# मानव दिमाग के विचार पढ़ने और बदलने की तकनीक तैयार, डेटा सुरक्षा के लिए न्यूरोराइट्स कानून की उठी मांग

> न्यूरोसाइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तालमेल से मानव मस्तिष्क के विचारों को पढ़ना और नियंत्रित करना संभव हो गया है। वैज्ञानिकों और कानूनी विशेषज्ञों ने मस्तिष्क डेटा की व्यावसायिक बिक्री रोकने के लिए नए न्यूरोराइट्स कानूनों की मांग की है।

**Type:** article · **Category:** पड़ताल · **Published:** 2026-08-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/investigations/manava-dimaga-ke-vichara-parhane-aura-badalane-ki-takanika-taiyara-deta-suraksha-ke-lie-neurorights-kanuna-ki-uthi-manga-16044 · **Language:** Hindi
**Tags:** न्यूरोसाइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, न्यूरोराइट्स, ब्रेन डेटा प्राइवेसी, माइंड रीडिंग टेक, राफेल युस्टे, ईईजी तकनीक

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक न्यूरोसाइंस के तेजी से होते विकास ने मानव मस्तिष्क की सबसे निजी सीमाओं को भेदना शुरू कर दिया है। प्रयोगशालाओं में हुए अत्याधुनिक प्रयोगों से यह साबित हो चुका है कि मस्तिष्क के भीतर चल रहे विचारों, भावनाओं और भाषाई पैटर्न को न केवल पढ़ा जा सकता है, बल्कि कृत्रिम तरीकों से दिमाग में नई संवेदनाएं और विचार भी रोपे जा सकते हैं। प्रयोगशालाओं से निकलकर यह तकनीक अब कार्यस्थलों, उपभोक्ता उपकरणों और कॉरपोरेट डेटा प्रणालियों तक पहुंच रही है, जिससे मानव चेतना की प्राइवेसी और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

## दृष्टि क्षेत्र में हेरफेर और चूहों पर सफल प्रयोग
न्यूरोवैज्ञानिक राफेल युस्टे और उनकी शोध टीम ने मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को समझने के लिए चूहों पर एक दूरगामी प्रयोग किया। उन्होंने पाया कि अंधेरे और रोशनी की तेज कंट्रास्ट वाली पट्टियां आंखों के सामने हिलाने से विजुअल कॉर्टेक्स की कोशिकाएं तेजी से सक्रिय होती हैं। शोधकर्ताओं ने एक कंप्यूटर स्क्रीन पर ऊपर-नीचे और दाएं-बाएं घूमती पट्टियों को दिखाकर चूहों को प्रशिक्षित किया। जब पट्टियां ऊपर-नीचे होती थीं, तो चूहों को पानी की नली से पानी पीना होता था, और जब पट्टियां दाएं-बाएं चलती थीं, तो उन्हें पानी पीना रोकना होता था।

इस दौरान लेजर तकनीक की मदद से चूहों की खोपड़ी के भीतर उन न्यूरॉन्स की पहचान की गई जो इन दृश्यों को देखने पर सक्रिय हो रहे थे। न्यूरोनल कोड को समझने के बाद शोधकर्ताओं ने होलोग्राफिक लेजर सिस्टम का उपयोग करके सीधे मस्तिष्क के भीतर न्यूरॉन्स को सक्रिय किया। न्यूरोवैज्ञानिक राफेल युस्टे ने इस प्रयोग के बारे में कहा, "सबसे अहम मोड़ तब आया जब कंप्यूटर स्क्रीन को पूरी तरह बंद कर दिया गया।" स्क्रीन बंद होने के बावजूद जब लेजर की मदद से मस्तिष्क में पट्टियों की छवि डाली गई, तो चूहों ने ठीक वैसा ही व्यवहार किया जैसे वे वास्तविक दृश्य देखकर करते थे। चूहों के पानी चाटने की संख्या, अवधि और प्रतिक्रिया समय बिल्कुल वैसा ही था, जिससे यह साबित हुआ कि वे असली और नकली दृश्य में अंतर नहीं कर पा रहे थे। राफेल युस्टे ने चेतावनी देते हुए कहा, "जो काम हम आज चूहों पर कर रहे हैं, वही कल इंसानों पर भी किया जा सकता है।"

