मानसून की विदाई के बीच देश के 51 फीसदी हिस्से में सूखे का संकट, कई इलाकों में वर्षों का रिकॉर्ड टूटा साल 2026 के मानसून के दौरान देश भर में सामान्य से 12 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है, जिसके चलते 51 फीसदी भूभाग पर सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही देश भर में जल संकट और सूखे की गहरी चिंताएं सामने आने लगी हैं। इस साल का मानसून बेहद असामान्य रहा है, जहां राष्ट्रीय स्तर पर वर्षा सामान्य से 12 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। औसत बारिश में इस कमी के कारण देश का 51 प्रतिशत क्षेत्र अब गंभीर सूखे जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहा है। असमान वर्षा वितरण ने कृषि और जल भंडारण के सामने एक गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। विदाई की समयसीमा और असमान बारिश का प्रभाव मौसम चक्र के अनुसार मानसून की विदाई की प्रक्रिया 19 सितंबर से शुरू हो चुकी है और इसके 15 अक्टूबर तक पूरे देश से पूरी तरह विदा होने की संभावना है। इस पूरे मौसम के दौरान वर्षा के वितरण में भारी विषमता देखने को मिली। जहां कुछ क्षेत्रों में पिछले 20 वर्षों में सबसे कम वर्षा दर्ज की गई, वहीं देश के कुछ अन्य हिस्सों में बीते 17 वर्षों का सर्वाधिक वर्षा रिकॉर्ड टूट गया। यह असमानता भूजल स्तर और जलाशयों की क्षमता पर सीधे असर डाल रही है। कृषि और जनजीवन पर मंडराता खतरा आधे से अधिक देश में सूखे जैसी परिस्थितियों के कारण आने वाले महीनों में रबी फसलों की बुवाई और पेयजल आपूर्ति पर सीधा दबाव बढ़ सकता है। जिन इलाकों में बारिश की भारी कमी रही है, वहां मिट्टी में नमी का स्तर तेजी से गिरा है। वहीं अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में अचानक आई बाढ़ और जलजमाव ने स्थानीय स्तर पर बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। 15 अक्टूबर तक मानसून की पूर्ण वापसी के बाद पानी की उपलब्धता और आगामी शुष्क मौसम की चुनौतियों से निपटना एक प्रमुख प्राथमिकता बन जाएगा। इसका आप पर असर देश के 51 प्रतिशत क्षेत्र में सूखे जैसे हालात और सामान्य से 12 प्रतिशत कम वर्षा से आगामी महीनों में पेयजल और खेती पर व्यापक असर पड़ेगा। • भारत में: आधे से अधिक भूभाग में जल संकट के कारण रबी फसलों की बुवाई और खाद्यान्न उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इससे आने वाले समय में खाद्य वस्तुओं की कीमतों और सिंचाई लागत पर सीधा दबाव देखने को मिल सकता है। • किसानों और ग्रामीण इलाकों में: जिन क्षेत्रों में पिछले 20 वर्षों का सबसे कम पानी बरसा है, वहां मिट्टी में नमी घटने से बुवाई कठिन होगी। ऐसे इलाकों में किसानों को कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों और सटीक जल प्रबंधन की ओर रुख करना पड़ेगा। • शहरी जल आपूर्ति पर: कई प्रमुख जलाशयों में जल स्तर पर्याप्त न होने से आगामी गर्मी से पहले ही पानी की राशनिंग शुरू हो सकती है। नगर निकायों को ट्यूबवेल और आपातकालीन पाइपलाइनों पर निर्भरता बढ़ानी पड़ सकती है। • उपभोक्ताओं और घरेलू बजट पर: दलहन और तिलहन जैसी फसलों के उत्पादन में गिरावट की आशंका से दैनिक रसोई बजट पर असर पड़ सकता है। उपभोक्ताओं को आने वाले महीनों में महंगाई से निपटने के लिए योजना बनानी होगी। ऐसा क्यों हुआ साल 2026 के मानसून के दौरान वायुमंडलीय असंतुलन और मानसून ट्रफ के अनियमित रुख के चलते बारिश का वितरण बेहद विषम रहा। इसी कारण राष्ट्रीय स्तर पर 12 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई और आधे से अधिक देश में सूखे के हालात बने। • मानसून ट्रफ में लगातार विचलन: मानसूनी हवाओं और दबाव प्रणालियों के असमान रहने से वर्षा कुछ सीमित क्षेत्रों तक सिमट गई। इसी कारण कुछ हिस्सों में 17 साल का रिकॉर्ड टूटा, जबकि अन्य इलाके 20 वर्षों के सूखे का सामना करने लगे। • कमजोर मानसूनी सक्रियता: मौसम के कई हफ्तों के दौरान बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से पर्याप्त नमी वाले मजबूत डिप्रेशन नहीं बन पाए। इस वजह से मध्य और प्रायद्वीपीय भारत के विशाल क्षेत्रों में लंबे समय तक बारिश का सूखा दौर खिंच गया। • 19 सितंबर से समय से पहले विदाई का रुख: उत्तर-पश्चिम भारत से मानसूनी हवाओं की वापसी का सिलसिला 19 सितंबर को ही शुरू हो गया। सामान्य समय के आसपास नमी का प्रवाह घटने से कमी वाले इलाकों में दोबारा अच्छी बारिश का मौका पूरी तरह खत्म हो गया। सवाल-जवाब 1. 2026 के मानसून में सामान्य से कितने प्रतिशत कम बारिश हुई है? इस वर्ष के मानसून के दौरान कुल वर्षा सामान्य से 12 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। 2. देश के कितने हिस्से में सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है? बारिश की भारी कमी के कारण देश के 51 प्रतिशत क्षेत्र में सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। 3. मानसून की वापसी की प्रक्रिया कब शुरू हुई और यह कब तक समाप्त होगी? मानसून की विदाई 19 सितंबर से शुरू हो चुकी है और इसके 15 अक्टूबर तक पूरे देश से विदा होने की उम्मीद है। 4. वर्षा के वितरण में किस प्रकार के रिकॉर्ड दर्ज किए गए? कुछ क्षेत्रों में पिछले 20 वर्षों की सबसे कम बारिश हुई, जबकि कुछ अन्य इलाकों में पिछले 17 वर्षों की सर्वाधिक वर्षा का रिकॉर्ड दर्ज हुआ। https://trendkia.com/investigations/monsoon-ki-vidai-ke-bicha-desha-ke-51-phisadi-hisse-men-sukhe-ka-snkata-kai-ilakon-men-varshon-ka-rikorda-tuta-41518 TrendKia — Har trend, sabse pehle.