# अमेरिकी फर्टिलिटी उद्योग पर भारी पड़ती 28 साल की रूढ़िवादी रणनीतिकार

> हेरिटेज फाउंडेशन से जुड़ी शोधकर्ता एम्मा वॉटर्स सहायक प्रजनन तकनीकों, सरोगेसी और भ्रूण चयन के सख्त विरोध के जरिए अमेरिकी स्वास्थ्य और पारिवारिक नीतियों को नई दिशा दे रही हैं।

**Type:** article · **Category:** पड़ताल · **Published:** 2026-09-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/investigations/ameriki-fertility-udyoga-para-bhari-parati-28-sala-ki-rurhivadi-rananitikara-37089 · **Language:** Hindi
**Tags:** एम्मा वॉटर्स, हेरिटेज फाउंडेशन, आईवीएफ, सरोगेसी, अमेरिकी राजनीति, प्रजनन तकनीक, बायोएथिक्स

सुबह आठ बजे का समय परिवार के साथ नाश्ते और बाइबिल पाठ के लिए तय रहता है। एम्मा वॉटर्स अपने जीवन को 'ईश्वर से प्रेम करो, विवाह करो और संतान पैदा करो' के सीधे सिद्धांत पर ढालने का प्रयास करती हैं। सुरक्षा कारणों से वे अपनी दो बेटियों के वास्तविक नामों को सार्वजनिक चर्चा से अलग रखना पसंद करती हैं, जिन्हें बोलचाल में गर्टी और ओफेलिया कहा जा सकता है। घर के माहौल में सुबह के समय बच्चियों की चंचलता और खिलौनों की आवाजें गूंजती रहती हैं। उनके पति जैक, जो धर्मप्रचारक बनने की पढ़ाई कर रहे हैं, घर और अध्ययन के बीच संतुलन बनाते हैं। घरेलू व्यवस्था में जैक की बड़ी मेज पर नीत्शे की प्रतिमा रखी है, जबकि पास ही एक छोटी खींचने वाली मेज पर बैठकर एम्मा वॉटर्स नीतिगत बैठकों में भाग लेती हैं, जहां दीवार पर डोनाल्ड ट्रंप का चित्र भी टंगा है। व्यस्तताओं के बीच वे व्यायाम के लिए अलग से समय नहीं निकाल पाती हैं।

## रूढ़िवादी राजनीति का उभरता चेहरा और प्रजनन तकनीक पर बहस
पेंसिल्वेनिया के एक साधारण उपनगरीय इलाके से काम करने वाली एम्मा वॉटर्स की पहचान वॉशिंगटन की सत्ता संरचना में तेजी से बढ़ी है। अमेरिका का फर्टिलिटी उद्योग लगभग 10 अरब डॉलर का हो चुका है, किंतु हाल के वर्षों में यह कई नैतिक और कानूनी विवादों के घेरे में आया है। भ्रूणों की अदला-बदली, वाणिज्यिक स्तर पर बच्चों के जन्म के केंद्र चलाना, बच्चों के यौन अपराध के मामलों से जुड़े व्यक्तियों द्वारा पितृत्व के कानूनी अधिकार प्राप्त करना तथा सरोगेट माताओं और अभिभावकों के बीच कानूनी तकरार जैसे विषय लगातार सुर्खियां बने हैं। इसके अतिरिक्त पॉलीजेनिक परीक्षण की पेशकश करने वाली व्यावसायिक कंपनियां माता-पिता को ऐसे भ्रूण चुनने का विकल्प दे रही हैं जो सबसे लंबे, बुद्धिमान और गंजेपन से मुक्त हों, जिससे नस्लीय बुद्धिमत्ता अंतर जैसी पुरानी बहसों को फिर से बल मिला है। तकनीकी क्षेत्र के कई बड़े चेहरे भी इस दिशा में निवेश कर रहे हैं। ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन, जो स्वयं सरोगेसी के माध्यम से पिता बने हैं, और कॉइनबेस के सीईओ ब्रायन आर्मस्ट्रांग एक ऐसी स्टार्टअप कंपनी में निवेश कर चुके हैं जो भ्रूण संपादन पर काम करती है। ऐसे परीक्षणों और तकनीकों से जन्म लेने वाले बच्चों की चर्चा अब वास्तविकता का रूप ले रही है।

