# साउन्ड वेव्स बनीं संजीवनी: वेस्ट वर्जीनिया में बिना सर्जरी साउंड थेरेपी से गंभीर नशे की लत का अनोखा इलाज

> अमेरिका के वेस्ट वर्जीनिया में डॉक्टरों ने बिना किसी चीर-फाड़ के हाई-टेक साउंड थेरेपी से मस्तिष्क के रिवॉर्ड सेंटर को रीसेट करके नशे की लत छुड़ाने का क्रांतिकारी क्लिनिकल ट्रायल किया है।

**Type:** article · **Category:** पड़ताल · **Published:** 2026-08-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/investigations/saunda-vevsa-banin-snjivani-west-virginia-men-bina-sarjari-saunda-therepi-se-gnbhira-nashe-ki-lata-ka-anokha-ilaja-16705 · **Language:** Hindi
**Tags:** साउंड थेरेपी, वेस्ट वर्जीनिया, नशे की लत का इलाज, अल्ट्रासाउंड तकनीक, न्यूरोसर्जरी, हेल्थ रिसर्च

वर्ष 2024 की शुरुआती दिनों की बात है, जब वर्मोंट राज्य के बर्लिंगटन शहर के पास एंटीक की दुकान चलाने वाली लिंडा अपनी लापता बेटी की तलाश में थक-हारकर टीवी के सामने बैठी थीं। उनकी 45 वर्षीय बेटी एरिन मैकनल्टी पिछले कई हफ्तों से गायब थीं और सालों से मेथामफेटामाइन यानी मेथ के गंभीर नशे से जूझ रही थीं। हाई स्कूल के दिनों में शराब और मारिजुआना से शुरू हुआ नशे का यह सिलसिला हीरोइन और कोकीन तक पहुंच चुका था। कई बार ओवरडोज़, रिहैब और सबऑक्सोन के उपचार के बावजूद, जब एरिन को एक दोस्त ने मेथ से मिलवाया, तो उनका जीवन पूरी तरह से नशे के नियंत्रण में आ गया। टीवी पर प्रसारित हो रहे एक विशेष कार्यक्रम में लिंडा ने वेस्ट वर्जीनिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा की जा रही एक नई न्यूरोसर्जिकल प्रक्रिया के बारे में सुना, जो बिना किसी चीर-फाड़ के अल्ट्रासाउंड तरंगों के जरिए मस्तिष्क के भीतर पहुंचकर नशे की लत का इलाज कर रही थी।

## बिना सिर खोले दिमाग की गहराइयों तक पहुंचने की नई तकनीक
इस अभूतपूर्व चिकित्सा का नेतृत्व कर रहे डॉ. अली रज़ाई गहरे मस्तिष्क उद्दीपन यानी डीप ब्रेन स्टिमुलेशन के जाने-माने विशेषज्ञ हैं। पारंपरिक रूप से मस्तिष्क के गहरे हिस्सों तक इलेक्ट्रोड पहुंचाने के लिए कपाल में छेद करके सर्जरी करनी पड़ती थी। हालांकि, अल्ट्रासाउंड तकनीक ने इस जोखिम भरे रास्ते को पूरी तरह बदल दिया। इस तकनीक में बिना खोपड़ी को काटे या मस्तिष्क के नाजुक ऊतकों को छुए केवल 20 मिनट के भीतर अल्ट्रासाउंड तरंगें मस्तिष्क के लक्षित बिंदु तक भेजी जा सकती हैं, और मरीज को उसी दिन घर वापस भेजा जा सकता है। ईरान में जन्मे और लॉस एंजिल्स में पले-बढ़े डॉ. रज़ाई ने अमेरिका में नशे के संकट के केंद्र माने जाने वाले वेस्ट वर्जीनिया को अपनी प्रयोगशाला चुना। अमेरिका में लगभग 4.5 करोड़ लोग किसी न किसी नशे की समस्या से पीड़ित हैं। वर्ष 2025 में देश भर में नशीली दवाओं के ओवरडोज़ से लगभग 70,000 मौतें दर्ज की गईं, जिनमें वेस्ट वर्जीनिया की ओवरडोज़ मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से दोगुनी से भी अधिक थी।

## 1950 के शुरुआती प्रयोगों से आधुनिक तकनीक तक का सफर
अल्ट्रासाउंड से मस्तिष्क का इलाज करने का विचार नया नहीं है। 1950 के दशक में विलियम फ्राई और फ्रांसिस फ्राई नामक दो भाइयों ने एक विशाल उपकरण बनाया था जो अल्ट्रासाउंड तरंगों को एक बिंदु पर केंद्रित कर सकता था। उस समय जानवरों और पार्किंसंस रोग के मरीजों के मस्तिष्क में कंपन पैदा करने वाले छोटे हिस्से को जलाकर नष्ट किया जाता था, लेकिन खोपड़ी की हड्डी का हिस्सा हटाने की मजबूरी के कारण वह तरीका लोकप्रिय नहीं हो पाया। 1970 के दशक में लेवोडोपा दवा आने के बाद वह सर्जरी अप्रचलित हो गई। इसके विपरीत, आधुनिक फोकस्ड अल्ट्रासाउंड मशीनें खोपड़ी को नुकसान पहुंचाए बिना दर्जनों अलग-अलग कोणों से उच्च आवृत्ति की ध्वनि तरंगें छोड़ती हैं। जब ये तरंगें मस्तिष्क के भीतर गहराई में स्थित एक विशिष्ट बिंदु पर मिलती हैं, तब उनकी ऊर्जा वहां पहुंचकर उच्चतम स्तर पर काम करती है।

