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  "type": "article",
  "title": "नेपाल के रसुवा में भीषण बाढ़ का कहर, चीन सीमा मार्ग नष्ट और हजारों लोग फंसे",
  "summary": "नेपाल के रसुवा जिले में भीषण बाढ़ से चीन सीमा को जोड़ने वाला मार्ग पूरी तरह तबाह हो गया है और दस हजार लोग फंसे हुए हैं।",
  "content": "26 अगस्त को नेपाल में आई बाढ़ ने इस पर्वतीय क्षेत्र के भूगोल को पूरी तरह से बदलकर रख दिया, जिसमें रसुवा जिला सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ है। काठमांडू से आने वाले मार्ग का एक हिस्सा भूतकशी नदी में समा गया, जबकि अन्य हिस्से मलबे और गाद के नीचे दब गए। इस आपदा के बाद जब बचाव दल और सहायता कर्मी ज़मीनी हालात का जायजा लेने के लिए आगे बढ़े, तो उन्हें बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। काठमांडू और रसुवा के बीच की दूरी नक्शे पर भले ही कम लगे, लेकिन ज़मीन पर हालात इसके बिल्कुल विपरीत थे। रसुवा पहुंचने के लिए लगभग 190 किलोमीटर की पथरीली और टूटी-फूटी पटरियों का सफर तय करना पड़ा, जिसमें अकेले धुंचे गांव तक पहुंचने में ही करीब 16 घंटे का समय लग गया।\n\n \n\nदस हजार लोग फंसे और मलबे से अटा सुरंग मार्ग\n\nलगभग 46,000 की आबादी वाले रसुवा जिले में अभी भी करीब 10,000 लोग फंसे हुए हैं, जिन्हें निकालने के लिए हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है। धुंचे से लगभग 11 किलोमीटर आगे बढ़ने पर चिलिमे सुरंग का इलाका आता है, जहां पहाड़ों से बहकर आई लगभग 150 मीटर ऊंची गाद और मलबा जमा हो गया है। जब आपदा आई थी, तब सुरंग के अंदर छह मजदूर काम कर रहे थे जो अभी भी लापता हैं। चेतावनी मिलने के बाद बाहर मौजूद लोग भी अपनी जान बचाने के लिए सुरंग के भीतर चले गए थे। नेपाल सेना के जवान और सिम्रिक एयर की पर्वतारोही बचाव टीम भारी मशीनों और विशेष उपकरणों के साथ मलबे को हटाने और सुरंग के भीतर फंसे लोगों तक पहुंचने के प्रयासों में जुटी हुई है।\n\n \n\nप्रत्यक्षदर्शियों की दर्दनाक कहानियां और लापता लोग\n\nआपदा के इस मंजर के बीच कई दिल दहला देने वाली कहानियां सामने आई हैं। लीजा राउत नामक स्थानीय निवासी ने बताया कि वह खेतों में काम कर रही थीं जब उन्हें पानी और चट्टानों के नीचे आने की तेज आवाज सुनाई दी। जब तक वह कुछ समझ पातीं, तब तक बाढ़ उनके चार मंजिला घर को अपने साथ बहा ले गई थी, जिसे उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी की कमाई से बनाया था। एक अन्य स्थानीय निवासी उमेश ने बताया कि बाढ़ का पानी इतनी तेजी से आया जैसे कोई बुलेट ट्रेन दौड़ रही हो और महज दो से तीन मिनट में सब कुछ तबाह हो गया। इस आपदा में उनका पूरा परिवार तो सुरक्षित बच गया, लेकिन एक चाची और दो परिचित लापता हो गए, जिनमें से एक का शव बाद में बरामद हुआ।\n\n \n\nअस्पतालों के हालात और छह दिनों तक संघर्ष\n\nधुंचे के जिला अस्पताल में घायलों की भारी भीड़ देखने को मिली, जहां मरीजों को इलाज के लिए लाया गया। वरिष्ठ नर्स शोभा नौपाने ने बताया कि अपने 20-22 साल के करियर में उन्होंने ऐसा खौफनाक मंजर कभी नहीं देखा था। आपदा की रात अचानक चेतावनी मिलने के बाद वे लोग तुरंत अस्पताल पहुंचे, जहां कीचड़ और मलबे में पूरी तरह से सने हुए घायल मरीज लगातार पहुंचते रहे। बिजली और इंटरनेट सेवाएं ठप होने के कारण गंभीर रूप से घायल लोगों को काठमांडू रैफर करना भी बेहद मुश्किल हो गया था। इसके अलावा, स्याफ्रुबेसी कस्बे के रहने वाले अमृत को छह दिन बाद हेलीकॉप्टर से सुरक्षित निकालकर सेना के शिविर तक पहुंचाया गया। उन्होंने बताया कि जिस जलविद्युत परियोजना में वे काम करते थे, वहां के 150 से अधिक कर्मचारी अभी भी लापता हैं, जबकि युवराज सरकी नामक एक अन्य व्यक्ति ने खाने के बिना छह दिन जंगल में बिताए और एक निर्माणाधीन इमारत की छत पर रातें काटीं।