दक्षिणपंथी तकनीकी समूह जन्म दर बढ़ाने अथवा संतानों के आनुवंशिक सुधार के विचार से प्रभावित दिखते हैं, जबकि प्रगतिशील खेमा इन तकनीकी परिवर्तनों के नैतिक खतरों पर खुलकर बात करने में झिझक महसूस करता रहा है। एम्मा वॉटर्स इसी वैचारिक शून्य में अपनी रणनीतिक उपस्थिति दर्ज कराती हैं। उन्होंने फ्लोरिडा में अंतरराष्ट्रीय सरोगेसी पर प्रतिबंध लगाने, टेक्सास में आईवीएफ को लेकर रिपब्लिकन पार्टी की नीतियों को कठोर बनाने और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सभी के लिए मुफ्त आईवीएफ वाली घोषणाओं को नियंत्रित करने में मुख्य रणनीतिक भूमिका निभाई है। जेडी वेंस के विचारों से प्रेरित और जेन जी पीढ़ी से ताल्लुक रखने वाली वॉटर्स प्रजनन तकनीकों के वर्तमान ढांचे को कानूनी और सामाजिक स्तर पर पूरी तरह रूपांतरित करना चाहती हैं।

## कॉलेज से हेरिटेज फाउंडेशन तक का सफर
टेनेसी के एक क्रिश्चियन कॉलेज में अपनी स्नातक पढ़ाई के तीसरे वर्ष के दौरान वॉटर्स ने जेडी वेंस का एक पॉडकास्ट साक्षात्कार सुना था, जिसके विचारों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। वर्ष 2021 में कॉलेज की शीर्ष उपाधि के साथ पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 'अमेरिकन मोमेंट' नामक रूढ़िवादी प्रशिक्षण संस्थान में इंटर्नशिप के लिए आवेदन किया, जहां उन्हें तुरंत पूर्णकालिक नौकरी मिल गई। इसी दौरान एक अभ्यास सरकारी कार्यक्रम के दौरान उनकी मुलाकात जैक्सन वॉटर्स से हुई। अपने संस्मरणों में उन्होंने स्वीकार किया है कि करियर निर्माण की तीव्र इच्छा के चलते एक समय उन्हें पत्नी और मां बनना अपनी प्रगति में बाधा जैसा लगता था, जिसके कारण उन्होंने कुछ समय के लिए जैक से दूरी भी बना ली थी। हालांकि बाद में एक पादरी के परामर्श के बाद उन्होंने अपनी सोच को बदला और 24 वर्ष की उम्र में विवाह किया। रिपब्लिकन हलकों में भी इतनी कम उम्र में विवाह करने पर कई वरिष्ठ सहकर्मी युवा महिलाओं को असामान्य दृष्टि से देखते थे।

राजधानी वॉशिंगटन में रहते हुए वॉटर्स ने सक्रिय राजनीतिक जीवन व्यतीत किया। जब वे पहली बेटी गर्टी के साथ गर्भवती हुईं, तब उन्होंने अपने पति के सेमिनरी अध्ययन और पारिवारिक जरूरतों को देखते हुए अधिक लचीले काम की तलाश शुरू की। वर्ष 2022 में वे हेरिटेज फाउंडेशन से जुड़ीं, जो अमेरिकी रूढ़िवादी विचारकों का सबसे प्रभावशाली संस्थान माना जाता है। संस्था ने उन दिनों 'प्रोजेक्ट 2025' की रूपरेखा तैयार की थी। वॉटर्स ने संस्थान के सामने सहायक प्रजनन तकनीकों और आनुवंशिक विज्ञान पर नीतिगत शोध का प्रस्ताव रखा। उस समय तक गर्भपात विरोधी आंदोलनों का पूरा ध्यान केवल गर्भपात पर केंद्रित था और आईवीएफ पर होने वाली बहसें केवल इस बिंदु तक सीमित थीं कि क्या भ्रूण को कानूनी व्यक्ति माना जाए। वॉटर्स का तर्क था कि यह नीतिगत मुद्दा आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में होगा और हेरिटेज फाउंडेशन ने इस विषय पर उन्हें शोध विश्लेषक के रूप में नियुक्त कर लिया।

