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  "type": "article",
  "title": "कंबोडिया और मलेशिया से चल रहा डिजिटल अरेस्ट का खतरनाक खेल, कॉर्पोरेट स्टाइल में ठगे जा रहे करोड़ों रुपये",
  "summary": "दक्षिण-पूर्व एशिया से संचालित होने वाले एक संगठित साइबर ठगी रैकेट ने भारत में कई लोगों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की रंगदारी वसूली है।",
  "content": "दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से संचालित होने वाला एक बेहद संगठित और कॉर्पोरेट शैली का नेटवर्क बड़े पैमाने पर डिजिटल अरेस्ट यानी डिजिटल गिरफ्तारी के घोटालों को अंजाम दे रहा है। यह सिंडिकेट भारत, अमेरिका और चीन सहित दुनिया भर के मासूम लोगों को अपना निशाना बना रहा है। यह अवैध उद्योग बिल्कुल किसी वैध बहुराष्ट्रीय कंपनी की तरह काम करता है, जिसमें एचआर टीमें, व्यवस्थित भर्ती और प्रशिक्षण कार्यक्रम, निर्धारित लक्ष्य और प्रोत्साहन के साथ नियमित वेतन भी शामिल है।\n\nभारतीय पीड़ितों से करोड़ो की ठगी\nइन संगठित ठगों द्वारा मचाई गई तबाही का वित्तीय आंकड़ा चौंकाने वाला है। पिछले 11 महीनों के दौरान, इन साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर कई भारतीय नागरिकों से बड़ी रकम वसूली है। इनमें मुंबई के एक व्यवसायी से 58 करोड़ रुपये, दिल्ली की एक बुजुर्ग महिला से 20 करोड़ रुपये और गांधीनगर के एक डॉक्टर से 19 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धोखाधड़ी के मामले शामिल हैं। इन पीड़ितों को डरा-धमकाकर उनकी जीवन भर की कमाई लूट ली गई।\n\nकंबोडिया और मलेशिया के सुरक्षित ठिकानों का भंडाफोड़\nइस पूरे रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए 55 दिनों तक एक गहन अंडरकवर अभियान चलाया गया। यह अभियान मुंबई से शुरू होकर कंबोडिया और मलेशिया तक पहुंचा, जो इन दिनों साइबर अपराधों के सबसे बड़े केंद्र बनकर उभरे हैं। इस खुफिया जांच के दौरान गुप्त कैमरों की मदद से ठगी नेटवर्क से जुड़े लोगों की संदिग्ध गतिविधियों को रिकॉर्ड किया गया। इतना ही नहीं, कंबोडिया और मलेशिया में सक्रिय पाकिस्तानी एजेंटों के साथ बातचीत करके उनके पूरे नेटवर्क को बेनकाब किया गया।\n\nहवाई अड्डे से लेकर सुरक्षित ठिकानों तक का जाल\nइस जांच से पता चला है कि यह अवैध धंधा हवाई अड्डे पर आगमन से लेकर भारी सुरक्षा वाले ठिकानों तक बेहद योजनाबद्ध तरीके से चलाया जाता है। इन साइबर ठिकानों को कड़े पहरे में रखा जाता है ताकि कोई भी जानकारी बाहर न जा सके। इस वैश्विक रंगदारी नेटवर्क का खुलासा करने वाली यह विस्तृत जांच रिपोर्ट दो हिस्सों में 9 जुलाई और 10 जुलाई को जारी की गई है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों के प्रति नागरिकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है, क्योंकि ठग पुलिस या सरकारी अधिकारियों का रूप धरकर लोगों को डराते हैं।\n• मुंबई, दिल्ली और गांधीनगर में: इन शहरों में हाल ही में बड़े पैमाने पर वित्तीय ठगी हुई है, जिससे स्थानीय निवासियों को किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन कानूनी धमकी के मामले में तुरंत स्थानीय साइबर पुलिस से संपर्क करने की सलाह दी जाती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. डिजिटल अरेस्ट ठगी क्या है?\nयह एक ऐसी ऑनलाइन धोखाधड़ी है जहां ठग खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर पीड़ितों को डराते हैं और डिजिटल रूप से बंधक बनाकर उनसे पैसे वसूलते हैं।\n\n2. प्रमुख मामलों में पीड़ितों ने कितनी रकम गंवाई है?\nपिछले 11 महीनों में मुंबई के एक व्यवसायी ने 58 करोड़ रुपये, दिल्ली की एक बुजुर्ग महिला ने 20 करोड़ रुपये और गांधीनगर के एक डॉक्टर ने 19 करोड़ रुपये गंवाए हैं।\n\n3. इस ठगी नेटवर्क के मुख्य केंद्र कहां स्थित हैं?\nइस धोखाधड़ी नेटवर्क के मुख्य परिचालन केंद्र मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों जैसे कंबोडिया और मलेशिया में स्थित हैं।\n\n4. यह ठगी नेटवर्क किसी कॉर्पोरेट व्यवसाय की तरह कैसे काम करता है?\nइस नेटवर्क में व्यवस्थित एचआर टीमें, संगठित भर्ती और प्रशिक्षण कार्यक्रम, निश्चित लक्ष्य और वेतन के साथ-साथ प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है।\n\n5. इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश करने वाले अंडरकवर ऑपरेशन में कितना समय लगा?\nइस पूरे रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए मुंबई से लेकर कंबोडिया और मलेशिया तक 55 दिनों का गहन अंडरकवर ऑपरेशन चलाया गया था।",
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  "category": "पड़ताल",
  "publishedAt": "2026-07-08",
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    "डिजिटल अरेस्ट",
    "साइबर अपराध",
    "कंबोडिया",
    "मलेशिया",
    "ऑनलाइन ठगी",
    "धोखाधड़ी"
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  "site": "TrendKia"
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