{
  "type": "article",
  "title": "कॉकपिट में क्रैश कुल्हाड़ी से हमलावर बना ओमान का को-पायलट, सुरक्षा चूक और पाकिस्तानी पायलटों पर भारत के नियमों की पड़ताल",
  "summary": "फ्लाईदुबई की फ्लाइट में कैप्टन स्मित मच्छार पर क्रैश एक्स से हमला करने वाले को-पायलट हम्माम अल-हमामी के कट्टरपंथी अतीत, इज़राइल की सुरक्षा खामियों और भारत के विमानन नियमों पर एक विस्तृत पड़ताल।",
  "content": "हवाई सफर के दौरान कॉकपिट के भीतर होने वाली अप्रत्याशित घटनाएं पूरी दुनिया के विमानन क्षेत्र को हिलाकर रख देती हैं। हाल ही में फ्लाईदुबई के एक विमान में कैप्टन स्मित मच्छार पर हुए जानलेवा हमले ने अंतरराष्ट्रीय एविएशन प्रोटोकॉल और एयरलाइन सुरक्षा की पोल खोल दी है। विमान के भीतर यह हमला किसी चाकू या आम हथियार से नहीं, बल्कि कॉकपिट में आपातकालीन स्थिति के लिए रखी जाने वाली क्रैश कुल्हाड़ी यानी क्रैश एक्स से किया गया था। इस औजार को विमान के केबिन या कॉकपिट में आपात स्थिति के दौरान खिड़कियां तोड़ने अथवा बाधाएं हटाने के लिए रखा जाता है। हमले को अंजाम देने वाला कोई बाहरी व्यक्ति या यात्री नहीं, बल्कि खुद विमान का को-पायलट हम्माम अल-हमामी था। उसके इस हिंसक कदम के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं कि जिस पायलट को पूर्व में उसकी संदिग्ध गतिविधियों की वजह से उड़ान भरने से रोका गया था, वह आखिर इज़राइल जाने वाले संवेदनशील विमान के कॉकपिट तक कैसे पहुंचा और क्या ऐसी कोई सुरक्षा खामी भारत के विमानन क्षेत्र में भी संभव हो सकती है।\n\n \n\nकट्टरपंथी विचारधारा और ओमान एयर से निष्कासन का सफर\n\nजांच और मीडिया हलकों में सामने आई जानकारियों के अनुसार 29 वर्षीय हम्माम अल-हमामी ओमान का नागरिक है। उसके पिता ओमानी मूल के हैं जबकि उसकी मां सीरियाई मूल की हैं, हालांकि ओमान प्रशासन की तरफ से अभी उसकी नागरिकता की औपचारिक पुष्टि होना बाकी है। हमामी ने अपने जीवन का अधिकांश समय संयुक्त अरब अमीरात में गुजारा था। उसके अतीत के तार सीरिया से भी जुड़े रहे हैं, जहां रहने के दौरान वह उग्र और कट्टरपंथी विचारों के प्रभाव में आया था।\n\nहमामी के लिंक्डइन प्रोफाइल के ब्योरे के मुताबिक उसने इंग्लैंड की बकिंघमशायर न्यू यूनिवर्सिटी से साल 2023 में डिस्टेंस-लर्निंग कोर्स के जरिए एविएशन मैनेजमेंट की डिग्री हासिल की थी। वह साल 2017 से ओमान की राष्ट्रीय एयरलाइन ओमान एयर के साथ जुड़ा हुआ था और वहां काम कर रहा था। साल 2024 में पायलट ट्रेनिंग सेशन के दौरान उसे कट्टरपंथी वेबसाइटों को ब्राउज करते और सामग्री खंगालते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था। इस गंभीर सुरक्षा अनुशासनहीनता के बाद ओमान एयर ने तुरंत सख्त कदम उठाते हुए उसे फ्लाइंग ड्यूटी से हटा दिया और ग्राउंड आधारित डेस्क जॉब पर ट्रांसफर कर दिया। हमामी को दफ्तर में बैठकर डेस्क का काम करना पसंद नहीं आया, जिसके चलते उसने जून 2025 में ओमान एयर से इस्तीफा दे दिया।\n\nओमान एयर छोड़ने के तुरंत बाद हमामी मोरक्को की राष्ट्रीय एयरलाइन 'एयर मारोक' में शामिल हो गया, जहां उसने जून 2025 से जनवरी 2026 तक सेवाएं दीं। वहां से भी इस्तीफा देने के बाद उसने फरवरी 2026 में, यानी इस घटना से लगभग आठ महीने पहले, को-पायलट के तौर पर फ्लाईदुबई ज्वाइन कर ली।