## सहायक प्रजनन तकनीकों की हकीकत और विदेशी प्रभाव
वॉटर्स ने पाया कि उनके अपने रूढ़िवादी सहयोगियों में भी कृत्रिम गर्भाधान की तकनीकी प्रगति को लेकर पर्याप्त जानकारी का अभाव था। कैपिटल हिल के कई नीतिगत कर्मचारी उन परीक्षणों की भविष्य की संभावनाओं पर सवाल पूछ रहे थे जो दशकों से प्रचलन में थे। चीन में एक वैज्ञानिक पहले ही क्रिसपर तकनीक से भ्रूणों के संपादन के आरोप में जेल की सजा काटकर बाहर आ चुका था। अमेरिका में आईवीएफ के दौरान लिंग चयन एक आम प्रक्रिया बन चुकी थी और वाणिज्यिक सरोगेसी एजेंसियों का संचालन किसी सामान्य व्यवसाय की तुलना में भी कम विनियामक निगरानी में चल रहा था।

वर्ष 2023 में वॉटर्स ने फॉक्स न्यूज और अपने नीतिगत लेखों के माध्यम से यह मुद्दा उठाया कि अमेरिकी सरोगेट माताओं का उपयोग विदेशी नागरिकों द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने इसे नागरिकता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल बताया, जहां कमजोर विनियामक कानूनों के चलते कोई भी विदेशी व्यक्ति अमेरिकी नागरिकता प्राप्त बच्चे को जन्म दिलवा सकता था। वॉटर्स स्वयं को केवल विरोध करने वाली आवाज के रूप में देखे जाने का खंडन करती हैं। उनका कहना है कि वे मानव जीवन के विकास, पारंपरिक स्त्री-पुरुष विवाह और प्राकृतिक प्रजनन तकनीकों की समर्थक हैं, जिसके अंतर्गत आहार और जीवनशैली में सुधार कर प्राकृतिक रूप से गर्भधारण को प्राथमिकता दी जाती है। वे 'प्रो-नेटलिस्ट' कहलाने के बजाय 'प्रो-फैमिली' शब्द को प्राथमिकता देती हैं।

## आईवीएफ और आनुवंशिक चयन पर सैद्धांतिक आपत्तियां
एम्मा वॉटर्स सीधे तौर पर आईवीएफ तकनीक पर पाबंदी की मांग करने के बजाय यह तर्क देती हैं कि यह प्रक्रिया प्राकृतिक मातृत्व के समय को टालने का भ्रामक भरोसा दिलाती है। उनके अनुसार भ्रूणों की आनुवंशिक जांच और उनका क्रम तय करने की प्रक्रिया बच्चों को ईश्वर के उपहार के बजाय उपभोक्ता वस्तुओं की तरह चुनने की मानसिकता को बढ़ावा देती है। उनका मानना है कि सरोगेसी महिलाओं के शरीर का वस्तुकरण करती है और बच्चों के व्यावसायिक लेन-देन को जन्म देती है। विवाह, यौन संबंध और प्रजनन को अलग करने से सामाजिक ताना-बाना बिखरता है। वे अपने नीतिगत शोध पत्रों में वयस्क अधिकारों के स्थान पर बच्चों के कल्याण और उनके अधिकारों को प्राथमिकता देने की बात कहती हैं।

रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी इन मुद्दों पर एकराय नहीं है। पार्टी का एक बड़ा वर्ग आईवीएफ के वर्तमान स्वरूप का समर्थन करता है। जन्म दर बढ़ाने के पक्षधर दक्षिणपंथी दो खेमों में बंटे हैं। तकनीकी दक्षिणपंथी समूह कृत्रिम गर्भाशय, सरोगेसी और आनुवंशिक सुधार को जनसंख्या संकट का समाधान मानते हैं, जबकि वॉटर्स जैसे परंपरावादी मानते हैं कि ये तरीके समस्या को और अधिक जटिल बनाएंगे। भ्रूण परीक्षण स्टार्टअप 'ऑर्किड' की मुख्य कार्यकारी नूर सिद्दीकी जैसे संस्थापक सोशल मीडिया पर प्राकृतिक गर्भाधान की तुलना में आनुवंशिक रूप से जांचे गए भ्रूणों को प्राथमिकता देने की पैरवी करते हैं, ताकि आनुवंशिक विकारों से बचा जा सके। इसके विपरीत वॉटर्स इसे एक अमानवीय भविष्य की शुरुआत मानती हैं।

