# ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़ा विपक्ष, दिल्ली में सड़क से संसद तक राहुल गांधी की नई राजनीतिक बिसात

> चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी सांसदों के साथ प्रदर्शन कर रहे राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। इसके पीछे विपक्षी एकता को साधने और आगामी चुनावों के लिए नई रणनीति बनाने की गहरी सियासी कवायद देखी जा रही है।

**Type:** article · **Category:** पड़ताल · **Published:** 2026-10-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/investigations/gyanesh-kumar-ke-istiphe-para-ara-vipaksha-delhi-men-saraka-se-snsada-taka-rahul-gandhi-ki-nai-rajanitika-bisata-44368 · **Language:** Hindi
**Tags:** राहुल गांधी, ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयोग, इंडिया गठबंधन, वोट चोरी, एसआईआर, सुप्रीम कोर्ट, भारतीय जनता पार्टी

मंगलवार की सुबह राष्ट्रीय राजधानी में राजनीतिक सरगर्मी उस समय तेज हो गई जब विपक्षी नेता चुनाव आयोग के दफ्तर की ओर मार्च करने के लिए सड़कों पर उतर आए। इस विरोध प्रदर्शन की कमान संभालते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि उनके साथ लोकसभा और राज्यसभा के लगभग 300 विपक्षी सांसद मौजूद थे। जब सुरक्षाबलों ने उन्हें रोकने और हिरासत में लेने की कोशिश की, तो वे आकाशवाणी भवन के पास धरने पर बैठ गए। इसके बाद करीब आठ घंटे तक चले गतिरोध के उपरांत दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।

विपक्षी खेमे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को अब अपनी राजनीतिक साख और अस्तित्व की लड़ाई में बदल दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे टकराव के पीछे चुनावी नतीजों को लेकर विपक्ष का गहरा असंतोष और भविष्य की राजनीति के समीकरण जुड़े हुए हैं।

## चुनावी हार और पक्षपात के दोहरे आरोप
इस टकराव की नींव में विपक्ष द्वारा लगाए गए दो प्रमुख आरोप हैं। महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों के नतीजे सामने आने के बाद, राहुल गांधी ने दावा किया था कि कांग्रेस पार्टी की हार सामान्य राजनीतिक कारणों से नहीं बल्कि मतदाता सूची में हुई अनियमितताओं के चलते हुई थी। उनका तर्क था कि एक ही पते पर कई मतदाताओं के नाम दर्ज थे और बड़ी संख्या में फर्जी या डुप्लिकेट मतदाता शामिल किए गए थे। राहुल गांधी के अलावा ममता बनर्जी, अखिलेश और कई अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग पर सीधे तौर पर बीजेपी को फायदा पहुंचाने और विपक्ष को हराने का आरोप लगाया है।

दूसरा बड़ा कारण चुनाव आयोग पर लगाया गया पक्षपात का आरोप है। महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के विभाजन के बाद, फरवरी 2023 में चुनाव आयोग ने पार्टी का पारंपरिक चुनाव चिन्ह 'धनुष-बाण' बागी नेता एकनाथ शिंदे के धड़े को सौंप दिया था, जिसने बीजेपी के साथ सरकार बनाई थी। वहीं उद्धव ठाकरे के गुट को 'मशाल' चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया। इसी तरह, एनसीपी के विभाजन के बाद बीजेपी के साथ गठबंधन करने वाले अजित पवार गुट को पार्टी की पारंपरिक 'घड़ी' सौंप दी गई। बंगाल चुनाव के बाद जब टीएमसी में टूट हुई, तो आयोग ने पार्टी के पुराने चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर दोनों धड़ों के लिए रोक लगा दी।

राहुल गांधी ने आयोग के इस रवैये को 'पार्टी चोरी' करार देते हुए निशाना साधा था। उन्होंने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और उसके बाद टीएमसी के साथ एक ही पैटर्न दोहराया गया, जहां बीजेपी और चुनाव आयोग ने मिलकर पहले दलों को तोड़ा और फिर उनके मूल चुनाव चिन्ह छीन लिए।

## ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल और 20 राज्यों के चुनाव
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक चलने वाला है। इस समयावधि के दौरान देश के 20 अलग-अलग राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। विपक्षी दलों का आकलन है कि यदि ज्ञानेश कुमार अपने पद पर बने रहते हैं, तो इन सभी आगामी चुनावों में निष्पक्ष प्रक्रिया संभव नहीं हो पाएगी। 23 सितंबर को सामने आई एक विस्तृत मीडिया जांच के बाद इस मामले ने और अधिक तूल पकड़ लिया, जिसके बाद विपक्ष पूरी ताकत से सड़कों पर उतर आया।