\n\n \n\nघटना के नौ घंटे बाद सोशल मीडिया प्रोफाइल से रहस्यमयी पोस्ट\n\nफ्लाईदुबई के बोइंग 737 मैक्स 8 विमान में घटी इस खौफनाक वारदात के ठीक नौ घंटे बाद बुधवार को हमामी के लिंक्डइन खाते से दो बेहद चौंकाने वाली पोस्ट साझा की गईं। फिलहाल यह साफ नहीं हो सका है कि उन पोस्टों को किसने और कहां से अपलोड किया था।\n\nपहली पोस्ट में बोइंग 737 मैक्स विमान के कॉकपिट के भीतर रिकॉर्ड किए गए वीडियो क्लिप शामिल थे। इस वीडियो में दुबई एयरपोर्ट पर खड़ी इज़राइली एयरलाइन 'एल अल' के विमान का जूम किया गया दृश्य दिखाई दे रहा था। कॉकपिट की स्क्रीन पर फ्लाइट नंबर OMA624 और तारीख 11 अक्टूबर 2023 दर्ज थी। यह दुबई से मस्कट की उड़ान थी और यह तारीख हमास द्वारा इज़राइल पर किए गए हमलों के ठीक चार दिन बाद की थी, जब हमामी ओमान एयर में तैनात था।\n\nउसी वीडियो के अन्य क्लिपों में एक अन्य इज़राइली एयरलाइन अरकिया के विमानों के साथ-साथ एल अल के अन्य विमानों को भी दिखाया गया था। क्लिप के अंतिम हिस्से में अल-कायदा कमांडर अयमान अल-जवाहिरी और 2009 में अमेरिकी सीआईए के सात अधिकारियों सहित नौ लोगों की आत्मघाती हमले में जान लेने वाले अल-कायदा आतंकी हुमाम खलील अबू-मुलाल अल-बलावी की तस्वीरें लगाई गई थीं।\n\nदूसरी पोस्ट में एक एआई जनरेटेड तस्वीर थी, जिसमें इस्लाम के तीन पवित्र स्थलों मक्का, मदीना और यरुशलम को एक चमकती हुई रेखा से आपस में जुड़ा दिखाया गया था। इसके बैकग्राउंड में एक गाना बज रहा था, जिसके बोल अपमान को खारिज करने और मौत के खौफ से परे रहने के संदेश दे रहे थे। इसी तरह के दोनों वीडियो हमामी के नाम से बने इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी उसी वक्त डाले गए थे, जिसे बाद में सोशल मीडिया से हटा दिया गया।\n\n \n\nमहिलाओं के कामकाज के खिलाफ नफरत और कट्टरपंथी सोच\n\nहमामी के एक्स प्रोफाइल पर मौजूद पुराने ब्योरे से यह बात भी पुख्ता हुई है कि वह धार्मिक रूप से बेहद कट्टर था और कामकाजी महिलाओं के प्रति गहरी नफरत रखता था। यद्यपि अब उसके अकाउंट से ये पोस्ट हटाई जा चुकी हैं, लेकिन 2021 और 2022 के बीच साझा किए गए करीब 3,000 ट्वीट्स के विश्लेषण से उसकी मानसिकता का खुलासा हुआ।\n\nफरवरी 2022 की एक पोस्ट में हमामी ने लिखा था कि उसकी मां को उसके लिए एक ऐसी लड़की खोजने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा जो शादी के बाद नौकरी न करे और हिजाब पहने। उसने को-वर्किंग ऑफिसों में महिलाओं के काम करने को लेकर बेहद आपत्तिजनक बातें लिखी थीं और दावा किया था कि साझा दफ्तरों में काम करने से धार्मिक और संस्कारी लड़कियों की जिंदगी बर्बाद होती है और उनका शोषण होता है।\n\nफ्लाईदुबई के एक अन्य पायलट ने भी इस बात की पुष्टि की कि हमामी अत्यधिक कट्टर था, दिन में कई बार नमाज पढ़ता था और किसी भी महिला से हाथ मिलाने से पूरी तरह परहेज करता था।\n\n \n\nओमान एयर के प्रतिबंध के बावजूद इज़राइल की उड़ान तक कैसे पहुंचा हमामी?