## पॉलिसी का प्रभाव और मॉडल बिल
जब 2024 में डोनाल्ड ट्रंप ने स्वयं को 'आईवीएफ का जनक' बताते हुए मुफ्त आईवीएफ का वादा किया, तो हेरिटेज फाउंडेशन के भीतर कई लोगों को झटका लगा। इसके बावजूद वॉटर्स ने सरोगेसी के नियमन और पॉलीजेनिक परीक्षणों के विरोध का रास्ता चुना। उन्होंने विदेशी नागरिकों द्वारा अमेरिकी महिलाओं की कोख के व्यावसायिक उपयोग को रोकने के लिए एक मॉडल कानून तैयार किया। वाशिंगटन में उन्होंने 'एडिटिंग डेस्टिनी' शीर्षक से एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया, जिसमें अकादमिक विशेषज्ञों ने आनुवंशिक संपादन के नैतिक खतरों पर चर्चा की। गोष्ठी में शामिल विशेषज्ञों ने स्वीकार किया कि पहले से जन्मे व्यक्तियों के कायिक जीन संपादन और भविष्य की पीढ़ियों में स्थानांतरित होने वाले जर्मलाइन जीन संपादन के बीच स्पष्ट अंतर किया जाना चाहिए।

फ्लोरिडा के सीनेटर रिक स्कॉट के तत्कालीन मुख्य कानूनी सलाहकार ऑस्टिन रोजर्स ने वॉटर्स के मॉडल बिल के आधार पर विदेशी विरोधी देशों के नागरिकों द्वारा सरोगेसी कराने पर रोक लगाने की पहल की। रोजर्स ने कैलिफोर्निया में एक चीनी दंपत्ति द्वारा 25 सरोगेट माताओं के जरिए बच्चे पैदा करवाने और बाद में उनके उत्पीड़न के आरोपों का हवाला देते हुए कड़े कानून की आवश्यकता पर बल दिया। अकादमिक जगत के जानकारों का भी मानना है कि प्रजनन तकनीकों के अनियंत्रित प्रसार पर दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों में पर्याप्त नैतिक बहस नहीं हो रही थी।

## घरेलू जीवन और प्रभाव की शैली
वॉटर्स ने अपनी पुस्तक 'लीड लाइक जाएल' में महिलाओं को विशिष्ट पारंपरिक भूमिकाओं के माध्यम से प्रभाव डालने का सुझाव दिया है। उनका तर्क है कि घरेलू जीवन में संवाद और आतिथ्य सत्कार के जरिए भी बड़े नीतिगत बदलाव लाए जा सकते हैं। उनके घर पर विभिन्न विचारकों, रूढ़िवादी कार्यकर्ताओं और यहां तक कि उनके विरोधी विचारों वाले तकनीकी संस्थापकों की भी नियमित बैठकें होती हैं। उदाहरण के लिए, वे हिप्सटर यूजेनिक्स के समर्थक साइमन और मैल्कम कॉलिन्स जैसे विचारकों से वैचारिक मतभेद के बावजूद व्यक्तिगत संवाद बनाए रखती हैं। वे रोनाल्ड रीगन के उस कथन पर विश्वास करती हैं कि यदि व्यक्ति श्रेय लेने की चिंता न करे तो वह किसी भी लक्ष्य को हासिल कर सकता है।

पॉलीजेनिक परीक्षण करने वाली कंपनियों के संस्थापकों के साथ चर्चा में जब यह सवाल उठा कि ऊंचाई की भविष्यवाणी करने वाले जीन वास्तव में केवल 25 प्रतिशत मामलों में ही सटीक बैठते हैं, तो वॉटर्स ने यह चिंता व्यक्त की कि आनुवंशिक जोखिम स्कोर के आधार पर भ्रूणों को नष्ट करना नैतिक रूप से अनुचित है। वे मानती हैं कि तकनीक के आधार पर मानव जीवन की श्रेष्ठता तय करना भविष्य में गंभीर सामाजिक असमानताओं को जन्म देगा।

