अली खामेनेई की अंतिम यात्रा शुरू, तेहरान से मशहद तक उमड़ेगा करोड़ों का हुजूम ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की अंतिम यात्रा 4 जुलाई से शुरू हो चुकी है, जो तेहरान, कुम, नजफ और कर्बला होते हुए 9 जुलाई को मशहद पहुंचेगी, जहां उन्हें दफनाया जाएगा। ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की अंतिम विदाई की रस्में 4 जुलाई से शुरू हो चुकी हैं। उनके पार्थिव शरीर की पांच दिन लंबी यात्रा शिया इस्लाम के सबसे अहम शहरों से होकर गुजरेगी और आखिर में उन्हें सुपुर्द ए खाक किया जाएगा। इस मौके पर 100 से ज्यादा देशों के नेता और 2 करोड़ से ज्यादा लोग शियाओं के नेता कहे जाने वाले खामेनेई को आखिरी सलामी देने पहुंचने वाले हैं। तेहरान से मशहद तक, ईरान और इराक के पांच बड़े शहरों का सफर अंतिम यात्रा तेहरान से शुरू होकर कुम पहुंचेगी, फिर सीमा पार कर इराक के नजफ और कर्बला में रुकेगी और आखिर में 9 जुलाई को मशहद पहुंचेगी। मशहद में ही खामेनेई का अंतिम संस्कार होगा और यहीं इस पांच दिन की यात्रा का समापन होगा। सड़कों पर करोड़ों का हुजूम यात्रा जिन शहरों से गुजर रही है, वहां सड़कों पर भारी भीड़ जमा हो रही है। खासकर तेहरान में लोगों का गम छलक पड़ा और शहर से गुजरते जुलूस के दौरान भावुक कर देने वाले नजारे देखने को मिले। इतनी बड़ी भीड़ की तुलना मध्य पूर्व के उन बड़े अंतिम संस्कारों से की जा रही है, जिन्होंने पहले भी दुनिया भर का ध्यान खींचा था। कर्बला की शहादत से क्यों जोड़ा जा रहा है यह मातम सवाल यह भी उठ रहा है कि खामेनेई की हत्या को कर्बला की शहादत से क्यों जोड़ा जा रहा है, जो शिया इस्लाम के इतिहास की सबसे अहम घटनाओं में गिनी जाती है। शिया मुसलमानों के लिए मातम मनाना धर्म का बेहद अहम हिस्सा है और शहादत का जिक्र इस भावना को और गहरा कर देता है। शायद यही वजह है कि यह अंतिम यात्रा इतने बड़े पैमाने पर निकल रही है, वो भी कर्बला से होते हुए मशहद तक। 1989 की वो अफरा तफरी, जब खोमैनी का जनाजा बेकाबू हो गया था खामेनेई के जनाजे की इस भारी भीड़ को देखकर लोगों को 1989 में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खोमैनी के अंतिम संस्कार की याद आ रही है। उस वक्त शव के करीब पहुंचने की होड़ में भीड़ बेकाबू हो गई थी, लोगों ने खोमैनी के शव पर लिपटे कफन को खींच लिया था और अफरा तफरी में शव जमीन पर गिर गया था। इलाके के इतिहास में वह जनाजा आज भी सबसे अराजक भीड़ वाले मौकों में गिना जाता है। आगे क्या अभी यात्रा इराक से होकर गुजर रही है और आखिरी रस्में 9 जुलाई को मशहद में होंगी। तब तक 100 से ज्यादा देशों के नेताओं का पहुंचना जारी रहेगा, वहीं 2 करोड़ से ज्यादा लोग रास्ते भर खामेनेई को श्रद्धांजलि देते नजर आएंगे। इसका आप पर असर यह खबर सीधे तौर पर भारत के किसी शहर या राज्य से नहीं जुड़ी है, लेकिन कुछ लोगों के लिए इसका असर अहम है: • तीर्थयात्रियों के लिए: ईरान और इराक में शिया तीर्थ स्थलों पर करोड़ों लोगों की भीड़ जमा है, ऐसे में वहां यात्रा या जियारत की योजना बनाने वालों को भीड़ और सुरक्षा इंतजामों का ध्यान रखना होगा। • निवेशकों और तेल बाजार पर नजर रखने वालों के लिए: ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या से जुड़ी अस्थिरता का असर मध्य पूर्व की सियासी हलचल और तेल बाजार पर पड़ सकता है। सवाल-जवाब 1. अली खामेनेई की अंतिम यात्रा की रस्में कब शुरू हुईं? ये रस्में 4 जुलाई से शुरू हो चुकी हैं। 2. अंतिम यात्रा किन शहरों से होकर गुजरेगी? यह तेहरान से कुम, फिर इराक के नजफ और कर्बला होते हुए मशहद तक जाएगी। 3. खामेनेई को कहां और कब दफनाया जाएगा? उन्हें 9 जुलाई को मशहद में दफनाया जाएगा। 4. इस मौके पर कितने लोगों के पहुंचने की उम्मीद है? 2 करोड़ से ज्यादा लोग और 100 से ज्यादा देशों के नेता पहुंचने वाले हैं। 5. खामेनेई को शियाओं का नेता क्यों कहा जाता है? उन्हें व्यापक रूप से शियाओं के नेता के तौर पर जाना जाता है, इसीलिए श्रद्धांजलि देने वाले उन्हें इसी नाम से याद कर रहे हैं। 6. खामेनेई की हत्या को कर्बला की शहादत से क्यों जोड़ा जा रहा है? क्योंकि कर्बला की शहादत शिया इस्लाम के इतिहास की सबसे अहम घटनाओं में से एक है और इस अंतिम यात्रा में भी शहादत और मातम की वही भावना झलक रही है। 7. 1989 में अयातुल्ला खोमैनी के जनाजे में क्या हुआ था? भीड़ बेकाबू होकर ताबूत की तरफ बढ़ी, लोगों ने कफन को खींच लिया और अफरा तफरी में खोमैनी का शव जमीन पर गिर गया था। https://trendkia.com/investigations/ali-khamenei-ki-antima-yatra-shuru-tehran-se-mashhad-taka-umarega-karoron-ka-hujuma-5363 TrendKia — Har trend, sabse pehle.