ईरान सीमा पर तैनात यूएसएस लिंकन पर नौसैनिकों में बढ़ा मानसिक तनाव, अमेरिकी नौसेना ने भेजा नया युद्धपोत आठ महीने से अधिक समय से बिना किसी तट पर रुके समुद्र में तैनात यूएसएस अब्राहम लिंकन के नौसैनिकों में भारी थकावट और आत्महत्या की प्रवृत्ति देखी जा रही है, जिसके बाद अमेरिकी नौसेना ने राहत देने के लिए यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन को रवाना किया है। मध्य पूर्व में ईरान के तटों के पास पिछले कई महीनों से गश्त लगा रहे अमेरिकी परमाणु संचालित विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन पर तैनात नौसैनिकों के बीच एक गंभीर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है। लगभग नौ महीने से लगातार समुद्र में मौजूद और बिना किसी भूभाग पर कदम रखे तैनात पांच हजार से अधिक मरीन और चालक दल के सदस्य भारी मानसिक तनाव, अत्यधिक थकावट और आत्महत्या के विचारों से जूझ रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अमेरिकी नौसेना ने यूएसएस लिंकन की जगह लेने के लिए अपने दूसरे विमानवाहक पोत यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन को मध्य पूर्व की ओर रवाना कर दिया है। सैनिकों के परिजनों के खुलासे और मानसिक स्थिति की भयावहता युद्धपोत पर मौजूद सैनिकों की दर्दनाक स्थिति की जानकारी उनके परिजनों के माध्यम से सामने आई है। एनाबेल लोमा नाम की एक महिला ने बताया कि उनके पति ने यूएसएस अब्राहम लिंकन से समुद्र में कूदकर जान देने का प्रयास किया था। हालांकि, उन्हें समय रहते बचा लिया गया और फिलहाल वे मेडिकल लीव पर हैं, लेकिन उनसे संपर्क साधने में भारी कठिनाई हो रही है। एनाबेल के अनुसार, लगातार काम के असहनीय बोझ के कारण उनके पति पूरी तरह टूट चुके हैं और उन्हें डर है कि इस मानसिक थकावट के कारण उनका 13 साल का नौसेना करियर खराब हो जाएगा तथा उन्हें अपमानजनक तरीके से सेवा से बाहर कर दिया जाएगा। इसी तरह मारिया रोड्रिगेज नामक एक अन्य नौसैनिक की पत्नी ने बताया कि युद्धपोत पर तैनात उनके पति ने अपने एक साथी को समुद्र में छलांग लगाने की तैयारी करते देखा था। उनके पति ने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए साथी का हाथ पकड़ा और उसे खींचकर डेक पर सुरक्षित वापस ले आए। सैनिक परिवारों और वरिष्ठ नौसेना अधिकारियों के बीच 6 अगस्त को हुई एक बैठक के दौरान एक नौसैनिक की पत्नी ने रोते हुए बताया कि उसके पति ने उसे संदेश भेजा था कि वह उम्मीद करता है कि कल सुबह उसकी आंख न खुले। एक सैनिक के पिता ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके बेटे के साथी हर समय जहाज से कूदने के बारे में सोचते रहते हैं, जबकि परिवार घर पर शांति से सो रहे हैं और सैनिक वहां किसी अज्ञात कारण से संघर्ष कर रहे हैं। लगातार नौ महीने की तैनाती और खस्ताहाल बुनियादी सुविधाएं यूएसएस अब्राहम लिंकन 21 नवंबर 2025 को सैन डिएगो से प्रशांत महासागर क्षेत्र के लिए रवाना हुआ था। 11 दिसंबर को यह गुआम द्वीप पहुंचा और फिर इसे जनवरी में मध्य पूर्व में ईरान के पास अरब सागर में तैनात कर दिया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमान के अनुसार, इस युद्धपोत का उपयोग ईरान के खिलाफ अमेरिकी हवाई हमलों में किया गया, जहां इस पर मौजूद लड़ाकू विमानों ने लगभग दस हजार उड़ानें भरीं। मई में इसकी वापसी तय थी, लेकिन बिना किसी पूर्व सूचना के इसकी तैनाती की अवधि बढ़ा दी गई। जुलाई की शुरुआत में ओमान के एक बंदरगाह पर जहाज ने संक्षिप्त ठहराव किया था, जहां से केवल ताजा फल और सब्जियां ली गईं। इस दौरान कुछ सैनिकों को उतरा तो गया लेकिन उन्हें बंदरगाह के भीतर एक सुरक्षित परिसर तक ही सीमित रखा गया। ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी में लगे होने के कारण यह जहाज मित्र देशों के बंदरगाहों पर नहीं रुक सका, जिससे आपूर्ति और विश्राम दोनों ठप हो गए। लंबे मिशन के कारण जहाज के कलपुर्जे खराब होने लगे हैं। जहाजों के टॉयलेट में पानी की किल्लत हो गई है, शावर में फंगस लग गई है और सीवेज ओवरफ्लो होने की तस्वीरें भी सामने आई हैं। गर्म पानी की व्यवस्था ठप हो चुकी है। अमरीकी डेमोक्रेटिक सांसद माइक लेविन ने X पर लिखा कि जहाज पर हफ्तों से कपड़े धुलाई का काम बंद है, खाने में सिर्फ आधा कप चावल और दो रोटियां मिल रही हैं। यहां तक कि साबुन, डिओडोरेंट और टूथपेस्ट जैसी बुनियादी चीजें भी खत्म हो चुकी हैं। जहाज की कैंटीन से खरीदारी पर सख्त पाबंदियां लगा दी गई हैं और व्यक्तिगत स्वच्छता के सामान दुर्लभ हो गए हैं। मानक नियम और तैनाती चक्र का उल्लंघन सामान्य परिस्थितियों में अमेरिकी नौसेना ऑप्टिमाइज्ड फ्लीट रिस्पॉन्स प्लान (OFRP) के तहत 32 से 36 महीने यानी 3 साल के चक्र का पालन करती है। इस चक्र में सैनिकों की कुल तैनाती 7 महीने यानी 210 दिनों की होती है। परमाणु संचालित होने के कारण यूएसएस लिंकन को ईंधन की जरूरत नहीं पड़ती और अन्य रसद जहाज (UNREP के जरिए) हवा व पानी के रास्ते सामान पहुंचाते रहते हैं। हालांकि, सामान्य दिनों में जहाज महीने में कम से कम एक बार बंदरगाह पर रुकते हैं। एडमिरल डैरिल कॉडल के अनुसार, 2018 से 2022 तक इस नियम का पालन हुआ, लेकिन अक्टूबर 2023 में हमास के इजरायल पर हमले के बाद अमेरिका के सभी 11 विमानवाहक पोतों में से कई की तैनाती बढ़ानी पड़ी। 13 अगस्त तक यूएसएस लिंकन अपनी तय वापसी की तारीख से 53 दिन से अधिक समय समुद्र में बिता चुका है और 200 दिनों से अधिक समय से किसी बंदरगाह पर नहीं रुका है। इससे पहले यह जहाज 3 जनवरी 2022 को सैन डिएगो से निकलकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में 220 दिन बिता चुका था और फिर 11 जुलाई 2024 से 20 दिसंबर 2024 तक 162 दिनों के मिशन पर था। हाल ही में यूएसएस जेराल्ड फोर्ड जून 2025 से समुद्र में था, जिसने अक्टूबर 2025 में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो से जुड़े मिशन और फरवरी 2026 में मध्य पूर्व में काम किया। 16 मई 2026 को यह 326 दिनों के बाद बंदरगाह लौटा, जो वियतनाम युद्ध के बाद का सबसे लंबा रिकॉर्ड था। माना जा रहा है कि यूएसएस लिंकन कैलिफोर्निया लौटते समय इस रिकॉर्ड को तोड़ सकता है। लंबे समुद्री प्रवास का स्वास्थ्य पर पड़ता घातक प्रभाव महीनों तक लगातार समुद्र में बिना ज़मीन देखे रहने से सैनिकों में गंभीर शारीरिक और मानसिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं • निजता का अभाव: सीमित जगह में हजारों लोगों के रहने से व्यक्तिगत स्पेस पूरी तरह खत्म हो जाता है, जिससे चिड़चिड़ापन बढ़ता है। • बर्नआउट: वापसी की तारीखों में बार-बार बदलाव से मानसिक टूटन होती है। • डिप्रेशन का खतरा: इंटरनेट और कॉल की सीमित सुविधा के कारण परिवार से कट जाना और घर की खबरों से बेखबर रहना अपराधबोध और डिप्रेशन को जन्म देता है। • अनिद्रा (इंसोमनिया): निचले हिस्से में काम करने वाले सैनिकों को धूप और ताजी हवा नहीं मिलती, जिससे शरीर में विटामिन D की कमी होती है और बॉडी क्लॉक बिगड़ने से नींद उड़ जाती है। • लगातार शारीरिक थकावट: 12 से 16 घंटे की शिफ्ट, जेट