## वैश्विक नियम और अमेरिकी बाजार का अंतर
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखा जाए तो अमेरिका का फर्टिलिटी उद्योग अत्यधिक अनियमित माना जाता है। अमेरिका के अलावा लगभग सभी विकसित देश गैर-चिकित्सीय लिंग चयन पर प्रतिबंध लगाते हैं। कई प्रमुख देश वाणिज्यिक सरोगेसी को गैरकानूनी मानते हैं और संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न समितियां बच्चों के अधिकारों के तहत अज्ञात शुक्राणु या अंडाणु दान पर सवाल उठाती रही हैं। जर्मनी जैसे देशों में भ्रूण परीक्षण के लिए सरकारी अनुमोदन आवश्यक होता है। इसके विपरीत अमेरिका में निजी इक्विटी समर्थित क्लिनिक बड़े पैमाने पर आईवीएफ और संबंधित सेवाएं बिना सख्त केंद्रीय नियमों के प्रदान करते हैं।

इस खुलेपन के कारण जहां कई परिवार संतान सुख प्राप्त करने को अपनी स्वायत्तता मानते हैं, वहीं आलोचक इसे अनियंत्रित बाजार व्यवस्था कहते हैं। 'मेन हैविंग बेबीज' जैसी संस्थाओं का मानना है कि इस उद्योग पर लगाए जाने वाले सख्त प्रतिबंध समलैंगिक पुरुषों और अन्य दंपत्तियों के माता-पिता बनने के अधिकारों को सीमित कर सकते हैं। इसके विपरीत रोचेस्टर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की राजनीति विज्ञान की प्रोफेसर लॉरेन हॉल और नारीवादी लेखक जेसिका वैलेंटी जैसी आलोचक वॉटर्स की अकादमिक योग्यता और हेरिटेज फाउंडेशन के महिला विरोधी रुख पर सवाल उठाती हैं।

## कानूनी बदलाव और भविष्य की दिशा
वॉटर्स के नीतिगत दबाव का प्रभाव अब अमेरिकी कानून व्यवस्था में दिखाई देने लगा है। नवंबर 2025 में सीनेटर रिक स्कॉट ने 'सेफ किड्स एक्ट' पेश किया, जिसके तहत अमेरिकी विरोधी देशों के नागरिकों के सरोगेसी उपयोग पर रोक का प्रावधान था। फ्लोरिडा में मई में इसी प्रकार का राज्य कानून पारित हुआ। 2026 की शुरुआत में फ्लोरिडा के अटॉर्नी जनरल जेम्स उथमियर ने दो फ्रांसीसी पिताओं के कानूनी अभिभावक दर्जे को चुनौती देते हुए सरोगेसी को आधुनिक दासता बताया। केंटकी में भी सभी वाणिज्यिक सरोगेसी पर प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक प्रस्तुत किया गया।

टेक्सास में रिपब्लिकन पार्टी ने आईवीएफ के वर्तमान स्वरूप का विरोध किया और स्वास्थ्य विभाग ने अनुदान आवेदनों में जमे हुए भ्रूणों को बच्चों की श्रेणी में रखने का संकेत दिया। इसके अतिरिक्त अगस्त में जन्म पर्यटन पर रोक लगाने और विदेशी माता-पिता वाले सरोगेट शिशुओं को पासपोर्ट जारी न करने संबंधी प्रशासनिक आदेश भी सामने आए। वॉटर्स वर्तमान में 'रीथिंकिंग फर्टिलिटी' नामक अपनी अगली पुस्तक पर काम कर रही हैं और क्रायोप्रिजर्वेशन पर बनने वाले एक वृत्तचित्र से भी जुड़ी हैं। हाल ही में उन्होंने हार्वर्ड में भ्रूण कानून और नैतिकता विषयक शिखर सम्मेलन में भाग लिया। इस प्रकार 28 वर्ष की उम्र में वे अमेरिकी प्रजनन नीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में से एक बन चुकी हैं।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी फर्टिलिटी उद्योग पर बढ़ते विनियामक दबाव से कृत्रिम गर्भाधान और सरोगेसी के इच्छुक परिवारों के लिए कानूनी और वित्तीय चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

