शामिल थे। चारों सदस्यों ने आपसी समन्वय और उत्कृष्ट शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन करते हुए निर्धारित मार्ग से नून पीक के शिखर तक पहुंचने में सफलता पाई। शिखर पर तिरंगा फहराने के बाद पूरी टीम 30 अगस्त 2026 को सुरक्षित रूप से वापस तांगोल गांव लौट आई, जिसके साथ ही यह ऐतिहासिक चढ़ाई संपन्न हुई।

## नून पीक का इतिहास और तकनीकी चुनौतियां
नून पीक ज़ांस्कर रेंज के प्रसिद्ध नून कुन मैसिफ का सर्वोच्च बिंदु है। इसी पर्वत समूह में नून पीक की बहन मानी जाने वाली माउंट कुन चोटी भी स्थित है, जिसकी ऊंचाई 7,077 मीटर है। नून कुन मैसिफ के इतिहास पर नजर डालें तो इस क्षेत्र में पहला सफल पर्वतारोहण वर्ष 1953 में एक स्विस अभियान दल द्वारा किया गया था। तब से लेकर आज तक यह संपूर्ण इलाका वैश्विक पर्वतारोहियों के लिए भारतीय हिमालय के सबसे प्रतिष्ठित और कठिन ट्रैक्स में गिना जाता है।

नून पीक को अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण मानकों के अनुसार एक उच्च तकनीकी श्रेणी की चोटी माना जाता है। 7,000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर पर्वतारोहियों को अत्यंत कम ऑक्सीजन, बर्फीली हवाएं, अप्रत्याशित मौसम बदलाव और खड़ी बर्फ की दीवारों का सामना करना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में केवल साधारण ट्रैकिंग का अनुभव काफी नहीं होता, बल्कि विशेष पर्वतारोहण उपकरणों का सही उपयोग, तकनीकी क्लाइंबिंग स्किल्स और विपरीत समय में सही फैसले लेने की परिपक्वता आवश्यक होती है।

## अनुमति, प्रशिक्षण और विशाल ठाकुर का करियर
इस जोखिम भरे अभियान को अंजाम देने से पहले टीम ने नई दिल्ली स्थित इंडियन माउंटेनियरिंग फाउंडेशन से नियमानुसार सभी जरूरी परमिट और कानूनी स्वीकृतियां प्राप्त की थीं। विशाल ठाकुर मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के रहने वाले हैं और वर्तमान में चंडीगढ़ में निवास करते हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत सामान्य ट्रैकिंग से की थी, लेकिन बाद में उन्होंने इसे पूर्णकालिक करियर के रूप में अपनाया।

विशाल ठाकुर ने पर्वतारोहण का औपचारिक और कठिन प्रशिक्षण उत्तरकाशी स्थित प्रतिष्ठित नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग से प्राप्त किया है। वे अब नए पर्वतारोहियों को प्रशिक्षण देने का कार्य भी करते हैं। नून पीक से पहले विशाल ठाकुर कई अन्य प्रसिद्ध अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दे चुके हैं। पिछले वर्ष उन्होंने हिमाचल प्रदेश के स्पीति क्षेत्र में स्थित मणिरंग पीक को रिकॉर्ड समय में फतह किया था। इसके अतिरिक्त वे उत्तराखंड की कठिन मानी जाने वाली ब्लैक पीक, मनाली की फ्रेंडशिप पीक और लद्दाख की युनाम पीक पर भी सफलतापूर्वक चढ़ाई कर चुके हैं।

## टीमवर्क और भारतीय माउंटेनियरिंग का भविष्य
अभियान की सफलता पर बात करते हुए विशाल ठाकुर ने बताया कि इतनी ऊंचाई पर पहाड़ हर क्षण आपकी परीक्षा लेता है। विशाल ठाकुर ने कहा, “चार दिनों में अभियान पूरा करना और पूरी टीम के साथ सुरक्षित वापस लौटना मेरे लिए इस सफलता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।”

विशाल ठाकुर का मानना है कि भारतीय हिमालयी क्षेत्र में विश्व स्तरीय पर्वतारोहण केंद्र बनने की अपार क्षमताएं मौजूद हैं। वे अपने अभियानों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से भारत में युवाओं को तकनीकी पर्वतारोहण के प्रति जागरूक कर रहे हैं, ताकि देश में एक मजबूत और सुरक्षित माउंटेनियरिंग संस्कृति का निर्माण हो सके।