इंजन का भीषण शोर और लगातार अलर्ट रहने की मजबूरी शरीर को पूरी तरह थका देती है। • ताजे भोजन का अभाव: ताजा खाना खत्म होने पर हफ्तों तक पैक्ड भोजन खाने से पाचन संबंधी समस्याएं होती हैं। • गंदे शौचालय और संक्रमण: प्लंबिंग ठप होने से गंदगी फैलती है, जिससे बीमारियों और संक्रमण का खतरा रहता है। अधिकारियों का रुख और यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन की रवानगी शुरुआत में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूएसएस लिंकन पर सैनिकों के स्वास्थ्य की चिंताजनक खबरों को खारिज कर दिया था। 14 अगस्त को ट्रंप ने लंबी तैनाती के दावों को नकारते हुए कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। हालांकि, कार्यवाहक नौसेना सचिव हंग काओ ने स्वीकार किया कि यूएसएस लिंकन ने कॉम्बैट ज़ोन में 200 से अधिक दिन और कुल 266 दिनों की कठिन तैनाती का सामना किया है। उन्होंने बताया कि कुछ सैनिकों को मानसिक स्वास्थ्य उपचार दिया गया है, लेकिन किसी मौत की खबर से इनकार किया। ट्रंप और हंग काओ दोनों ने पुष्टि की है कि यूएसएस लिंकन अब अमेरिका लौट रहा है। जापान के योकोसुका नौसैनिक अड्डे से मई में प्रशांत क्षेत्र के लिए निकला यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन अब इसकी जगह लेने आगे बढ़ रहा है। पोत की लोकेशन के अनुसार 13 अगस्त को यह मलेशिया के पास था और 22 August तक यह ओमान के दुक्म बंदरगाह या ईरान के पास पहुंचकर यूएसएस लिंकन की जगह ले सकता है। इसके वहां पहुंचते ही मध्य पूर्व में अमेरिका के तीन विमानवाहक पोत हो जाएंगे, जबकि प्रशांत महासागर क्षेत्र में एक भी अमेरिकी विमानवाहक पोत नहीं बचेगा। इसका आप पर असर • भारत और दुनिया भर में: अमेरिकी सेना की मिडल ईस्ट में बढ़ती तैनाती से हिंद महासागर और अरब सागर के व्यापारिक मार्गों पर सुरक्षा और वैश्विक राजनीति पर गहरा असर पड़ता है। • सैन्य परिवारों के लिए: लंबी और अनिश्चित तैनातियों के कारण सैनिकों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव के प्रति वैश्विक स्तर पर नीतियां बदलने की मांग उठ रही है। सवाल-जवाब 1. यूएसएस अब्राहम लिंकन पर तैनात नौसैनिकों के बीच तनाव की मुख्य वजह क्या है? करीब नौ महीने से बिना तट पर उतरे लगातार समुद्र में रहने, अनिश्चित वापसी की तारीखों, अत्यधिक काम के बोझ, और बुनियादी सुविधाओं जैसे साफ पानी तथा ताजा खाने की कमी के कारण नौसैनिकों में मानसिक तनाव और आत्महत्या के विचार पनप रहे हैं। 2. यूएसएस लिंकन के स्थान पर कौन सा युद्धपोत भेजा जा रहा है? अमेरिकी नौसेना ने यूएसएस लिंकन को राहत देने और उसकी जगह लेने के लिए यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन को मध्य पूर्व के लिए रवाना किया है। 3. अमेरिकी नौसेना के नियमों के अनुसार एक युद्धपोत की तैनाती कितने समय की होती है? ऑप्टिमाइज्ड फ्लीट रिस्पॉन्स प्लान (OFRP) के तहत तीन साल के चक्र में नौसैनिकों की तैनाती लगभग सात महीने यानी 210 दिनों के लिए होती है। 4. यूएसएस अब्राहम लिंकन ने मध्य पूर्व में कौन से प्रमुख अभियानों में भाग लिया है? यूएसएस लिंकन ने मध्य पूर्व में तैनात रहते हुए ईरान के खिलाफ अमेरिकी हवाई हमलों में हिस्सा लिया, जिसके दौरान युद्धपोत पर मौजूद फाइटर जेट्स ने लगभग दस हजार उड़ानें भरीं। https://trendkia.com/investigations/iran-sima-para-tainata-uss-lincoln-para-nausainikon-men-barha-manasika-tanava-ameriki-nausena-ne-bheja-naya-yuddhapota-17105 TrendKia — Har trend, sabse pehle.