मानव मस्तिष्क और चेतना के नए रहस्य सुलझाने में जुटे वैज्ञानिक वैज्ञानिक मानव कोशिकाओं से चलने वाले कंप्यूटर, अष्टबाहु जीवों की बुद्धिमत्ता और लत से निपटने के आधुनिक इलाजों पर नए शोध सामने ला रहे हैं। संज्ञानात्मक विज्ञान और न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में हो रहे नए अनुसंधानों ने इंसानी दिमाग और जीवों की बुद्धिमत्ता को समझने के कई नए रास्ते खोल दिए हैं। प्रयोगशालाओं में किए जा रहे हालिया अध्ययनों से यह स्पष्ट हो रहा है कि मस्तिष्क से जुड़े जटिल तंत्र और सोचने-समझने की क्षमता केवल पारंपरिक जीवविज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तकनीक और उन्नत चिकित्सा के साथ तेजी से जुड़ रही है। जीवित कोशिकाओं से कंप्यूटर और ऑक्टोपस की बुद्धि आधुनिक अनुसंधानकर्ताओं ने मानव कोशिकाओं का उपयोग करके कंप्यूटर तैयार करने की दिशा में ठोस प्रगति की है। इस तकनीक के तहत जैविक तंत्रिका ऊतकों को कम्प्यूटेशनल प्रणालियों से जोड़कर जटिल गणनाएं करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इसके साथ ही, अष्टबाहु जीवों यानी ऑक्टोपस के तंत्रिका तंत्र पर भी ताजा अध्ययन किए गए हैं। इन अध्ययनों से पता चलता है कि बिना रीढ़ की हड्डी वाले इन जीवों में सूचनाओं को संसाधित करने और निर्णय लेने का तरीका इंसानी सोच के विकास को समझने के लिए बेहद अहम सुराग देता है। नशे की लत का आधुनिक उपचार और ब्रेन वायरिंग मस्तिष्क से जुड़े अध्ययनों में व्यसन यानी नशे की लत से निपटने के लिए भी आशाजनक चिकित्सा पद्धतियों की पहचान की गई है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि लत के दौरान मस्तिष्क के तंत्रिका मार्गों में जो बदलाव आते हैं, उन्हें विशेष चिकित्सीय हस्तक्षेपों के जरिए दोबारा सामान्य किया जा सकता है। इसके अलावा, मस्तिष्क के न्यूरल नेटवर्क में होने वाले बदलावों को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने विभिन्न परिस्थितियों पर काम किया है, जिसमें यह देखा गया है कि समय से पहले जन्म लेने वाले शिशुओं के मस्तिष्क नेटवर्क में वायरिंग किस तरह बदलती है। मस्तिष्क तकनीक और सीखने की क्षमता न्यूरोसाइंस में बिना किसी सर्जरी या इंप्लांट के मस्तिष्क और कंप्यूटर के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने वाले गैर-आक्रामक इंटरफेस विकसित करने के प्रयास भी जारी हैं। साथ ही, इंसान के मस्तिष्क की नई क्षमताओं को सीखने और खुद को ढालने की शक्ति पर भी प्रयोग हुए हैं, जिनमें लोगों द्वारा कुछ ही हफ्तों में इकोलोकेशन जैसी जटिल क्षमताएं सीखकर अपने तंत्रिका मार्गों को रीवायर करने के प्रमाण मिले हैं। यह दर्शाता है कि मानव मस्तिष्क जरूरत पड़ने पर खुद की संरचनात्मक सीमाओं को पुनः व्यवस्थित करने में सक्षम है। इसका आप पर असर यह शोध मानव मस्तिष्क की बीमारियों और भविष्य की कंप्यूटिंग तकनीकों को बेहतर बनाने में सीधा असर डाल सकता है। • मरीजों के लिए: लत और तंत्रिका विकारों के नए