\n\n \n\nचीन सीमा तक भारी तबाही और सीमा पार व्यापार ठप\n\nरसुवा-गीरोंग सीमा की ओर जाने वाला वह गलियारा पूरी तरह से उजड़ चुका है, जहां से पहले हर समय कंटेनर ट्रक चीन से कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन और अन्य सामान लेकर नेपाल आते थे। मुख्य जिला अधिकारी नरेंद्र पहरियार के अनुसार, बाढ़ का पानी कई जगहों पर 100 से 150 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच गया था। इस भीषण तबाही के कारण गोसाइकुंड, उत्तरगया, आमछोड़िंगमो, कालिका और नौकुंडा ग्रामीण पालिकाएं देश के बाकी हिस्सों से कट गई हैं। इसके अलावा लांगटांग क्षेत्र भी पूरी तरह से अलग-थलग पड़ गया है, जहां 116 परिवार और लगभग 450 लोग रहते हैं। हर साल इस इलाके में 25,000 से अधिक देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं, जिन्हें बाद में नुवाकोट के दुप्चेश्वर मार्ग से सुरक्षित बाहर निकाला गया।\n\n \n\nसैकड़ों व्यापारी और कैलाश यात्री लापता\n\nरसुवा की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की बड़ी भूमिका है और यह आपदा ऐसे समय में आई जब पर्यटन सीजन की तैयारियां शुरू हो रही थीं। मुख्य जिला अधिकारी नरेंद्र पहरियार ने बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े 644 पर्यटकों के लापता होने की सूचना मिली है, जिनमें भारत और अन्य देशों के नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा, नौ दिनों के बाद भी 300 से अधिक व्यापारी, कंटेनर चालक और अन्य वाणिज्यिक कामगार लापता हैं, और सीमा शुल्क कार्यालय के कम से कम 15 कर्मचारी भी अभी तक नहीं मिले हैं। बाढ़ से ठीक एक दिन पहले नेपाल आने के लिए तैयार खड़े 70 से 75 मालवाहक कंटेनर बह गए या मलबे में दब गए, जिनमें आगामी त्योहारों के लिए लाए जा रहे कपड़े और अन्य सामान भरे हुए थे, जिससे अरबों रुपये के नुकसान का अनुमान है।\n\nइसका आप पर असर\nनेपाल के रसुवा में आए भीषण बाढ़ और भूस्खलन का असर क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखला और भारत से जुड़ी धार्मिक यात्राओं पर पड़ा है।\n\n  - भारत में: कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े सैकड़ों भारतीय पर्यटकों के लापता होने और चीन के साथ सीमावर्ती व्यापार ठप होने से व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ा है।\n\n  - रसुवा में: स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के लिए सड़क मार्ग बंद होने से आवश्यक वस्तुओं की भारी कमी हो गई है और लोगों को केवल हेलीकॉप्टरों के जरिए सहायता मिल पा रही है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. नेपाल के रसुवा में भीषण बाढ़ कब आई?\nनेपाल के रसुवा में 26 अगस्त को भीषण बाढ़ आई।\n\n2. रसुवा जिले में कितने लोग फंसे हुए हैं?\nरसुवा जिले में लगभग 10,000 लोग फंसे हुए हैं जिन्हें हेलीकॉप्टरों से निकाला जा रहा है।\n\n3. चिलिमे सुरंग के पास कितनी ऊंचाई तक मलबा जमा हुआ है?\nचिलिमे सुरंग के पास पहाड़ों पर लगभग 150 मीटर ऊंची गाद और मलबा जमा हुआ है।\n\n4. कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े कितने लोग लापता बताए गए हैं?\nकैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े 644 पर्यटकों के लापता होने की सूचना मिली है।\n\n5. रसुवा में कितने कंटेनर बाढ़ में बह गए?\nलगभग 70 से 75 मालवाहक कंटेनर बाढ़ में बह गए या मलबे के नीचे दब गए।",
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  "category": "पड़ताल",
  "publishedAt": "2026-09-04",
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