## सड़क पर उतरने के पीछे राहुल गांधी के चार राजनीतिक लक्ष्य
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और 'वोट चोरी' के नैरेटिव पर राहुल गांधी की इस आक्रामक सक्रियता के पीछे चार बड़े राजनीतिक मकसद देखे जा रहे हैं।

पहला मकसद इस बड़े जनांदोलन के स्वाभाविक नेता के रूप में उभरना है। राहुल गांधी पिछले लगभग दो वर्षों से चुनावी अनियमितताओं के विषय को लगातार उठा रहे हैं। उन्होंने 7 अगस्त 2025 को पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस कर महादेवपुरा सीट पर हुई कथित गड़बड़ियों के साक्ष्य पेश किए थे। इसके बाद सितंबर में उन्होंने कर्नाटक और महाराष्ट्र चुनावों में गड़बड़ी के आरोप लगाए और नवंबर 2025 में हरियाणा चुनाव को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। चुनाव आयोग से जुड़ी नई जानकारियों के सामने आने के ठीक अगले दिन 23 सितंबर को उन्होंने अपनी चौथी प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस पर राजनीतिक विशेषज्ञ रशीद किदवई का विश्लेषण है कि राहुल गांधी को पहले कदम उठाने का लाभ मिल रहा है, क्योंकि उन्होंने बिहार चुनाव से पहले ही यह मामला उठाया था और अब इसके राष्ट्रीय मुद्दा बनने से उन्हें फायदा होगा।

दूसरा बड़ा मकसद 'वोट चोरी' के मुद्दे के जरिए इंडिया गठबंधन को एकजुट बनाए रखना है। जुलाई 2023 में कांग्रेस, डीएमके और आम आदमी पार्टी सहित 23 विपक्षी दलों ने मिलकर इंडिया ब्लॉक बनाया था, जिसने 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 240 सीटों पर समेटने में भूमिका निभाई थी। हालांकि विभिन्न नीतियों और राज्य स्तर पर सहयोगियों के बीच मतभेदों की खबरें आती रहती हैं, लेकिन चुनाव आयोग के कथित पक्षपात के मुद्दे पर गठबंधन के अधिकांश दल पूरी तरह एकमत दिखाई देते हैं। कांग्रेस मामलों के जानकार आदेश रावल के अनुसार, राहुल गांधी का मुख्य लक्ष्य 2029 का लोकसभा चुनाव है, जहां वे चाहते हैं कि देश की सभी 543 सीटों पर बीजेपी के सामने गठबंधन का सिर्फ एक साझा उम्मीदवार मैदान में उतरे।

तीसरा मकसद युवाओं और आम जनता को सीधे जोड़ना है। पेपर लीक मामले में दिल्ली में हुए युवा प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की तर्ज पर सीजेपी ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे का मुद्दा नए सिरे से उठाया है। राहुल गांधी मतदाता सूची की जटिल तकनीकी बहसों, फॉर्म 6 के बदलावों और एसआईआर प्रक्रिया को सरल राजनीतिक नारों जैसे 'सेव माय वोट' और 'वोट चोरी' में बदलकर जनमानस तक पहुंचाना चाहते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद का कहना है कि आम लोगों में इस मुद्दे को लेकर एक सहानुभूति है और गांवों तक यह संदेश जा चुका है कि कहीं न कहीं कुछ गलत हो रहा है। वहीं वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी का मानना है कि विपक्ष को उम्मीद है कि यदि युवाओं का एक छोटा हिस्सा भी इस मुद्दे पर उनके साथ जुड़ता है, तो उसके राजनीतिक पुनरुद्धार की संभावना बन सकती है।

चौथा मकसद जनता की धारणा की लड़ाई में बढ़त हासिल करना है। 2023 में पारित नए कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को कानूनी सुरक्षा प्राप्त है, जिसका अर्थ है कि पद पर रहते हुए उनके खिलाफ आपराधिक मामले नहीं चलाए जा सकते। मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल महाभियोग के जरिए हटाया जा सकता है। अप्रैल में विपक्ष ने इसके लिए नोटिस दिया था, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति ने इसे स्वीकार नहीं किया। संख्याबल की कमी के बावजूद विपक्ष फिर से कोशिश की तैयारी में है। आदेश रावल का कहना है कि राहुल गांधी की यह रणनीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक छवि पर असर डालने के उद्देश्य से है, ताकि यह धारणा बनाई जा सके कि चुनावी सफलता आयोग के सहयोग पर टिकी है।

## विपक्ष की चुनौतियां और अंदरूनी फांक
सड़कों पर आक्रामकता दिखाने के बावजूद विपक्ष के सामने कई गंभीर सीमाएं हैं। 6 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी और डीएमके शामिल नहीं हुईं। आम आदमी पार्टी पिछले साल ही इंडिया गठबंधन से अलग हो गई थी, जबकि डीएमके ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद गठबंधन से दूरी बना ली थी, हालांकि दोनों दल अपने स्तर पर ज्ञानेश कुमार का विरोध कर रहे हैं।

