कंबोडिया के स्कैम कंपाउंड में बिजली के झटके, जबरन 20 घंटे की ड्यूटी और भागते बॉस कंबोडिया के फ्नोम पेन्ह और चेरिथॉम में बने साइबर स्कैम कंपाउंड में लड़कों से जबरन काम कराया जाता है, टारगेट पूरा न होने पर बिजली के झटके और मारपीट होती है, वहीं अमेरिका में रहने वाले एक भारतीय को डिजिटल अरेस्ट कर 9.5 करोड़ रुपए ऐंठने वाले पाकिस्तानी एजेंट ने एक महीने में 95 लाख रुपए कमीशन कमाया। कंबोडिया के साइबर स्कैम नेटवर्क से जुड़े एक एजेंट के मुताबिक अमेरिका में रहने वाले एक भारतीय को डिजिटल अरेस्ट कर 9.5 करोड़ रुपए ऐंठे गए, और इस एक डील से एजेंट को महीने भर में 95 लाख रुपए से ज्यादा का कमीशन मिला। भारत में हर दिन करीब 61 करोड़ रुपए और हर महीने करीब 2 हजार करोड़ रुपए साइबर ठगी के जरिए लुटे जा रहे हैं, और इस पूरे कारोबार का बड़ा हिस्सा कंबोडिया और मलेशिया जैसे देशों से चलाया जा रहा है। पहले हिस्से में बताया गया था कि भारत में साइबर स्कैम कंपनियों के लिए लड़कों की भर्ती कैसे होती है। इस दूसरे और आखिरी हिस्से में कंबोडिया पहुंचने के बाद इन लड़कों के साथ क्या होता है, इसकी परतें खुलती हैं। फ्नोम पेन्ह में एजेंट विक्की से मुलाकात 15 जून को कंबोडिया की राजधानी फ्नोम पेन्ह पहुंचने पर एयरपोर्ट पर सिर्फ यात्रा का मकसद पूछा गया और सैलानी होने की बात पर इमिग्रेशन आसानी से पार हो गया। इससे पहले पाकिस्तानी एजेंट लफी ने बताया था कि एयरपोर्ट पर पूछताछ होती है, लेकिन उसकी सेटिंग है और उसका आदमी 200 से 250 डॉलर लेकर इमिग्रेशन क्लियर करा देता है। एयरपोर्ट से निकलते ही एजेंट विक्की को फोन किया गया तो उसने शाम 5 बजे मिलने के लिए बुलाया। जो लोकेशन भेजी गई वह फ्नोम पेन्ह इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास त्रापेआंग रुमचेक इलाके की थी, जहां कई गोदाम, लॉजिस्टिक्स कंपनियां, रेस्टोरेंट और अपार्टमेंट बने हुए हैं। लोकेशन पर पहुंचकर दोबारा फोन करने पर विक्की ने आगे बढ़कर मुख्य सड़क की तरफ आने को कहा। थोड़ा आगे बढ़ते ही काली शर्ट और कैप पहने एक लड़का दिखा, यही विक्की था। वह अपने घर ले गया और अंदर घुसते ही साथ मौजूद लड़के ने गेट बंद कर दिया। बातचीत में पता चला कि विक्की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का रहने वाला है। विक्की ने बताया कि यही उसका घर भी है और दफ्तर भी। स्कैम के लिए आने वाले लड़कों को पहले यहीं रखा जाता है और कुछ दिन बाद स्कैम कंपाउंड भेज दिया जाता है। उसने यह भी बताया कि अब भर्ती का तरीका बदल चुका है, एजेंट अब सीधे लोकेशन पर कॉल नहीं करते। चूंकि यह मुलाकात लफी भाई के भेजने पर हुई थी, इसलिए ही विक्की ने भरोसा दिखाया। पुलिस छापे की पहले से खबर और भागने के गुप्त रास्ते विक्की को शक न हो, इसलिए सीधे सवाल पूछने के बजाय यह कहा गया कि यहां रेस्टोरेंट खोलना है और रेस्टोरेंट के ऊपर ही कमरे बनाकर भारत से आने वाले लड़कों को रखा जाएगा, ताकि किसी