## इसका आप पर असर
यह उपलब्धि भारत के साहसिक खेल और पर्वतारोहण क्षेत्र में युवाओं और नए क्लाइम्बर्स के लिए प्रेरणादायक है।

- **भारत में:** देश में व्यावसायिक और तकनीकी पर्वतारोहण संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, जिससे अधिक युवा प्रशिक्षण केंद्रों की ओर आकर्षित होंगे। जो लोग पर्वतारोहण में करियर बनाना चाहते हैं, उन्हें नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग जैसे संस्थानों से औपचारिक डिग्री लेने की प्रेरणा मिलेगी।
- **हिमाचल प्रदेश और लद्दाख में:** कारगिल के तांगोल गांव जैसे सीमावर्ती इलाकों में एडवेंचर टूरिज्म और स्थानीय गाइड रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे। स्थानीय युवाओं को ट्रेकिंग और एक्सपीडिशन अभियानों के जरिए सीधे आर्थिक लाभ प्राप्त करने का मौका मिलेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. नून पीक की कुल ऊंचाई कितनी है और यह कहां स्थित है?
नून पीक समुद्र तल से 23,409 फीट (7,135 मीटर) ऊंची है और यह लद्दाख के कारगिल जिले में स्थित ज़ांस्कर रेंज का हिस्सा है।

### 2. विशाल ठाकुर के अभियान दल में कौन-कौन शामिल था?
विशाल ठाकुर के दल में राहुल, निकिता ठाकुर और राकेश सिंह नेगी शामिल थे।

### 3. टीम ने यह अभियान कितने दिनों में और किस तारीख को पूरा किया?
टीम ने यह अभियान कारगिल के तांगोल गांव से 26 अगस्त 2026 को शुरू किया और 30 अगस्त 2026 को सुरक्षित लौटकर कुल चार दिनों में पूरा किया।

### 4. नून कुन मैसिफ पर पहला सफल पर्वतारोहण कब हुआ था?
नून कुन मैसिफ पर पहला सफल पर्वतारोहण वर्ष 1953 में एक स्विस अभियान दल द्वारा किया गया था।

### 5. विशाल ठाकुर ने पर्वतारोहण का प्रशिक्षण कहां से प्राप्त किया है?
विशाल ठाकुर ने पर्वतारोहण का प्रशिक्षण उत्तरकाशी स्थित नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग से प्राप्त किया है।

### 6. विशाल ठाकुर पहले किन अन्य प्रमुख चोटियों को फतह कर चुके हैं?
विशाल ठाकुर हिमाचल की मणिरंग पीक, उत्तराखंड की ब्लैक पीक, मनाली की फ्रेंडशिप पीक और युनाम पीक को फतह कर चुके हैं।

## प्रेरणा और सबक
विशाल ठाकुर का पर्वतारोहण करियर यह सिखाता है कि व्यवस्थित प्रशिक्षण और अनुशासन से कठिन से कठिन लक्ष्यों को पाया जा सकता है।

- **बुनियाद से शुरुआत:** साधारण ट्रेकिंग से करियर शुरू करके तकनीकी रूप से कठिन 7,000 मीटर+ चोटियों तक पहुंचना यह दर्शाता है कि अनुभव हमेशा चरणबद्ध तरीके से हासिल किया जाता है।
- **सुरक्षा को प्राथमिकता:** किसी भी अभियान की सबसे बड़ी सफलता केवल चोटी तक पहुंचना नहीं, बल्कि पूरी टीम को सुरक्षित वापस लाना है।
- **औपचारिक प्रशिक्षण का महत्व:** जुनून के साथ-साथ नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग जैसे संस्थानों से मिलने वाली तकनीकी शिक्षा जोखिमों को न्यूनतम कर देती है।
- **टीमवर्क और तालमेल:** विपरीत परिस्थितियों वाले वातावरण में सफलता अकेले नहीं, बल्कि पूरी टीम के परस्पर विश्वास और अनुशासन पर निर्भर करती है।

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