\n\nइस पूरे मामले पर इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि जिन देशों के इज़राइल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं, वहां के पायलट इज़राइल जाने वाले विमानों को नहीं उड़ा सकते। उन्होंने कहा कि हमामी किसी तरह इस नियम को चकमा देकर कॉकपिट में घुसने में कामयाब रहा, जो एक बहुत बड़ी सुरक्षा खामी है। दरअसल ओमान फिलिस्तीन का समर्थक है और उसने इज़राइल को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं दी है, जिसके चलते दोनों देशों के बीच औपचारिक कूटनीतिक रिश्ते नहीं हैं।\n\nहमामी के इज़राइल की उड़ान संचालित करने के पीछे मुख्य रूप से तीन सिद्धांत सामने आ रहे हैं\n\n \n\n1. विमानन समझौतों में विसंगति और नियमों का अभाव\n\nएयरलाइंस विभिन्न देशों के साथ हवाई परिचालन समझौते करती हैं, जो यह तय करते हैं कि किन राष्ट्रीयताओं के पायलटों को उन उड़ानों पर भेजा जा सकता है। इज़राइली रिपोर्ट्स के अनुसार फ्लाईदुबई के परिचालन समझौते में यह स्पष्ट शर्त थी कि ओमानी पायलटों को इज़राइल नहीं भेजा जाएगा। परंतु सितंबर 2020 में हस्ताक्षरित अब्राहम एकॉर्ड्स के तहत संयुक्त अरब अमीरात और इज़राइल के बीच एक द्विपक्षीय विमानन सेवा समझौता हुआ था। इसके अनुच्छेद 13 के अनुसार दोनों देशों की एयरलाइंस अपने किसी भी विमानन स्टाफ को बिना किसी राष्ट्रीयता के प्रतिबंध के एक-दूसरे के यहां भेज सकती हैं। इस द्विपक्षीय समझौते में पायलटों की नागरिकता को लेकर कोई अलग पाबंदी नहीं थी, जिससे फ्लाईदुबई के मूल परिचालन समझौते में भारी भ्रम और चूक पैदा हो गई।\n\n \n\n2. पृष्ठभूमि जांच और खुफिया निगरानी की विफलता\n\nइज़राइली खुफिया एजेंसी शिन बेट संवेदनशील देशों से आने वाली उड़ानों और उनके क्रू मेंबर्स की निगरानी करती है। लेकिन कई रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि शिन बेट ने खुद हमामी की कोई स्वतंत्र बैकग्राउंड जांच नहीं की, बल्कि उसने पूरी तरह फ्लाईदुबई पर भरोसा किया कि वह प्रतिबंधित देशों के पायलटों को इज़राइल नहीं भेजेगी। इसके अलावा ओमान और इज़राइल के बीच हाल के वर्षों में आवाजाही आसान हुई थी और कई ओमानी पायलट इज़राइल आ-जा चुके थे। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि ओमान एयर ने हमामी पर लगाए गए प्रतिबंध की जानकारी अन्य अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों को दी थी या नहीं। फ्लाईदुबई ने भी यह स्पष्ट नहीं किया है कि नियुक्ति से पहले हमामी का कोई बैकग्राउंड वेरिफिकेशन ओमान सरकार या उसकी पिछली एयरलाइन से कराया गया था या नहीं। घटना के बाद इज़राइल की परिवहन मंत्री मिरी रेगेव की मांग पर फ्लाईदुबई की इज़राइल उड़ानों को पूरी तरह निलंबित कर दिया गया है।