## fMRI और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का तालमेल
बीते दो दशकों में कार्यात्मक चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग (fMRI) तकनीक ने मस्तिष्क के नक्शे बनाने में बड़ी सफलता हासिल की है। fMRI न्यूरॉन्स तक ऑक्सीजन पहुंचाने वाले हीमोग्लोबिन में मौजूद आयरन को ट्रैक करती है। जब इस तकनीक को मशीन लर्निंग एल्गोरिदम के साथ जोड़ा गया, तो वैज्ञानिकों के लिए जटिल से जटिल मानसिक स्थितियों को पहचानना आसान हो गया। आधुनिक एल्गोरिदम अब डिप्रेशन के विचारों से लेकर ईर्ष्या जैसी सूक्ष्म भावनाओं को स्कैन के आधार पर समझ सकते हैं।

इसके अलावा प्रयोगशालाओं में ऐसे एल्गोरिदम विकसित किए जा चुके हैं जो किसी व्यक्ति द्वारा देखे जा रहे वीडियो क्लिप को उसके मस्तिष्क के स्कैन का विश्लेषण करके पुनर्गठित कर सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान मतदाताओं के दिमाग की गतिविधियों का अध्ययन करके यह तक पता लगाया गया कि कौन से उम्मीदवार उनके मन में चिंता या घृणा पैदा कर रहे हैं और कौन से उम्मीदवार सहानुभूति की भावना जगा रहे हैं।

## पैरालाइसिस रोगियों के लिए वरदान और भाषा की डिकोडिंग
न्यूरोसाइंस का यह दायरा अब छवियों और भावनाओं से आगे बढ़कर सीधे मानव भाषा और शब्दों को डिकोड करने तक पहुंच गया है। वर्ष 2023 में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के न्यूरोसर्जन एडवर्ड चांग के नेतृत्व में एक अभूतपूर्व सफलता हासिल की गई। ब्रेन-स्टेम स्ट्रोक के कारण 18 वर्षों से लकवाग्रस्त एन जॉनसन नामक महिला के मस्तिष्क की सतह पर 253 इलेक्ट्रोड की एक ग्रिड लगाई गई। यह ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) उनके न्यूरोनल संकेतों को वास्तविक समय में 78 शब्द प्रति मिनट की गति से वाक्यों में बदलने में सक्षम रहा, जो सामान्य बातचीत की गति से लगभग आधी है।

शोधकर्ताओं ने इस प्रणाली को एक डिजिटल अवतार से जोड़ा, जो एन जॉनसन की शादी के 15 मिनट के पुराने भाषण की रिकॉर्डिंग से तैयार की गई आवाज में बोलता था। मस्तिष्क की न्यूरोनल गतिविधि के आधार पर वह अवतार चेहरे के भाव जैसे मुस्कान या त्योरी भी प्रदर्शित करता था। न्यूरोसर्जन एडवर्ड चांग ने इस सफलता के बाद राफेल युस्टे को फोन पर बताया, "मैं सो नहीं पा रहा हूं।" इस तकनीक ने जहां गंभीर रोगियों के लिए संवाद के नए रास्ते खोले हैं, वहीं इसके व्यावसायिक दुरुपयोग की आशंका ने वैज्ञानिकों को चिंतित कर दिया है। वर्तमान में दुनिया भर में 100 से भी कम लोगों के पास खोपड़ी के भीतर प्रत्यारोपित BCI उपकरण मौजूद हैं, लेकिन गैर-आक्रामक तकनीकें तेजी से बढ़ रही हैं।

## गैर-आक्रामक स्कैनिंग और पोडकास्ट अध्ययन
समस्या केवल सर्जिकल इंप्लांट्स तक सीमित नहीं है। समर 2023 में यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास की एक टीम ने बिना किसी सर्जरी के केवल fMRI स्कैन का उपयोग करके मस्तिष्क की गतिविधियों को वाक्यों में बदलने का प्रदर्शन किया। इस अध्ययन में प्रतिभागियों को 16 घंटे तक स्टोरीटेलिंग पोडकास्ट ("द मथ रेडियो आवर" और "मॉडर्न लव") सुनाकर AI मॉडल को प्रशिक्षित किया गया।