को शक न हो। इस पर विक्की ने कहा कि जमीन मिल जाएगी, कोई दिक्कत नहीं। वह वीजा के साथ-साथ कानूनी मदद भी दिलाता है और अगर कोई लड़का जेल जाए तो उसके पास वकीलों का समूह है। उसने दावा किया कि पुलिस छापे की जानकारी उसे पहले ही मिल जाती है और कई बार ऐसा हुआ है कि पुलिस एक दरवाजे से आ रही थी और उसने लड़कों को दूसरे दरवाजे से बाहर निकाल दिया। विक्की ने यह भी बताया कि अगर कोई अपना खुद का स्कैम ऑपरेशन चलाना चाहे तो वह उसके लिए जगह का इंतजाम भी कर सकता है और सुरक्षा भी मुहैया कराता है। उसने यहां तक कहा कि उसने पुलिस नंबर वाली गाड़ियां तक दी हैं। सैलरी, कमीशन और सिम कार्ड का धंधा सैलरी के बारे में पूछने पर विक्की ने बताया कि लड़कों की शुरुआती सैलरी 75 हजार से 1 लाख रुपए के बीच होती है और काम के हिसाब से कमीशन अलग से मिलता है। रहने के लिए एसी कमरा और दिन में तीन बार खाना दिया जाता है। लड़का पहुंचते ही उसे पूरा काम समझा दिया जाता है। यही वह मौका था जब विक्की ने बताया कि अमेरिका में रहने वाले भारतीयों के पास खूब पैसा है और एक पाकिस्तानी लड़के ने एक महीने में 95 लाख रुपए से ज्यादा का कमीशन कमाया था क्योंकि उसने एक भारतीय ग्राहक को डिजिटल अरेस्ट कर 9.5 करोड़ रुपए भरवाए थे। बातचीत के अंत में विक्की ने कहा कि कंबोडिया में भारतीय सिम कार्ड की भारी मांग है और अगर कोई भारत से सिम कार्ड लाकर यहां पहुंचा सके तो भारी मुनाफा है, क्योंकि भारत से आने वाले लोग हजारों सिम लाते हैं। भारतीय कॉलिंग में भी पैसा है, इसका इंतजाम हो सके तो कमाई अच्छी होगी। चेरिथॉम में सैकड़ों स्कैम कंपाउंड विक्की से मुलाकात के बाद असली स्कैम कंपाउंड तक पहुंचने की कोशिश हुई। पहले स्कैम कंपाउंड में फंस चुके रोहित ने बताया था कि फ्नोम पेन्ह से 60 किलोमीटर दूर चेरिथॉम नाम की एक जगह है, जहां कई कंपाउंड बने हुए हैं। कंबोडिया के कांडाल प्रांत में स्थित इस जगह पर पहुंचने पर सैकड़ों सफेद बहुमंजिला इमारतें दिखीं, जो वियतनाम सीमा से महज 3 किलोमीटर दूर हैं। हर इमारत के बाहर ऊंची दीवारें थीं, दीवारों के ऊपर कंटीले तार लगे थे, सीसीटीवी कैमरे लगे थे और बड़े लोहे के गेट थे। कुछ कंपाउंड में ताले लगे थे तो कुछ के बाहर सुरक्षा गार्ड खड़े थे। फ्नोम पेन्ह से साथ आए स्थानीय सहयोगी पोंग वांथा ने गाड़ी से बाहर न निकलने की हिदायत दी, क्योंकि इलाके में स्कैमर घूमते रहते हैं। पोंग के मुताबिक यहां कितने कंपाउंड हैं इसकी सही गिनती किसी को नहीं पता, लेकिन ज्यादातर इमारतों में साइबर स्कैम कंपनियां चल रही थीं, कुछ अब भी गुपचुप तरीके से चल रही हैं तो कुछ ने ठिकाना बदल लिया है। पूरा इलाका सुनसान था। छिपते-छिपाते इमारतों की तस्वीरें ली गईं और फिर एक इमारत के पीछे बनी झुग्गी बस्ती के पास पहुंचा गया। वहां मिले लोगों ने बताया कि कुछ दिन पहले तक कंपाउंड में रहने वाले लड़के यहां चाय-पानी के लिए आते थे, लेकिन पुलिस छापे के बाद कई लड़के भाग