इलाज उपलब्ध हो सकेंगे। इससे गंभीर मानसिक समस्याओं और नशे पर निर्भरता से जूझ रहे लोगों को सुरक्षित विकल्प मिलेंगे। • तकनीक उपयोगकर्ताओं के लिए: बिना सर्जरी वाले मस्तिष्क-कंप्यूटर इंटरफेस से भविष्य के उपकरण नियंत्रित होंगे। इससे सामान्य लोग बिना किसी चिप प्रत्यारोपण के न्यूरल तकनीकों से जुड़ सकेंगे। • सीखने और मानसिक स्वास्थ्य के लिए: मस्तिष्क की रीवायरिंग क्षमता से नई दक्षता हासिल करना आसान होगा। लोग अपनी मानसिक एकाग्रता और सीखने की गति में व्यावहारिक सुधार कर सकेंगे। • वैज्ञानिक विकास के लिए: जैविक कोशिकाओं से बने कंप्यूटर कंप्यूटिंग की दिशा बदल सकते हैं। इससे ऊर्जा की कम खपत में अधिक जटिल गणनाएं संभव हो सकेंगी। ऐसा क्यों हुआ मस्तिष्क की कार्यप्रणाली और जैविक बुद्धिमत्ता को पूरी तरह से समझने की आवश्यकता ने वैज्ञानिकों को इन नए अध्ययनों की ओर प्रेरित किया है। • पारंपरिक सिलिकॉन की सीमाएं: मौजूदा कंप्यूटर प्रणालियों की ऊर्जा खपत और प्रसंस्करण सीमाओं के कारण वैज्ञानिकों ने जैविक कोशिकाओं की ओर रुख किया। जीवित न्यूरॉन्स प्राकृतिक रूप से अत्यधिक ऊर्जा-कुशल गणनाएं करने में सक्षम होते हैं। • व्यसन के स्थायी समाधान की तलाश: नशीली दवाओं की लत के पुराने उपचार अक्सर विफल हो जाते हैं क्योंकि वे मस्तिष्क के भौतिक तंत्रिका मार्गों को ठीक नहीं कर पाते। इसी वजह से शोधकर्ताओं ने न्यूरल सर्किट को रीवायर करने वाले चिकित्सीय समाधानों पर ध्यान केंद्रित किया। • वैकल्पिक बुद्धिमत्ता को समझने की जरूरत: ऑक्टोपस जैसे बिना रीढ़ वाले जीवों का अध्ययन इसलिए किया गया क्योंकि उनका तंत्रिका तंत्र मानव विकास से पूरी तरह स्वतंत्र विकसित हुआ है। इससे बुद्धिमत्ता के वैकल्पिक जैविक नियमों को समझना संभव हुआ है। सवाल-जवाब 1. मानव कोशिकाओं से कंप्यूटर कैसे तैयार किए जा रहे हैं? वैज्ञानिक जीवित तंत्रिका ऊतकों को इलेक्ट्रॉनिक सर्किट से जोड़कर जैविक प्रणालियों के जरिए डेटा प्रोसेसिंग और जटिल गणनाएं करने का परीक्षण कर रहे हैं। 2. ऑक्टोपस पर किए गए शोध से क्या जानकारी सामने आई है? इस अध्ययन से पता चलता है कि बिना रीढ़ की हड्डी वाले जीवों का विकेंद्रीकृत तंत्रिका तंत्र स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने और बुद्धिमत्ता विकसित करने में सक्षम है। 3. क्या नशे की लत से मस्तिष्क में होने वाले बदलावों को ठीक किया जा सकता है? हां, नए न्यूरोलॉजिकल अनुसंधानों से संकेत मिलता है कि लक्षित चिकित्सीय हस्तक्षेपों के माध्यम से मस्तिष्क के तंत्रिका मार्गों को सामान्य किया जा सकता है। 4. मस्तिष्क-कंप्यूटर इंटरफेस के लिए क्या सर्जरी अनिवार्य है? नहीं, आधुनिक तकनीक के तहत अब गैर-आक्रामक उपकरण विकसित किए जा रहे हैं जो बिना किसी सर्जिकल इंप्लांट के मस्तिष्क के संकेतों को पढ़ सकते हैं। https://trendkia.com/investigations/manava-mastishka-aura-chetana-ke-nae-rahasya-sulajhane-men-jute-vaijnanika-33924 TrendKia — Har trend, sabse pehle.