\n\n \n\n3. दोहरी नागरिकता अथवा जाली दस्तावेजों की आशंका\n\nशुरुआत में यह कयास लगाए जा रहे थे कि हमामी ने किसी ऐसे देश की नागरिकता हासिल कर ली होगी जिसके नागरिकों को इज़राइल जाने की अनुमति है, और उसी के आधार पर वह फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 तक पहुंचा। हालांकि 2 अक्टूबर को आई मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि उसके पास दोहरी नागरिकता नहीं थी और वह केवल ओमानी पायलट के रूप में विमान उड़ा रहा था। एविएशन विशेषज्ञ अनंत सेठी का कहना है कि फ्लाईदुबई एक बजट एयरलाइन है जो पायलट ट्रेनिंग और सुरक्षा प्रक्रियाओं पर कम खर्च करती है, जबकि सुरक्षा का असल जिम्मा एयरलाइन से ज्यादा संबंधित सरकारों का होता है। उनके अनुसार इस बात की भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि किसी बड़ी साजिश के तहत हमामी के लिए जाली दस्तावेजों से किसी तीसरे देश की नागरिकता तैयार कराई गई हो ताकि उसे फ्लाईदुबई में भर्ती कराया जा सके।\n\n \n\nक्या कोई पाकिस्तानी पायलट भारत के लिए विमान उड़ाकर आ सकता है?\n\nअप्रैल 2025 से भारत और पाकिस्तान ने एक-दूसरे के लिए अपना हवाई क्षेत्र यानी एयरस्पेस पूरी तरह बंद कर रखा है। इसका सीधा मतलब यह है कि दोनों मुल्कों के बीच न तो कोई सीधी उड़ान संचालित होती है और न ही दोनों देशों की एयरलाइंस एक-दूसरे के हवाई क्षेत्र से होकर किसी तीसरे देश जा सकती हैं। इसके अलावा पाकिस्तान में पंजीकृत कोई भी विमान भारत में प्रवेश नहीं कर सकता, भले ही उसे किसी विदेशी एयरलाइन द्वारा ही क्यों न संचालित किया जा रहा हो।\n\nएविएशन विशेषज्ञ अनंत सेठी के मुताबिक, कड़े प्रतिबंधों के बावजूद दो सैद्धांतिक रास्ते ऐसे हो सकते हैं जिनसे पाकिस्तानी मूल का पायलट किसी विदेशी उड़ान से भारत आ सकता है\n\n \n\n1. दोहरी नागरिकता का सहारा\n\nपाकिस्तान अपने नागरिकों को दोहरी नागरिकता रखने की कानूनी इजाजत देता है। इस वजह से बड़ी संख्या में पाकिस्तानी नागरिक अमेरिका सहित कई पश्चिमी मुल्कों की नागरिकता ले लेते हैं। अमेरिका जैसे देशों में विदेशी मूल का व्यक्ति नागरिकता लेकर वहां की एयरलाइंस में कमर्शियल पायलट बन सकता है। ऐसे में यह संभव है कि पाकिस्तानी मूल का कोई व्यक्ति अमेरिकी या किसी अन्य विदेशी पासपोर्ट के आधार पर किसी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन का पायलट बनकर भारत की उड़ान पर आ जाए।\n\n \n\n2. जनरल डिक्लेरेशन और विदेशी एयरलाइन भर्ती\n\nदुनियाभर की कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस विदेशी नागरिकों को पायलट के तौर पर नौकरी देती हैं। भारत ने विदेशी एयरलाइंस पर ऐसी कोई सीधी पाबंदी नहीं लगाई है जैसी इज़राइल ने फ्लाईदुबई पर ओमानी पायलटों को लेकर लगाई थी। यद्यपि भारत ने अप्रैल 2025 से पाकिस्तानी नागरिकों और पायलटों के वीजा जारी करने पर रोक लगा रखी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत बिना पूर्व वीजा वाले पायलट भी 'जनरल डिक्लेरेशन' दस्तावेज के जरिए विमान के साथ किसी देश में प्रवेश कर सकते हैं। यह जनरल डिक्लेरेशन उड़ान शुरू होने पर और वापसी की उड़ान के वक्त जमा किया जाता है।\n\nहालांकि भारत का नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो यानी बीसीएएस संवेदनशील उड़ानों और क्रू सदस्यों की बेहद कड़ी निगरानी करता है। बीसीएएस की इस चाक-चौबंद सुरक्षा प्रणाली के चलते किसी पाकिस्तानी नागरिक का क्रू मेंबर के रूप में भारत में प्रवेश कर पाना लगभग असंभव है, क्योंकि पायलटों के दस्तावेजों और बैकग्राउंड की गहन जांच की जाती है। अनंत सेठी का कहना है कि यह पूरा मसला अंततः पायलट के पेशे पर टिके बुनियादी भरोसे का है, ठीक वैसे ही जैसे कोई यह उम्मीद नहीं करता कि एक डॉक्टर ऑपरेशन थिएटर में मरीज की जान ले लेगा, फिर भी ऐसे अपराध सामने आ जाते हैं।