{
  "type": "article",
  "title": "ऑपरेशन गंगा: वह भारतीय विमान जिसे भारत ने खुद ही अगवा होने दिया, जिसने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए",
  "summary": "जनवरी 1971 में भारतीय विमान गंगा के अपहरण के पीछे की एक अनकही कहानी, जिसे RAW की एक सोची-समझी चाल के तहत अंजाम दिया गया था ताकि पाकिस्तान पर हवाई प्रतिबंध लगाया जा सके।",
  "content": "भास्कर की स्पाई फाइल्स श्रृंखला के तहत आप 'ऑपरेशन गंगा' के दूसरे भाग को पढ़ रहे हैं। यह कहानी 1956 में पूर्वी पाकिस्तान के चटगांव की पहाड़ियों में स्थित एक गुप्त सैन्य शिविर से शुरू होती है। वहां पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के अधिकारी मानचित्रों पर अपनी उंगलियां घुमा रहे थे। उनमें से एक ने सिगार का कश लेते हुए कहा, मिस्टर फितो, असम और नगालैंड में ऐसी आग लगाओ जिसे दिल्ली की सरकार कभी बुझा न सके। अंगामी जापू फितो ने हंसते हुए राइफल उठाई और दावा किया कि दिल्ली दूर है और जंगल घने हैं, इसलिए उन्हें रोकना असंभव है। ISI ने फितो को न केवल पनाह दी, बल्कि हथियार और गुरिल्ला युद्ध का प्रशिक्षण भी दिया। 1960 तक पाकिस्तान ने मिज़ोरम में मिज़ो नेशनल फ्रंट का इस्तेमाल कर भारत को तोड़ने की साजिश रची। इस खेल में चीन भी शामिल हो गया था, जो चटगांव के रास्ते हथियार पहुंचा रहा था।\n\nचिकन नेक की सुरक्षा\nभारत के लिए सबसे बड़ा खतरा सिलीगुड़ी कॉरिडोर था, जिसे 'चिकन नेक' के नाम से जाना जाता है। पश्चिम बंगाल में स्थित यह 22 किलोमीटर चौड़ा गलियारा ही एकमात्र जमीनी मार्ग था जो पूरे पूर्वोत्तर को शेष भारत से जोड़ता था। आर.के. यादव अपनी पुस्तक 'मिशन RAW' में लिखते हैं कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने RAW प्रमुख आर.एन. काओ से पूछा था कि यदि पाकिस्तान हमारे पूर्वोत्तर को तोड़ने के लिए उनके क्षेत्र का उपयोग कर रहा है, तो हम उस क्षेत्र को ही क्यों अलग नहीं कर देते? काओ ने कुछ देर मौन रहने के बाद कहा कि वे ऐसा ही करेंगे।\n\nचुनाव और तनाव\nदिसंबर 1970 में पाकिस्तान के पहले आम चुनाव हुए। कुल 300 सीटों में से शेख मुजीब-उर-रहमान की अवामी लीग को 160 सीटें मिलीं, जबकि जुल्फिकार अली भुट्टो की पार्टी को केवल 81 सीटें मिलीं। मुजीब का प्रधानमंत्री बनना तय था, लेकिन रावलपिंडी में बैठे तानाशाह राष्ट्रपति याह्या खान ने एक बंगाली को सत्ता सौंपने से इनकार कर दिया। इसके बाद पूर्वी पाकिस्तान की सड़कों पर 'जोय बांग्ला' के नारे गूंजने लगे। लंदन में मौजूद RAW के एक सूत्र ने सूचना दी कि पाकिस्तान पूर्वी विंग में किसी बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा है। आर.एन. काओ ने इंदिरा गांधी को सुझाव दिया कि भारत को अपना हवाई क्षेत्र पाकिस्तान के लिए बंद कर देना चाहिए ताकि उनकी रसद और सैनिकों की आवाजाही श्रीलंका के लंबे समुद्री रास्ते से होकर जाए। प्रधानमंत्री ने सहमति जताई, लेकिन इसके लिए एक ठोस कारण की आवश्यकता थी, जिसे खोजने की जिम्मेदारी RAW ने ली।\n\nहाशिम कुरैशी का ब्रेनवाश\n1969 में पेशावर में कश्मीरी अलगाववादी नेता डॉक्टर फारूक हैदर के बंगले पर एक बैठक हुई। वहां मकबूल भट और 19 वर्षीय हाशिम कुरैशी मौजूद थे। मकबूल ने रेडियो पर इथियोपियाई विमान के अपहरण की खबर सुनते ही हाशिम को उकसाया कि दुनिया तभी ध्यान देती है जब विमानों में अफरा-तफरी मचती है। हाशिम ने बिना सोचे-समझे अपहरण के लिए हामी भर दी। 