इसके बाद जब प्रतिभागियों ने नए पोडकास्ट सुने, तो एल्गोरिदम ने उनके मस्तिष्क की प्रतिक्रियाओं को विश्लेषित करके उन कहानियों के सार को सटीक शब्दों और वाक्यों में ढाल दिया। कंप्यूटेशनल न्यूरोवैज्ञानिक अलेक्जेंडर हुथ ने इस तकनीक के नतीजे देखकर कहा, "यह सचमुच काफी डरावना है।" इस प्रयोग ने साबित कर दिया कि किसी व्यक्ति के विचारों की प्राइवेसी बिना किसी सर्जिकल चीर-फाड़ के भी खतरे में पड़ सकती है।

## कार्यस्थलों पर निगरानी और गीग इकोनॉमी का खतरा
प्रयोगशालाओं के बाहर अब ऐसे पहनने योग्य (वेअरेबल) ब्रेन स्कैनर तेजी से विकसित हो रहे हैं जो दफ्तरों और घरों तक पहुंच रहे हैं। भविष्य में ऐसी स्थितियां बन सकती हैं जहां गीग इकोनॉमी के कर्मचारी केवल अपने दिमाग के स्कैन डेटा को बेचकर सालाना 30,000 डॉलर अतिरिक्त कमा सकें। लोग पैसों या डिजिटल सेवाओं के बदले अपने मस्तिष्क की गतिविधियों का डेटा कॉरपोरेट कंपनियों को सौंपने के लिए मजबूर हो सकते हैं।

वर्तमान में इलेक्ट्रोencephalोग्राफी (EEG) तकनीक पर आधारित उपकरण व्यापक रूप से इस्तेमाल हो रहे हैं। ये उपकरण खोपड़ी पर पहने जाते हैं और न्यूरॉन्स द्वारा उत्पन्न सूक्ष्म विद्युत क्षेत्रों को मापते हैं। इमोटिव नामक न्यूरोटेक कंपनी ने ऑफिस कर्मचारियों के लिए ऐसे हेडसेट और ईयरबड्स का परीक्षण किया है जो दिन भर उनके ध्यान के स्तर और तनाव की निगरानी करते हैं। हालांकि कंपनी का दावा है कि यह डेटा केवल कर्मचारी की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए है, लेकिन प्राइवेसी विशेषज्ञों का मानना है कि इसे कॉरपोरेट निगरानी से अलग रखना मुश्किल होगा। इमोटिव के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टैन ली ने भविष्यवाणी की कि अगले पांच वर्षों में कार्यस्थल पर मस्तिष्क निगरानी "काफी व्यापक हो जाएगी।"

## ड्राइवरों से लेकर स्कूली बच्चों और पुलिस जांच तक उपयोग
EEG तकनीक का उपयोग ट्रक ड्राइवरों और खदान कर्मचारियों की थकान नापने के लिए भी किया जा रहा है ताकि दुर्घटनाओं को रोका जा सके। वहीं चीन में प्राइमरी स्कूल के बच्चों को एकाग्रता मापने वाले हेडसेट पहनाए गए, जिनका डेटा कंपनी सर्वर और शिक्षकों तक पहुंचता था। एक वीडियो रिपोर्ट सामने आने के बाद इस प्रोजेक्ट को निलंबित कर दिया गया।

दुबई में पुलिस बल "आईकॉग्निटिव" नामक तकनीक का उपयोग संदिग्धों की जांच के लिए कर रहा है। यह प्रणाली किसी संदिग्ध के सामने अपराध से जुड़े सामान की तस्वीर आने पर उसके दिमाग में उत्पन्न होने वाले अनैच्छिक विद्युत स्पाइक को पकड़ती है। एक हत्या के मामले में संदिग्ध को जब अपराध में प्रयुक्त हथियार की तस्वीर दिखाई गई, तो उसके मस्तिष्क की तरंगों ने स्वतः प्रतिक्रिया दी, जिसके बाद उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।

## उपभोक्ता उत्पाद और टेक दिग्गजों की योजनाएं
कंज्यूमर मार्केट में EEG उपकरण वेलनेस और मेंटल हेल्थ के नाम पर बेचे जा रहे हैं। आईबैंड हेडसेट सपनों को नियंत्रित करने का दावा करता है, जबकि फ्लो नामक उपकरण डिप्रेशन के इलाज के लिए मस्तिष्क में विद्युत तरंगें भेजता है। ब्रेनबिट नामक हेडबैंड ध्यान, नींद, शिक्षा और ऑनलाइन डेटिंग में मूड इंडिकेटर के रूप में काम करने का प्रचार करता है। इसके अलावा न्यूरोमार्केटिंग के जरिए उपभोक्ताओं की अवचेतन पसंद को जानने के प्रयास किए जा रहे हैं। वर्ष 2022 में इमोटिव ने लोरियल कंपनी के साथ मिलकर स्टोर में इत्र चुनने के लिए मस्तिष्क तरंगों के विश्लेषण की तकनीक पेश की।

