पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों में लश्कर के 30 से ज्यादा आतंकियों के खात्मे पर गहराया रहस्य, वायरल वीडियो से गरमाई बहस लश्कर आतंकी रिजवान हनीफ के एक वायरल वीडियो ने पाकिस्तान में 30 से अधिक चरमपंथियों की रहस्यमयी मौतों और उसके पीछे की वजहों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पाकिस्तान में एक जनसभा को संबोधित करते हुए लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी रिजवान हनीफ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सीमा पार जारी रहस्यमयी हत्याओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस वीडियो में रिजवान हनीफ यह स्वीकार करता नजर आ रहा है कि वर्ष 2020 के बाद से पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े 30 से अधिक सदस्यों को निशाना बनाकर मार गिराया गया है। उसने इन हत्याओं के लिए भारतीय खुफिया एजेंसियों को जिम्मेदार ठहराया है। पाकिस्तान में शरण लेने वाले आतंकी संगठन आमतौर पर अपने कैडरों की मौतों या अंदरूनी नुकसान पर सार्वजनिक रूप से चुप्पी साधे रहते हैं, ऐसे में इस तरह का खुला कबूलनामा एक दुर्लभ और असामान्य घटना माना जा रहा है। संगठन के भीतर खौफ, हताशा और बयान के पीछे की रणनीति किसी शीर्ष आतंकी ऑपरेटिव का इस तरह सार्वजनिक मंच पर आकर इतने बड़े नुकसान का जिक्र करना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मोहसिन रज़ा खान के अनुसार, यह वीडियो संगठन के भीतर पनप रहे गुस्से, डर और गहराती हताशा को साफ तौर पर उजागर करता है। वर्ष 2020 से अब तक 30 से ज्यादा लश्कर आतंकियों के मारे जाने के बावजूद पाकिस्तानी पुलिस या सुरक्षा एजेंसियां किसी भी हमलावर की पहचान करने या उन्हें गिरफ्तार करने में नाकाम रही हैं। प्रोफेसर खान का मानना है कि इस वीडियो को सार्वजनिक करने के पीछे दो मुख्य मकसद हो सकते हैं। पहला, लगातार हो रहे हमलों से हतोत्साहित हो चुके निचले स्तर के आतंकियों का मनोबल बढ़ाना। दूसरा, पाकिस्तानी हुक्मरानों और एजेंसियों पर सार्वजनिक रूप से यह दबाव बनाना कि वे इन आतंकी नेटवर्क को सुरक्षा प्रदान करें और हमलावरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। प्रोफेसर खान ने इस पहलू पर भी विचार किया कि शायद पाकिस्तानी प्रतिष्ठान के किसी हिस्से की मौन सहमति से यह वीडियो सामने आया हो, हालांकि वे यह भी स्पष्ट करते हैं कि इसका कोई पुख्ता सबूत नहीं है। इसलिए संगठन की अंदरूनी घबराहट और लाचारी ही इस वीडियो के पीछे की सबसे मजबूत वजह नजर आती है। छिटपुट घटनाओं से एक बड़े व्यवस्थित पैटर्न में बदलाव हालांकि पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में आतंकियों पर जानलेवा हमलों की खबरें 2020 से ही आ रही थीं, लेकिन हालिया वायरल वीडियो ने इन घटनाओं को देखने का नजरिया पूरी तरह बदल दिया है। पहले जिन मामलों को अलग-अलग आपराधिक घटनाओं के तौर पर देखा जा रहा था, अब उन्हें एक सुनियोजित और सिलसिलेवार अभियान के रूप में आंका जा रहा है। यह रुझान 2021 के बाद और अधिक स्पष्ट हुआ, जब पाकिस्तान के अलग-अलग प्रांतों में विभिन्न आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों को निशाना बनाया गया। इससे यह साफ हो गया कि यह किसी एक शहर तक सीमित मामला नहीं है। सार्वजनिक तौर पर सामने आईं दो प्रमुख घटनाओं ने इस पूरी बहस को सबसे ज्यादा हवा दी है। पहली घटना सियालकोट की है, जहां मस्जिद के पास लश्कर से जुड़े प्रमुख चेहरे शाहिद लतीफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दूसरी घटना कराची की है, जहां आतंकियों की सूची में शामिल हंजला अदनान की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। इन घटनाओं को आपस में जोड़कर एक बड़े पैटर्न के रूप में पेश करने से सालों से दबी पड़ी अज्ञात हमलावरों की बहस एक बार फिर नए सिरे से शुरू हो गई है। आंतरिक गुटबाजी और रंजिश की संभावना पर विश्लेषकों की राय इन रहस्यमयी मौतों के पीछे सिर्फ बाहरी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि आतंकी संगठनों की अंदरूनी रंजिश की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। प्रोफेसर मोहसिन रज़ा खान का कहना है कि जब कोई सशस्त्र या आतंकी गुट लंबे समय तक किसी बड़ी गतिविधि में शामिल नहीं होता, तो उसके भीतर अंदरूनी दरारें और गुटबाजी पनपने लगती है। लंबे समय की निष्क्रियता से संगठन के भीतर नेतृत्व को लेकर