दूसरी बड़ी चुनौती ठोस कानूनी सबूतों की कमी है। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि अनियमितताएं साबित होने पर कार्रवाई की जाएगी। उधर, ज्ञानेश कुमार ने 2025 में आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि या तो राहुल गांधी सात दिनों के भीतर हलफनामा पेश करें या देश से माफी मांगें, जिसके बाद राहुल गांधी ने कोई लिखित हलफनामा पेश नहीं किया था। इसके अलावा जनसमर्थन के चुनावी वोटों में बदलने पर भी सवाल हैं। बिहार चुनाव से पहले राहुल गांधी ने 'वोटर राइट्स यात्रा' के तहत 110 सीटों पर करीब 1,300 किलोमीटर की पदयात्रा की थी, लेकिन कांग्रेस लड़ी गई 61 सीटों में से केवल छह ही जीत सकी। रशीद किदवई का मानना है कि यदि योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश में जीतते हैं और कांग्रेस पंजाब में कमजोर रहती है, तो आज के प्रदर्शन की भीड़ का कोई खास मतलब नहीं रह जाएगा।

## बीजेपी का पलटवार और आरोपों पर सवाल
इंडिया गठबंधन के इस मार्च पर बीजेपी ने तीखा पलटवार किया है। पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने इस पूरे घटनाक्रम को अराजकता फैलाने और राहुल गांधी को फिर से रीलॉन्च करने का प्रयास बताया।

संबित पात्रा ने सवाल उठाते हुए कहा कि एसआईआर का विरोध करके क्या कांग्रेस मतदाता सूची में 2.8 करोड़ मृत लोगों के नाम बनाए रखना चाहती है। उन्होंने पूछा कि क्या राहुल गांधी और सोनिया गांधी भी 'वोट चोरी' के जरिए ही सांसद बने हैं, और यदि एसआईआर प्रक्रिया अवैध है, तो क्या कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकारें भी अवैध मानी जाएंगी।

## नवंबर तक चलेगा विपक्ष का राष्ट्रव्यापी आंदोलन
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने स्पष्ट किया है कि विपक्ष नवंबर तक अपने विरोध प्रदर्शन जारी रखने की तैयारी कर चुका है। पार्टी ने संसद के शीतकालीन सत्र तक इस अभियान को जिंदा रखने के लिए विस्तृत कार्यक्रम बनाया है।

तय कार्यक्रम के अनुसार 10 से 20 अक्टूबर के बीच ब्लॉक स्तर पर साइकिल और मोटरसाइकिल के जरिए 'वोट बचाओ, देश बचाओ' अभियान चलाया जाएगा। इसके बाद 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक चौपाल बैठकों का आयोजन होगा, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली आयोजित की जाएगी। अंत में 25 और 26 नवंबर को छह अलग-अलग स्थानों से 'दिल्ली मार्च' निकाला जाएगा, जो 26 नवंबर को संविधान दिवस के मौके पर दिल्ली पहुंचेगा।

राजनीतिक विश्लेषक अमिताभ तिवारी का कहना है कि यदि ज्ञानेश कुमार दबाव में इस्तीफा देते हैं, तो पूरी एसआईआर प्रक्रिया और उसके बाद हुए सभी चुनाव संदेह के घेरे में आ जाएंगे। वहीं यदि वे इस्तीफा नहीं देते हैं, तो कांग्रेस इसे लेकर सड़कों पर जमी रहेगी और खुद को नरेंद्र मोदी के मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में स्थापित करने की कोशिश करेगी।

## सुप्रीम कोर्ट के रुख पर टिकी निगाहें
इस पूरे मामले में अदालत की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उसने फॉर्म 6 में किए गए बदलावों को मंजूरी नहीं दी थी। शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से उन पर लगाए गए 14 आरोपों पर जवाब तलब किया है। इसके साथ ही केंद्र सरकार को भी नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है, जिसके आधार पर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

## इसका आप पर असर
चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची के विवाद का सीधा असर देश के हर पंजीकृत वोटर और आने वाले चुनावों पर पड़ सकता है।