## न्यूक्लियस एकम्बेंस और डोपामिन का चक्र रीसेट करने की प्रक्रिया
ट्रांसक्रैनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन जैसी गैर-आक्रामक थेरेपी मस्तिष्क की केवल बाहरी परतों तक ही पहुंच पाती हैं, लेकिन डॉ. रज़ाई की टीम ने मस्तिष्क के भीतर मटर के दाने जितने छोटे हिस्से 'न्यूक्लियस एकम्बेंस' को निशाना बनाया। यह हिस्सा मस्तिष्क के रिवॉर्ड सर्किट का मुख्य केंद्र होता है। मेथामफेटामाइन और ओपियोइड जैसे नशीले पदार्थ इस हिस्से में डोपामिन का भारी प्रवाह पैदा करते हैं, जिससे समय के साथ मस्तिष्क इस आनंद का आदी हो जाता है और बार-बार नशे की तीव्र इच्छा पैदा करता है। फोकस्ड अल्ट्रासाउंड का मुख्य उद्देश्य इसी न्यूक्लियस एकम्बेंस को रीसेट करना और नशे के साथ बने मानसिक जुड़ाव को तोड़ना है। वर्ष 2021 में अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी FDA से अनुमति मिलने के बाद इस क्लिनिकल ट्रायल की शुरुआत की गई थी।

## तीन प्रयासों के बाद अस्पताल पहुंचीं एरिन और ट्रायल का अनुभव
अपनी मां और बेटी के सहयोग से एरिन मैकनल्टी अप्रैल 2024 में वेस्ट वर्जीनिया यूनिवर्सिटी से संबद्ध रिहायशी इलाज केंद्र 'सेंटर फॉर होप एंड हीलिंग' पहुंचीं। हालांकि, प्रक्रिया से पहले उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। दो बार एयरपोर्ट से वापस लौटने और अत्यधिक लालसा के कारण एक बार इलाज केंद्र छोड़ने के बाद आखिरकार एरिन को अध्ययन में शामिल कर लिया गया। अक्टूबर 2024 में एरिन को पहले चरण के तहत एक कंट्रोल ग्रुप में रखा गया, जहां उन्हें 'शैम' यानी एक नकली अल्ट्रासाउंड ट्रीटमेंट दिया गया। इस दौरान उन्हें नशीली दवाओं की तस्वीरें दिखाकर उनकी लालसा का स्तर 0 से 10 के पैमाने पर मापा गया। नकली इलाज के कारण उनकी लालसा कम नहीं हुई और कुछ हफ्तों बाद उन्होंने फिर से नशे का सेवन शुरू कर दिया।

## असली इलाज से 20 मिनट में दूर हुई सालों पुरानी लालसा
जनवरी 2025 में एरिन को दोबारा बुलाया गया और इस बार उन्हें वास्तविक फोकस्ड अल्ट्रासाउंड थेरेपी दी गई। सिर के ऊपरी हिस्से से लगभग 8 सेंटीमीटर गहराई में स्थित न्यूक्लियस एकम्बेंस पर 20 मिनट तक अल्ट्रासाउंड तरंगें केंद्रित की गईं। स्कैनिंग के दौरान ही नशीले पदार्थों की तस्वीरें देखने के बावजूद एरिन के मन में नशे की तीव्र इच्छा अचानक समाप्त हो गई। प्रक्रिया के बाद मोबाइल ऐप और नियमित यूरीन टेस्ट के जरिए उनकी निगरानी की गई। एरिन ने बताया कि सड़क पर या बस में लोगों को नशा करते देखकर भी उनके दिमाग में कोई हलचल नहीं होती थी, मानो मस्तिष्क का वह बटन हमेशा के लिए बंद कर दिया गया हो।