चुके हैं और भीड़ काफी कम हो गई है। पूछने पर पता चला कि ये सारी इमारतें पिछले चार-पांच साल में ही बनी हैं, इन्हें चीनी लोगों ने बनवाया है। पहले यहां कुछ नहीं था, अब खेतों के बीच कंपाउंड, सड़कें और बिजली तक मौजूद है। कंपाउंड के अंदर की जिंदगी, पासपोर्ट जब्त और सीसीटीवी पहरा चेरिथॉम के जिस कंपाउंड में रोहित को रखा गया था, वहां साइबर स्कैम के लिए लाए गए लड़कों को एयरपोर्ट से सीधे गाड़ी में बैठाकर कंपाउंड के अंदर ले जाया जाता है। इसके बाद पूछताछ होती है और पासपोर्ट छीन लिया जाता है। परिवार से बात करने के लिए मोबाइल सिर्फ एक बार दिया जाता है, वो भी बिना वीडियो कॉल की सुविधा के। एक कमरे में 6 से 10 लड़कों को रखा जाता है, हॉस्टल की तरह बंक बेड बने होते हैं और सभी लड़के 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी में रहते हैं। जिन लड़कों पर भरोसा बन जाता है, उन्हें कंपनी कुछ समय के लिए कंपाउंड से बाहर जाने की इजाजत भी देती है। रोहित के जरिए ही इस इलाके में रेस्टोरेंट चलाने वाले जाहिद का नंबर मिला। जाहिद ने बताया कि सख्ती बढ़ने की वजह से वहां सब कुछ बंद कर दिया गया है, वह खुद अभी फ्नोम पेन्ह में है और लड़कों को दूसरे देशों में भेजा जा रहा है। उसका कहना था कि सख्ती कम होते ही सब कुछ फिर शुरू हो जाएगा। स्कैम कंपाउंड की ट्रेनिंग, काम और सैलरी इन स्कैम कंपाउंड में पहुंचने के बाद एक हफ्ते की ट्रेनिंग दी जाती है। रोहित और उसके साथियों को कंप्यूटर पर काम करना, मैसेजिंग ऐप इस्तेमाल करना, अंग्रेजी में बातचीत करना और पहले से तैयार स्क्रिप्ट के हिसाब से लोगों से बात करना सिखाया गया था। चेरिथॉम का कंपाउंड देखने के बाद फ्नोम पेन्ह के रिवरसाइड इलाके का रुख किया गया, जिसे स्कैमरों का अड्डा कहा जाता है। यहां भारत, बांग्लादेश, नेपाल और वियतनाम समेत कई देशों के लड़के मिले। रिवरसाइड इलाके में बांग्लादेशी लड़के की आपबीती कैमरा बंद रखकर बात करने वाले एक बांग्लादेशी लड़के ने बताया कि कंपनी ने पहले उसे कंबोडिया के सिएम रीप शहर बुलाया था क्योंकि वहां एयरपोर्ट पर उनका सेटअप था, वहां से वह फ्नोम पेन्ह पहुंचा। नौकरी देने के बजाय कंपनी ने 6 लाख रुपए की मांग रख दी, जबकि उसने पहले ही 1.5 लाख रुपए दे दिए थे। एजेंट ने कहा कि बाकी बचे 4.5 लाख रुपए चुकाने पर ही कंपनी में आ पाएगा, फिर यह रकम बढ़ाकर 8 लाख रुपए कर दी गई। परिवार ने कर्ज लेकर पैसे भेजे, तब जाकर 20 दिन होटल में फंसे रहने के बाद उसे छोड़ा गया। इसके बाद एजेंट ने उसे गोल्डन कैसीनो कंपनी भेजा। पहले 7 दिन ट्रेनिंग हुई, जिसमें रोजाना 12 घंटे बिठाकर ग्राहकों से बात करने का तरीका सिखाया गया। दोपहर के खाने में ज्यादातर चाइनीज खाना दिया जाता था, जो खाने लायक नहीं होता था। जो लड़के ठीक से काम नहीं करते थे, उनसे 20 घंटे तक काम कराया जाता था और कई बार 12 घंटे खड़े रहकर काम करना पड़ता था। टारगेट पूरा न होने पर बिजली के झटके और