\n\n \n\nविमान हाइजैक की मंशा और जांच के मुख्य बिंदु\n\nवारदात के बाद शुरुआती इलाज पूरा होने पर हमामी को सऊदी अरब से संयुक्त अरब अमीरात भेज दिया गया है, जहां सुरक्षा और जांच एजेंसियां उससे गहन पूछताछ कर रही हैं। जांचकर्ताओं के हवाले से यह दावा सामने आया है कि हमामी ने पूछताछ में कबूल किया कि उसका असली इरादा विमान को अगवा कर इज़राइल की धरती पर क्रैश कराने का था। तलाशी के दौरान उसके निजी सामान से 'फ्री फिलिस्तीन' लिखे पर्चे और फिलिस्तीन समर्थक प्रचार सामग्री भी बरामद हुई है।\n\nफिलहाल जांच एजेंसियां तीन सबसे अहम सवालों की तह तक जाने की कोशिश में जुटी हैं: पहला यह कि हमामी किस समय और किन परिस्थितियों में कट्टरपंथ की गिरफ्त में आया, क्योंकि जांच में उसके कुछ धार्मिक हस्तियों से मिलने की बात भी सामने आई है; दूसरा यह कि क्या उसने इस पूरे खौफनाक मंसूबे को अकेले तैयार किया था या उसके साथ कोई अन्य सिंडिकेट भी शामिल था; और तीसरा यह कि उड़ान के दौरान कैप्टन स्मित पर किए गए इस जानलेवा हमले के पीछे क्या कोई संगठित आतंकी साजिश सक्रिय थी।\n\nइसका आप पर असर\nअंतरराष्ट्रीय उड़ानों में पायलटों की सुरक्षा जांच और कॉकपिट प्रोटोकॉल में संभावित बदलावों का सीधा असर हवाई यात्रियों की यात्रा सुरक्षा और एयरलाइन संचालन पर पड़ेगा।\n\n• यात्री सुरक्षा और विश्वास: अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों में पायलटों के बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और मानसिक स्वास्थ्य जांच को कड़ा किया जाएगा। यात्रियों के लिए यह सुनिश्चित होगा कि संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर केवल पूर्णतः सत्यापित क्रू ही तैनात हों।\n• भारत में विमानन सुरक्षा: भारत आने वाली विदेशी एयरलाइनों के क्रू सदस्यों की बीसीएएस द्वारा जांच और सख्त की जाएगी। सुरक्षा जांच के कड़े नियमों के चलते अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के डिपार्चर और इमिग्रेशन प्रोसेस में थोड़ा अधिक समय लग सकता है।\n• मध्य पूर्व की यात्राएं: इज़राइल और यूएई के बीच उड़ान संचालन की समीक्षा से उड़ानों के शेड्यूल में अस्थायी बदलाव संभव हैं। इन रूट्स पर यात्रा करने वाले यात्रियों को अपनी उड़ानों की स्थिति पहले से जांचने की सलाह दी जाती है।\n• एयरलाइंस में भर्ती प्रक्रिया: बजट और फुल-सर्विस एयरलाइंस दोनों में पायलटों की भर्ती और बैकग्राउंड ट्रैकिंग पर अतिरिक्त खर्च होगा। एयरलाइंस द्वारा इन सुरक्षा लागतों के समायोजन से भविष्य में लंबी दूरी के टिकटों पर मामूली असर पड़ सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nफ्लाईदुबई विमान में हुआ यह हमला व्यक्तिगत कट्टरपंथ, एयरलाइनों के बीच सूचनाओं के तालमेल की कमी और कूटनीतिक समझौतों में मौजूद कानूनी अस्पष्टताओं के एक जटिल गठजोड़ का परिणाम था।