ऐप्पल, मेटा और स्नैप जैसी टेक दिग्गज कंपनियां अपने स्वयं के न्यूरोटेक्नोलॉजी उत्पादों पर काम कर रही हैं। मेटा और स्नैप ऐसे इंटरफेस बना रहे हैं जिनसे केवल ध्यान केंद्रित करके वर्चुअल बटन दबाए जा सकें। ऐप्पल ने अपने AirPods में EEG सेंसर जोड़ने का पेटेंट दर्ज कराया है। वहीं कर्नल नामक कंपनी ने "फ्लो" नाम से एक हेडसेट बनाया है जो EEG और इंफ्रारेड लाइट का उपयोग करके fMRI जैसी सटीक ब्रेन रीडिंग प्रदान करता है। माना जा रहा है कि अगले एक दशक में यह तकनीक आम उपभोक्ताओं तक पहुंच जाएगी।

## न्यूरोराइट्स आंदोलन और 5 मौलिक अधिकार
मस्तिष्क डेटा के व्यावसायिक दोहन और मानसिक हेरफेर को रोकने के लिए न्यूरोवैज्ञानिकों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहल शुरू की है। राफेल युस्टे ने 2017 में कोलंबिया विश्वविद्यालय में 25 विशेषज्ञों (न्यूरोवैज्ञानिक, सर्जन, नीतिविद, वकील और AI विशेषज्ञ) की बैठक बुलाई। तीन दिनों के विचार-विमर्श के बाद उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि न्यूरोटेक्नोलॉजी का मुद्दा सीधे तौर पर मानवाधिकारों से जुड़ा है।

इस बैठक में "न्यूरोराइट्स" की अवधारणा सामने आई और पांच मुख्य अधिकारों का प्रस्ताव रखा गया

- **मेंटल प्राइवेसी (मानसिक गोपनीयता):** व्यक्ति की स्पष्ट सहमति के बिना मस्तिष्क डेटा को डिकोड, स्टोर, शेयर या बेचा नहीं जा सकता।
- **आइडेंटिटी (पहचान):** तकनीक को व्यक्ति की चेतना और बाहरी इनपुट के बीच की सीमा को धुंधला करने से रोकना।
- **एजेंसी (स्वायत्तता):** बिना किसी बाहरी तकनीकी हस्तक्षेप के अपने निर्णय लेने का अधिकार।
- **फेयर एक्सेस (समान पहुंच):** न्यूरो-ऑग्मेंटेशन तकनीकों तक सभी की समान पहुंच ताकि अमीर और गरीब के बीच विभाजन न हो।
- **एल्गोरिदम बायस से सुरक्षा:** AI मॉडल में डेवलपर्स या डेटा के कारण पैदा होने वाले पूर्वाग्रहों से सुरक्षा।

## वैश्विक कानून और कंपनियों की प्राइवेसी रिपोर्ट
राफेल युस्टे द्वारा गठित "न्यूरोराइट्स फाउंडेशन" संयुक्त राष्ट्र और दुनिया भर की सरकारों के साथ मिलकर काम कर रहा है। वर्ष 2021 में चिली अपने संविधान में संशोधन करके मस्तिष्क डेटा और न्यूरोराइट्स को सुरक्षा देने वाला दुनिया का पहला देश बना। इसके बाद ब्राजील, उरुग्वे, मेक्सिको, अर्जेंटीना, स्पेन और अमेरिका में इस दिशा में कानूनी प्रक्रियाएं शुरू हुईं। अप्रैल 2024 में अमेरिका के कोलोराडो राज्य ने गैर-चिकित्सकीय कंज्यूमर न्यूरोटेक उपकरणों के मस्तिष्क डेटा को प्राइवेसी कानून के तहत संरक्षित करने का पहला पूर्ण कानून पारित किया, जिसके बाद कैलिफोर्निया ने भी ऐसा ही कदम उठाया। UNESCO की अंतरराष्ट्रीय बायोएथिक्स समिति ने भी मानवाधिकार ढांचे में न्यूरोराइट्स को शामिल करने की सिफारिश की है।