मारपीट उस लड़के ने बताया कि उसे बहुत प्रताड़ित किया गया। टारगेट पूरा न होने पर पहले खाना बंद कर दिया जाता, फिर एक छोटे कमरे में बंद कर दिया जाता, जहां न तो वॉशरूम जाने दिया जाता और न कुछ खाने को दिया जाता। एक दिन मैनेजर के सामने बहुत रोने के बाद टीम लीडर ने उसे बिजली के झटके दिए और बुरी तरह मारपीट की। एक हफ्ते बाद मैनेजर ने उसके एजेंट को फोन कर उसे छुड़वाया। चूंकि कर्ज बहुत ज्यादा था और लौटाने के लिए पैसे नहीं थे, इसलिए वह दूसरी कंपनी में चला गया, जहां हर महीने दो से तीन हजार डॉलर की कमाई होने लगी। लेकिन 24 अप्रैल को यह कंपनी बंद हो गई, चीनी बॉस को गिरफ्तार कर लिया गया और सभी लड़के भाग निकले। उन्हें म्यांमार-मलेशिया जाने को कहा गया, कुछ अफ्रीकी देशों में भी गए। उस लड़के के मुताबिक कंपनी ने कुछ साथियों पर इतना दबाव डाला कि उन्होंने आत्महत्या कर ली और उनमें से दो शव समुद्र में फेंक दिए गए। एजेंट भी वहां से फरार हो गए। कंबोडिया से मलेशिया, म्यांमार की तरफ पलायन पाकिस्तानी एजेंट लफी, स्कैम कंपनी के एचआर विभाग में काम करने वाले मैनुअल, कंबोडिया में मिले एजेंट विक्की और स्कैम कंपनियों में काम कर चुके लड़कों से हुई बातचीत में यह बात सामने आई कि कंपनियां अब कंबोडिया से मलेशिया, म्यांमार, तुर्कमेनिस्तान और श्रीलंका जैसे देशों की ओर शिफ्ट हो रही हैं। इन्हीं लड़कों के जरिए क्वालालंपुर के एक भर्ती एजेंट का लिंक मिला। जिस लड़के से नंबर मिला, उसका हवाला देकर एजेंट से बात की गई और यह जताया गया कि भारत से लड़कों को स्कैम कंपाउंड भेजने का काम किया जाता है। एजेंट ने पहले क्वालालंपुर में मिलने की बात कही, लेकिन वहां पहुंचने पर मिलने से मना कर दिया। उसने कहा कि सारा काम बिना मिले ही होगा, क्वालालंपुर के लिए एक ओपनिंग है, अच्छी अंग्रेजी बोलने वाले लड़कों को प्राथमिकता मिलेगी और उनकी वीडियो भेजी जाए तो वह इंटरव्यू का इंतजाम करा देगा। क्वालालंपुर के एजेंट की स्क्रिप्ट और सिलसिलेवार डिमांड इसके बाद एजेंट ने व्हाट्सऐप पर एक स्क्रिप्ट भेजी, जिसमें लिखा था कि पुलिस, ईडी या सीबीआई अधिकारी बनकर कॉल पर किसी को कैसे फंसाना है। एजेंट ने इसी स्क्रिप्ट के हिसाब से लड़कों की वीडियो रिकॉर्ड कर भेजने को कहा। एक लड़के का वीडियो भेजने पर जवाब आया कि वीडियो ठीक है, अब पासपोर्ट भेजो तो इंटरव्यू का इंतजाम कर दिया जाएगा और एक हफ्ते के भीतर उसे क्वालालंपुर बुला लिया जाएगा। कंपनी का पता पूछने और उसे एक बार देखने की इच्छा जताने पर एजेंट ने कहा कि यह चीनी कंपनी है, दफ्तर मुख्य शहर में है लेकिन पता नहीं दिया जा सकता, वह खुद भी वहां कभी नहीं गया। लड़के के चुने जाने के बाद कंपनी के लोग उसे सीधे एयरपोर्ट से ले जाएंगे। अगले दिन एजेंट ने यूरोप और अमेरिका के बाजार के लिए भी ओपनिंग की जानकारी भेजी और बताया कि सैलरी 800 डॉलर होगी, काम क्वालालंपुर से ही करना है, लेकिन सिर्फ वही लड़के भेजे जाएं जो स्कैम