\n\n• कट्टरपंथी प्रभाव और पूर्व चेतावनी की अनदेखी: को-पायलट हम्माम अल-हमामी सीरिया प्रवास के दौरान कट्टरपंथी विचारधारा के संपर्क में आया था और 2024 में ओमान एयर में प्रशिक्षण के दौरान संदिग्ध वेबसाइटें देखते पकड़ा गया था। उसे उड़ान से हटाकर केवल डेस्क जॉब पर रखा गया, लेकिन उसके इस रिकॉर्ड को अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों के साथ साझा नहीं किया गया।\n• विमानन समझौतों में कानूनी विसंगति: फ्लाईदुबई के इज़राइल परिचालन समझौते में ओमानी पायलटों पर रोक थी, लेकिन 2020 के अब्राहम एकॉर्ड्स के अनुच्छेद 13 में राष्ट्रीयता के आधार पर किसी क्रू पर रोक न होने का सामान्य नियम दर्ज था। इस नीतिगत विरोधाभास के कारण फ्लाईदुबई ने हमामी को इज़राइल जाने वाली फ्लाइट पर रोस्टर कर दिया।\n• सुरक्षा एजेंसियों का एयरलाइन पर अत्यधिक भरोसा: इज़राइली खुफिया एजेंसी शिन बेट ने हमामी की स्वतंत्र पृष्ठभूमि जांच करने के बजाय एयरलाइन के स्व-अनुपालन पर भरोसा किया। इसी तरह फ्लाईदुबई ने भी मोरक्को से आने के बाद उसके पुराने ओमानी रिकॉर्ड की विस्तृत पड़ताल नहीं की।\n• विमान क्रैश कराने की हिंसक योजना: जांचकर्ताओं के अनुसार हमामी का मकसद विमान का नियंत्रण छीनकर उसे इज़राइल में क्रैश करना था। उसके पास से फिलिस्तीन समर्थक प्रचार सामग्री मिलने और कॉकपिट में क्रैश कुल्हाड़ी का हथियार के रूप में इस्तेमाल करने से इस साजिश का खुलासा हुआ।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. फ्लाईदुबई की फ्लाइट में कैप्टन पर किस चीज से हमला किया गया था?\nकैप्टन स्मित मच्छार पर कॉकपिट में रखी जाने वाली आपातकालीन क्रैश कुल्हाड़ी (क्रैश एक्स) से हमला किया गया था।\n\n2. को-पायलट हम्माम अल-हमामी को ओमान एयर ने फ्लाइंग ड्यूटी से क्यों हटाया था?\nसाल 2024 में पायलट ट्रेनिंग के दौरान हमामी को कट्टरपंथी वेबसाइटों को देखते हुए पकड़ा गया था, जिसके बाद उसे डेस्क जॉब पर भेज दिया गया था।\n\n3. इज़राइल के नियमों के बावजूद हमामी उस उड़ान का पायलट कैसे बना?\nअब्राहम एकॉर्ड्स के अनुच्छेद 13 में राष्ट्रीयता की शर्त न होने के कारण नियमों में भ्रम पैदा हुआ और सुरक्षा एजेंसियों ने उसकी स्वतंत्र बैकग्राउंड जांच नहीं की थी।\n\n4. क्या पाकिस्तानी पायलट किसी विदेशी एयरलाइन के जरिए भारत आ सकते हैं?\nयदि किसी पायलट के पास अमेरिका जैसी दोहरी नागरिकता हो तो वह तकनीकी रूप से आ सकता है, लेकिन भारत की बीसीएएस की कड़ी जांच के चलते ऐसा होना लगभग असंभव है।\n\n5. जांच में हमामी का असली मकसद क्या सामने आया है?\nजांच एजेंसियों के अनुसार हमामी का इरादा विमान को अपने नियंत्रण में लेकर इज़राइल में क्रैश कराने का था।",
  "url": "https://trendkia.com/investigations/kokapita-men-kraisha-kulhari-se-hamalavara-bana-oman-ka-ko-payalata-suraksha-chuka-aura-pakistani-payalaton-para-india-ke-niyamon--42538",
  "category": "पड़ताल",
  "publishedAt": "2026-10-04",
  "tags": [
    "फ्लाईदुबई",
    "हम्माम अल हमामी",
    "विमान सुरक्षा",
    "कॉकपिट हमला",
    "ओमान एयर",
    "नागरिक उड्डयन",
    "बीसीएएस",
    "इज़राइल"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}