1970 में सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने हाशिम को सीमा पार करते हुए पकड़ा। पूछताछ के दौरान उसने कबूल किया कि वह एक भारतीय विमान को हाईजैक करने आया था। जब यह जानकारी बी.एस.एफ. महानिदेशक के.एफ. रुस्तमजी के माध्यम से आर.एन. काओ तक पहुंची, तो दिल्ली में इंदिरा गांधी, काओ और रुस्तमजी के बीच एक गुप्त बैठक हुई।\n\nडबल एजेंट का खेल\nRAW प्रमुख ने प्रस्ताव रखा कि हाशिम को डबल एजेंट बनाया जाए। अगली सुबह, अधिकारियों ने हाशिम के सामने चाय रखते हुए कहा कि यदि वह विमान का अपहरण करता है, तो वे उसे रोकेंगे नहीं, बस उसे उनकी शर्तों पर काम करना होगा। हाशिम मान गया और उसे सुरक्षित स्थान पर रखा गया। उसने अपने चचेरे भाई अशरफ कुरैशी को साथ लिया। हथियार के तौर पर हाशिम ने खिलौना पिस्तौल मंगवाई और अशरफ ने लकड़ी का नकली ग्रेनेड तैयार किया। RAW ने इसके लिए 'गंगा' नामक एक पुराने फौकर फ्रेंडशिप विमान को चुना, जिसे स्क्रैप घोषित किया जा चुका था।\n\nविमान का अपहरण और परिणाम\n30 जनवरी 1971 को श्रीनगर हवाई अड्डे पर कोहरा छाया हुआ था। 28 यात्रियों और चार क्रू मेंबर्स के साथ गंगा ने उड़ान भरी। हवा में हाशिम और अशरफ ने खिलौना पिस्तौल और लकड़ी के ग्रेनेड के दम पर विमान पर कब्जा कर लिया। कैप्टन एम.के. कचरू ने समझदारी दिखाई और विमान को लाहौर की ओर मोड़ दिया। 3 फरवरी 1971 को भारत ने अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के नियमों का हवाला देकर अपना हवाई क्षेत्र पाकिस्तान के लिए बंद कर दिया। इससे पाकिस्तान की रसद का रास्ता कट गया। अंततः दिसंबर 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के 93,000 सैनिकों ने समर्पण कर दिया और बांग्लादेश का जन्म हुआ। भारत सरकार और RAW ने आधिकारिक तौर पर कभी स्वीकार नहीं किया कि उन्होंने अपने ही विमान को हाईजैक होने दिया था।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: यह घटना ऐतिहासिक रूप से भारत की कूटनीतिक और रणनीतिक श्रेष्ठता को दर्शाती है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कड़े फैसलों के महत्व को रेखांकित करती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ऑपरेशन गंगा क्या था?\nयह 1971 में भारतीय विमान गंगा के अपहरण से जुड़ी एक गुप्त RAW योजना थी, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान के खिलाफ कूटनीतिक लाभ उठाना था।\n\n2. हाशिम कुरैशी कौन था?\nहाशिम कुरैशी एक कश्मीरी युवक था जिसे मकबूल भट ने कट्टरपंथी बनाया था और बाद में RAW ने उसे डबल एजेंट के रूप में इस्तेमाल किया।\n\n3. विमान का अपहरण क्यों किया गया?\nRAW ने पाकिस्तान को अपना हवाई क्षेत्र बंद करने का कानूनी आधार देने के लिए इस अपहरण को होने दिया।\n\n4. इस घटना का परिणाम क्या निकला?\nभारत ने पाकिस्तान के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया, जिससे पूर्वी पाकिस्तान में उनकी सैन्य रसद बाधित हुई और अंततः बांग्लादेश का उदय हुआ।",
  "url": "https://trendkia.com/investigations/operation-ganga-the-indian-plane-india-allowed-to-be-hijacked-to-break-pakistan-apart-6960",
  "category": "पड़ताल",
  "publishedAt": "2026-07-12",
  "tags": [
    "ऑपरेशन गंगा",
    "इंदिरा गांधी",
    "आर.एन. काओ",
    "बांग्लादेश मुक्ति संग्राम",
    "1971 का युद्ध",
    "हाशिम कुरैशी"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}