करने को तैयार हों। यह रिपोर्ट लिखे जाने तक लफी और मैनुअल संपर्क में बने हुए हैं, मैनुअल लड़कों के पासपोर्ट मांग रहा है जबकि लफी ने इंटरव्यू के लिए थोड़ा और इंतजार करने को कहा है। किराए के बंगलों और अपार्टमेंट में चल रहा धंधा मलेशिया में उन जगहों तक भी पहुंचा गया जहां पुलिस छापों में स्कैम कंपनियां पकड़ी गई थीं, लेकिन यह पता नहीं चल सका कि किन इमारतों में अभी स्कैम कंपाउंड चलाए जा रहे हैं। पड़ताल में यह जरूर सामने आया कि साइबर स्कैम कंपनियां क्वालालंपुर के ओल्ड क्लांग रोड, कुचाई लामा और बांग्सार इलाकों में कमर्शियल इमारतों, किराए के बंगलों या अपार्टमेंट में चल रही हैं। बाहर से सब कुछ सामान्य दिखता है, लेकिन हकीकत कुछ और होती है। एक्सपर्ट्स की राय: चीनी सिंडिकेट और नए ठिकाने कंबोडिया के कई स्कैम कंपाउंड पर जमीनी स्तर पर पड़ताल कर चुकीं ‘द आई विटनेस’ प्रोजेक्ट की ऑपरेशंस डायरेक्टर नाथन पॉल सदर्न का कहना है कि इन कंपाउंड को अंतरराष्ट्रीय चीनी सिंडिकेट चलाते हैं, जिनके स्थानीय सरकारों से अच्छे संबंध हैं। शुरुआत में टेलीकॉलिंग या कस्टमर सर्विस की नौकरी बताकर 1200 डॉलर महीने की सैलरी का लालच दिया जाता है, और लोग इसी लालच में फंस जाते हैं। उनके मुताबिक कंपाउंड पहुंचने के बाद काम करना ही पड़ता है, न करने पर अंधेरे कमरे में बंद कर मारपीट की जाती है। कंपाउंड के बाहर हथियारबंद सुरक्षा गार्ड होते हैं, इसलिए भागना आसान नहीं होता और कंपनियां पासपोर्ट भी छीन लेती हैं, जिससे पैसों की कमी में लोग कंपाउंड में ही काम करते रह जाते हैं। उनका कहना है कि इन स्कैम कंपाउंड की ऑपरेशनल क्षमता और जिस पैमाने पर ये काम कर रहे हैं, वह हैरान करने वाला है, और एक देश में सख्ती होते ही ये दूसरे देश भाग जाते हैं। कंबोडिया में मानव तस्करी के मुद्दे पर लंबे समय से काम कर रहे मार्क टेलर का कहना है कि कंबोडिया साइबर क्राइम का ठिकाना बन चुका है, और जुए के कारोबार से जुड़ी साइबर स्कैम कंपनियां यहां आ चुकी हैं, जिनमें कई देशों के लोग फंसे हुए हैं। उनके मुताबिक सख्ती के बाद ये कंपनियां श्रीलंका, फिलीपींस, म्यांमार, युगांडा और केन्या जैसे देशों की ओर शिफ्ट हो रही हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कंबोडिया में यह काम पूरी तरह बंद हो गया है। यह एक संगठित नेटवर्क है और इस पूरे उद्योग को खत्म करना आसान नहीं है। साउथ-ईस्ट एशिया स्कैम का गढ़ कैसे बना साल 2018 से 2021 के बीच चीन ने ऑनलाइन जुए, टेलीकॉम फ्रॉड और क्रिप्टो स्कैम के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया था। इसके बाद चीनी अपराधी गिरोहों ने अपना कारोबार कंबोडिया, म्यांमार और लाओस जैसे देशों में शिफ्ट कर लिया। इन देशों में कानून-व्यवस्था कमजोर है और प्रशासन तथा अपराधी नेटवर्क के बीच सांठगांठ भी है। कोरोना महामारी के दौरान यहां बने कैसीनो खाली पड़ गए थे, जिसके बाद गिरोहों ने इन्हीं इमारतों को स्कैम सेंटर