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  "title": "पश्चिम बंगाल सीमा पर घुसपैठ और निर्वासन के दावों में बड़ा अंतर, क्या है जमीनी हकीकत",
  "summary": "भारत और बांग्लादेश की सीमा पर अवैध प्रवासियों के निर्वासन के दावों और ज़मीनी आंकड़ों में भारी विरोधाभास सामने आया है।",
  "content": "कोलकाता से लगभग नब्बे किलोमीटर दूर स्थित हकीमपुर चेकपोस्ट पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम नजर आते हैं। भारत और बांग्लादेश की सीमा की ओर बढ़ने वाले रास्तों पर पुलिस और बीएसएफ के वाहन गाड़ियों को रोककर दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल में भाजपा के सत्ता में आने के बाद यहीं पर कथित तौर पर अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशी नागरिकों के जुटने की बात कही गई थी। करीब तीन महीने बीत जाने के बाद भी यहां चौकसी तो पूरी सख्ती के साथ बरती जा रही है, लेकिन बांग्लादेश की तरफ जाने वाले लोगों की कोई भारी भीड़ दिखाई नहीं देती है।\n\nदावों और आंकड़ों का विरोधाभास\nसीमा पार भेजने के मामलों को लेकर अलग-अलग स्तर पर जो आंकड़े सामने आए हैं, उनमें बहुत बड़ा अंतर देखने को मिलता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अट्ठाइस मई को दिए बयान में कहा था कि हर दिन पांच हजार से दस हजार बांग्लादेशी वापस लौट रहे हैं। इसके बाद आठ जून को शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि चार हजार आठ सौ लोगों को निर्वासित किया जा चुका है। दूसरी तरफ बांग्लादेश सरकार का कहना है कि उसने साल दो हजार छब्बीस में अब तक केवल सतहत्तर लोगों को ही स्वीकार किया है। भारत और बांग्लादेश के बीच कुल चार हजार छियानबे किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जिसका सबसे बड़ा हिस्सा पश्चिम बंगाल राज्य से होकर गुजरता है। दोनों पक्षों के इन अलग-अलग दावों के पीछे की सच्चाई जानने के लिए सीमावर्ती चौकियों, होल्डिंग सेंटरों और पड़ोसी देश के जमालपुर-कुरीग्राम सीमा क्षेत्र का जायजा लिया गया।\n\nबीएसएफ और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया\nहकीमपुर चेकपोस्ट पर तैनात सीमा सुरक्षा बल के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शुरुआती दिनों में कुछ भीड़ जरूर हुई थी और वे लोग हफ्ते में दस से पंद्रह बांग्लादेशियों को वापस भेजते थे, लेकिन अब कई हफ्तों तक कोई नहीं आता है। पेट्रापोल और महदीपुर चेकपोस्ट पर भी नजारा कुछ ऐसा ही था जहां किसी तरह की लंबी कतारें या भीड़ देखने को नहीं मिली। महदीपुर के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पकड़े गए लोगों को सीधे सीमा पर नहीं लाया जाता है, बल्कि पहले उन्हें होल्डिंग सेंटरों में रखा जाता है और सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही उन्हें आगे भेजा जाता है। सीमा से सटे गांवों में रहने वाले लोगों का जीवन सामान्य रूप से चल रहा है, लेकिन आवाजाही के दौरान पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है। परली गांव के रहने वाले रहीमउद्दीन बिस्वास ने बताया कि पहले उन्हें आधार कार्ड साथ रखने की जरूरत नहीं पड़ती थी, लेकिन अब चेकपोस्ट पार करने के लिए दस्तावेज पास रखना जरूरी है और कागजात न होने पर वाहन जब्त कर लिए जाते हैं।\n\nहोल्डिंग सेंटरों की स्थिति और मुर्शिदाबाद का केंद्र\nपश्चिम बंगाल के गृह और पर्वतीय मामलों के विभाग ने चौबीस मई दो हजार छब्बीस को सभी जिलों में संदिग्ध विदेशी नागरिकों के लिए होल्डिंग सेंटर स्थापित करने का आदेश जारी किया था ताकि निर्वासन की प्रक्रिया शुरू होने से पहले उनके दस्तावेजों की जांच की जा सके। सीमा सुरक्षा बल के सूत्रों के अनुसार फिलहाल केवल सात सीमावर्ती जिलों में ही ऐसे केंद्र बनाए गए हैं, जहां ग्यारह होल्डिंग सेंटरों में तीन सौ से ज्यादा लोग रखे गए हैं। मुर्शिदाबाद के लालगोला इलाके में बने ऐसे ही एक केंद्र की पड़ताल की गई जो ज़मीन पर