कानूनी विशेषज्ञ जेरेड जेंसर ने न्यूरोडेटा सुरक्षा की अनिवार्यता पर बल देते हुए कहा, "मस्तिष्क डेटा की सुरक्षा की जरूरत कल की नहीं, बल्कि आज की समस्या है।" न्यूरोराइट्स फाउंडेशन द्वारा 30 प्रमुख कंज्यूमर न्यूरोटेक कंपनियों की प्राइवेसी नीतियों के अध्ययन में चौंकाने वाले खुलासे हुए। अध्ययन के अनुसार 29 कंपनियों के पास उपभोक्ता के ब्रेन डेटा तक असीमित पहुंच थी, 20 कंपनियां तीसरे पक्षों के साथ डेटा साझा कर सकती थीं, और 2 कंपनियां तीसरे पक्षों को डेटा बेचने का संकेत दे रही थीं। विनियमन के अभाव में कंपनियां उपभोक्ता के सबसे निजी दिमागी डेटा पर कब्जा जमाने की होड़ में लगी हुई हैं।

## इसका आप पर असर
**पाठकों के लिए इस खबर का सीधा असर:**

- **मानसिक गोपनीयता का खतरा:** कंज्यूमर हेडसेट, इयरफोन और स्मार्ट वॉच जैसे आने वाले टेक गैजेट्स आपके दिमाग के संकेतों और मूड का डेटा ट्रैक कर सकते हैं, जिसे बिना आपकी स्पष्ट जानकारी के विज्ञापनों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
- **कार्यस्थल पर निगरानी:** दफ्तरों में कर्मचारियों की एकाग्रता और तनाव मापने के लिए EEG उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ रहा है, जिससे काम के दौरान आपकी दिमागी स्थिति पर प्रबंधन की नजर रह सकती है।
- **कानूनी अधिकार और सुरक्षा:** कोलोराडो और चिली जैसे राज्यों/देशों की तर्ज पर आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर न्यूरोराइट्स कानून लागू होने से आम नागरिकों के ब्रेन डेटा की बिक्री पर रोक लगेगी।

## सवाल-जवाब

### 1. क्या वर्तमान तकनीक से इंसान के विचार पढ़े जा सकते हैं?
हां, प्रयोगशालाओं में fMRI और AI एल्गोरिदम के संयोजन से किसी व्यक्ति द्वारा सुने गए शब्दों, देखी गई छवियों और उसकी भावनाओं को डिकोड किया जा चुका है।

### 2. चूहों पर किए गए न्यूरोसाइंस प्रयोग में क्या परिणाम मिले?
शोधकर्ताओं ने लेजर तकनीक से चूहों के विजुअल कॉर्टेक्स में नकली दृश्य इम्पलांट किए, जिससे स्क्रीन बंद होने पर भी चूहों ने वास्तविक दृश्य की तरह ही प्रतिक्रिया दी।

### 3. न्यूरोराइट्स (Neurorights) क्या हैं और इनकी जरूरत क्यों है?
न्यूरोराइट्स पांच मौलिक कानूनी अधिकार हैं जो मस्तिष्क डेटा को डिकोड होने, बिकने और दिमाग में तकनीकी हेरफेर से बचाने के लिए प्रस्तावित किए गए हैं।

### 4. कौन से देशों या राज्यों ने ब्रेन डेटा प्राइवेसी के कानून बनाए हैं?
चिली ने अपने संविधान में संशोधन करके न्यूरोराइट्स को शामिल किया है, जबकि अमेरिकी राज्य कोलोराडो और कैलिफोर्निया ने कंज्यूमर न्यूरोडेटा सुरक्षा कानून पारित किए हैं।

### 5. दफ्तरों और स्कूलों में EEG तकनीक का इस्तेमाल कैसे हो रहा है?
दफ्तरों में कर्मचारियों के तनाव और फोकस की जांच के लिए और ड्राइवरों की थकान नापने के लिए EEG हेडसेट का इस्तेमाल किया जा रहा है।

### 6. कंज्यूमर न्यूरोटेक कंपनियों की प्राइवेसी रिपोर्ट में क्या सामने आया?
30 में से 29 कंपनियों के पास ग्राहक के ब्रेन डेटा तक असीमित पहुंच थी और दो तिहाई कंपनियां तीसरे पक्षों के साथ डेटा साझा कर सकती थीं।

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