## सिलिकॉन वैली की दिलचस्पी और सुरक्षा से जुड़े सवाल
डॉ. रज़ाई की टीम अब तक 47 मरीजों पर यह प्रक्रिया दोहरा चुकी है। प्रारंभिक 20 प्रतिभागियों में से नशे की इच्छा में 90 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी गई और पॉजिटिव यूरीन टेस्ट में 80 प्रतिशत की कमी आई। अब बाल्टीमोर, फ्लोरिडा और न्यूयॉर्क में भी इसके ट्रायल शुरू हो चुके हैं। सिलिकॉन वैली के प्रमुख उद्यमियों जैसे सैम ऑल्टमैन की मर्ज लैब्स, फ्रेड एहरसम की नज, मैरी लू जेप्सन की ओपनवॉटर और रीड हॉफमैन समर्थित सनमाई टेक्नोलॉजीज ने बिना सर्जरी के मूड और मानसिक विकारों के इलाज के लिए ऐसे पोर्टेबल उपकरण विकसित करने में भारी निवेश किया है। हालांकि, यह तकनीक अभी पूरी तरह जोखिम मुक्त नहीं है। पिछले वर्ष एक 44 वर्षीय प्रतिभागी को अल्ट्रासाउंड की तीव्रता बढ़ाते समय मस्तिष्क में छोटे रक्तस्राव का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद वैज्ञानिकों ने इसके सुरक्षित डोज़ और तापमान नियंत्रण पर अधिक शोध की आवश्यकता जताई है।

## एक नया जीवन और भविष्य की योजनाएं
उपचार के बाद एरिन मैकनल्टी ने वेस्ट वर्जीनिया में रहते हुए एक संस्था में काम किया और पीयर सपोर्ट स्पेशलिस्ट का कोर्स पूरा किया। मई 2025 में वह अपने परिवार के पास वर्मोंट लौट आईं। अब वे अपनी मां की एंटीक दुकान में मदद करती हैं और अपने घर पर सामान्य जीवन जी रही हैं। एरिन का कहना है कि अब उनके मन में नशे का कोई विचार नहीं आता और वे अपने परिवार के साथ भविष्य की योजनाएं बना रही हैं। डॉ. रज़ाई का मानना है कि अल्ट्रासाउंड के साथ-साथ व्यवहार थेरेपी और सामाजिक सहयोग भी नशे से पूरी तरह उबरने के लिए आवश्यक हैं।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** गैर-आक्रामक फोकस्ड अल्ट्रासाउंड तकनीक का सफल परीक्षण भविष्य में भारत में गंभीर नशे की लत और मानसिक विकारों के बिना सर्जरी सस्ते और सुरक्षित इलाज की राह खोल सकता है।

**मरीजों और परिवारों के लिए:** इस तकनीक के जरिए लंबे समय से नशीली दवाओं की लत से जूझ रहे मरीजों को बिना कपाल की सर्जरी या महीनों लंबे अस्पताल के दाखिले के सिर्फ 20 मिनट के प्रोसीजर से राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

## सवाल-जवाब

### 1. वेस्ट वर्जीनिया में नशे की लत का इलाज किस नई तकनीक से किया गया?
शोधकर्ताओं ने बिना किसी सर्जरी के खोपड़ी के भीतर अल्ट्रासाउंड तरंगों को केंद्रित करके मस्तिष्क के 'न्यूक्लियस एकम्बेंस' हिस्से को रीसेट किया, जिससे नशे की लत और लालसा दूर हुई।

### 2. क्या इस अल्ट्रासाउंड प्रक्रिया में सिर में चीरा लगाने की जरूरत होती है?
नहीं, यह प्रक्रिया पूरी तरह से गैर-आक्रामक है। इसमें बिना सिर खोले या सर्जरी किए अल्ट्रासाउंड तरंगें मस्तिष्क के लक्षित हिस्से तक भेजी जाती हैं।

### 3. एरिन मैकनल्टी को इलाज के बाद कितनी देर में असर महसूस हुआ?
वास्तविक अल्ट्रासाउंड प्रक्रिया के दौरान ही 20 मिनट के भीतर एरिन की नशीले पदार्थों के प्रति लालसा समाप्त हो गई।

### 4. क्या फोकस्ड अल्ट्रासाउंड का यह इलाज अभी सभी अस्पतालों में उपलब्ध है?
नहीं, यह अभी एक प्रायोगिक क्लिनिकल ट्रायल है जो वेस्ट वर्जीनिया यूनिवर्सिटी और कुछ अन्य प्रमुख चिकित्सा केंद्रों में परीक्षण के दौर से गुजर रहा है।

## प्रेरणा और सबक
**दृढ़ संकल्प और उम्मीद:** सालों तक नशीली दवाओं की गंभीर लत और कई बार असफल प्रयासों के बावजूद परिवार ने हार नहीं मानी और नई चिकित्सा तकनीक की खोज जारी रखी।

**पारिवारिक सहयोग की शक्ति:** बेटी को नशे से बाहर निकालने के लिए मां और बेटी का अटूट समर्थन ही उसे वेस्ट वर्जीनिया के जीवन रक्षक ट्रायल तक ले जाने में निर्णायक बना।

**सकारात्मक बदलाव और पुनर्वास:** इलाज के बाद एरिन ने न केवल नशे से दूरी बनाई बल्कि अन्य पीड़ितों की मदद के लिए पीयर सपोर्ट स्पेशलिस्ट का कोर्स करके अपने जीवन को एक नया मकसद दिया।

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