खींचतान, विचारधारा का टकराव और आर्थिक संसाधनों पर कब्जे की जंग शुरू हो जाती है। जब आर्थिक मदद की कमी होती है या विभिन्न कमांडरों के बीच वर्चस्व की लड़ाई बढ़ती है, तो यह रंजिश खूनी मोड़ ले लेती है। ऐसी स्थिति में लश्कर-ए-तैयबा के भीतर ही अलग-अलग गुट या अन्य प्रतिद्वंद्वी संगठन एक-दूसरे के सदस्यों को रास्ते से हटाने के लिए हमले कर सकते हैं। हालांकि, प्रोफेसर खान यह भी सावधान करते हैं कि इन मामलों की कोई स्वतंत्र या विस्तृत जांच नहीं हुई है, इसलिए अंदरूनी रंजिश केवल एक विश्लेषणात्मक संभावना है, न कि कोई सिद्ध तथ्य। इस्लामाबाद और नई दिल्ली के बीच बढ़ता कूटनीतिक गतिरोध इन मौतों के राजनीतिक और कूटनीतिक परिणाम भी दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव बढ़ा रहे हैं। पाकिस्तान सरकार लंबे समय से यह दावा करती रही है कि उसकी सीमा के भीतर हो रही इन हत्याओं में विदेशी खुफिया एजेंसियों का हाथ है। पाकिस्तान की ओर से इस मुद्दे पर सबसे आक्रामक रुख 2024 की शुरुआत में देखा गया। जनवरी 2024 में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस करके भारत पर पाकिस्तानी धरती पर लक्षित हत्याएं कराने का आरोप लगाया था। इस्लामाबाद ने दावा किया था कि उसके पास विदेशी संलिप्तता के पुख्ता सबूत हैं और वह इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाएगा। वहीं, भारत ने पाकिस्तान के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। भारत का स्पष्ट कहना था कि पाकिस्तान ने अपने दावों के समर्थन में कोई भी विश्वसनीय या ठोस सबूत पेश नहीं किया है। दोनों देशों के बीच यह विवाद अब भी अनसुलझा है और किसी भी संयुक्त जांच की दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है। सरकारी पुष्टि न होने के बावजूद क्यों बनी हुई है इस विषय पर उत्सुकता सरकारी स्तर पर औपचारिक पुष्टि न होने या पुलिस जांच के नतीजों तक न पहुंचने के बावजूद, ये घटनाएं सुरक्षा विशेषज्ञों और जनता के बीच चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं। विश्लेषकों का कहना है कि खुफिया मामलों से जुड़ी बहसें अक्सर किसी आधिकारिक रिपोर्ट के आने से बहुत पहले शुरू हो जाती हैं। हत्याओं का एक जैसा तरीका, सटीक टाइमिंग, जाने-पहचाने आतंकी चेहरों का चुनाव और अलग-अलग प्रांतों में इनका फैला होना ही इस अज्ञात हमलावर मॉडल को लगातार सुर्खियों में बनाए रखता है। इसका आप पर असर • भारत में: सीमा पार सुरक्षा परिदृश्य और भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे कूटनीतिक रुख पर इस घटनाक्रम का सीधा असर पड़ता है। • वैश्विक स्तर पर: आतंकवाद विरोधी अभियानों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों पर विश्लेषकों की नजर बनी रहेगी। सवाल-जवाब 1. वायरल वीडियो में लश्कर आतंकी रिजवान हनीफ ने क्या दावा किया है? उन्होंने दावा किया कि 2020 के बाद से पाकिस्तान के विभिन्न शहरों में लश्कर-ए-तैयबा के 30 से अधिक सदस्य मारे गए हैं और इसके पीछे भारतीय एजेंसियों का हाथ है। 2. सार्वजनिक रिपोर्टों में पाकिस्तान में मारे गए किन प्रमुख आतंकियों का जिक्र है? रिपोर्टों में सियालकोट में मस्जिद के पास मारे गए शाहिद लतीफ और कराची में मारे गए हंजला अदनान का मुख्य रूप से जिक्र शामिल है। 3. प्रोफेसर मोहसिन रज़ा खान ने वीडियो के सार्वजनिक होने का क्या कारण बताया? प्रोफेसर मोहसिन रज़ा खान के अनुसार, यह वीडियो संगठन के भीतर डर और हताशा को दर्शाता है, जिसका मकसद कैडरों का मनोबल बढ़ाना और पाकिस्तानी अधिकारियों पर सुरक्षा का दबाव बनाना है। 4. इन लक्षित हत्याओं पर पाकिस्तान सरकार का क्या आधिकारिक रुख रहा है? जनवरी 2024 में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने विदेशी एजेंसियों पर आरोप लगाया था, जिसे भारत ने विश्वसनीय सबूत न होने की बात कहकर खारिज कर दिया था। 5. क्या इन हत्याओं के पीछे आतंकी गुटों की आपसी रंजिश भी हो सकती है? हां, विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय तक निष्क्रिय रहने से आतंकी संगठनों में गुटबाजी, नेतृत्व और वित्तीय संसाधनों पर कब्जे को लेकर अंदरूनी रंजिश पनप सकती है। https://trendkia.com/investigations/pakistan-ke-alaga-alaga-shaharon-men-lashkar-ke-30-se-jyada-atnkiyon-ke-khatme-para-gaharaya-rahasya-vayarala-vidiyo-se-garamai-ba-13756 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