- **भारत में:** विदेशी दंपत्तियों और प्रवासी भारतीयों के लिए अमेरिकी सरोगेसी के नियमों में सख्ती से अंतरराष्ट्रीय कानूनी औपचारिकताएं कठिन हो सकती हैं। इससे सीमा पार से बच्चे गोद लेने या सरोगेसी कराने के नियम और जटिल हो जाएंगे।
- **अमेरिका में:** आईवीएफ और सरोगेसी के नए प्रतिबंधों से क्लिनिकल लागत में बढ़ोतरी होगी और प्रक्रियाएं लंबी खिंच सकती हैं। इच्छुक अभिभावकों को कानूनी परामर्श और नियामक जांच के लिए अधिक समय देना होगा।
- **वैश्विक स्तर पर:** कई देशों में वाणिज्यिक सरोगेसी पर पाबंदियों के बीच अमेरिका के रुख में बदलाव से वैश्विक फर्टिलिटी पर्यटन बाजार सिमट सकता है। विभिन्न देशों की सरकारों को नागरिकता और पितृत्व अधिकारों पर नए द्विपक्षीय समझौते करने होंगे।
- **मरीजों के लिए:** भ्रूणों की आनुवंशिक जांच पर पाबंदी या सीमा तय होने से बीमारियों की पहचान को लेकर माता-पिता की पसंद सीमित हो सकती है। क्लिनिकों को केवल चिकित्सकीय रूप से आवश्यक परीक्षणों तक ही सीमित रहना पड़ेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
अमेरिका में फर्टिलिटी उद्योग के खिलाफ यह अभियान अनियंत्रित व्यावसायिक गतिविधियों, आनुवंशिक चयन से जुड़े नैतिक विवादों और विदेशी नागरिकों द्वारा कानूनी खामियों के उपयोग के कारण शुरू हुआ है।

- **व्यावसायिक अनियमितताएं:** अमेरिकी प्रजनन उद्योग में निगरानी की कमी के चलते बच्चों की अनैतिक खरीद-फरोख्त और धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं ने नीति निर्माताओं को कड़े विनियामक कदम उठाने के लिए बाध्य किया है।
- **जीन संपादन और नैतिक चिंताएं:** भ्रूणों के चयन और आनुवंशिक परीक्षण की बढ़ती प्रवृत्ति ने वैज्ञानिक और सामाजिक हलकों में यूजेनिक्स जैसी नई असमानताओं का भय पैदा कर दिया है। रूढ़िवादी विचारकों ने इसे प्राकृतिक मानवीय मर्यादा का उल्लंघन माना है।
- **राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकता कानून:** विदेशी नागरिकों द्वारा अमेरिकी सरोगेट माताओं के माध्यम से नागरिकता प्राप्त कराने वाले जन्म पर्यटन ने संसद में कानूनी सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं। इसी कारण से अमेरिकी नागरिकों के अधिकारों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लेकर सख्त कानून बनाए जा रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. एम्मा वॉटर्स कौन हैं और वे क्यों चर्चा में हैं?
एम्मा वॉटर्स हेरिटेज फाउंडेशन में एक शोध विश्लेषक हैं, जो अमेरिकी फर्टिलिटी उद्योग, आईवीएफ और सरोगेसी के नियमन पर अपने नीतिगत शोध के लिए जानी जाती हैं।

### 2. फ्लोरिडा में सरोगेसी को लेकर क्या नए कदम उठाए गए हैं?
फ्लोरिडा में विदेशी विरोधी देशों के नागरिकों द्वारा सरोगेसी कराने पर रोक लगाने के साथ-साथ कानूनी अभिभावक के दर्जे को लेकर कड़े विनियामक कदम उठाए गए हैं।

### 3. पॉलीजेनिक परीक्षण को लेकर मुख्य विवाद क्या है?
पॉलीजेनिक परीक्षण माता-पिता को ऊंचाई, बुद्धिमत्ता और अन्य लक्षणों के आधार पर भ्रूण चुनने की सुविधा देता है, जिसे आलोचक गैर-जरूरी और यूजेनिक्स का रूप मानते हैं।

### 4. क्या रिपब्लिकन पार्टी में सभी लोग आईवीएफ के विरोध में हैं?
नहीं, अधिकांश रिपब्लिकन मतदाता और नेता आईवीएफ का समर्थन करते हैं, हालांकि पारंपरिक रूढ़िवादी गुट इसके मौजूदा अनियंत्रित स्वरूप के खिलाफ है।

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