बैंक और तीसरी मंजिल पर होल्डिंग सेंटर के रूप में चल रहा है। आसपास के स्थानीय लोगों को भी इस बात की जानकारी नहीं थी कि उस इमारत के भीतर कोई ऐसा केंद्र संचालित हो रहा है। एक स्थानीय सीमा शुल्क अधिकारी ने बताया कि इस केंद्र की क्षमता बीस से पच्चीस लोगों की है और यहां से कैदियों को मालदा भेजा जाता है, जहां से उन्हें महदीपुर के रास्ते सीमा पार कराया जाता है। मालदा के इंग्लिश बाजार स्थित होल्डिंग सेंटर में राज्य के अन्य जिलों से लाए गए लोगों को भी रखा जाता है और एक अधिकारी के मुताबिक वहां मौजूदा समय में लगभग एक सौ तीस लोग मौजूद हैं।\n\nपहचान की प्रक्रिया और सीमा के उस पार का हाल\nविदेशी नागरिकों की पहचान को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा दो मई दो हजार पच्चीस को जारी मानक संचालन प्रक्रिया का पालन किया जाता है, जिसमें गहन जांच और दस्तावेज सत्यापन के बाद राज्य सरकार संबंधित व्यक्ति को बीएसएफ को सौंपती है। हालांकि इस प्रक्रिया में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किसी व्यक्ति को संदिग्ध मानने का आधार क्या होगा और अंतिम फैसला कौन करेगा। उत्तर 24 परगना के एक पुलिस अधिकारी ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि वे लोग बातचीत के लहजे और भाषा से ही पहचान लेते हैं। वहीं दूसरी तरफ जमालपुर और कुरीग्राम सेक्टर में बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के जवान लगातार गश्त कर रहे हैं और स्थानीय नागरिक भी रात के समय सीमा की निगरानी में मदद कर रहे हैं। बीडीजी अधिकारियों ने भारत पर बिना नागरिकता सत्यापन के लोगों को जबरन भेजने के आरोप लगाए हैं और जमालपुर के पास धनुआ गांव के मतिउर रहमान ने बताया कि पिछले महीने बीएसएफ ने कुछ लोगों को भेजने का प्रयास किया था जिसे रोक दिया गया। बीडीजी सेक्टर कमांडर सरकार मोहम्मद मुस्तफिजुर रहमान ने बताया कि हाल के हफ्तों में ऐसे इक्कीस प्रयास सामने आए हैं, जिनमें दो सौ से अधिक लोगों को जबरन भेजने की कोशिश को नाकाम किया गया।\n\nराजनीतिक प्रतिक्रियाएं\nदैनिक भास्कर द्वारा पश्चिम बंगाल सरकार से इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया मांगी गई थी, लेकिन समाचार प्रकाशित होने तक कोई जवाब नहीं मिला था। दूसरी तरफ दार्जिलिंग से सांसद और भाजपा प्रवक्ता राजू बिष्ट ने बयान देते हुए कहा कि गृह मंत्री और मुख्यमंत्री दोनों के आंकड़े अपनी जगह सही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि गृह मंत्री के बयान का संबंध स्वेच्छा से वापस लौटने वाले लोगों से है, जबकि मुख्यमंत्री द्वारा बताए गए आंकड़े कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद किए गए निर्वासन से जुड़े हुए हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. भारत और बांग्लादेश की सीमा की कुल लंबाई कितनी है?\nभारत और बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमा कुल चार हजार छियानबे किलोमीटर लंबी है।\n\n2. गृह मंत्री अमित शाह ने क्या दावा किया था?\nगृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया था कि हर दिन पांच हजार से दस हजार लोग वापस लौट रहे हैं।\n\n3. बांग्लादेश ने दो हजार छब्बीस में कितने लोगों को स्वीकार किया है?\nबांग्लादेश के अनुसार उसने कानूनी प्रक्रियाओं के तहत वर्ष दो हजार छब्बीस में केवल सतहत्तर लोगों को स्वीकार किया है।\n\n4. पश्चिम बंगाल में कितने जिलों में होल्डिंग सेंटर बनाए गए हैं?\nसीमा सुरक्षा बलों के अनुसार वर्तमान में केवल सात सीमावर्ती जिलों में ग्यारह होल्डिंग सेंटर बनाए गए हैं।",
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  "category": "पड़ताल",
  "publishedAt": "2026-08-09",
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    "भारत बांग्लादेश सीमा",
    "अवैध अप्रवासी",
    "घुसपैठ विवाद",
    "पश्चिम बंगाल",
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