में बदल डाला। इसका आप पर असर यह पूरा नेटवर्क सीधे आम लोगों की जेब पर हमला करता है, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है। • आम पाठकों के लिए: खुद को या अपने परिवार में विदेश में रहने वालों को पुलिस, ईडी या सीबीआई अधिकारी बनकर आने वाले किसी भी कॉल पर पैसे देने या वीडियो कॉल पर बने रहने से पहले नजदीकी थाने में जाकर सच्चाई जरूर जांचें, क्योंकि यही डिजिटल अरेस्ट स्कैम कई भारतीयों से करोड़ों रुपए ऐंठ चुका है। • नौकरी तलाशने वालों के लिए: विदेश में ऊंची सैलरी वाली टेलीकॉलिंग या कस्टमर सर्विस नौकरी का ऑफर मिलने पर एजेंट, कंपनी का पता और वीजा दस्तावेज बिना पूरी तरह सत्यापित किए आगे न बढ़ें, क्योंकि यही तरीका लड़कों को कंबोडिया और मलेशिया के स्कैम कंपाउंड में फंसा रहा है। सवाल-जवाब 1. डिजिटल अरेस्ट स्कैम में एजेंट ने कितना कमीशन कमाया? एजेंट विक्की के मुताबिक एक पाकिस्तानी लड़के ने एक भारतीय ग्राहक को डिजिटल अरेस्ट कर 9.5 करोड़ रुपए भरवाए, जिससे उसे एक महीने में 95 लाख रुपए से ज्यादा का कमीशन मिला। 2. भारत में साइबर ठगी से रोजाना और महीने में कितना नुकसान हो रहा है? भारत में साइबर स्कैम के जरिए हर दिन करीब 61 करोड़ रुपए और हर महीने करीब 2 हजार करोड़ रुपए लुटे जा रहे हैं। 3. स्कैम कंपाउंड कंबोडिया में कहां स्थित हैं? फ्नोम पेन्ह से 60 किलोमीटर दूर कांडाल प्रांत के चेरिथॉम इलाके में सैकड़ों बहुमंजिला स्कैम कंपाउंड बने हुए हैं, जो वियतनाम सीमा से सिर्फ 3 किलोमीटर दूर हैं। 4. एजेंट विक्की कौन है और वह क्या काम करता है? विक्की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का रहने वाला एक एजेंट है जो स्कैम कंपाउंड के लिए लड़कों को रखता, भर्ती करता और वीजा-कानूनी मदद जैसी सुविधाएं मुहैया कराता है। 5. कंपाउंड में लड़कों के साथ टारगेट पूरा न होने पर क्या होता है? एक बांग्लादेशी लड़के के मुताबिक टारगेट पूरा न होने पर पहले खाना बंद किया जाता है, फिर बंद कमरे में रखा जाता है, और कई बार बिजली के झटके देकर मारपीट भी की जाती है। 6. स्कैम कंपनियां कंबोडिया से किन देशों की ओर शिफ्ट हो रही हैं? जानकारी के मुताबिक ये कंपनियां मलेशिया, म्यांमार, तुर्कमेनिस्तान, श्रीलंका, फिलीपींस, युगांडा और केन्या जैसे देशों की ओर शिफ्ट हो रही हैं। 7. 24 अप्रैल को क्या हुआ था? 24 अप्रैल को एक स्कैम कंपनी अचानक बंद हो गई, उसके चीनी बॉस को गिरफ्तार कर लिया गया और सभी लड़के वहां से भाग निकले। 8. क्वालालंपुर के एजेंट ने किस तरह की स्क्रिप्ट भेजी थी? एजेंट ने व्हाट्सऐप पर एक स्क्रिप्ट भेजी थी जिसमें पुलिस, ईडी या सीबीआई अधिकारी बनकर कॉल पर लोगों को फंसाने का तरीका लिखा था, और सैलरी 800 डॉलर बताई गई थी। https://trendkia.com/investigations/knbodiya-ke-skaima-knpaunda-men-bijali-ke-jhatake-jabarana-20-ghnte-ki-dyuti-aura-bhagate-bosa-6400 TrendKia — Har trend, sabse pehle.