- **मतदाता सूची की जांच:** मतदाता सूची में फर्जी या डुप्लिकेट नामों को हटाने के लिए चलाए जा रहे एसआईआर अभियान और फॉर्म 6 के नियमों में बदलाव से आम मतदाताओं के पंजीकरण पर असर पड़ेगा। नागरिकों को आगामी विधानसभा और स्थानीय चुनावों से पहले अपने नाम और पते के विवरण की पुष्टि खुद करनी पड़ सकती है।
- **आगामी 20 राज्यों के चुनाव:** मुख्य चुनाव आयुक्त के 2029 तक के कार्यकाल के दौरान देश के 20 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस राजनीतिक टकराव के कारण चुनावी नतीजों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर जनता और राजनीतिक दलों की निगरानी पहले से कहीं अधिक कड़ी रहेगी।
- **राष्ट्रीय स्तर पर:** विपक्ष द्वारा घोषित देशव्यापी साइकिल-मोटरसाइकिल रैलियों और चौपालों से राजनीतिक माहौल गरमाएगा। 10 अक्टूबर से 26 नवंबर तक चलने वाले इन कार्यक्रमों के कारण विभिन्न शहरों और कस्बों में सड़क यातायात और राजनीतिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
- **दिल्ली में:** 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित बड़ी रैली और 25-26 नवंबर को छह दिशाओं से होने वाले दिल्ली मार्च के चलते राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था सख्त रहेगी। प्रदर्शन के दिनों में मध्य दिल्ली और सीमावर्ती मार्गों पर आम यात्रियों को यातायात संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच यह अभूतपूर्व टकराव हालिया विधानसभा चुनावों के विवादित नतीजों, पार्टी विभाजन के फैसलों और मतदाता सूची सुधार नियमों पर उपजे अविश्वास के कारण हुआ है।

- **तात्कालिक कारण:** महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों में अप्रत्याशित हार के बाद विपक्षी दलों ने बड़े पैमाने पर डुप्लिकेट वोटरों और एक ही पते पर दर्जनों नामों के होने का आरोप लगाया। 23 सितंबर को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सामने आए खुलासों के बाद इस असंतोष ने सड़क पर बड़े विरोध प्रदर्शन का रूप ले लिया।
- **चुनाव चिन्ह आवंटन पर विवाद:** महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी तथा बंगाल में टीएमसी के विभाजन के बाद आयोग द्वारा लिए गए निर्णयों ने विपक्ष के अविश्वास को बढ़ाया। मूल चुनाव चिन्हों को बीजेपी से हाथ मिलाने वाले बागी गुटों को दिए जाने को विपक्ष ने संस्थागत पक्षपात और राजनीतिक साजिश करार दिया।
- **नियमों और कानूनी सुरक्षा में बदलाव:** 2023 में पारित नए कानून ने चुनाव आयुक्तों को आपराधिक मुकदमों से कानूनी छूट प्रदान कर दी, जिससे उन्हें हटाने का एकमात्र रास्ता संसद में महाभियोग रह गया। वहीं फॉर्म 6 में बदलाव और एसआईआर प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोग से 14 बिंदुओं पर जवाब मांगे जाने से मामला और पेचीदा हो गया है।
- **2029 के लिए विपक्षी रणनीति:** विपक्षी गठबंधन आगामी 20 राज्यों के चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता का मुद्दा उठाकर युवाओं और आम मतदाताओं को अपने साथ जोड़ना चाहता है। इस साझा मुद्दे के जरिए वह गठबंधन सहयोगियों के बीच बिखराव को रोककर संयुक्त मोर्चा बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. विपक्षी सांसद दिल्ली में किस मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे?
विपक्षी सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।

### 2. राहुल गांधी को पुलिस ने कहां और कितने समय बाद हिरासत में लिया?
राहुल गांधी को आकाशवाणी भवन के पास करीब आठ घंटे तक धरने पर बैठने के बाद दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया।

### 3. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल कब तक है?
ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक है, और इस दौरान देश के 20 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं।

### 4. विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए क्या कदम उठाया था?
विपक्ष ने अप्रैल में महाभियोग का नोटिस दिया था, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति ने इसे स्वीकार नहीं किया।

### 5. बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रदर्शन पर क्या प्रतिक्रिया दी?
संबित पात्रा ने कहा कि यह मार्च अराजकता फैलाने का प्रयास है और पूछा कि क्या कांग्रेस एसआईआर का विरोध कर 2.8 करोड़ मृत लोगों के नाम सूची में रखना चाहती है।

### 6. विपक्ष ने आने वाले दिनों के लिए क्या विरोध कार्यक्रम तय किया है?
विपक्ष 10 से 20 अक्टूबर तक ब्लॉक स्तर पर अभियान चलाएगा, 1 नवंबर को रामलीला मैदान में रैली करेगा और 25-26 नवंबर को दिल्ली मार्च निकालेगा।

### 7. सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले में क्या कदम उठाया है?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसने फॉर्म 6 में बदलाव को मंजूरी नहीं दी थी और आयोग तथा ज्ञानेश कुमार से 14 आरोपों पर जवाब मांगा है।

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